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Jagar: Calling Of God - जागर: देवताओं का पवित्र आह्वान

Started by पंकज सिंह महर, June 05, 2008, 11:28:33 AM

पंकज सिंह महर

गंगनाथ जी की जागर के कुछ अंश


ओ उणनी निशाण, उणनी निशाण, अफताई आई गैछ
भानवे ओ गंगुआ जोगी डोटी को निशाणा,
भानवे ओ गंगुवा जोगी कालि को मसाणा,
       आऽ ऽ ऽ ऽ ओ गहतुआ बाणा, गहतुआ बाणा,
       बटुवा मसाणा त्वीलै उल्टा फाड़ी डालो,
       भानवे ओ गंगुआ जोगी उल्टा फाड़ी डालो,
ओ खेली हाली ताशा, खेली हाली ताशा,
जाधैं भाना कटीया तू भानवे बामनिया भाना,
बाजुरी को घासा, भानवे बामनिया भाना, बाजुरी को घासा,
        ओ खोली हाल ताला, खोली हाल ताला,
        काखी में धरिया त्वीले, भानवे बामनिया भाना, कैथे कनू हालो,
        भानवे बामनिया भाना, कैथे कनू हालो॥

Mukesh Joshi

गोरील देवता के जागर के कुछ अंश-

ॐ प्रथ्वीनाथ को पाट,
गुरु को शबद , नौ नरशिंह को पाट,
चौबटा की धूल,कांवर की विद्धा को पाट ,
गोरिया द्लेद्र हरंत करी ,
दुखो को अंत करी ,सुबुद्धि  देई,
मन इच्छा पूर्ण करी .
कुटम परिवार पर छाया करी ,
चार दिशा में मेरा वैरी भस्म करी .
चंपावती मे थान तेरो जागरंतो ह्वे जयां
तै चंपावती राज मा होलो राजा झालुराय ,
राजा की होली सात राणी वोराणी.

Mukesh Joshi

निरंकार देवता के जागर के कुछ अंश :-

ओंकार सतगरु प्रसाद .
प्रथमे ओंकार ,ओंकार से फोंकार
फोंकार से वायु ,वायु से विषदरी;
विषदरी से पाणी, पाणी से कमल ,
कमल से ब्रम्हा  पैदा होइगे ;
गुसैं को  तब देवध्यान लैगे,
जल का सागरु माँ तब गुसैजीन स्रष्टि  रंचीले;
तब देंदा गुसै ब्रह्मा का पास चार वेद,
चौद शास्त्र .अठार पुराण, चौबीस गायत्री .
सुबेर पढ्द ब्रह्मा स्याम भूली जान्द,
अठासी हजार  वर्ष तब ब्रह्मा -
नाभिकमल  मा रैइक वेद पढ़दो.
तब  चार वेद,चौद शास्त्र .अठार पुराण,
चौबीस गायत्री,वैका कंठ मा आई गैन,
वे ब्रह्मज्ञानी तब गर्व बढ गए

Rajen


Mukesh Joshi

गंगू रमोला  जी के जागर के कुछ अंश :-

लुका भूका सेम जाग ,आरुणी सेम जाग ,
वारुणी सेम जाग ,तल्लो सेम जाग ,तलबला सेम जाग .
तिन मथुरा मा जनम लीने कर्तार,
तिन देवकी का गर्भ लीने अवतार .
तुम द्वारिका का धनि ,मथुरा का ग्वैर ,
गायो का गोपाल होला गोप्यो का मोहन ,
तुम तै प्यारी होली मधुवनै की कुंज,
तुम तै प्यारा होला जमुना का छाला .
तब सुपिना मा देखे क्रष्ण गंगू रमोली
तौ ऊँची डांडीयो मा , बांज की वाणई होली जख होली कुलाई
अनमन भांति का फुल होला ,फुलू की वासिना .
देखे भगवान बांकी रमोली लगे मन .

Mukesh Joshi

सर्ष्टिकी उत्पत्ति

कैलासू मा रन्दों शम्भु स्यो भोले नाथ
शम्भू भोलेनाथ भान्गुल्या स्यो जोगी .
भान्गुल्या स्यो जोगी धुनी मा रम्यु रैन्द,
हे बाबा हे .....................हे बाबा
................................................
cont...


brijesh.mamgain

i want to know  what jagar is ? how the jagaries are able to  call the gods and the people who died to ask something  from them ?
Brijesh

प्रिय ब्रिजेश जी,
आप फ़ोरम के इस thread को शुरू से (from page 1) से पढ़ेंगे तो आप के सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे.
वीरेन्द्र सिंह बिष्ट

Quote from: brijesh.mamgain on November 11, 2008, 04:22:46 PM
i want to know  what jagar is ? how the jagaries are able to  call the gods and the people who died to ask something  from them ?
Brijesh

पंकज सिंह महर

धार्मिक गीतों की सँख्या कुमाऊँ में अधिक है । धार्मिक गीतों में पौराणिक आख्यानों वाले गीतों का प्रथम स्तर पर लिया जा सकता है । ऐसे गीतों में दक्ष प्रजापति के यज्ञ से लेकर रामायण, महाभारत के अनेक अवसरों के गीत आ जाते हैं । ऐसे गीतों का क्रम बहुत लम्बा चलता है । पौराणिक देवी-देवताओं के सभी गीत इस क्षेत्र में गाये जाते हैं ।

धार्मिक गीतों के अन्तर्गत स्थानीय देवी-देवताओं को भी स्थान मिला है । इन्हों जागर गीत के नाम से जाना जाता है । गढ़वाल-कुमाऊँ में 'जागरों' का विशेष महत्व है । जागरी, ढोल, हुड़का, डौंर-थाली बजाकर देवता विशेष के जीवन व कार्यों का बखान गीत गाकर करता है । जिस व्यक्ति पर 'देवता' विशेष अवतरित होता है - वह डंगरिया कहलाता है । जागरी जैसे-जैसे वाद्य बजाकर देवता विशेष के कार्यों का उल्लेख करता हुआ गाता है - वैसे-वैसे ही 'औतारु' (डंगरिया) नाचता जाता है । उसके शरीर में एक विशेष प्रकार की 'कम्पन शक्ति' प्रवेश करती है । जन-मानस मनौती मनाकर देवता को जागरी से नचवाते हैं और देवता को नाचने पर विपत्ति को टली हुई मानते हैं । आश्विन के महीने में ऐसे 'जागर' लगाये जाते हैं । स्थानीय देवी-देवताओं का पूजन 'बैसी' कहलाता है । जागरों में ग्वेल, गंगनाथ, हरु, कव्यूर, भोलानाथ, सेम और कलविष्ट आदि के जागर विशेष रुप से प्रसिद्ध हैं ।