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Water Crisis Rising In Uttarakhand - उत्तराखंड मे हो रही है पानी की समस्या

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 07, 2007, 08:32:57 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

पानी के लिए तरस रहे हैं सौ से अधिक गांव------अभी उत्तराखंड में बरसात का मौसम होते हुए भी पानी के लिए कई गाँव आज भी तरशा रहे हैं ,तो गर्मियों में क्या हालात होते होंगे इन गांवों में ,बारिश के चलते अभी तक 49 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिनसे औसतन 120 से भी अधिक गांव बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। लगभग तीस हजार से अधिक की आबादी पेयजल के बीच पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। यह समस्या एक माह से बनी हुई है। हालांकि, विभाग की ओर से लगभग 25 से भी अधिक योजनाओं को वैकल्पिक तौर पर चालू करने की बात कही जा रही है, पर यह व्यवस्था ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रही है। ऐसे में नजदीक हों या फिर कई किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों के सहारे ही लोग पानी जुटा रहे हैं।

उधर, विभाग ने भी समस्या के प्रभावी निस्तारण को लेकर हाथ खड़े कर रहे हैं। क्षतिग्रस्त योजनाओं का मुआयना कर आगणन तैयार करने की प्रक्रिया की जा रही है, पर मरम्मतीकरण कार्य में कितना समय लगेगा अभी कुछ भी स्पष्ट उत्तर विभाग के पास नहीं है।

Devbhoomi,Uttarakhand

पत्थरों से नहीं निकलेगा पानी
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लोगों को पानी की किल्लत से राहत देने के लिए स्वीकृत की गई पंपिंग योजना का मात्र शिलान्यास किया गया। एक साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा न किए जाने से जनता में रोष है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मात्र पत्थरों को स्थापित कर देने से पेयजल समस्या से राहत नहीं मिलेगी। विभाग को शीघ्र ही कुछ धरातलीय कार्रवाई करनी चाहिए।

जनता की मांग पर प्रदेश के पेयजल मंत्री तथा क्षेत्रीय विधायक व वर्तमान राजस्व एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री दिवाकर भट्ट ने वर्ष 2010 में लक्ष्मोली हडिम की धार पंपिंग पेयजल योजना का शिलान्यास किया। शिलान्यास करने के एक साल बीत जाने के बाद भी आज तक इस योजना पर निर्माण के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ, जबकि इस योजना पर सरकार की ओर से बजट का आवंटन किया जा चुका है।

विभागीय लापरवाही के कारण इस योजना पर निर्माण कार्य शुरू न होने से इस क्षेत्र की 19 ग्राम सभाओं के 32 राजस्व गांवों व उनकी 77 बस्तियों की जनता इसका लाभ नहीं मिल रहा है, जिस कारण कई गांवों को पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं।

वर्तमान समय में इस क्षेत्र के अधिकतर गांवों के लिए जिस पेयजल योजना से पेयजल की आपूर्ति होती थी, उसकी कमान पेयजल निगम से जल संस्थान के हाथों में जाने से क्षेत्र में पेयजल संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है।

Sorce dainik jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

धौलादेवी की उपेक्षा पर भड़कने लगा है जनाक्रोश
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जाका, अल्मोड़ा: जनपद के धौलादेवी क्षेत्र को कोई पुरसाहाल नहीं है। हालत यह है कि ग्रामीणों को पेयजल, विद्युत व स्वास्थ्य सेवा तो दूर खाद्यान्न योजना का लाभ भी ठीक से नसीब नहीं हो रहा है। हालांकि क्षेत्रवासी ज्वलंत मुद्दों पर पूर्व कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

