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Janye Punyu: Raksha Bandhan - जन्ये पुन्यु (श्रावणी उपाकर्म): रक्षा बंधन

Started by Risky Pathak, August 05, 2008, 12:16:28 PM

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Risky Pathak

Tiwari and Tripathi Log Shravani Shukal Paksha Ki Purnima Ke 15 Din baad Apna Yagyopaweet Change Karte Hai.


हिमांशु जी भोजन करते बक्त के मंत्र क्या होते है। और इस मंत्र को कीस नाम से जाना जाता है। हमै बताने का कष्ट करे।

एक और मंत्र के बारे मे मै आपसे जानना चाहता हु वह मंत्र है लघुसंका जाते वक्त का यानी मल त्याग करते समय का यानी जब हम जनेउ कान मे बाधते है। और नाम भी बताने का कष्ट करे।


Risky Pathak

शास्त्रों में विदित है कि भोजन करने से पहले परमात्मा को भोग लगाना चाहिए|
उसके लिए भोजन के पात्र से दस या पांच अंगुल दाहिनी और पृथ्वी पर जल का आसन देकर निम्नलिखित मंत्र पढ़कर तीन ग्रास निकाले|

ॐ भूपतये स्वाहा|
ॐ भुवनपतये स्वाहा|
ॐ भूतानां पतये स्वाहा|

इन मंत्रो द्वारा पृथ्वी, चौदह भुवनों तथा संपूर्ण प्राणियों के स्वामी परमात्मा कि तृप्ति कि जाती है, जिससे सबकी तृप्ति स्वतः हो जाती है|


पञ्च प्राणाहुति : मौन होकर छोटे छोटे  पांच ग्रास द्बारा निम्नलिखित मंत्रो से  प्राणाहुति दे|
ॐ प्राणाय स्वाहा|
ॐ अपानाय स्वाहा|
ॐ व्यानाय स्वाहा|
ॐ उदानाय स्वाहा|
ॐ समानाय स्वाहा|
Quote from: sunder singh negi "poet" on July 30, 2009, 11:20:03 AM
हिमांशु जी भोजन करते बक्त के मंत्र क्या होते है। और इस मंत्र को कीस नाम से जाना जाता है। हमै बताने का कष्ट करे।

Risky Pathak

Shmaa chahta hu negi jee ye mantra mujhe nahi ptaa hai Aur na hi kisi pustak me mujhe milaa
Quote from: sunder singh negi "poet" on July 30, 2009, 11:24:59 AM
एक और मंत्र के बारे मे मै आपसे जानना चाहता हु वह मंत्र है लघुसंका जाते वक्त का यानी मल त्याग करते समय का यानी जब हम जनेउ कान मे बाधते है। और नाम भी बताने का कष्ट करे।

खीमसिंह रावत

बचपन में हमने राखी का त्यौहार नही सुना / रक्षा बंधन ही सुना और तो और ब्राहमण लोग ही यजमानों के हाथो में रक्षा का धागा बाधते थे परिवार में जितने पुरुष जनेऊ वाले होते उतने जनेऊ देते थे उसके बदले में पडित जी को दक्षिणा और बैकर देते थे /

समय  के साथ साथ सब कुछ बदल रहा है
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बचपन पर मेरी कविता की दो पंक्तियां

बचपन के वो दिन
हम माटि के घर बनाया करते थे।
लडते थे झगडते थे
शोर मचाया करते थे।

Quote from: खीमसिंह रावत on August 01, 2009, 05:37:05 PM
बचपन में हमने राखी का त्यौहार नही सुना / रक्षा बंधन ही सुना और तो और ब्राहमण लोग ही यजमानों के हाथो में रक्षा का धागा बाधते थे परिवार में जितने पुरुष जनेऊ वाले होते उतने जनेऊ देते थे उसके बदले में पडित जी को दक्षिणा और बैकर देते थे /

समय  के साथ साथ सब कुछ बदल रहा है
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पंकज सिंह महर

Quote from: sunder singh negi "poet" on July 30, 2009, 06:40:47 PM
dosto kisi bhi members ko agar in mantron ke bare me pata ho to batane ka kasht kare. 5 August najdik aane wala hai.

please help me early.

सुन्दर जी, उत्तराखण्ड की संस्कृति से संबंधित मंत्रों को निम्न लिंक में दिया गया है, आप इसकी सहायता ले सकते हैं।

http://www.merapahad.com/forum/culture-of-uttarakhand/holy-mantras-from-uttarakhandi-culture/