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Fauji Lalit Mohan- Gajendra Rana- Pritam Bhartwan- उत्तराखंड के नए प्रसिद्ध गायक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 08, 2007, 12:58:43 PM

Anubhav / अनुभव उपाध्याय


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Hem Da Thanx..  Thoda sa vistar mai dal dete hai esh interivew ko..

ललित मोहन जोशी

Link for "Tak Taka Tak" song on 'youtube'

आज से 7-8 साल पहले एक नाम कुमाउँनी संगीत में अचानक उछला और कुमाऊँ की सीमायें पार करके पूरे उत्तराखण्ड पर उसकी आवाज ने अपना जादू बिखेर दिया.
"टक टका टक कमला" गाने वाला एक सीधी-साधी 'लुक' वाला फौजी अपनी कंठ की मधुरता से सभी के दिल पर छा गया.
आज फौजी ललित मोहन जोशी कुमाउँ के सबसे पसंदीदा गायक हैं.  यह कहना गलत नही होगा कि स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के बाद ललित मोहन जोशी ही वह गायक है जिसे पूरे कुमाऊँ - गढवाल में लोग बहुत पसंद करते हैं.

"क्रिएटिव उत्तराखण्ड - म्यर पहाड" ने कुमाउनी भाषा में ही उनका साक्षात्कार लिया. जो आप लोगों के लिये प्रस्तुत है.

म्यर पहाड - ललित दा नमस्कार! सब है पैल्लि हम तुमर गौं-परिवारा क बार में जानकारी प्राप्त करन चांल.
ललित मोहन जोशी - मैं मुन्सयारी (जिला-पिथौरागढ) इलाका क धुरातोली गौं को रून्या छू. परिवार में इजा-बाज्यू, 2 भाई और 1 बैनी छ. म्यर ब्या रामनगर बटि भ्यो और हमार 2 च्याल छन.

म्यर पहाड - पढाई-लिखाई कां बटि करि तुमिल?
ललित मोहन जोशी – मैंल मुन्सयारी बटि इन्टर करिछ. ऊक बाद मैं फौज में भर्ती हो गयूं. रानीखेत बटि ट्रैनिंग करना क बाद सेकण्ड नागा (कुमाऊँ रेजिमेन्ट)में पोस्टिंग भै मेरि.

म्यर पहाड - संगीत में रुचि कब बटि थी तुमरि. यो सब आर्मी में ऊनाक बाद शुरु करिछ या पैल्ली बटि तुमोर संगीत दगड लगाव थ्यो.
ललित मोहन जोशी – अरे संगीत त नानछना बटि पसंद थ्यो मैंस. नानछना बटि मैं जंगल गौर चरून जाथ्यू, वा लै खूब गान गानेर भयू, रूख में चढ बैर. मुनस्यारी मैं हमोर एक कल्चरल ग्रुप लै थ्यो.

म्यर पहाड - अच्छा त आर्मी मैं ऊनाक बाद ले संगीतो को शौक कम नै भ्यो तुमोर?
ललित मोहन जोशी – ना! प्रोत्साहन मिलिछ वा बटि लै. आर्मी में उनाक 2-3 साल बाद पैली कैसिट निकालिछ, "टक टका टक कमला". और अब तक टोटल 32 आडियो-वीडियो एलबम रिलीज हो ग्यान.

म्यर पहाड - लोकसंगीताक बार मैं कां बटि सिखिछ तुमिल? और एक सफल गायक बननाक लिजि लोकसंगीत कि जानकारी कतुक जरूरी छ?
ललित मोहन जोशी – बिना लोकसंगीत कि जानकारी का कोई ले गायक सफल ने हो सकनु. नानछना गौं मैं भौत कुछ सिखिछ मैंले लोकसंगीताक बार में.  मैं आजि लै बुजुर्ग लोगून दगड बैठ बैर लोकसंगीताक बार मैं सिकते रूंछु.

म्यर पहाड - गढवाली और कुमाऊँनी संगीत मैं कतुक समानता नज्ञर ऊंछी तुमस?
ललित मोहन जोशी – कुमाऊँनी और गढवाली लोकसंगीत में क्वे ज्याद अन्तर न्हातिन. थ्वाड भाषा क अन्तर त कुमाऊँ-गढवाल में जरूर छ. लेकिन गाना सुनते-सुनते कुमाऊँनी आदिम गढवाली और गढवाली आदिम कुमाऊँनी गाना समझ लिछ.

