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Janye Punyu: Raksha Bandhan - जन्ये पुन्यु (श्रावणी उपाकर्म): रक्षा बंधन

Started by Risky Pathak, August 05, 2008, 12:16:28 PM

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Risky Pathak

आजकल तो बाजार में रेडीमेड जनेऊ आ गये है|
पहले जनेऊ का धागा बाजार से लाकर इसे कट्टु के द्बारा काटा जाता है| और फ़िर हाथ से ही इसमे ग्रन्थ बनाया जाता है| यही ग्रन्थ यज्ञोपवीत का मूलभूत है, उसके बाद इसे पीले रंग से रंगाया जाता है और फ़िर जन्ये-पुन्यु के दिन यजमानो को दिया जाता है|   

Risky Pathak

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत सहजं पुरस्तात|
आयुष्यम अग्रयं प्रतिमुच शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः||
ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवितेनोपनह्यामी|
 

Quote from: Pankaj/पंकज सिंह महर on August 05, 2008, 12:42:24 PM
हिमांशु गुरु, 
       जनेऊ बदलते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिये, वह भी बताओ, मुझे तो इतना ही पता है कि
यग्योपवीतं परमं पवित्रं


Anubhav / अनुभव उपाध्याय


hem

यज्ञोपवीत -धारण हेतु विनयोग:-
ॐ यज्ञोपवीतं इति मन्त्रस्य  परमेष्ठी ऋषि:,लिंगोक्ता देवता:,त्रिष्टुप् छंद:,यज्ञोपवीत धारणे विनियोग: |  




Risky Pathak


श्रावणी उपाकर्म: श्रावण को ग्रहण की स्थिति में श्रावण शुक्ल पंचमी को उपाकर्म का पहला विकल्प है| संवत १९८९(Year 1932), २००८(Year 1951), २०२७(Year 1970) में भी यही परम्परा रही है "तत्र ग्रहण संक्रांति आदि सम्भावनायां  श्रावण शुक्ल पंचमी हस्तयुता मुख्यकालः "

Risky Pathak



अगर राखी की बात करे तो पहाडो में ये प्रचलन पहले नही था| द्वितीय(भाई दूज) को भाई-बहिन का त्यौहार होता है| इसके अलावा भिटौली तो हमारे यह भाई -बहिन के पवित्र प्रेम को प्रदर्शित करती है|

hem

पुरानी  जनेऊ त्याग का मन्त्र

एतावद्दिन्पर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया |
जीर्णत्वात् त्वत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखं ||    


यह मन्त्र पढ़ कर जनेऊ को जल में विसर्जित करना चाहिए |


Risky Pathak

जनेऊ धारण विधि:
यज्ञोपवीत मंत्र पढ़ कर नूतन जनेऊ  पहने और फ़िर पुराने जनेऊ को निकालकर जल में प्रवाहित कर दे अथवा तुलसी के पौधे  की जड़ो में डाल दे|
 


पंकज सिंह महर

Quote from: hem on August 05, 2008, 02:04:18 PM
पुरानी  जनेऊ त्याग का मन्त्र

एतावद्दिन्पर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया |
जीर्णत्वात् त्वत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखं ||    


यह मन्त्र पढ़ कर जनेऊ को जल में विसर्जित करना चाहिए |



बहुत-बहुत धन्यवाद हेम जी,
      आशा है आगे भी आप ऎसे ही हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। जनेऊ पहनते समय भी कोई मन्त्र पढ़ा जाता है? यदि हां तो कृपया उससे भी हमें परिचित करांये।