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Water Crisis Rising In Uttarakhand - उत्तराखंड मे हो रही है पानी की समस्या

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 07, 2007, 08:32:57 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Pahad Paani. Pahad ke Kaam Nahi aata.
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कर्णप्रयाग (चमोली)। अलकनंदा व पिंडर की संगमस्थली में बढ़ती पेयजल किल्लत से स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। सुबह होते ही मोटर मार्गो पर लगी लंबी कतार और शेष रहे प्राकृतिक स्रोतों पर महिलाओं, बच्चों व नेपाली मजदूरों का जमावड़ा लग जाता है। लोगों को चिंता सालने लगी है कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में इस कदर हालत बिगडे़ हैं तो मई-जून में क्या आलम होगा।

नगर क्षेत्र में लगे एक दर्जन हैंडपंपों में से आधे से अधिक ठप हैं जबकि अधिकांश पर दूषित पानी निकलने से लोग अब नदी का रूख कर रहे हैं लेकिन नदी तटों पर बढ़ता प्रदूषण व क्षेत्र में विभिन्न विद्युत परियोजनाओं के कार्य से पानी मटमैला हो चुका है जिसे सीधे पीना खतरे से खाली नही है। नगर पंचायत के अंतर्गत जलसंस्थान ने जहां अब पेयजल की आपूर्ति दिन में एक बार सुनिश्चित की है वहीं बाल विकास परिसर, पैट्रोल पंप शक्तिनगर, सुभाषनगर व अपर बाजार के तहसील कालोनी में कई दिनों से पानी आपूर्ति ठप है। लोग 10-20 रुपये प्रति कनस्तर पानी ढुलान करा रहे हैं, कमोबेश यही स्थिति मुख्य बाजार के होटल व्यवसायियों की है। कुछ लोगों ने जहां मोटर पंप लगाकर पानी की व्यवस्था की है तो कई दिनभर मजदूरों से पानी आपूर्ति जारी रखे हैं। व्यापारी मुकेश कुमार, हरीश चंद्र व आनंद सिंह मिंगवाल बताते हैं कि मुख्य बाजार के एकमात्र प्राकृतिक स्रोत गर्मधारा पर पानी के लिए घंटोंलाईन में खड़े रहने के बाद भी दूषित पानी पीना विवशता बना है जिससे बीमारी का अंदेशा बना है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6324042.html

हेम पन्त

Source : LiveHindustan.com

घनसाली- गर्मी के शुरू होते ही स्यूरी गांव में पानी का घोर अकाल पड़ गया है। गांव का एक मात्र जल स्नोत सूखने से ग्रामीणों को पांच किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। लेकिन प्रशासन ने अभी गांव में पानी उपलब्ध कराने के कोई इंतजाम नही किये हैं। शीघ्र इंतजाम न करने पर ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय में आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

पट्टी ढुंगमंदार के स्यूरी गांव में पानी की त्रही-त्रही मची है। डेढ वर्ष पहले गांव के दस पुराने जल स्नोत सूख गये थे। इन स्नोतों से ग्रामीण अपने लिए तथा पशुओं के लिए पानी लाते थे, लेकिन इनके सूखने पर गांव का एक मात्र जल स्नोत बचा। जिस पर 160 परिवार रात दिन बारी-बारी से पानी भरते थे। लेकिन एक माह पहले वह स्नोत भी सूख गया। जिसके बाद गांव में पानी का हा-हाकार मच गया है।

ग्रामीणों को स्यूरी गांव से पांच किलोमीटर दूर बडोनगांव से ग्रामीणों को पानी लाना पड़ रहा है। बडोनगांव में एक मात्र जल स्नोत होने के कारण ग्रामीणों को वहां भी नम्बर लगाना पड़ रहा है। लोगों का पूरा दिन तथा राते भी पानी को लाने में ही बीत रही है। पानी के घोर अकाल के कारण पन्द्रह परिवारों ने 22 पशुओं की निलामी कर दी है। जिनमें कीर्ति सिंह प्रथम, कीर्ति सिंह द्वितीय व कीर्ति सिंह तृतीय, दिनेश सिंह, विछला देवी, राम सिंह, अमर दास सहित पन्द्रह ग्रामीण है।

