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"मौजूदा दौर मैं हिमालय बचाने और हिमालय बसाने की चुनौती" विषय पर व्याख्यानमाला

Started by sanjupahari, August 23, 2008, 04:17:44 AM

Charu Tiwari

क्रिएटिव उत्‍तराखंड म्‍यर पहाड् का आयोजन द्वाराहाट में संपन्‍न हुआ दिल्‍ली से सभी साथी इसमें शामिल हुये, दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन िदनांक 30 अगस्‍त 2008 को प्रखर समाजवादी स्‍वृ विपिन त्रिपाठी और टिहरी रियासत के खिलाफ संघर्ष करते हुये अपनी शहादत देने वाले श्रीदेव सुमन पर पोसटर जारी किये गये, दूसरे दिन कुमाऊ इंजीनियिरंग कालेज सभागार में मौजूदा दौर में हिमालय बचाने और बसाने की चुनौती को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया गया, इसमें उत्‍तराखंड के अपने क्षेत्र की हिस्‍तयों ने श्राागीदारी की, इस कार्यक्रम में पदम श्री से सम्‍मानित सुप्रिसद्व पुरातत्‍विवद डा.यशोधर मठपाल, डा. शेख्रर पाठक, आंदोलनकार और राजनीतिक विचारक डा. शमशेर बिष्‍ट, कुमाऊं विश्‍वविद्वालय नैनीताल के इतिहास विभाग के प्रमुख और पर्यावरणिवद डा. अजय रावत, जनकिव गिर्दा, प्रचार आंदोलनकारी और पत्रकार पीसी तिवारी, साहित्‍यकार डा. लक्ष्‍मण बिष्‍ट बटरोही, नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन साह, रंगकर्मी श्रीष डोभाल, काशी िसंह ऐरी, डा. नारायण िसंह जन्‍तवाल, डा. प्रकाश पाण्‍डे, डा. सुरेश डालाकोटी के अलावा बडी संख्‍या में बुद्विजीवियों ने अपनी भागीदारी की, हालांकि पुचायत चुनाव के चलते आशा के अनुरूप लोगों की भागीदारी नहीं रही लेकिन म्‍यर पहाड की एक नई पहल ने लोगों को इस बात के लिए सहमत कराया कि मोजूदा दौर में पहाड के मुददे और उनके समाधान के लिए नये सिरे से सोचने की जरूरत है, म्‍यर पहाड. के हेम पंत, दयाल पांडे, पवन कांडपाल, मुकुल पांडे, कैलाश पांडे, चारू ितवारी के अलावा आंदोलनकारी प्रताप साही और महेश मठपाल ने दिल्‍ली से इस कार्यक्रम में शिरकत की

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: Charu Tiwari on September 01, 2008, 09:59:43 PM
क्रिएटिव उत्‍तराखंड म्‍यर पहाड् का आयोजन द्वाराहाट में संपन्‍न हुआ दिल्‍ली से सभी साथी इसमें शामिल हुये, दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन िदनांक 30 अगस्‍त 2008 को प्रखर समाजवादी स्‍वृ विपिन त्रिपाठी और टिहरी रियासत के खिलाफ संघर्ष करते हुये अपनी शहादत देने वाले श्रीदेव सुमन पर पोसटर जारी किये गये, दूसरे दिन कुमाऊ इंजीनियिरंग कालेज सभागार में मौजूदा दौर में हिमालय बचाने और बसाने की चुनौती को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया गया, इसमें उत्‍तराखंड के अपने क्षेत्र की हिस्‍तयों ने श्राागीदारी की,

