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UKD: Regional Party - उत्तराखंड क्रांति दल: उत्तराखंड की क्षेत्रीय पार्टी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 04, 2008, 10:01:12 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


UKD should intesify the protest as the Capital is on its top issue.

Quote from: हेम पन्त on July 15, 2009, 10:36:57 AM
UKD stages protest, demands Gairsain as Uttarakhand capital 
   
Dehra Dun, Jul 13 The Uttarakhand Kranti Dal (UKD) staged demonstrations and sit-ins here today to protest Dixit Commission&aposs report which has opposed making Gairsain as permanent capital of the hill state.

Since the carving out of Uttarakhand as a separate state, the UKD, a key regional party, has vociferously raised the demand of making Gairsain as its permanent capital.

UKD workers, led by its president Narayan Singh Jantwal, assembled at Gandhi Park here and staged a sit-in to protest the Dixit Commission&aposs report which was tabled in the state assembly today.

They also held demonstrations and submitted memoranda to the Dehra Dun District Magistrate to be on passed to Prime Minister Manmohan Singh and Chief Minister Ramesh Pokhariyal Nishank.

Jantwal said since 80 per cent of geographical area of Uttarakhand is hilly, the permanent capital should be housed there.

A committee of MLAs set up under the chairmanship of the then Uttar Pradesh minister Ramashankar Kaushik had also favoured making Gairsain as capital of the hill state, Jantwal said.

He said the UKD would intensify its stir if its demand was not met.


राजेश जोशी/rajesh.joshee

ऊत्तराखण्ड क्रन्ति दल में नेतृत्व की लड़ाई जारी है, इसके सारे नेता आपस में ही लडते रह्ते हैं ये जनता क भला क्या करेंगे जब खुद ही एकजुट नही रह सकते।  देहरादून के नगर अध्यक्ष के पोस्टर में उसने अपने शीर्ष नेताओं का जिक्र तक नही किया है।  इस पार्टी में सब पार्टी को अपनी जागीर समझते हैं और संगठन नाम की कोई चीज नही है, नाही अपने से वरिष्ठों के प्रति सम्मान।  अब पार्टी के राज्य सरकार में मंत्री का निम्न बयान देखिये:
http://www.amarujala.com/today/naninews.asp?city=14ntl1c.asp
अब वो अपनी नाकामियों को भी जनता के उपर डाल रहे हैं जैसे जनता उनकी बपौती है।

पंकज सिंह महर

उक्रांद ने अपना नया मुखिया त्रिवेन्द्र पंवार के रुप में चुन लिया है। इसी अवसर पर दैनिक जागरण में एक रिपोर्ट-

तल्ख तेवर प्रदेश की सत्ता में भागीदार प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अधिवेशन में इस बार दल के तेवर कुछ तल्ख नजर आए। शीर्ष नेताओं ने सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस पर जिस तरह निशाना साधा, उससे दल के भीतर उथल-पुथल के साफ संकेत मिलते हैं। दल की कमान एक बार फिर त्रिवेंद्र सिंह पंवार के रूप में ऐसे हाथों में सौंपी गई है, जिससे पार्टी की भावी रणनीति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं होगा। प्रदेश में वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह भी तय है कि दल सत्ता सुख के चलते अपने जिस एजेंडे की अनदेखी करता रहा, चुनावी वैतरणी पार करने को उसका दोबारा सहारा लेगा। नए केंद्रीय अध्यक्ष ने स्थायी राजधानी गैरसैंण का मुद्दा उठाकर यह जाहिर भी कर दिया है। लिहाजा चुनाव का समय नजदीक आते-आते दोनों सत्ताधारी दलों के बीच दूरियां बढ़ना तय माना जा रहा है। सरकार में दायित्व संभाल रहे शीर्ष नेताओं के सुर पहले भी बदलते रहे हैं। अब पैनापन कुछ अधिक है। यह तथ्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि सत्ता में भागीदारी के बावजूद दल के भीतर कार्यकर्ताओं की छटपटाहट बरकरार रही है। हालांकि इस मामले में दल को आत्म मंथन करने की जरूरत है। प्रमुख क्षेत्रीय दल होने के बावजूद उक्रांद नीति, रीति और जन भावनाओं की अभिव्यक्ति के मामले में अपनी मुकम्मल पहचान कायम नहीं कर पाया। केंद्रीय अधिवेशनों से लेकर तमाम मंचों पर आपसी मनमुटाव और खींचतान पर प्रमुख नेताओं का जितना जोर रहा, उतना पार्टी एजेंडे को लेकर कभी नहीं दिखा। स्थायी राजधानी के मुद्दे को छोड़कर जलविद्युत परियोजनाओं, ऊर्जा क्षेत्र, गंगा, हिमालयी पर्यावरण, जंगल और उस पर हक-हकूकों,रोजगार, विषम भौगोलिक क्षेत्रों के विकास जैसे पार्टी के मुख्य मुद्दों पर भी ठोस राय मुखर नहीं हुई। आगामी चुनाव के मद्देनजर इन खामियों को दूर करने के मंसूबे बांधे जा रहे हैं, लेकिन पिछले अनुभव फिलहाल ठोस उम्मीद नहीं जगाते। देखना है कि पार्टी नेता अपने अहम से ज्यादा जन सरोकारों और कार्यकर्ताओं को तवज्जो देते हैं अथवा नहीं।

हेम पन्त


dayal pandey/ दयाल पाण्डे

श्री त्रिवेन्द्र जी को बहुत बहुत बधाई आशा करते हैं उनके अगुवाई में पार्टी एक जुट होकर उत्तराखंड में सरकार बनाएगी बहुत बहुत शुभ कामनायें 

lpsemwal

UKD has a weakness of not taking development issues on its policy. The party formed to raise the voice for seprate hill state
for development but it remeber the seprate word and forget Hill and state.

