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No Water, No Youth - पहाड़ का पानी, पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नही आती

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 05, 2008, 01:34:49 PM

पहाड़ का पानी, पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नही आती क्या आप इस तथ्य से सहमत है ?

Yes
35 (83.3%)
Not
6 (14.3%)
Can't Say
1 (2.4%)

Total Members Voted: 42

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तो,

आम्तौर से कई गोस्ठियो मे यह सुनने को मिला है की लोग कहते है  पहाड़ का पानी, पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नही आती ?

क्या आप इस बात से सहमत है ?

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



Well said prashant da...

It is the responsiblity of new generation to work  towards pahad. The economic condition of pahadi earlier was very poor. But by mercy of God now pahadi are doing well not only in country but at hte international level.

Unfortuantely, there are several pahadi who are running business even in UK but they never come back to pahad and work towards its development. Our Govt is also equally responsible for not inviting such people of ours at pahad..

During our recent Seminar at Delhi Padam Shree Shekhar Pathak JI was telling that there are many pahadi in US who are running business there but UK Govt not consulted them.




Quote from: Chiring We on March 05, 2008, 03:13:36 PM
well, we should then try to be of its use...even if we r not so young anymore :):):)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जहाँ तक रही पानी की बात, यह बात सही है पहाड़ का पानी पहाड़ का काम कम ही आता है. सिचाई के लिए पानी, पीने के लिए पानी नही, गंगा देश की इतनी बड़ी नदी हमारे यहाँ से ही निलती है.

पहाड़ का बच्चा जवान होता है, पहाड़ छोड़ के चला जाता है वह भी पहाड़ के काम नही आता है..  मेरे हिसाब से इस तथ्य मे कोई दो राय है है !

जरूरत है इस सच को बदलने की !


पंकज सिंह महर

बिल्कुल सही बात है मेहता जी, विस्तृत उत्तर बाद में दूंगा, आजकल यहां सत्र चल रहा है, बहुत व्यस्त हूं।

पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको..!

पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको.पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको.पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको.पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको.पानी रोको, जवानी रोको, उत्तराखण्ड की बर्बादी रोको.

Risky Pathak

Sahi khaa Mehta Jee. And agar Pahaad ki jwaani pahaad ke kaam aa jaaye to paahad ka paani swayam apne aap pahaad ke kaam aa jayegaa..

Saalaa Kisi me dum hi nahi hai.... Dar Lagta hai subko... 

Quote from: M S Mehta on March 05, 2008, 04:21:44 PM
जहाँ तक रही पानी की बात, यह बात सही है पहाड़ का पानी पहाड़ का काम कम ही आता है. सिचाई के लिए पानी, पीने के लिए पानी नही, गंगा देश की इतनी बड़ी नदी हमारे यहाँ से ही निलती है.

पहाड़ का बच्चा जवान होता है, पहाड़ छोड़ के चला जाता है वह भी पहाड़ के काम नही आता है..  मेरे हिसाब से इस तथ्य मे कोई दो राय है है !

जरूरत है इस सच को बदलने की !


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


mujhe aasa hai nayee peedi is trend to thodi gee.




Quote from: Himanshu Pathak on March 07, 2008, 03:41:30 PM
Sahi khaa Mehta Jee. And agar Pahaad ki jwaani pahaad ke kaam aa jaaye to paahad ka paani swayam apne aap pahaad ke kaam aa jayegaa..

Saalaa Kisi me dum hi nahi hai.... Dar Lagta hai subko... 

Quote from: M S Mehta on March 05, 2008, 04:21:44 PM
जहाँ तक रही पानी की बात, यह बात सही है पहाड़ का पानी पहाड़ का काम कम ही आता है. सिचाई के लिए पानी, पीने के लिए पानी नही, गंगा देश की इतनी बड़ी नदी हमारे यहाँ से ही निलती है.

पहाड़ का बच्चा जवान होता है, पहाड़ छोड़ के चला जाता है वह भी पहाड़ के काम नही आता है..  मेरे हिसाब से इस तथ्य मे कोई दो राय है है !

जरूरत है इस सच को बदलने की !


पंकज सिंह महर

मेहता जी,
          बहुत सही बात आपने कही, इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण आप स्वयं हैं, आप दिल्ली गये, आपकी जवानी Company के काम आ रही है, यदि आप अपने proffession से related काम उत्तराखण्ड में कर पाते या यहां की किसी संस्था के लिय कार्य करते तो निश्चित रुप से वह पहाड़ के काम आता, लेकिन मजबूरी है, पेट पालना है और अपनी योग्यता के अनुरुप काम पाना है, तो बाहर तो जाना ही पड़ेगा। यही बात सभी के लिये लागू है।
       पहाड़ से mostly लोग army  मै हैं, उनकी जवानी देश के काम तो आ रही है, लेकिन जब वह रिटायर होकर घर आता है तो बूढा हो कर आता है और अपने गांव, खेत में भी काम नही कर पात्ता। तो जवानी इस मायने में तो और भी कुर्बान है कि वह देश के काम आ रही है।
        लेकिन जवानी इस मामले में कतई कुरबान नहीं की जा सकती कि बिहार और उ०प्र० से लोग यहां आकर नौकरी करें और हमारे पढे-लिखे भाई दो रोटी की खातिर दिल्ली या मुंबई के किसी ढाबे में बर्तन मले। हमारी सरकार को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिये कि कम से कम तृतीय और चतुर्थ श्रेणी का रोजगार उत्तराखण्ड मूल के लोगों के लिये आरक्षित कर दी जांय, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम हमारी आने वाली पीढी को परेशान करेंगे और वह हमें कोसेंगे कि हमारे पुरखों ने हमारे लिये कुछ भी नहीं किया।

जय उत्तराखण्ड!