           इस कार्यक्रम में पदम श्री से सम्‍मानित सुप्रिसद्व पुरातत्‍विवद डा.यशोधर मठपाल,
           डा. शेख्रर पाठक, आंदोलनकार और राजनीतिक विचारक डा. शमशेर बिष्‍ट, कुमाऊं विश्‍वविद्वालय नैनीताल के इतिहास विभाग के प्रमुख और पर्यावरणिवद डा. अजय रावत, जनकिव गिर्दा, प्रचार आंदोलनकारी और पत्रकार पीसी तिवारी, साहित्‍यकार डा. लक्ष्‍मण बिष्‍ट बटरोही, नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन साह, रंगकर्मी श्रीष डोभाल, काशी िसंह ऐरी, डा. नारायण िसंह जन्‍तवाल, डा. प्रकाश पाण्‍डे, डा. सुरेश डालाकोटी के अलावा बडी संख्‍या में बुद्विजीवियों ने अपनी भागीदारी की, हालांकि पुचायत चुनाव के चलते आशा के अनुरूप लोगों की भागीदारी नहीं रही लेकिन म्‍यर पहाड की एक नई पहल ने लोगों को इस बात के लिए सहमत कराया कि मोजूदा दौर में पहाड के मुददे और उनके समाधान के लिए नये सिरे से सोचने की जरूरत है, म्‍यर पहाड. के हेम पंत, दयाल पांडे, पवन कांडपाल, मुकुल पांडे, कैलाश पांडे, चारू ितवारी के अलावा आंदोलनकारी प्रताप साही और महेश मठपाल ने दिल्‍ली से इस कार्यक्रम में शिरकत की

Charu Da,

Heartiest Congratulation to the entire team for sucessfully conducting Seminar..

ETV has aslo broadcasted this event.

पंकज सिंह महर

Quote from: H.Pant on August 29, 2008, 05:32:17 PM
यह कार्यक्रम बहुत सफल होने की आशा है...
दिल्ली से लगभग 15 लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिये आज शाम द्वाराहाट के लिये निकल रहे हैं. आप लोगों को इस कार्यक्रम से सम्बन्धित समाचार एवम फोटो मैं इसी टापिक पर उपलब्ध कराउंगा.

कख चा भैजी?
धेखी-धेखी......आख्य़ू पटा गैणी।

हेम पन्त

नमस्कार,
३० अगस्त का कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा.विपिन त्रिपाठी जी को श्रद्धांजली देने के बाद वक्ताओं ने उत्तराखण्ड की मौजूदा स्थिति पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखे. सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हुई कि गैरसैंण राजधानी के लिये सभी वर्ग के लोगों को पुन: एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है. इसके साथ ही श्री विपिन त्रिपाठी जी व अमर शहीद श्रीदेव सुमन के पोस्टरों का विमोचन किया गया.

दूसरे दिन ३१ अगस्त को व्याख्यानमाला में श्री अजय रावत का पहाङ के दुर्लभ वनस्पतियों व जीव-जन्तुओं पर प्रभावशाली स्लाइड शो महत्वपूर्ण आकर्षण रहा.

जल्द ही आपको इसी टापिक पर कार्यक्रम से सम्बन्धित फोटो देखने को मिलेंगी.




हेम पन्त



हेम पन्त

प्रख्यात संस्क्रतिकर्मी गिरीश तिवारी "गिर्दा" अपने विचार रखते हुए. गिर्दा ने त्रिपाठी जी के साथ बिताये गये दिनों के संस्मरण सुनाये. वर्तमान समय में पहाङ में जमीनों की अन्धाधुन्ध बिक्री व बढते "रिजोर्ट कल्चर" से गिर्दा काफी व्यथित नजर आये. उन्होने अपनी "जागो-जागो हे मेरा लाल" कविता का पाठ भी किया.


हेम पन्त

अल्मोङा से पधारे प्रख्यात विचारक शमशेर बिष्ट जी अपने विचार रखते हुए. बिष्ट जी ने इस समय पहाङों में पैसे के जोर पर चल रहे पंचायती चुनावों पर अपने विचार रखे. उन्होने कहा कि विपिन त्रिपाठी जी हमें ऐसे दौर में छोङ कर चले गये जब उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.