• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Song Expressing Grief Of Women - पहाड़ के महिलाओ की पीडा व्यक्त करते ये गाने

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 04, 2009, 12:05:49 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

ये गाना अभी अभी आया है इसको स्वर दिय है उभरते गायक गजेन्द्र राणा और मीना राणा ने , दुरु पर्देसू छौं तुमु अपणु ख्याल रख्यान

बरखा हवेली बत्वानी होलू रै, छौया मन्दारों कु पाणी होलू रै
जाली सुवा घासु का डांडीयों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!

            धरयों खांदा मा चाकू कितलू, चुल्ला मा भावरानी च आग !
            छन स्वामी परदेश मा देवतों, रख्या राजी तुमु मेरु सुहाग !!

मेरी प्यारी उदास न होई ,मैं छुटी का अरज देणु छौं !
लगदा मंगसीर का मैना,मेरी प्यारी मैं घोर ऑनु छौं !!

            लगी सौणकी  कुरेडी  रोला गदरियों मा ,हौंदु सिंस्याट !
            घुट घुट लगदी च बडुली, दिल मा हौंदु धक् धक्द्याट    !!!

बौन पंछी , गाड गद्नियों ,मेरी प्यारी खुदेनं न देना !!
होली घासु क जांई बाणु मा तुमु सौं छन वीं रौन न देना !!!

            सेवा सौंली, राजी खुसी अपणी तुमु फ़ोन मा दी दयान!
            बाटु देखुलू मंगसीर क मैना ,स्वामी घोर जरूर अयान !!

प्यारी कन क्वे कटेला यी दीन,मेरु त्वेसी बिछाडाट करयों च !
बाकि पर्देसू नौकरी क बानाघर गाँव गुठयार छोडीयूँ च !!!!

             पर्देसू मा अफु रयान , मेरा बाना नि मन झुराण!
            मैं जन्नी छुओं ,अपणाघोर  मा स्वामी तुमु अपणु ख्याल रख्यान!!!

सुवा तू अपणु ख्याल रख्यान , बरखा होली बत्वानी होलू रै चौया मंद्रों कु पाणी होलू रै!
जाली सुवा घासु क डंडियों मा, मन विन्कू खुदेणु होलू रै !!!!

http://www.youtube.com/watch?v=http://www.youtube.com/watch?v=wsrkpSQXZtA&feature=channel_page

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान  
=========================

[youtube]Qd18blxLEQk

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान  
जिदेरी घसेरी  बोल्युं  मां ,
आण नि  देंदी  जब सरकारी  बाण (जंगल)  ,
गोर  भेन्सियुं  मिल  क्या  खिलान ,

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान

तेरी भों  में  पतरोल  काखी  भी  जौन ,
तू ड्यूटी संभल जंगल  बचोऊ ,
भेलुन्द  पौदु  मी , दालुन्द  मोरू ,
चाहे  जंगल  चोरु , मिल  घास  लिजान ,
गोर  भेन्सियुं  मिल  क्या  खिलान ,

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान

गुन्द्क्याली  खुट्टी  तेरी घास  रैदाली ,
पट्ट  मोरी  जैली  भेलुन्द  पौदाली ,
तेरी दाठी  चादरिला, गोर  बछुरोला ,
सास  ससुर  ला  खोल्युन  रे  जाण ,
जिदेरी घसेरी  बोल्युं  मां ,

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान

तां भी सरकारी  तेरु  मन  भी  सरकारी ,
तिल  क्या  समझन  हम  लोगों  की  खरी ,
जब घर  जोला , लाखुद  घास  लोला ,
और गोर  पीजोला  तब  चुल्लू  जगान ,
नौनो  ला  निथर  भूखी  साईं  जाण ,

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान

गाँव  की  बेटी  ब्वारी  कु  बाण  ही  च  सारु ,
जनादु  छो  मी  भी  पर  क्या  जी  कारू ,
दया  जो  आली  सब  ला  सुन्याली  , मेरी  नौकरी  जाली  ,
मेरु  छूती  होए  जाण , बाल  बचूं  मिल  क्या  खिलान ,

ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान
ना जा ना जा तौ  भेलू  पखान ..


Singer : Narendra Singh Negi JI [/b] [/glow] [/size]


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


गोपाल बाबु गोस्वामी जी यह गाना पहाड़ के महिलाओ में पीडा की व्यक्त करता हुवा !

दिन उना जाना रैया
जुग जुग बीती गैया
म्यर पहाड़ माँ बहिना
उदेखिया (उदासी)  रैया हो...

  हम के ना भय
 अक्षर ज्ञान, पहाड़ नारी रैगिये अज्ञान
 स्वामी की चिट्टी आछ घरो मा
 कही के पडूना लागी शर्म हो...

दिन उना जाना रैया
जुग जुग बीती गैया
म्यर पहाड़ माँ बहिना
उदेखिया (उदासी)  रैया हो...

