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Garhwali Poem by Sudesh Bhatt- फौजी सुदेश भट्ट की गढ़वाली कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 02, 2015, 11:53:06 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिल्ली मां बैठयां छन
उत्तराखंड बच्यांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन दिल्ली मा
जौंन नी खैनी लाठी गोली
उत्तराखंड आंदोलन मा
वी नेता बणी गेन दीदों
आज उत्तराखंड मा
बोली भाषा कुछ नी जंणदीन
भुना छन पहाड बचोला हम
दिल्ली मा पड पडी की
राजधानी गैरसैंण लीजोला हम
बिरली की सी टक लगीं
१७ की दही की डखुली मा
तैडु सी या खता खंणैणी
बैठ बैठी की दिल्ली मा
जौं भयुं न लाठी गोली
खैन उत्तराखंड आंदोलन मा
वी बिरण हुयां छन
अपुंण उत्तराखंड मा
दिल्ली मा बैठयां छन
उत्तराखंड बच्यांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन.......
गडवली कुमयीं भाषा जौंसारी
भाषा बचांण कुन भुना छन
पहाडियों की कछेडी लगेकी
देशी मा बिंगांणा छन
दिल्ली मा बैठ्यां छन
उत्तराखंड बचांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन .........
सर्वाधिकार सहित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
गौं गलों की याद
त्योहार बग्वाल यैगे
बार त्योहारु मा दीदी भूली
मैत पैटीं होली
नौकरया भयुं की
अर्जी छुट्टी की जयीं होली
मीतै बी बौडी बौडी
याद गौं की यैगे
खुशीयों कु त्योहार दीदों
हपार बग्वाल यैगे
फुलझडी दिवाछलों की
मीतै याद यैगे
पुजा पिठै की बाडी
गोरु तै खलांण की याद यैगे
आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
मेरी बुडडी बुये दीदों
सार लगीं होली
औलु बग्वाल्युं की छुट्टी
घीयु की गुंदकी धरीं होली
दुर परदेस्युं की घरम
हुंणी होली जग्वाल
दगडया बुल्दु भयुं तुमकुन
मुबारक ह्वा हैप्पी बग्वाल
आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
गौं गलों की याद
त्योहार बग्वाल यैगे
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज टक मेरी फिर
गांव अपंणी लैगे
खुशियों कु त्योहार दीदों
लेकी बग्वाल यैगे
आज टक मेरी फिर
ढौल दमौ की रस्यांण
घ्यु की गुंदकी याद यैगे
पुरी पक्वड गरम श्वाल
दीदों याद यैगे
आज फिर टक मेरी
सजे धजे की बाडी झंग्वरु
गौरु ते खलौंण की याग यैगे
सिंगीयुं पर तेल लगांण
गल्यों की जोडी याद यैगे
आज टक मेरी फिर
बन बन की मिठायुं की
कन याद यैगे
हाथी घ्वाडा शेर मशीन
सौब याद यैगे
आज टक मेरी फिर
दीदी भूली मेरी सौब
मैत अयीं जयीं होली
मुडी ख्वाल मथी ख्वाल
काकी बडीयुं पन भिट्यांणा होली
आज टक मेरी फिर
दगडया भग्यान भी म्यार
छुट्टी अयां ह्वाल
बग्वली की रस्यांण मा रंगमत
ढौल दमों मा नचंणा ह्वाल
आज टक मेरी.......

सर्वाधिकार सहित @सुदेश भटट(दगडया) की बग्वली की शुभकामनाओं की दगड (फोटो साभार सत्येश्वर प्रसाद जोशी जी)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारी दीपावली
हमारा बग्वाल आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारे लिये मिलावटी बर्फी
मिठाईयों का त्योहार आ गया
हमारे पहाडों मे घी की गुंदकी
अर सुवाल पक्वडीयुं की रस्यांण लेके आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
शहरों मे अमीरों के लिये
पीने का बहाना लेके आ गया
मेरे पहाडों मे अमीर गरीब
सबको मिलाने बग्वाल आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारे शहरों मे डींजे
ध्वनी प्रदुषंण लेके आ गया
वायु मंडल को दुषित करने
पटाखों का धुंवा छा गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारी तो लडियां जलाने गुल होती
बिजली का सहारा आ गया
हमारे पहाडों मे सदाबहार
मुछ्यल.दीवाछलों का बगत आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया

सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)की देशी दगडयों कुन समर्पित पंक्ति