जन संघर्ष समिति धौलादेवी के सदस्यों ने अध्यक्ष शिवदत्त पांडे की अगुवाई में डीएम डीएस गब्र्याल से मुलाकात कर जनसमस्याएं गिनाई। उन्होंने ने क्षेत्र में जंगली जानवरों से निजात दिलाने की मांग उठाई। ताकि फसलों को बचाया जा सके। इसके अलावा विद्यालयों में शिक्षक व चिकित्सालय में चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाएं उपलब्ध किए जाने, आपदा प्रभावितों को मुआवजा आदि मुद्दे भी उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि नए मोटर मार्ग निर्माण के दौरान किसानों के खेत कट रहे हैं। इसके एवज में उन्होंने मुआवजे पर जोर दिया। साथ ही श्रमिक कल्याण बोर्ड को शीघ्र अस्तित्व में लाए जाने, बीपीएल व अंत्योदय राशन कार्ड धारकों का सर्वे, सस्ते गल्ले की दुकानों में खाद्यान्न की नियमित आपूर्ति समेत तमाम मांगें उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि इन ज्वलंत मुद्दों पर कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की जनसमस्याओं के निदान को प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समस्याओं का निराकरण न किया गया तो ग्रामीण दोबारा आंदोलन को बाध्य होंगे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8443027.html

Devbhoomi,Uttarakhand

कठ्या गांव में पेयजल को हा-हाकार,उत्तराखंड के जल निगम में भी क्या  चोरों की कमी है ?
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नरेन्द्रनगर प्रखंड के अंतर्गत ग्राम पिपलेथ-कठ्या में पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से पेयजल संकट गहरा गया है। दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत न होने से ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी वर्ष अगस्त माह में दैवीय आपदा से गांव को पेयजल आपूर्ति करवाने वाली 6 किमी. लम्बी कठ्या पिपलेथ पेयजल लाइन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। यह सब लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्माणाधीन खाड़ी-पिपलेथ मोटर मार्ग के कारण हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के कारण चट्टानों के धंसने से पेयजल लाइन ठप पड़ी है, जिस कारण पेयजल के लए हा-हाकार मचा है। प्रधान भावना भंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता धूम सिंह नेगी का कहना है कि तीन माह बाद भी क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत नहीं की गई है, जबकि उस समय लोनिवि नरेन्द्रनगर की ओर से तत्काल लाइनों की मरम्मत की बात कही गई थी।

उन्होंने बताया कि पेयजल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था ग्राम पंचायत ने स्वयं की है। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जल संस्थान ने अपनी परिसम्पत्ति को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की। ग्रामीणों ने पेयजल लाइन की मरम्मत व आपूर्ति सुचारु न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बारे में लोनिवि नरेन्द्रनगर के अवसर अभियंता एस कुमार का कहना है कि क्षतिग्रस्त लाइन का प्राकलन तैयार किया गया है, जल्द ही मरम्मत का कार्य किया जाएगा।

Jagran news

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  444 गांव व तोक प्यासे        Nov 17, 10:33 pm    बताएं   








The mail below is the evidence how much development has taken place in Uttarakhand. If this is the condition in Winter, you can imagine the situation in Summer.

Development point of view, hill areas are neglected very poor development there.
==============  444 गांव व तोक प्यासे







