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Garhwali Poem by Sudesh Bhatt- फौजी सुदेश भट्ट की गढ़वाली कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 02, 2015, 11:53:06 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बचपन भीतर बंद म्यारु
खुज्यांण कुन अयुं छौं
जाळ लग्यां छन द्यो द्यवतों पर
हटांण कुन अयुं छौं
पित्रु की फोटु पाळी पर
सरा धुळ मां भरीं च
बुये की पर्या रयी पर दीदों
कन कुयडी जमीं च
ग्वाई लगै जों भितर्युं मा
सरा बांजी हुयीं च
बचपन छौं खुज्यांणु दीदों
अर आंखी मेरी भरीं च
गंज्यल्युं पर दीदी भूल्युं की
सरा धीवडु लग्युं च
दुधाळ गौडी की पींड की तौली
सरा जंक मा भरीं च
बचपन भीतर बंद म्यारु
खुज्यांण कुन अयुं छौं
जाऴ लग्यां छन द्यो द्यवतों पर
हटांण कुन अयुं....
सर्वाधिकार रक्षित @लेख सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नित बंदना हे हिमालय
चरणों मे तेरी करता हुं
शीश झुका कर कोटि नमन
शत बार तुझे मै करता हुं
मानव का जीवन भी निर्भर
हे हिमालय तुझ पर है
भारत का सतर्क प्रहरी
तु अडिग खडा हिमालय है
तुझसे पहिचान है भारत की
गंगा यमुना का तु उदगम है
रीसी मुनियों की तपस्थली तु
प्रहरियों की कर्मभूमि है
नित बंदना हे हिमालय
चरणों मे तेरी करता हुं
शीश झुका कर कोटि नमन
शत बार तुझे मै....
सर्वाधिकार रक्षित @सुदेश भट्ट"दगड्या"हिमालय प्रेमियों को सप्रेम समर्पित