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Nag Devta Temples In Uttarakhand - उत्तराखंड में नाग देवता के मंदिर

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 02, 2009, 01:23:08 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

    photo                                              Nagnath-1          Side view of Nag temple at Nagnath


(PHoto by Dinesh Pundhir)
       

Devbhoomi,Uttarakhand


देव मिलन के साक्षी बने सैकड़ों लोग
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वर्षो से चली आ रही परम्परा के अनुसार तीन साल बाद जब दल्ला गांव का कुल देवता नागराजा बाहर निकला तो क्षेत्र में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर अन्य गांवों के देवी-देवता भी यहां पहुंचे। एक सप्ताह तक चलने वाले इस धार्मिक मेले में देवी-देवताओं की डोली व निशान को नचाया जाएगा। देव-मिलन की इस अनूठी परम्परा के सैकड़ों लोग साक्षी बने।

टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लाक के दल्ला गांव में नागराजा ग्रामीणों का ईष्ट देव है जिसे क्षेत्र के देवी-देवताओं में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। नागराजा का निशान हर तीसरे साल बाहर निकाला जाता है। रविवार को सुबह विधिवत पूजा-अर्चना कर नागराजा के निशान को बाहर निकाला गया। इस अवसर पर क्षेत्र के सात गांवों के देवी-देवताओं व उनके पश्वा भी दल्ला गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया गया। बाद में ग्रामीणों ने देवताओं को नचाया। इस अवसर पर पांडव नृत्य का भी आयोजन किया गया।

इस धार्मिक आयोजन पर रोजगार के लिए महानगरों में रहने वाले लोग व धियाणियां (शादीशुदा बेटी) भी विशेष रूप से गांव आती हैं। नागराजा के पुजारी सुंदरलाल रतूड़ी का कहना है कि वर्षो पूर्व सेम-मुखेम के ग्रामीण अपने निशान को बदरीनाथ ले गए थे और वापसी के दौरान उन्होंने दल्ला गांव में विश्राम किया। बाद में निशान जमीन से उठा ही नहीं और वहीं पर जम गया। तब से आज तक यह दल्ला गांव में ही है और असली नागराजा का निशान यही है। इसकी खासियत यह है कि पुजारी के अलावा इस निशान को कोई उठा नहीं सकता है। गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य रजनी नेगी, विनोद रतूड़ी, चन्द्रवीर का कहना है कि मंदिर के सौंदर्यीकरण व मेले के भव्य आयोजन के लिए पर्यटन व सरकार को पहल करनी चाहिए।

एक गागर पानी पी जाता है पश्वा

नई टिहरी : हर तीसरे साल जब नागराजा देवता के निशान को बाहर निकाला जाता है तो देवता के पश्वा को अवतरित किया जाता है। इस दौरान पश्वा एक गागर पानी व कई सेर कच्चा दूध पी जाता है। इस दृश्य को देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

परियों से छीना था धूप-दीपक पात्र

नई टिहरी : नागराजा देवता को धूप-दीप दिखाने का जो पात्र है वह भी अनूठा है। इस पात्र की तरह बना अन्य कोई पात्र क्षेत्र में कहीं नहीं है और न ही अब तक इस तरह की बनावट गढ़वाल में कही देखी गई। किवदंति है कि यह पात्र आक्षरियों (परियों) से छीना गया था। तब से अब तक इसी पात्र में धूप जलाकर नागराजा को अवतरित किया जाता है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6717013.html

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कालिय  नाग मंदिर
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में रवाई घटी में पुरोला तहसील क्षेत्र पट्टी सरबड़ीयाड़ में स्थित श्री कालिय नाग का मंदिर है!

इस मंदिर के अहाते में एक धूनी प्रज्वलित है ! इस धूनी का बुझना अशुभ माना जाता है!