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारी दीपावली
हमारा बग्वाल आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारे लिये मिलावटी बर्फी
मिठाईयों का त्योहार आ गया
हमारे पहाडों मे घी की गुंदकी
अर सुवाल पक्वडीयुं की रस्यांण लेके आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
शहरों मे अमीरों के लिये
पीने का बहाना लेके आ गया
मेरे पहाडों मे अमीर गरीब
सबको मिलाने बग्वाल आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारे शहरों मे डींजे
ध्वनी प्रदुषंण लेके आ गया
वायु मंडल को दुषित करने
पटाखों का धुंवा छा गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया
तुम्हारी तो लडियां जलाने गुल होती
बिजली का सहारा आ गया
हमारे पहाडों मे सदाबहार
मुछ्यल.दीवाछलों का बगत आ गया
मुझे मेरे गांव का
त्योहार याद आ गया

सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)की देशी दगडयों कुन समर्पित पंक्ति

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रगबग सी हुयुं छौं
दिल्ली की घिमसांण मा
धक्का मुल्कों मा रक्सां
हुयुं छौं ईं दिल्ली मा
फोन पर ही बात हुंदी
अपणु से यीं दिल्ली मा
मिलणा कु तो टैम ही नी
कैमा ईं दिल्ली मा
डबख डबख डबखंणु छौं
चकौर सी दिल्ली मा
कबेलदारी हुयीं घर
नौकरी खुज्यांणु छौं दिल्ली मा
गौं क तिबाट चौबटों की
याद आंणी दिल्ली मा
रगाबगी हुयीं दीदों
मैकु लाल बत्युं मा
कभी चांदनी चौक कभी
कनाट प्लैश फुटपाथों मा
कभी डोर टु डोर छौं जाणु
समान बिचंण कुन दिल्ली मा
रगबग सी हुयुं छौं
दिल्ली की घिमसांण ....
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज कु शीर्षक हे दारु..
मरन म दारु बचंण म दारु
हैंसद ख्यल्द अर रुवांद मा दारु
ब्यौ मा दारु म्याल मा दारु
घाटम मड्यों तक चयैंणी दारु
हे दारु हे दारु हे दारु हे दारु
भैंसी बियायी त पैली दारु
बल्द लायी त पिलाई दारु
बेटी लखांण त लखनर कुन दारु
ब्वारी आयी त समधी कुन दारु
हुलेरु कुन त छैयी दारु
अब त डुलेरु कुन भी दारु
फड पकांण त पैली दारु
हल लगांण त तब भी दारु
हे दारु हे दारु हे दारु हे दारु
गुरज्युं कुन भी चयैंणी दारु
बामण जजमान सबकुन दारु
पुजा पिठै मा पैली दारु
हंत्या घड्यलु मा ह्वाई दारु
कौ कार्यों मा यैथर दारु
नामकरण मा जरुरी दारु
रामचंद्र नौ धर्यांणु
पेलम पेल कैकी दारु
हे दारु हे दारु हे दारु हे दारु
देबी दयबतों की जगाम
दारु ही अब द्वास लगली
थुल्युं न ही कीटी .कीटी...........
सर्वाधिकार @सुदेश भटट (दगडया) स्थान नाम चरित्र काल्पनिक मात्र है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देखा देख्युं मा
सरा भ्याल ह्वै ग्या
म्यार गौं मुलुक
सुनसान ह्वै ग्या
आदीम त दुर
चकलु न भी छ्वाडी
तिबारी डिंडयाल्युं से
सब्युं न मुख म्वाडी
गौं के बाट आंण कुन
खार खांणा छन
आपदों क मुवावजा मा
प्लाट कुन रगरयांणा छन
देखा देख्युं मा
सरा भ्याल ह्वै ग्या
म्यार गौं मुलुक सुनसान.....
गडवली बुलंण मा
दिल्ली मा सरमांणा छन
श्वारों मनन घी दाल
गडवाल बिटी खुब मंगाणा छन
दिल्ली मा यैकी अफु
बड चितांणा छन
गौं मा द्वार चटबा छुड्यां
यख द्वार ढकी क बैठ्यां छन
म्यार गौं मुलुक
सुनसान.......
.......सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हपार स्यु गौं बस्युं
दीदों द्याखो धार मा
लोग चलीगेन द्वार ढकी
सडक यैग्या चौक मा
देवी द्ययवता भीतर उगडयां
सुनिंद छन परदेश मा
कुछ दिल्ली बंबई बसगेन
कुछ हपार बिदेश मा
बंठों पर सी जंक लग्या
बिसलरी धरीं सिरंण्यु मा
फ्रिजु की तिबासी भुजी
सवदी हुंणी परदेश मा
मेरी दीदी भुली दीदों
हिटी नी सकदन गांव मा
घस्यर लखड्यल बी जमा अलगसी
ह्वेगेन जैकी परदेश मा
धै लगांण मा हुयीं शरम
रैबार जंदिन फोन मा
गांणा सुणदन अंगरेजी भग्यान
लीड कुचीं च कान मा
हपार स्यु गांव बस्युं
दीदों द्याखो......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)