 हम के ना भय
अक्षर ज्ञान, पहाड़ नारी रैगिये अज्ञान
 हम सांस की धाग, मे आश की माव ग्छियोना रैया

दिन उना जाना रैया
जुग जुग बीती गैया
म्यर पहाड़ माँ बहिना
उदेखिया (उदासी)  रैया हो...

यो गोबरिया कीड जैसा गोबर में रैया..
दिन उना जाना रैया हो..

(पहाड़ के नारी के अज्ञान होने पर और पर किस किस प्रकार के दुःख आते है ओह इस गाने में बताया गया है )

इस लाइन को देखिये

"  स्वामी की चिट्टी आछ घरो मा
 कही के पडूना लागी शर्म हो... "

पहले समय मे जब महिला अज्ञान थी जब उसके पति की चिट्टी घर मे आती थे तो उसे पड़ना नहीं आता था, उस चिट्टी को उसे किसी और के द्वारा पढाने में इस प्रकार की शर्म आती थी ! जो की उसके लिए एक व्यथा थी )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


घुट घुट बाडुली लगीं च
मैत्यों कू रैबार आयूं च
भादों का मैना दुभ्री पाती कू त्यौहार आयूं च.!
कोदा झंगोरा की सार भी भरी गी होली
काखड़ी मूंगरी भी लगी गी होली
कब जौलू कब खौलू
मन माँ उलार आयूं च.!

बारे मासी काम द्यानियों नि छूटेंदु
बरसू का नक् कभी मैत नि जयेन्दु
मैना दू एक मैत रौलू
मन माँ विचार आयूं च .!

बरखा की रडी जड़ी माँ
घास पात का बण
घनघोर कुरेडी माँ
रोई रोई रण
बुझ्याँ बुब्दाल्यान मन माँ
आज यु प्यार आयूं च
घुट घुट बाडुली लगीं च
मैत्यों कू रैबार आयूं च ..!!

Source : http://harish-bisht.blogspot.com/2009/06/blog-post_29.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


बारा मैनो की बारामास गायी
घगरी फटीक घुंडियों माँ आयी २

चैत का मैना दिशा भेट होली
तेरी ब्येटुली ब्वे डब डब रोली
बैसाख मैना कोथीग कुरालु
बिना स्वामी जी का प्राण झुरोलू
बारा मैनो की.....

जेठ का मैना कोदू बूती जालू
मेरी पुन्गरियों ब्वे कु बूती आलु
आषाढ़ मैना कुयडी लोकैली
बिना स्वामी जी का कनु के कटीली
बारा मैनो की.....

सोंड का मैना कूडो चुयालो
जो पाणी भैर, भीतिर भी आलो
भादो का मैं संगरांद आली
मेरु कु च ब्वे जु मैत बुलाली
बारा मैनो की.....

अशूज मैना शरद भी आला
पितर हमारा टुक टुक जाला
कार्तिक मैना बग्वाल आली
स्वामी जौंका घौर पकोडा पकाली
बारा मैनो की.....

मंगसीर बैख ढाकर जाला
मर्च बिकैक गुड ल्वोन ल्योला
पूष का मैना झाडु च भारी
बिना स्वामी कि कु होली निर्भागी नारी
बारा मैनो की.....

माघ मॉस बीच मकरेण आली
कन होली भग्यान जु हरद्वार जाली
फागुण मैना होरी खिलेली
रसीला गीतों सुणी जिकुडा झुरोली
बारा मैनो की.....

बारा मैनो की बारामास गायी
घगरी फटीक घुंडियों माँ आयी २

http://harish-bisht.blogspot.com/2009/06/blog-post_4914.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


छट्ट छुटिगि प्यारु पहाड़"

छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदौं,
ऊ प्यारु पहाड़-२
जख छन बाँज बुराँश,
हिंसर किन्गोड़ का झाड़-२

कूड़ी छुटि पुंगड़ि छुटि,
छुटिगि सब्बि धाणी,
कखन पेण हे लाठ्याळौं,
छोया ढ़ुँग्यौं कू पाणी.
छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदों.....

मन घुटि घुटि मरिगि,
खुदेणु पापी पराणी,
ब्वै बोन्नि छ सुण हे बेटा,
कब छैं घौर ल्हिजाणी.
छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदों.....

भिन्डि दिनु बिटि पाड़ नि देखि,
तरस्युं पापी पराणी,
कौथगेर मैनु लग्युं छ,
टक्क वखि छ जाणी.
छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदौं.....

बुराँश होला बाटु हेन्ना,
हिंवाळि काँठी देखणा,
उत्तराखण्ड की स्वाणि सूरत,
देखि होला हैंसणा.
छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदों.....

दुःख दिदौं यू सब्यौं कू छ,
अपणा मन मा सोचा,
मन मा नि औन्दु ऊमाळ,
भौंकुछ न सोचा.
छट्ट छुटिगि सुणा हे दिदों.....