अल्मोड़ा : प्राकृतिक एवं पारंपरिक स्रोतों से लबरेज पहाड़ में लोग प्यासे! जी हां, पुनर्जन्म की राह तक रहीं 191 पेयजल योजनाएं कुछ ऐसी ही भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं। हालात इतने विकट हैं कि अल्मोड़ा जिले के 444 गांव व तोकों में करीब दो लाख की आबादी पानी को तरस गई है। हैरत की बात है, आपदा मद से मरहम के दावों के उलट ध्वस्त योजनाओं में जान फूंकने को बजट ही नहीं है। जाहिर है, सर्दी में हाल ऐसे हैं तो गर्मी में हलक आसानी से तर होगा, कहना मुश्किल है।
प्राकृतिक प्रकोप की पीड़ा से अभी पहाड़वासी उबरने की जुगत में लगे ही थे कि अब पेयजल संकट की नई चुनौति मुंह बाये खड़ी हो गई है। बीते वर्ष की त्रासदी, फिर इस साल आपदा में ध्वस्त पेयजल योजनाओं की मरम्मत न होने से सुदूर गांवों में संकट गहरा गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद के तीन डिवीजन अल्मोड़ा, रानीखेत व रामनगर की सल्ट शाखा में कुल 805 पेयजल वितरण योजनाएं हैं। आपदा में 191 योजनाएं नेस्तनाबूद हो गई थीं। ऐसे में इन योजनाओं पर निर्भर करीब 444 गांव एवं तोक पानी की बूंद को मोहताज हो गए हैं।
मगर अफसोस कि शासन-प्रशासन पर्वतीय अंचल की प्यास बुझाने का कतई गंभीर नहीं है। यही वजह है संबंधित विभागीय अधिकारियों के क्षति का एस्टीमेट भेजने के बावजूद आपदा मद से धनराशि देने के बजाय कंजूसी की जा रही है। कहना गलत न होगा, जनप्रतिनिधियों व अफसरशाही का रवैया यही रहा तो निश्चित तौर पर प्रभावित गांवों के दो लाख लोग पेयजल के लिए तरस जाएंगे।
:::::::::इंसेट::::::::
जरूरत 2.94 करोड़ की, 34 लाख में इतिश्री
अल्मोड़ा डिवीजन को योजनाएं ध्वस्त होने से 1.50 करोड़ की चपत लगी। विभागीय स्तर पर बजट मांगा गया तो प्रशासन ने आपदा मद से 34 लाख देकर पल्ला झाड़ लिया। रानीखेत डिवीजन में 1.05 करोड़ तो रामनगर डिवीजन की सल्ट शाखा में योजनाएं क्षतिग्रस्त होने से जल संस्थान को 40 लाख की चपत लगी है। हैरत की बात है, अब तक दोनों डिवीजनों को योजनाओं की मरम्मत को धेला तक नहीं मिला।
=====इंसेट बॉक्स===
संकट का सूरत-ए-हाल
डिवीजन   कुल योजनाएं  ध्वस्त
-अल्मोड़ा       353      108
-रानीखेत       337       53
-सल्ट शाखा    115       30
======इंसेट बॉक्स====
कुल गांव-तोक        संकट 
-अल्मोड़ा-  582       194
-रानीखेत- 749+279   170
-सल्ट शाखा- 230       80
(आंकड़े विभागीय हैं, वास्तविकता इससे भी ज्यादा खराब है।)
=====इंसेट========
धन मिलते ही युद्धस्तर पर होगा काम: ईई
अधिशासी अभियंता (जल संस्थान) वीके मिश्रा ने कहा, क्षति का एस्टीमेट प्रशासन को भेजा गया है। आपदा मद में धन मिलते ही क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरु कर दिया जाएगा।
=====इंसेट=======
जिला पंचायत ने शुरुआती चरण में एक दर्जन क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण को 60 लाख का एस्टीमेट प्रशासन को दिया है। मगर हीलाहवाली में अभी तक आपदा मद से धन ही नहीं मिला है। सुदूर गांवों में संकट गंभीर है। इससे निपटने को प्रशासन पर पूरा दबाव बनाया जाएगा।
मोहन राम आर्या, जिपं अध्यक्ष


(Dainik Jagran)

   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Who is taking care of this one of the biggest human need.

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बेलपट्टी क्षेत्र में गहराया पेयजल संकट
Feb 05, 09:57 pm
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गंगोलीहाट,जागरण कार्यालय : विकासखंड के बेलपट्टी क्षेत्र में अभी से पानी की किल्लत होने लगी है। गांवों के जल स्रोतों में पानी की कमी और योजनाएं नहीं होने के कारण लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने पेयजल समस्या से निपटने के लिए लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण करने की मांग की है।

बेलपट्टी क्षेत्र के अधिकांश गांवों के लिए पेयजल योजनाएं नहीं बनी हैं। इन गांवों केलोग परंपरागत जल स्रोतों पर निर्भर हैं। परंतु इन नौले धारों में फरवरी से लेकर जून तक पानी का स्तर कम हो जाता है। नौले धारों में पानी की कमी के कारण लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पानी की कमी के कारण पशुपालकों को सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ती है। बमुश्किल पेयजल की व्यवस्था करने वाले ग्रामीणों को पूरा दिन मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करने में व्यतीत करना पड़ता है। इस वर्ष भी अभी से पेयजल किल्लत शुरू होने लगी है। इस समस्या से निपटने के लिए क्षेत्रवासी लंबे समय से लिफ्ट पेयजल योजना के निर्माण की मांग उठा रहे हैं, परंतु अभी तक ग्रामीणों को महज कोरे आश्वासन ही मिले हैं। पेयजल संकट का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने जल संस्थान से शीघ्र बेलपट्टी क्षेत्र के लिए लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण किए जाने की मांग की है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Water Crisis increasing in hills.