All the best for party in leadership of Mr. panwar to consider the hill state for its survival and development of hill area. 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


उत्तराखंड राज्य के निर्माण में अहम् भूमिका निभानी वाली पार्टी को आज जनता का विश्वाश फिर जीतना होगा! नए अध्यक्ष को बधाई!

धनेश कोठारी

UKD ke naye adhyksh ko badhai,
lekin panwar ji satta ke sath rahkar pahad ki jarooraton ko samajhana thoda kathin hoga, yon bhi aaj jabran chipke rahane ka koi matlab nahi, wahin janata ka vishwas hasil karne ke liye satta ki malai to tyagni hogi, warana abki bar do seeten bhi salamat rahen ganimat hai, kyonki ab tak UKD ka kamkaj ullekhniy nahin raha hai,

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  उक्रांद का रेल रोको आंदोलन आठ को   
देहरादून, जागरण ब्यूरो:
उक्रांद अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने राज्य में गंगा पर निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं निरस्त करने के मामले में केंद्र के साथ ही राज्य सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित पर्यावरणविदों के दबाव में उत्तराखंड का विकास रोका जा रहा है। दल आठ नवंबर को परियोजनाएं बंद करने और गैरसैंण में राजधानी की मांग को लेकर रेल रोकेगा।
पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में श्री पंवार ने कहा कि मुख्यमंत्री को गंगा रिवर बेसिन प्राधिकरण का बहिष्कार करना चाहिए था। इस प्रकरण में राज्य सरकार भी जनता को गुमराह कर रही है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के पांच सांसदों की चुप्पी से जाहिर है कि वे भी राज्य के जन प्रतिनिधि की भूमिका नहीं निभा रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस उत्तराखंड का विकास रोक रहे हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह को उन्होंने केंद्र सरकार का एजेंट करार दिया।
उन्होंने कहा कि उक्रांद आठ नवंबर को परियोजना बंद करने और गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर रेल रोकेगा। 15 नवंबर को कंडी मार्ग की मांग को लेकर कार्बेट पार्क के तीनों गेटों पर तालाबंदी की जाएगी। हाई कोर्ट ने कंडी मार्ग के बाकी बचे हिस्से का डामरीकरण करने को कहा है। लेकिन सरकार इस मामले में ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है।
पूर्व अध्यक्ष बीडी रतूड़ी ने कहा कि परियोजनाएं बंद करना उत्तराखंड के साथ अन्याय है। पूर्व उपाध्यक्ष वेद उनियाल ने कहा कि प्राधिकरण का रुख उत्तराखंड के संसाधनों के प्रति मनमाना है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6879603.html

Devbhoomi,Uttarakhand


गैरसैंण को उक्रांद ने खोला मोर्चा
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उत्तराखण्ड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित किए जाने की मांग को लेकर उत्तराखण्ड क्रांतिदल ने जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया। जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी प्रेषित किये।

अल्मोड़ा में जुलूस का नेतृत्व द्वाराहाट के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने किया। जिला कार्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप राज्य की राजधानी गैरसैंण घोषित कर वहां निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण शीघ्र किया जाए। चिह्नित आंदोलनकारियों को घोषित सुविधाएं दिए जाने व सभी आंदोलनकारियों को कुछ न कुछ राहत राशि दिए जाने की सभी ने वकालत की। साथ ही रामनगर-कंडी मोटर मार्ग के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से प्रभावी पहल की अपेक्षा की गई। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में राज्य के आंदोलनकारियों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आग्रह किया गया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में विद्युत परियोजनाओं के सुचारु करने, आपदा का मुआवजा बढ़ाने की पुरजोर मांग की गई। धरना-प्रदर्शन देने वालों में विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, ब्रह्मानंद डालाकोटी, पान सिंह रावत, आन सिंह, कैलाश फुलारा, शिवराज बनौला, जिलाध्यक्ष सुभाष पांडे, नवीन डालाकोटी, शिवदत्त भट्ट, एलडी शर्मा, बसंत बल्लभ जोशी, हेम जोशी, सचिन पंत, मुमताज कश्मीरी, गिरीश साह, बहादुर कनवाल, गिरीश गोस्वामी, श्याम सिंह डोभाल, मोहन चंद्र गुरूरानी, किशोरी लाल वर्मा, खष्टी देवी, खिमुली देवी सहित सैकड़ों उक्रांद कार्यकर्ता मौजूद थे।

बागेश्वर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन के साथ उक्रांद कार्यकर्ताओं ने तहसील मुख्यालयों में भी धरना दिया उसके बाद प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे। उन्होंने प्रदेश को आपदा ग्रस्त घोषित करने, बंद जल विद्युत परियोजनाओं को बनाए जाने, आपदा के बाद दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाए जाने आदि मांगें प्रमुखता से उठायीं। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष हेम पंत, हीरा बल्लभ भट्ट, घनानंद जोशी, मनोज जोशी, पदम गिरी गोस्वामी, राजेंद्र थायत, गिरीश पाठक, जगदीश बिष्ट, राजेंद्र नेगी, माधवानंद तिवाररी, हरीश आर्या, मोहन पंत आदि उपस्थित थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6943041.html