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Folk Games Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की लोक क्रीड़ायें

Started by पंकज सिंह महर, November 26, 2008, 02:51:49 PM

पंकज सिंह महर

साथियो,
     इस टोपिक के अन्तर्गत हम उत्तराखण्ड में प्रचलित विभिन्न स्थानीय/लोक खेलों से फोरम को परिचित करायेंगे। आप सभी को याद होगा बचपन में हम लोग कुछ ऎसे खेल खेलते थे, जिनका फैलाव मैदानी क्षेत्रों में भी देहातों तक ही सीमित है, तो फिर चलिये खेलें, आइस-पाइस, ठिणी-दाबुली................!

पंकज सिंह महर

सबसे पहले मुझे याद आ रहा है लुकचुप्पी।

लुकचुप्पी (इस खेल को हिन्दी में छुपन्छुपाई और अंग्रेजी में HIDE & SEEK कहा जाता है)  में कई लोग शामिल हो सकते हैं और इसमें सभी खिलाड़ियों को छिपना होता है और एक खिलाड़ी उन सभी को खोजता है। उसे "चोर" कहा जाता था, यदि वह सभी को खोज नहीं पाता है तो फिर से उसे चोर बनना पड़ता है। दूसरे खिलाड़ी को देख लेने पर वह "आईस-पाईस" कहता है, जिस खिलाड़ी को चोर द्वारा सबसे पहले देख लिया जाये, उसे अगली बार चोर बनकर सबको ढूंढना पड़ता है। सबसे पहले चोर बनने के लिये एक गीत बोला जाता है, उस गीत के एक शब्द को एक खिलाड़ी पर गिना जाता है और जिस खिलाड़ी पर गीत समाप्त होता है, उसे ही सबसे पहले चोर बनना होता था।

हम इस गीत का प्रयोग करते थे- "अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बौ, अस्सी-नब्बे पूरे सौ, सौ में लागा तागा, चोर निकल कर भागा" जिस पर भागा शब्द आया, वही चोर......!

Rajen

सिमनटाई

गिल्ली डंडा

गोली (कंचे)

घुच्ची

पंकज सिंह महर

और भी कई खेल है, जिनके बारे में धीरे-धीरे समय मिलने पर जानकारी देने का प्रयास होगा और शायद हेम पंत जी इन खेलों की पूरी जानकारी देंगे।
अड्डू
दाणि
पकड़चुप्पी

पंकज सिंह महर

गुट्टी/पांछि/दाणि



यह मुख्यतः महिलाओं का खेल है, इस खेल को पांच छोटे-छोटे पत्थरों से खेला जाता है, इस खेल को पत्थर उछाल-उछाल कर खेला जाता है। जिसमें से चार पत्थर हाथ में रहते हैं और एक नीचे, जो ऎसा नहीं कर पाता या जिससे पत्थर गिर जाते हैं, वह हार जाती है। कोई महिला सदस्य ही इसकी और डिटेल दे पायेगी।

पंकज सिंह महर

अड्डू

अड्डू भी किशोरियों का ही खेल है, पत्थर के एक गोलाकार टुकड़े को अड्डू कहा जाता है और मैदान में आठ वर्गाकार खाने बनाये जाते हैं। खिलाड़ी को इस अड्डू को एक पांव पर उछल-उछल कर सभी खानों में पार कराना होता है। जो ऎसा नहीं कर पाता वह हारता है और जो सभी खानों पर अड्डू को एक पैर पर उछलकर पार करा लेता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।

पंकज सिंह महर

बाघ-बकरी

यह उत्तराखण्ड का काफी प्रचलित खेल है, हालांकि इन खेलों से अब नई पीढी परिचित नहीं है। इसमें मैदान या किसी पत्थर पर एक त्रिभुजाकार आकृति उकेरी जाती है और एक बाघ और तीन बकरियों से यह खेल खेला जाता है। बाघ त्रिभुज के ऊपर यानि जंगल में रहता है और बकरियां त्रिभुज के बाद एक गोठ में, इसमें बाघ और बकरी एक-एक घर बढ़ती हैं और यदि बाघ ने तीनों बकरियां खा लीं तो उसे विजेता मान लिया जाता है { मुख्यतः इसमें तीन घर एक लाइन में होते हैं, माना सबसे ऊपर वाले घर में बाघ है और बीच में बकरी और सामने एक घर खाली है तो बाघ को बकरी के ऊपर से कूदाकर खाली घर में रखा जाता है और माना जाता है कि बाघ ने बकरी खा ली}
अगर तीनों बकरियों ने मिलकर बाघ को बीच में फंसा लिया और बाघ के पास आगे बढ़ने के लिये कोई घर खाली नहीं है तो बकरी वाले खिलाड़ी को विजेता माना जाता है।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सिमनटाई

मुझे याद है बचपन के वो दिन जब मे ये खेल खेला करते थे!

इस खेल में सात पत्थर एक के ऊपर एक करके रखे जाते थे और इसको एक बाल के गिरना होता था और जो टीम इन सात पत्थरओ को फिर से एक के ऊपर एक रखती है वहिः विजयी टीम होती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


पाछ

पाच पत्थरओ का यह खेल होता है जिसे अंगुलियों के बीच से पत्थरओ उछाल कर निकलना होता है ! इसे विशेष कर महिलाए ज्यादे खेलती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



आंथी का खेल

यह शीशे के गोले जिन्हें आंठी भी कहते है उनसे खेला जाता है ! जो की घुची के रूप में खेलते है !