Devbhoomi,Uttarakhand

नागनाथ मंदिर: शत्रुओं से मिलती है निजात
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ऐतिहासिक राजबुंगा किले के पास स्थित नागनाथ मंदिर में संतान सुख के साथ ही शत्रुओं के संकट से निजात मिलती है। यहां धूनी के साथ ही कालभैरव का मंदिर लोगों की आस्था व श्रद्घा का केंद्र सदियों से बना है। यहां हर दिन पूजा के समय नौमत लगती है।





कहा जाता है कि चंद राजाओं ने जब चम्पावत में अपनी राजधानी स्थापित की तो इसके शीर्ष भाग में नगर की रक्षा के लिए नाथ संप्रदाय के एक महंत ने अपना डेरा जमाया। जिसे राजा ने अपना गुरु मानते हुए उनसे आशीर्वाद लिया और यह स्थान नागनाथ के रूप में जाना जाने लगा।


इस मंदिर में नागनाथ की धूनी के साथ ही कालभैरव का भी मंदिर है। कहते हैं यहां पूजा अर्चना करने से संतान सुख की प्राप्ति तो होती ही है, वहीं शत्रुओं का नाश होता है। सुबह व सायं आरती के समय यहां आज भी नौमत लगती है। तूरी जाति के लोग नगाडे़ के साथ ही तुरही बजाते हैं। वैसे तो यहां हर समय भक्तों का तांता लगा रहता है,


लेकिन बसंत और शारदीय नवरात्र के मौके पर तो यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। जिले ही नहीं बल्कि कुमाऊं के अन्य हिस्सों से भी लोग यहां आकर अपनी मुरादें पूरी करते हैं। इस मंदिर के पुजारी रावल लोग हैं, जो नियमित रूप से पूजा अर्चना करवाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के तीसरे रोज यहां हर वर्ष फूलडोल मेले का भी आयोजन होता है।
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      नगर की रक्षा करते हैं नागनाथ
कहते हैं नागनाथ चंद राजाओं के समय से ही इस नगर के रक्षक के रूप में लोगों की सुरक्षा भी करते हैं। अकेले, असहाय के अलावा पीडि़त जन जब कष्ट आने पर उनकी गुहार लगाते हैं तो अप्रत्यक्ष रूप से उस व्यक्ति को संकट से निजात मिलती है।
   

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जय श्री डांडानागराजा*

श्री डांडानागराजा का मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी जिले मे बनेलस्युहं पट्टी मे स्थित है !यह मंदिर पौड़ी से लगभग 33 किलोमीटर कि दूरी पर है! डांडानागराजा मंदिर मे जाने के लिय आपको पौड़ी से बस या टैक्सी मिल जाएगी. पौड़ी गढ़वाल मे भगवान डांडानागराजा का मंदिर पूरे उत्तराखंड मे एक सिध्पीठ एवम आस्था का केंद्र है! हर बर्ष अप्रैल १३-अप्रैल १४ को डांडानागराजा मंदिर मे मेले का आयोजन किया जाता है! डांडानागराजा मेले मे हजारो की संख्या मे भक्त जन नागराजा जी के दर्शन को आते है! (http://jaidandanagraja-pankajaswal.blogspot.com/)



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प्राचीन समय में गढ़वाल में रहने वाले नागाओं के वंशज आज भी सर्प का पूजा करते हैं। इस क्षेत्र में अनेकों सर्प मन्दिर स्थापित हैं। उदाहरणार्थ कुछ सर्प मन्दिर निम्न हैं।

पान्डुकेश्वर का शेष नाग मन्दिर

रतगाँव का भेकल नाग मन्दिर

तालोर का सांगल नाग मन्दिर

भरगाँव का बम्पा नाग मन्दिर

निति घाटी में जेलम का लोहन देव नाग मन्दिर

देहरादून घाटी नाग सिद्ध का बामन नाग मन्दिर


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Cham Chama Nag (Bamela Kharg)

3 km ahead from Bhaneyeee, there is a Buygya where Cham Chama Devta Temple is there. This temple is at 12500 ft height and spread in 3 hect area.  Lord Vishnu is worshiped here.

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Nag Devta Temple


Nag Devta Temple is situated at Cart Mackenjie Road and around 6 KMs from Mussoorie.