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Jagar: Calling Of God - जागर: देवताओं का पवित्र आह्वान

Started by पंकज सिंह महर, June 05, 2008, 11:28:33 AM

पंकज सिंह महर

चौथा चरण-गुरु की आरती

     इस चरण में देवता द्वारा गुरु की आरती की जाती है, ऎसा माना जाता है कि हमारे सभी लोक देवता पवित्र आत्मायें हैं। गुरु गोरखनाथ इनके गुरु हैं और इन सभी देवताओं ने कभी न कभी हरिद्वार जाकर कनखल में गोरखनाथ जी से दीक्षा ली है। तभी इनको गुरुमुखी देवता कहा जाता है, इस प्रसंग का वर्णन जगरिया करता है।

यहां पर गंगनाथ जी की दीक्षा का वर्णन किया जा रहा है-

ए.......तै बखत का बीच में, हरिद्वार में बार बर्षक कुम्भ जो लागि रौ।
ए...... गांगू.....! हरिद्वार जै बेर गुरु की सेवा टहल जो करि दिनु कूंछे......!
अहा.... तै बखत का बीच में, कनखल में गुरु गोरखीनाथ जो भै रईं......!
ए...... गुरु कें सिरां ढोक जो दिना, पयां लोट जो लिना.....!
ए...... तै बखत में गुरु की आरती जो करण फैगो, म्यरा ठाकुर बाबा.....!
अहा.... गुरु धें कुना, गुरु......, म्यारा कान फाडि़ दियो, मून-मूनि दियो,
         भगैलि चादर दि दियौ, मैं कें विद्या भार दी दियो,
         मैं कें गुरुमुखी ज बणा दियो।
ओ... दो तारी को तार-ओ दो तारी को तार,
        गुरु मैंकें दियो कूंछो, विद्या को भार,
        बिद्या को भार जोगी, मांगता फकीर,
        रमता रंगीला जोगी,मांगता फकीर।


       इस समय नृत्य करते समय देवता के हाथ में थाली और थाली में चावल के दाने, राख, फूल और जली हुई घी की बाती दी जाती है, देवता नृत्य करते समय थाली पकड़्कर अपने गुरु की आरती करते हैं।

पंकज सिंह महर

पांचवा चरण- खाक रमाना

इसमें खाक रमाई जाती है, मतलब देवता द्वारा धूणी से राख निकाली जाती है। उसके बाद थाली में रखी हुई राख को देवता सबसे पहले अपने माथे पर लगाते हैं, उसके बाद जगरिया को फिर वाद्य यंत्रों पर राख लगाते हैं। इसके बाद वहां पर बैठे लोग क्रम से देवता के पास जाते हैं और देवता उनके माथे पर राख (भिभूत) लगाकर आशीर्वाद देते हैं।

पंकज सिंह महर

छठा चरण- दाणि का विचार

जागर के छठे चरण में देवता दाणि का विचार करते हैं, दाणी का विचार का मतलब है, जिस घर में देवता का अवतरण किया गया है, उस घर की परेशानी का कारण क्या है। इसी बात पर देवता विचार करते हैं, वह हाथ में चावल के दाने लेकर विचार करते हैं और परेशानी का कारण और उसका समाधान भी बताते हैं।

पंकज सिंह महर

सातवां चरण- आशीर्वाद देना

जागर के इस चरण में देवता स्योंकार-स्योंनाई को आश्वस्त करते हैं कि उन्होने उनके सभी कष्टों को अभी से हर लिया है। उन्के सुखी जीवन के लिये आशीर्वाद दिया जाता है और वहां पर बैठे सभी लोगों के लिये देवता मंगलकामना करते हैं।

पंकज सिंह महर

आठवां चरण- देवता का अपने निवास के लिये प्रस्थान करना

यह जागर का अंतिम चरण होता है, क्योंकि जिस कार्य के लिये जागर लगाई गई थी वह कार्य पूरा हो जाता है। देवताओं को सूक्ष्मरुपधारी माना गया है और ऎसा माना जाता है कि सभी देवता हिमालय में निवास करते हैं। अतः जगरिया अब अंतिम औसाण देता है और देवता अंतिम बार नाचते हैं और अपने धाम की ओर वापस चले जाते हैं। जगरिया से वह इस बात का वादा करते हैं कि जब भी संकट होगा, वह जरुर आयेंगे।
      इसके बाद डंगरिया के शरीर में कम्पन बंद हो जाता है और उनका शरीर निढ़ाल सा हो जाता है। थोडी देर लेटे रहने के बाद उन्हें फिर से गंगाजल, गो-मूत्र दिया जाता है, उसके बाद वह सामान्य रुप में आ जाते हैं।



देखा ऎसे ही नही कहते हमारे उत्तराखण्ड को देवभूमि।

हरि ऊं!


पंकज सिंह महर

गोल्ज्यू की जागर सुनें, हुड़के की थाप पर, हालांकि इसमें गांवों में लगने वाली जागर की तरह तो नहीं है, लेकिन कुछ भाग है और गोल्ज्य़ु की बिरुत्वाई, कहा जा सकता है कि आरती form में है या लोक संगीत के farm में-


http://www.esnips.com/r/hmfl/doc/85d4f9f4-c948-4644-8460-a8d4b8a16932/Gweljyu1



http://www.esnips.com/doc/ea64e7db-8a27-44dc-9eae-79caf6c98945/Gweljyu2


यह आडियो क्लिप हमारे वरिष्ठ सदस्य श्री अनुभव उपाध्याय जी ने उपलब्ध कराया है।



खीमसिंह रावत

Pankaj S Mahar juw aapane jagar per but achchha kam kiya hai/ Jagar, harjuw ki dhuni me jatura-tirati-panchrati-egayari-baisi, khub dekhi hai/

aap logo ki mehanat hai jarur rang layegi/meri aor se dhanybad/
lege raho pankaj bhai

shailikajoshi

Thanks A lot


Maine kabhi Jagar nhi dekhi
Kabhi Mauka hi nhi mila Jagar me jane ka
n Mujhe Maloom tha k Jagar hoti hai Jo ek tarah ki Pooja hai
But aapne ise itne Vistar se Samajha diya


realy Thanks a Lot

Dinesh Bijalwan

dangria ko pasva yani devta ka pasu bhi khate hain.   Devta pasva ke madhyam se hi naachta,  aur bakta ( yani apni baat kahta hai)