म्यर पहाड - लेकिन एक बात त तुम जरूर मानला कि गढवाली संगीतोक मार्केट और लोकप्रियता कुमाऊँ है थ्वाड ठीक छ. येक कि कारण समझ में ऊछ तुमार?
ललित मोहन जोशी – यो बात सही छ. गढवाली संगीत इंडस्ट्री कि क्वालिटी और लोकप्रियता कुमाऊँ का है थ्वाड ठीक छ. उनार टेक्नीशियन और कलाकार बढिया छन जो आब कुमाऊँनी संगीत लिजि ले काम करनान.1-2 साल में यो अन्तर खत्म ह़वे जालो.

म्यर पहाड - 4-5 साल बटि त उत्तराखण्ड संगीत उद्योग भौत प्रगति में छ. लेकिन येक भविष्य कि होल?
ललित मोहन जोशी – उत्तराखण्ड संगीत भविष्य में पंजाबी संगीत है ले ज्याद प्रसिद्ध ह्वे जालो. मैं त यो उम्मीद करछु कि उत्तराखण्ड में बेहतरीन फिल्म उद्योग स्थपित हौलो. येक लिजि सरकार ले प्रयास करलि तभै हमरो यो सपना पूरो हो पालो.

म्यर पहाड - कुमाऊँनी-गढवाली कैसेट और वी.सी.डी.निकालन्या वाल ज्यादतर कम्पनी गैर-पहाडीन का छन, उन कलाकारुन कतुक सहायता करनान.
ललित मोहन जोशी – हाँ! पहाडी लोग कम छन इण्डस्ट्री में.बिजनेस वाल आदिम त पैल्ली अपनु फायदा देखछ. पुराना और नामी कलाकारनु त इंडस्ट्री बटि कुछ फायदा मिलछ लेकिन नय्या कलाकारस त उन बस एक प्लेटफार्म दी सकनान शुरुआत करनाक लिजि.

म्यर पहाड - आब भविष्य में कि प्रोग्राम छ.
ललित मोहन जोशी – ये मैन में मेरि नय्या अलबम रिलीज होलि "मीठी तेरी बोली". उम्मीद छ कि यो एलबम ले आप सबै लोगुन के पसन्द आलि. फिर ऊक बाद फिल्म बनूनाक विचार छ. फिल्म कि स्क्रिप्ट और कास़्टिंग लिजि काम शुरू है ग्यो छ.

म्यर पहाड - ललित दा "म्योर पहाड" क सौभाग्य छ कि तुमार दगाड बात करनाक मौक मिलिछ. हमुन आशा छ कि तुम अघिल के ले लोकसंगीत स बढावा दीते रौला और उत्तराखण्ड को नाम देश विदेश में फैलाला.
ललित मोहन जोशी – जरूर! मेर त हमेशा यो प्रयास रूंछ. हमरि संस्क्रति भौत विकसित छ और हम कैक है कम न्यात्या. "म्यर पहाड" स मेरि शुभकामना छन, धन्यवाद.


Hindi Translation
आज से 7-8 साल पहले एक नाम कुमाउँनी संगीत में अचानक उछला और कुमाऊँ की सीमायें पार करके पूरे उत्तराखण्ड पर उसकी आवाज ने अपना जादू बिखेर दिया.
"टक टका टक कमला" गाने वाला एक सीधी-साधी 'लुक' वाला फौजी अपनी कंठ की मधुरता से सभी के दिल पर छा गया.
आज फौजी ललित मोहन जोशी कुमाउँ के सबसे पसंदीदा गायक हैं.  यह कहना गलत नही होगा कि स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के बाद ललित मोहन जोशी ही वह गायक है जिसे पूरे कुमाऊँ - गढवाल में लोग बहुत पसंद करते हैं.

"क्रिएटिव उत्तराखण्ड - म्यर पहाड" ने कुमाउनी भाषा में ही उनका साक्षात्कार लिया. जो आप लोगों के लिये प्रस्तुत है.

