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देश का एक मात्र मंद‌िर जहां मुस्ल‌िम की ल‌िखी आरती से पूजा करते हैं ब्राह्मण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 04, 2017, 10:37:38 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

We are providing very exclusive information about Hindu's famous religious place Badrinath Dham. We have taken this information from Amar ujala news portal.

इस सांप्रदायिक सौहार्द की कहानी। भगवान बद्रीनाथ धाम को हिंदुओं का तीर्थ माना जाता है और यहां उनकी पूजा स‌िर्फ ब्राह्मण ही कर सकते हैं। लेकिन क्या आपको पता है क‌ि बद्रीव‌िशाल की आरती क‌िसने ल‌िखी है। His name is बदरुद्दीन .


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देश का एक मात्र मंद‌िर जहां मुस्ल‌िम की ल‌िखी आरती से पूजा करते हैं ब्राह्मण
इस सांप्रदायिक सौहार्द की कहानी। भगवान बद्रीनाथ धाम को हिंदुओं का तीर्थ माना जाता है और यहां उनकी पूजा स‌िर्फ ब्राह्मण ही कर सकते हैं। लेकिन क्या आपको पता है क‌ि बद्रीव‌िशाल की आरती क‌िसने ल‌िखी है।
151 सालों से कपाट खुलने से बंद होने तक मंदिर में नित्य सुबह-शाम जो आरती गाई जाती है, उसे एक मुस्लिम शायर ने लिखा है और वह शायर है चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी फकरुद्दीन (बदरुद्दीन)। बदरुद्दीन ने यह आरती वर्ष 1865 में लिखी थी ।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जब से ये आरती ल‌िखी गई है तब से भगवान बद्री विशाल की पूजा परंपराओं की शुरुआत इसी आरती के साथ होती है। बता दें क‌ि फकरुद्दीन तब नंदप्रयाग में पोस्टमास्टर हुआ करते थे और इस आरती को लिखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदरीनाथ के नाम पर बदरुद्दीन रख लिया था।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

104 वर्ष की उम्र में वर्ष 1951 में बदरुद्दीन का निधन हुआ। बदरुद्दीन के पोते अयाजुद्दीन सिद्दिकी के मुताब‌िक बद्रीनाथ धाम में मंदिर परिसर की दीवारों पर पहले पूरी की पूरी आरती लिखी गई थी। जिस व्यक्ति को यह आरती कंठस्थ नहीं होती, वह मंदिर की दीवारों पर देखकर आरती गाता था।
पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम्
निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।
शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम्।
शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम्।
जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।
इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम्।
सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।
यक्ष किन्नर करत कौतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम्।
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।
कैलाश में एक देव निरंजन शैल शिखर महेश्वरम्।
राजयुधिष्ठिर करत स्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्।
श्री बद्रजी के पंच रत्न पढ्त पाप विनाशनम्।
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य प्राप्यते फलदायकम् ‍