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How To Stop Migration From Uttarakhand? - उत्तराखंड से विस्थापन कैसे रोके?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 10, 2007, 08:56:26 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Have a look on this photo also... It is obvious that mirgartion from pahad is still at its peak after having been we got the separate state.




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



I am giving here example of my village. During the last few years a lot of people have migrated from Pahad. Most of them  armed forces people who leave the pahad saying for better education of their children. Eventually, thier children do not get the education they expect from them. The main reason of this that they are posted in remote borders areas of the coutnry and are not able to give proper guidance to their children. Howver, it is a good pretence for their better halfs to move from pahad and get rid of tough working. 

Quote from: M S Mehta on January 22, 2008, 12:52:30 PM

Ye dekho... log pahad chode gaye.




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



In a recent case, 4-5 families from my village have migrated. Reason for better future of their children. It is obvious if the basic faciliites are not provided, people will move likewise.



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


During our seminar at delhi. we discussed a lot on this issue. After even 7 yrs of becoming a separate state, we could not put a little bit of control on migration.

This is really a matter of  worried.

Risky Pathak

पशुपालन से लायें आर्थिक संपन्नता


जागरण कार्यालय, रामनगर: आत्मा परियोजना के तहत आयोजित पशुपालक गोष्ठी में ग्रामीणों से पशुपालन कर आर्थिक संपन्नता लाने का आह्वान किया गया। इस मौके पर एस्केड योजना के तहत पशु चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। निकटवर्ती ग्राम टेड़ा में आयोजित गोष्ठी के मुख्य अतिथि भाजपा ग्रामीण मंडल महामंत्री अरविंद गुसाई ने ग्रामीणों से उत्तम नस्ल का पशुपालन कर आर्थिक संपन्नता लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तम नस्ल की गायों को पाल कर दुग्ध क्रांति लाई जा सकती है। आत्मा परियोजना के निदेशक ने परियोजना के संबंध में जानकारी दी। पशु चिकित्साधिकारी डा.केके जोशी व डा.डीसी जोशी ने पशुपालकों को पशुओं के रोगों व पशु प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी। पशु चिकित्सा शिविर में 59 पशुओं का उपचार किया गया। कार्यक्रम का संचालन पशु चिकित्साधिकारी रामनगर डा.पीएस ह्यांकी ने किया। कार्यक्रम में भाजपा जिला उपाध्यक्ष चमन लाल चौधरी, नगर मंडल महामंत्री नरेंद्र शर्मा, रेवाधर बलौदी, भूपाल सिंह, लाल सिंह, धर्मा देवी, कमलेश शर्मा, इंद्र सिंह हाल्सी, अनिल रावत, राकेश, शाहनवाज खान आदि मौजूद थे।

राजेश जोशी/rajesh.joshee

पलायन एक ऐसी समस्या जो पुरी तरह से नही रुक सकती कभी कभी यह लाभदायक भी रहता है, क्या अगर धोनी का परिवार उत्तराखंड इमं रहता तो हमें एक अच्छा क्रिकेटर मिल पाता? पर यह केवल कुछ हद तक ही होना चाहिए तथा क्षेत्र का विकास वहाँ रहने वाले लोगों के द्वारा ही सम्भव है| 
पहाडों से पलायन का एक मुख्य कारण पहाड़ के लोगों महानगरों और मैदानी क्षेत्र में अधिक सुविधा होने का लालच भी है| चाहे वह महानगरों और प्रदेश से बाहर अन्य स्थानों पर अपने प्रदेश से भी बदतर स्थति में रह रहे हों|  यह सही है की पहाडों का जीवन शारीरिक रूप से कठिन है पर फ़िर भी अगर लोगों को कुछ सुविधाएं उपलब्ध हों तो वह महानगरों के प्रदुषण तथा अपराध और अन्य बुराइयों से अपने आपको बचा सकता है|
मुख्य रूप से उच्च शिक्षा का असमान वितरण, सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव तथा रोज़गार की अनुपलब्धता पहाड़ से पलायन का मुख्य कारण है|   इसके साथ ही पहाड़ के छोटे छूते कस्बों में युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए|  जिसके ITIs में पुराने पारंपरिक पाठ्यक्रमों के अलावा नए Job oriented professional कोर्स भी शुरू किए जाने चाहिए|
पर्यटन एक बहुत prospective field है हमारे प्रदेश के लिए पर इसको इस तरह से विकसित करना होगा की स्थानीय लोगों को सीधा इसका लाभ मिले|  इसके लिए स्थानीय निकायों द्वारा बैंक, व्यावसायिक संस्थानों और स्थानीय व्यवसायियों द्वारा नौजवानों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए|  बड़े उद्योग पहाड़ के लिए सम्भव नही हैं इसलिए नौकरी की बजे युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना होगा|  जिसके लिए जनता, सरकार और अन्य संगठनों को एक साथ प्रदेश के विकास के लिए सोचना होगा|

पंकज सिंह महर

खाली होने के कगार पर अगस्त्यमुनि के कई गांव

अगस्तमुनि (रुद्रप्रयाग)। प्र्रखंड अगस्त्यमुनि के कई गांवों में पलायन बदस्तूर जारी है। इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं के न होने से लोग सुख सुविधाओं की चाह लिए शहरों की ओर रूख कर रहे हैं, जिससे गांव के गांव खाली होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

क्षेत्र की ग्राम सभा चौड़, भटवाडी, तलसारी, टेमिरिया, थापली, रूमसी, बमोली, कणधार समेत कई गांवों में पलायन की स्थिति बेकाबू होती जा रहीं है, इसके पीछे मुख्य कारण इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव माना जा रहा है। नौ नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए उत्तराखंड राज्य का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्र का विकास कर शहरी क्षेत्रों की ओर हो रहे पलायन को रोकना था, लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन की स्थित भयावह होती जा रही है।

प्रखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत अधिकांश गांव आज पलायन के चलते खाली होने के कगार पर है। इन क्षेत्रों में मोटर मार्ग सुविधाओं की लचर स्थिति, उच्च स्तरीय विद्यालयों का अभाव, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सहित कई आवश्यक सुविधाओं का टोटा होने से पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे बदतर स्थिति बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं की बनी हुई है। युवा हाथों को काम न मिलने से वह औद्योगिक शहरों की ओर रूख करने को मजबूर हो रहे हैं। ग्राम सभा ऐंटा कमसाल के 92 वर्षीय पूर्व सैनिक पूरण सिंह राणा का कहना है कि क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव के चलते लोग पलायन को मजबूर है। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे है, जिससे यह स्थिति पैदा हो रही है।