ग्राम प्रधान भगवान सिंह राणा ने बताया कि खबोगी, खणद्वारी, पाणीहोड, खनारखोला, दौख, मुद्रखाल, नव खेत सहित ग्राम स्यूरी की कई तोकों में भी ग्रामीणों को पानी ले जाने की भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि पानी के अकाल के कारण ग्रामीण पशुओं को ही नही बेच रहे है बल्कि गांव को छोड़ने के लिए तैयार हो गये है। गांव को पेयजल से जोड़ने के लिए 1997 में पेयजल निगम ने 45 लाख की योजना तैयार की थी, जिस पर एक दिन भी पानी नही चल पाया।

ग्राम पंचायत डेढ़ वर्ष से वे शासन प्रशासन से पानी के इन्तजाम करने की मांग करते आये हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने अब जिला मुख्यालय में आमरण अनशन का मन बना लिया है।

Devbhoomi,Uttarakhand




I am just sharing my personal views. Last year, I visited Badrinath and travelled through Kotdwar, Gumkhal, Satpuli, Pauri Garhwal, SriNagar and enroute places to reach cited place. In all these enroute places, I saw scarcity of water. In nutshell, there was water crises almost in all these places.

At last, I reached my village Sera Mall, Patti-Sawli, District-Pauri Garhwal. I was schocked to find such situation even in and around my village. The pipes fitted for supply of waters were totally dried. The natural source of water (Pandhera) is also depleting.  The level of water of rivers are also depleting. If such situation persists for long time, what will be future of Uttarakhand without water.

Can some initiative of state government improve the situation? Pauri Garhwal Group is enriched with all kinds of members. Some of you might have say in government, if so, plese ask state government to take some measures to improve the situation.


FROM MAHENDAR KANDPAL

Devbhoomi,Uttarakhand

I am agreed with your views. There are some  measures to end water scarcity. I cann't understand why Uttarakhand Govt. is not planting trees like BAANZ, BURANSH, DEODAR, KAFAL. Stop tree cutting at high attidutes, stop cutting road on top of hills and plant trees sides of the roads.

Anil Arya / अनिल आर्य


पहाड़ के तीन अभिशाप हों दूर
एसजीआरआर में वीमैंस स्टडी सेंटर की गोष्ठी में पर्वतीय अंचलों की समस्याओं पर मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। एसजीआरआर पीजी कॉलेज के वीमैंस स्टडीज सेंटर (डब्ल्यूएससी) की ओर से आयोजित गोष्ठी में पर्वतीय अंचलों की समस्याओं पर गहन विमर्श हुआ। इस दौरान पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने पानी का अभाव, शराब और सड़कों को पहाड़ के लिए अभिशाप बताया। पहाड़ के विकास के लिए उन्होंने जल संरक्षण, शराब पर पूर्ण पाबंदी और बेहतर सड़कों के निर्माण की जरूरत जताई।
शुक्रवार को कालेज में सेंटर की एडवाइजरी कमेटी के पदाधिकारियों व सदस्यों की गोष्ठी में मुख्य अतिथि समाजसेवी तथा सेंटर की सदस्य विमला बहुगुणा ने कहा कि पहाड़ के जीवन का आधार महिलाएं हैं। उनके लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, फिर भी उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के संपूर्ण विकास के लिए ठोस उपाय होने चाहिए। महिला समाख्या की अध्यक्ष गीता गैरोला , एसजीआरआर पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो वीए बौड़ाई, एके बहुगुणा ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डा. मधु डी. सिंह, कोआर्डिनेटर प्रो. वीएस रावत, अनीता थपलियाल आदि मौजूद थे।
पानी की कमी, शराब और सड़कें हैं ये अभिशाप
महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाएं
http://epaper.amarujala.com

Devbhoomi,Uttarakhand

अभी तो अप्रैल का ही महिना है और पानी के लिए लोगों मैं लड़ाई शुरू हो गयी है,


पानी भरने को लेकर भिड़े दो पक्ष, मारपीट
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सार्वजनिक नल पर पानी भरने को लेकर हुई महिलाओं की भिड़ंत ने बड़ा रूप ले लिया। दोनों पक्षों में जमकर लाठी डंडे चले और तीन लोग जख्मी हो गए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।