का, पिथौरागढ़ : बीते कई दिनों से पेयजल संकट झेल रही जनता का सब्र सोमवार को टूट गया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चल रही बैठक में पहुंच कर प्रदर्शन किया। इस मौके पर प्रशासन सहित जल संस्थान के अधिकारियों को जम कर खरी-खोटी सुनाई । जिसे लेकर एक बार तनाव की स्थिति पैदा हो गई। एसडीएम सदर को बैठक छोड़कर प्रदर्शनकारियों से उलझना पड़ा।  नगर के जगदंबा कालोनी, सरस्वती विहार सहित आसपास के क्षेत्रों में विगत तीन दिनों से नलों में पानी  की बूंद  नहीं टपकी है। कालोनीवासियों द्वारा इसकी शिकायत जल संस्थान से किए जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की गई। जिससे गुस्साए महिला और पुरुष सोमवार को जनमंच संगठन के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचे । जहां पर जिलाधिकारी सीएमएस बिष्ट अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। प्रदर्शन के दौरान किसी अधिकारी के बाहर नहीं निकलने पर प्रदर्शनकारियों का पारा चढ़ गया। प्रदर्शनकारी बैठक स्थल सभागार में ही नारेबाजी करते हुए घुस गए।
प्रदर्शनकारियों के नारेबाजी के साथ सभागार में घुसने पर बैठक में मौजूद  अधिकारी हक्के-बक्के रह गए। पेयजल को तरस रही सिर में खाली कनस्तर लेकर पहुंची महिलाओं द्वारा अधिकारियों को जमकर खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी गई। महिलाओं का कहना था कि जनता प्यासी है, प्रशासन और विभाग सुध तक नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारियों के तेवरों को देखते हुए बैठक में पूरी तरह खलल पड़ गया। स्थिति तनावपूर्ण होने लगी। उपजिलाधिकारी सदर नरेश दुर्गापाल बैठक छोड़कर प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंचे। प्रदर्शनकारी उनके साथ उलझने लगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार की प्रात: जल संस्थान के ईई द्वारा पाइप लाइन की जांच की बात कहे जाने पर प्रदर्शनकारी और भड़क उठे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जल संस्थान की गलत वितरण व्यवस्था के चलते जल संकट बना हुआ है। पूर्व में प्रात: नलों में पानी चलाए जाने के बाद एक घंटे तक विद्युत कटौती की जा रही थी विगत कुछ दिनों से मात्र आधे घंटे ही बिजली काटी जा रही है। फलस्वरूप  टुल्लू पंप लगाए जा रहे हैं। लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। अंत में प्रशासन और जल संस्थान द्वारा मंगलवार से प्रात: 5 बजे से पानी की आपूर्ति किए जाने का आश्वासन दिए जाने पर प्रदर्शनकारी शांत हुए।
प्रदर्शनकारियों में जनमंच के संयोजक भगवान रावत, सह संयोजक गीता मेहरा, गंगा , कलावती देवी, मुन्नी देवी, प्रियंका जोशी, अमन , चेतन, नैन सिंह , होशियार सिंह, नवीन, आनंद पांडेय, उमेश पांडेय सहित दर्जनों लोग शामिल थे।


http://www.jagran.com/uttarakhand/pithoragarh-10265631.html


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गर्मी बड़ते ही कही दावानल तो कही पानी की गंभीर समस्या। गंगा, यमुना, सरयू, काली नदी आदि बड़ी-२ नदिया इसी प्रदेश से निकल रही है। बूंद-२ फिर भी पानी के लिए तरसे लोग।

What Govt is doing ??