म्यर पहाड - ललित दा नमस्कार! सब से पहले हम आपके गांव-परिवार के बारे मे जानना चाहेंगे.
ललित मोहन जोशी - मैं मुन्सयारी (जिला-पिथौरागढ) इलाके के धुरातोली गांव का रहने वाला हूं. परिवार में मां-पिताजी, 2 भाई और 1 बहन हैं. मेरी शादी रामनगर से हुई और हमारे 2 बेटे हैं

म्यर पहाड - पढाई-लिखाई कहां से की आपने?
ललित मोहन जोशी – मैने मुन्सयारी से इन्टर किया. उसके बाद मैं फौज में भर्ती हो गया. रानीखेत से ट्रैनिंग करना के बाद सेकण्ड नागा (कुमाऊँ रेजिमेन्ट)में पोस्टिंग हुई मेरी.

म्यर पहाड - संगीत में रुचि कब से थी आप की. ये सब आर्मी में आने के बाद शुरु हुआ या फिर उसके पहले से ही आपको संगीत से लगाव था.
ललित मोहन जोशी – अरे संगीत तो बचपन से ही पसंद था मुझे. बचपन में जंगल गाय चराने जाता था, वहां खूब गाने गाता था पेड में चढ कर. मुनस्यारी में हमारा एक कल्चरल ग्रुप भी था.

म्यर पहाड - अच्छा तो आर्मी में आने के बाद भी संगीत का शौक कम नही हुआ आपका?
ललित मोहन जोशी – नहीं! बल्कि प्रोत्साहन मिला वहां से. आर्मी में आने के 2-3 साल बाद पहली कैसिट निकाली, "टक टका टक कमला". और अब तक टोटल 32 आडियो-वीडियो एलबम रिलीज हो गयी हैं.

म्यर पहाड – लोकसंगीत कहां से सीखा आपने? और एक सफल गायक बनने के लिये लोकसंगीत की जानकारी कितनी जरूरी है?
ललित मोहन जोशी – बिना लोकसंगीत की जानकारी के कोई भी गायक सफल नही हो सकता. बचपन से ही गांव में बहुत कुछ सीखा मैने लोकसंगीता के बारे में.  मैं अभी भी बुजुर्ग लोगों के साथ बैठ कर लोकसंगीत सीखता रहता हूं.

म्यर पहाड - गढवाली और कुमाऊँनी संगीत में कितनी समानता नज्ञर आती है आपको?
ललित मोहन जोशी – कुमाऊँनी और गढवाली लोकसंगीत में कुछ ज्यादा अन्तर नही है. थोडा भाषा का अन्तर कुमाऊँ-गढवाल में जरूर है. लेकिन गाने सुनते-सुनते कुमाऊँनी लोग गढवाली और गढवाली लोग कुमाऊँनी गानों को समझने लगते हैं.

म्यर पहाड - लेकिन एक बात तो आप जरूर मानेंगे कि गढवाली संगीत की मार्केट और लोकप्रियता कुमाऊँ से थोडा बेहतर ठीक है. आपके अनुसार इसका क्या कारण है?
ललित मोहन जोशी – ये बात सही है. गढवाली संगीत इंडस्ट्री की क्वालिटी और लोकप्रियता कुमाऊँ का से थोडा बेहतर है. उनके टेक्नीशियन और कलाकार बढिया हैं जो अब कुमाऊँनी संगीत के लिए भी काम करते हैं.1-2 साल में ये हो अन्तर खत्म जायेगा.

म्यर पहाड - पिछले साल 4-5 साल में उत्तराखण्ड संगीत उद्योग काफी प्रगति की है. इसका भविष्य क्या है?
ललित मोहन जोशी – उत्तराखण्ड संगीत भविष्य में पंजाबी संगीत से भी ज्यादा प्रसिद्ध हो जायेगा. मैं तो ये उम्मीद करता हूँ कि उत्तराखण्ड में बेहतरीन फिल्म उद्योग स्थपित होगा. इसके लिए सरकार भी प्रयास करेगी तभी हमारा ये सपना पूरा हो पायेगा.

म्यर पहाड - कुमाऊँनी-गढवाली कैसेट और वी.सी.डी. की अधिकतर कम्पनियां गैर-पहाडी  लोगों की हैं वो कलाकारों की कितनी सहायता करते हैं.
ललित मोहन जोशी – हाँ! पहाडी लोग कम हैं इण्डस्ट्री में.बिजनेस वाले तो पहले अपना फायदा देखते हैं. पुराने और नामी कलाकाररों को तो इंडस्ट्री से कुछ फायदा मिलता है लेकिन नये कलाकार को तो वह बस एक प्लेटफार्म ही देते हैं शुरुआत करने के लिए.

