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Prahlad Singh Mehra - प्रहलाद सिह मेहरा उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक गायक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 15, 2008, 12:57:39 PM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720





बदलते समय पर प्रलाद सिंह महरा का यह गाना,
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हाय जमाना कस जमाना
तवे जमाना तवे जमाना देखि म्यार दिल हेगियो खट्ट

हाय जमाना कस
तवे जमाना तवे जमाना देखि म्यार दिल हेगियो खट्ट

नौ सौ रूपये कर्ज गाडी..
नौ सौ रूपये कर्ज गाडी..
च्यल ब्योवायो, ब्वारी लायो एक
भदर पन  घुमिनी रेछी, आरसी कंघी
चानी रूछी
काम करण की पट्ट

हाय जमाना कस जमाना
तवे जमाना तवे जमाना देखि म्यार दिल हेगियो खट्ट

हाय जमाना कस
तवे जमाना तवे जमाना देखि म्यार दिल हेगियो खट्ट







एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ को महिलाओं के कष्ट से भरा जीवन के लिए यह गाना समर्पित है।

पहाड़ की चेली लै
पहाड़ की ब्वारी के
कभे नि खाया द्वि रूवाटा सुख ले।
पहाड़ की चेली लै
पहाड़ की ब्वारी के
कभे नि खाया द्वि रूवाटा सुख ले। ..

राति उठी पोश गाडना  ...२
पानी ले भरी लियोना ..२
बिना कलेवा रूवाट खाया
तवील जान घास कटना ..२
१२ बाजी  घर आयी
सासू की गाली पायी।

पहाड़ की चेली लै
पहाड़ की ब्वारी के
कभे नि खाया द्वि रूवाटा सुख ले।

भान माजी के चुल लिपि ले
फिर गोरू  मुचूणा
गोरु  क दगाड
रित घर नि उणा
सुख लाकडा तोड़ी लाई
सांझ पड़ी तो घर आयी

पहाड़ की चेली लै
पहाड़ की ब्वारी के
कभे नि खाया द्वि रूवाटा सुख ले।

अषौज में धान काटना,
चैत में गियु टिपणा ..२
मंगशीर में जाण ब्वारी तवील
घासों क मागन
बारो मास बित गयी
तेरी बुति (काम) पुर नि भैई

पहाड़ की चेली लै
पहाड़ की ब्वारी के
कभे नि खाया द्वि रूवाटा सुख ले।