मामला कोतवाली क्षेत्र के लक्खीबाग का है। बुधवार सुबह स्थानीय निवासी नीलम देवी सार्वजनिक नल पर पानी भर रही थी। इसी दौरान पड़ोसी महिला वहां आई और नीलम को हटा दिया। इस बात पर दोनों में बहस हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के पुरुष वहां गए और मारपीट होने लगी। इसी बीच पड़ोसियों ने नीलम, उसके पति कुंदन और बेटी अन्नू पर लाठी व डंडों से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। घायलों को दून अस्पताल लाया गया। इसके बाद नीलम ने आरोपियों के विरुद्ध लक्खीबाग चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7646184.html

Devbhoomi,Uttarakhand

ये देहरादून के हल हैं, देहरादून जो की उत्तराखंड की राजधानी कहलाता है वही देहरादून,जहां उत्तराखंड के निशंक और बड़े-बड़े कुकर्मी नेता रहते हैं उसी देहरादून मैं पानी के लिए लोगों में लड़ाई  हो रही है !


हलिया

जल को अफसरों का घेराव किया  Jun 22,

कोटद्वार, जागरण कार्यालय: नजीबाबाद रोड स्थित डिफेंस कालोनी के लोग कई दिनों से दूषित पेयजल पीने को विवश हैं। इसके चलते बुधवार को ग्रामसभा काशीरामपुर के युमंद कार्यकर्ताओं ने जल संस्थान में पहुंच कर विभागीय अधिकारियों का घेराव किया। उन्होंने क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की। साथ ही क्षेत्र में नई पेयजल लाइन बिछाने की मांग भी की।

युवक मंगल दल काशीरामपुर के अध्यक्ष हरेंद्र पुंडीर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं के साथ ही मोहल्ले की महिलाएं जल संस्थान कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने जल संस्थान के अधिकारियों का घेराव किया। प्रदेशनकारियों का कहना था कि विभागीय लापरवाही से क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति हो रही है, जिससे क्षेत्र में महामारी का खतरा उत्पन्न हो गया है। मांग की गई कि तत्काल क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की जाए। ग्रामीणों ने क्षेत्र में नई पेयजल लाइन बिछाने की मांग भी उठाई।

इस पर अवर अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बजट का अभाव बताते हुए इस कार्य में असमर्थता जता दी। अलबता, मौजूदा पेयजल लाइन की जांच का आश्वासन अवश्य दिया। युमंद अध्यक्ष हरेंद्र पुंडीर ने क्षेत्रीय विधायक शैलेंद्र सिंह रावत से नई पेयजल लाइन के संबंध में दूरभाष पर वार्ता की, जिस पर विधायक श्री रावत ने विभागीय अधिकारियों को एक माह में नई लाइन बिछाने के निर्देश दिए।

घेराव कार्यक्रम में ममंद उपाध्यक्ष गजपाल चौहान, सचिव हरीश बहुगुणा, सभासद संजय रावत, मंजू देवी, मनमोहन ध्यानी, विपिन नेगी, अनूप नेगी, रेखा देवी, कुंवर सिंह, नीरज, नीरू, नीटू, जगदीश आदि शामिल रहे।




Devbhoomi,Uttarakhand

बरसात में भी पानी को तरस रहे लोग,शर्म की बात है ये उत्तराखंड की सरकार को और जल निगम विभाग के लए
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पर्यटन नगरी में ऊर्जा निगम का ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण छह दिन से पेयजल आपूर्ति बाधित है। ऐसे में नगरवासियों को अपने दैनिक कार्यो के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

नगर में पेयजल व्यवस्था के वितरण का जिम्मा छावनी परिषद पर है। छावनी परिषद नगर में बोर्ड की योजनाओं व एमईएस से मिलने वाले पानी से नगर में पेयजल की आपूर्ति करती है। गत माह 29 जुलाई को विद्युत ट्रांसफार्मर फुंक जाने के कारण नगर में डिग्गी लाइन से की जाने वाली पेयजल की आपूर्ति बाधित हो गई है।