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


पानी के लिए छूट रहे पसीने

जाका, रानीखेत : शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामसभा ऐना के ग्रामीण दो-तीन किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। यही कारण है कि ग्रामीण गंदा पानी पीने को विवश हैं। ग्रामसभा के सामाजिक कार्यकर्ता व समतावादी परिवार के अध्यक्ष मोहन राम ने शीघ्र ही गांव के लिए पेयजल योजना बनाने की मांग की है।

उनका कहना है कि ग्रामसभा ऐना के लिए 1982 में पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। कुछ समय तक चली इस योजना को बाद में स्वजल को सौंप दिया गया। कई वर्ष पूर्व यह योजना क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद भी आज तक इसे ठीक नहीं किया गया है। जिस कारण ग्रामसभा ऐना, पागसा के तोक मल्लीधार, पोखराधार, बीड़ाखोली के ग्रामीण पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि अनुसूचित बाहुल्य गांव के होने के बावजूद भी शासन-प्रशासन द्वारा इस गांव की उपेक्षा की जा रही है। जिस कारण ग्रामीणों को दो-तीन किमी दूर गधेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। गधेरों से ला रहे गंदे पानी से कभी भी गांवों में बीमारियां फैलने का भी खतरा बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि गांव में पानी उपलब्ध कराने के लिए वह कई बार संयुक्त मजिस्ट्रेट, जल संस्थान व विभागीय उच्च अधिकारियों को पत्र भेज चुके हैं। यही नहीं कुछ समय पूर्व गांव की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है। उसके बाद भी गांव की कोई सुध नहीं ली जा रही है। उन्होंने शीघ्र ही गांव के लिए नई योजना नहीं बनने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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मध्याह्न भोजन में भी दिक्कत

रानीखेत: प्राइमरी विद्यालय ऐना में पानी नहीं होने से मध्याह्न भोजन बनाने में दिक्कत हो रही है। विद्यालय पहुंचने के बाद भोजन बनाने के लिए भोजनमाताओं को पहले दो-तीन किमी दूर गधेरों से पानी ढोना पड़ता है। तब कहीं जाकर विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनता है।

(source - dainik jagran)

Devbhoomi,Uttarakhand

तीन साल से तर नहीं हुए कंठ
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घनसाली: अंबेडकर ग्राम रगस्या के ग्रामीण तीन सालों से पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि उन्हें अपनी प्यास बुझाने के लिए धर्मगंगा से दूषित पानी का ढुलान करना पड़ रहा हैं। इसके ऊपर जलसंस्थान बिना पानी दिए बिल भेजकर लोगों को परेशान कर रहा है।प्रखंड भिलगंना के रगस्या गांव में पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है।
पेयजल के अभाव में उन्हें नदी का दूषित पानी पीना पड़ रहा है। विदित हो कि रगस्या, आगर और कोटी तीन ग्राम पंचायतों के लिये जल संस्थान ने 1981 में 12 किमी लंबी योजना 87 लाख रूपये की लागत से योजना स्वीकृत की थी। निगम के अधिकारियों तथा ठेकेदारों की मिली-भगत के चलते योजना मात्र आगर गांव तक ही आकर रुक गई है।
ग्रामीणों के रोष प्रकट करने पर निगम ने निवालगांव से रगस्या गांव के लिये नई योजना बनाई लेकिन उस पर भी घटिया निर्माण के चलते पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हैरत की बात तो यह है कि जल संस्थान को स्थिति पता होने के बाद भी ग्रामीणों को हजारों रुपये के बिल समय-समय पर भेजे जा रहें है।ग्राम प्रधान पन्ना लाल का कहना है कि इस समस्या को लेकर संस्थान और पेयजल मंत्री तक को कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।--------समस्या के निस्तारण के लिए संस्थान को निर्देश दिए जा चुके हैं।
बिना पानी के जो बिल आ रहे हैं वे माफ किए जाएंगे।मंत्री प्रसाद नैथानी, पेयजल मंत्री-शिकायत पर जब गांव का निरीक्षण किया गया तो उस समय पानी चल रहा था। लोगों को बिलों का भुगतान तो करना ही पड़ेगा।डीडी जोशी, सहायक अभियंता जल संस्थान घसनाली
Source Dainik Jagran