म्यर पहाड - आपके भविष्य में क्या प्रोग्राम हैं?.
ललित मोहन जोशी – इस महीने मेरी नयी अलबम रिलीज होगी "मीठी तेरी बोली". उम्मीद है कि यह एलबम भी आप सभी लोगों को पसन्द आयेगी. फिर उसके बाद कुछ फिल्में बनाने का विचार है. फिल्म की स्क्रिप्ट और कास़्टिंग का काम शुरू हो गया है

म्यर पहाड - ललित दा "म्यर पहाड" का सौभाग्य है कि आपके साथ बात करने का मौका मिला. हमें आशा है कि आप भविष्य मे भी लोकसंगीत को बढावा देते रहेंगे और उत्तराखण्ड का नाम देश विदेश में फैलायेंगे.
ललित मोहन जोशी – जरूर! मेरा तो हमेशा यही प्रयास रहता है. हमारी संस्क्रति काफी विकसित है और हम किसी से भी कम नही हैं "म्यर पहाड" को मेरी शुभकामनाएं, धन्यवाद.




Quote from: Hem Pant on October 12, 2007, 01:54:10 PM
Read Fauji Lalit Mohan Joshi's Exclusive interview in Pahadi.....By once again CU-Myar Pahad

http://www.creativeuttarakhand.com/celebrities/l_m_joshi.html
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Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Pritam ji ka jawaab nahi hai Jaagar gaane main. Delhi main RK Puram ki vishaal jaagar main unhone samaa baand diya tha.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गजेन्द्र व मीना राणा के गीतों की रही धूम

नरेन्द्रनगर (टिहरी गढ़वाल)। कुंजापुरी पर्यटन एंव विकास मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या पर गढ़वाली लोक गायक गजेन्द्र व मीना राणा के गानों की धूम रही। गजेन्द्र राणा के प्रसिद्ध गीत 'चिट रूमाल हाय धरयूं छ', 'पुष्पा छोरी पौड़ी खाल की', नि रयेंदू मैसे ढौंढा पड़ीगे भैंसी दर्शक पर देर रात तक झूमते रहे।
   कार्यक्रम में मीना राणा व पदम गुसांई द्वारा प्रस्तुत 'भलु लगदु बनूली' को दर्शकों ने काफी सराहा। गढ़वाली गायक विशन सिंह हरियाला की प्रस्तुति तिलै धारू बोला ने भी दर्शकों की वाह-वाही लूटी। सांस्कृतिक संध्या में गायिका हेमा, अरूण, द्वारिका आदि ने भी शानदार प्ररस्तुतियां दी।

राजेश जोशी/rajesh.joshee

Mehta ji,
I also want to add name of Bhuwan Giri in new Kumauni singers, his famous album is Meri Kamu

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Sure Sir Ji...

I will try to give some information on him.

Quote from: rajesh.joshee on October 18, 2007, 02:49:15 PM
Mehta ji,
I also want to add name of Bhuwan Giri in new Kumauni singers, his famous album is Meri Kamu



राजेश जोशी/rajesh.joshee

Friends,
There are many new singers are comming, but either they are releasing 100s of Albums or they just become one Album wonder.  We can recognise them for some of their song or albums, they could not maintain the quality of their sininging for long time e.g.
Gajendra Rana - Pushpa Chhori & Bubli tero mobile
Lalit Mohan Joshi- Tak Taka tak Kamla
Preetam Bharatwan- Saruli and  Jagars
After that there are numbers of albums by those singers but they are just repeating their singing in other albums.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Rajesh Ji,

I would say that a singer should always endeour to give a new in his any new release rather than repeating the same thiing keeping in mind the choice of all categories.

Quote from: rajesh.joshee on October 31, 2007, 11:19:12 AM
Friends,
There are many new singers are comming, but either they are releasing 100s of Albums or they just become one Album wonder.  We can recognise them for some of their song or albums, they could not maintain the quality of their sininging for long time e.g.
Gajendra Rana - Pushpa Chhori & Bubli tero mobile
Lalit Mohan Joshi- Tak Taka tak Kamla
Preetam Bharatwan- Saruli and  Jagars
After that there are numbers of albums by those singers but they are just repeating their singing in other albums.