खास बात यह है कि लैंसडौन नगर में प्रतिवर्ष 2300 मिलीमीटर वर्षा होने की पुष्टि एक सर्वेक्षण हुई है जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। लेकिन विडंबना यह है कि नगर में राष्ट्रीय औसत से दुगनी पेयजल आपूर्ति होने के बावजूद नगर क्षेत्र की जनता छह दिन से पेयजल के लिए तरस रही है।

हमने उर्जा विभाग को ट्रांसफार्मर सही करने के लिए मौखिक व लिखित सूचना दे दी है। ट्रांसफार्मर के सही होने के बाद नगर में पेयजल आपूर्ति ढर्रे पर लौट आएगी।

 
समर विजय सिंह राणा, ईई छावनी परिषद लैंसडौन वर्तमान में एमईएस से मिलने वाले पेयजल से नगर क्षेत्र में आपूर्ति की जा रही है। क्योंकि ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण बोर्ड की योजना की सप्लाई नही हो पा रही है, इसलिए यह परेशानी बनी हुई है। मोहन सिंह बिष्ट, कार्यालय अधीक्षक, छावनी परिषद लैंसडौन मामला मेरी जानकारी में नही है।

लैंसडौन कैंट से भी इस बारे में हमें अभी तक सूचना नही है, यदि ऐसा है भी तो हमारे विभाग के अवर अभियंता ने भी इसकी सूचना नही दी है। मीडिया से मिली सूचना पर इसकी जानकारी ली जाएगी।
एसके सहगल , ईई उर्जा निगम कोटद्वार परिक्षेत्र



http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6235112.html

Devbhoomi,Uttarakhand

पानी के इंतजार में नलों पर टकटकी
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यदि आप नई टिहरी में हैं, तो सुबह नौ बजे से पहले पानी की व्यवस्था करनी होगी। यदि इस बीच आप सोए रह गए या फिर किसी और काम में उलझ गए तो फिर आपको पानी नहीं मिलने वाला।

इसके लिए आपको फिर दूसरे दिन का इंतजार करने के अलावा अन्य कोई विकल्प भी नहीं है। कारण जिला मुख्यालय में दिन में एक बार सिर्फ सुबह एक से डेढ़ घंटे जलापूर्ति की व्यवस्था है।


नई टिहरी शहर के मास्टर प्लान में यदि कोई सबसे बड़ी समस्या है, तो वह है पेयजल की। पुरानी टिहरी के बाद बसाये गए इस शहर की स्थापना की शुरूआत से ही एक दिन में एक समय पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था चलती आ रही है। यदि सुबह के वक्त पानी भर लिया तो ठीक, नहीं तो बगैर पानी के ही पूरा दिन गुजारना पड़ता है।

हालांकि सीमित अवधि के लिए होने वाली जलापूर्ति को देख मुख्यालय वासियों की निगाह सुबह अन्य कार्यो को छोड़ सिर्फ नलों पर ही लगी रहती है। एक बार पानी भर लिया, तब जाकर लोग अन्य कार्यो को निपटाते हैं।


जब कभी टिहरी बांध से पानी कम या ज्यादा छोड़ा जाता है तो योजना के पंप काम नहीं कर पाते, जिससे आपूर्ति बाधित हो जाती है। जिला मुख्यालय की जलापूर्ति काफी हद तक टीएचडीसी पर भी निर्भर करती है।

आपूर्ति को बनी मात्र एक योजना


नई टिहरी: जिला मुख्यालय में करीब 40 हजार की आबादी को जलापूर्ति का अकेला जिम्मा नई टिहरी पंपिंग पेयजल योजना पर है। जो पिछले करीब दो दशक से मुख्यालय वासियों की प्यास बुझाती आ रही है।

पिछले साल सितंबर माह में आपदा के दौरान योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिस कारण सप्ताह भर तक योजना से आपूर्ति नहीं हो पाई थी। अन्य विकल्प न होने के चलते पूरा मुख्यालय इसी योजना पर टिका हुआ है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6239532.html