जनु भी सोचा सुणा हे दिदौं,
छट्ट छुटिगि, ऊ प्यारु पहाड़,
जख छन बाँज बुराँश,
हिंसर किन्गोड़ का झाड़


http://harish-bisht.blogspot.com/2009/06/blog-post_4570.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रचनाकार: नरेन्द्र सिंह नेगी                 


तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि

तेरु बाटू तेरा अगाड़ि, मेरु बाटू मेरा अगाड़ि

कख ल्हिजालू कुज्याणी दगड़्या, कख ल्हिजालू कुज्याणी दगड़्या

दगड़ू नि रैणू सदानि... दगड़्या... दगड़ू नि रैणू सदानि

तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि




सुख मां दुख मां मिली जुली, दिन जू गैनी वी अपड़ा

सुख मां दुख मां मिली जुली, दिन जू गैनी वी अपड़ा

मेरी उंठड़्यूं मां हैंसी तेरी, तेरु दरद मेरा जिकुड़ा...

तेरु दरद मेरा जिकुड़ा...

अपणू परायू नि जाणि दगड़्या, अपणू परायू नि जाणि दगड़्या

दगड़ू नि रैणू सदानि... दगड़्या....दगड़ू नि रैणू सदानि...

तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि




कांडा लग्यां ईं उमर उंद, नरकै कि गाई बिराणी सी

कांडा लग्यां ईं उमर उंद, नरकै कि गाई बिराणी सी

बगत नि रुकि हथ जोड़ी जोड़ी, बगदू राई पाणी सी...

बगदू राई पाणी सी...

पौणू सि आई या ज्वानि दगड़्या, पौणू सि आई या ज्वानि दगड़्या,

दगड़ू नि रैणू सदानि... दगड़्या....दगड़ू नि रैणू सदानि...

तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि


रईं सईं बि कटि जाऊ जू, यनि समळौण देजा आज

रईं सईं बि कटि जाऊ जू, यनि समळौण देजा आज

दगड़्या भोळ कख तू कख मी, आखिरी बेर भ्येंटे जा आज

आखिरी बेर भ्येंटे जा आज...

बगण दे आंख्यूं कू पाणि... दगड़्या...बगण दे आंख्यूं कू पाणि... दगड़्या

दगड़ू नि रैणू सदानि... दगड़्या....दगड़ू नि रैणू सदानि...

तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि




बोझ हिया कू भुयां बिसैजा, भूलीं बिसरीं छ्वीं बत लैजा

बोझ हिया कू भुयां बिसैजा, भूलीं बिसरीं छ्वीं बत लैजा

औ दगड़्या सुख दुख बांटि ल्योला, जिकुड़ी अदला बदली कैजा

जिकुड़ी अदला बदली कैजा...

दुख से हार नि मानि दगड़्या... दुख से हार नि मानि दगड़्या...

दगड़ू नि रैणू सदानि... दगड़्या....दगड़ू नि रैणू सदानि...

तेरु भाग त्वे दगड़ि, मेरु भाग मै दगड़ि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Composed : महिमानंद ममगाईं                 

This song is also dedicated to the Women of Uttarakhand. In this song, a women's condition has been described who misses her parents house.

=========================================

ऊँचि डांड्यू तुम नीसी जावा

घणी कुलायो तुम छाँटि होवा

मैकू लगी छ खुद मैतुड़ा की

बाबाजी को देखण देस देवा

मैत की मेरी तु त पौण प्यारी

सुणौ तु रैवार त मा को मेरी

गडू गदन्य व हिलाँस कप्फू

मैत को मेर तुम गीत गावा


TRANSLATION IN HINDI

--'हे ऊँची पहाड़ियो! तुम नीची हो जाओ ।

ओ चीड़ के घने वृक्षो! तुम समने से छँट जाओ ।

मुझे मायके की याद सता रही है,

मुझे पिता जी का देस देखने दो ।

ओ मेरे मायके की हवा !

मेरी माँ का सन्देश सुना ।

ओ नदी-नालो! ओ हिलाँस पक्षी! ओ कप्फू!

तुम सब मिल कर मेरे मायके का गीत गाओ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

           
=========================
लोकगीत : गढ़वाली लोकगीत
========================

जा भाग्यानी तू मैत न्है जा

मेरो रैवार बई मूं ली जा

इनु बोल्यान तुम बई मूं मेरी

खुद लगी छ बल बई तेरी

बाबा को बोयान तुमन भलों करे

रुपयों खैक मेरो बुरो करे

बाबा न दिने चौ डाण्डों पोर

भायों न करे रुपयों जोर

भौजी क बोल्यान मैं जागी रौ लो

यूँ की हालात तबो लौलो

ये गौं छ पाणी दूरो

मऊ पूस क छ जाड़ो बूरो


MEANING IN HINDI.




--'जा भाग्यशालिनी, तू पीहर को चली जा,

मेरा सन्देश माँ के पास ले जा ।

ऎसे कहना : तुम मेरी माँ हो,

तुमसे मिलने की बहुत भूख लगी है, माँ!

पिता से कहना--तुमने अच्छा किया,

रुपए खाकर तुमने मेरा बुरा कर डाला ।

पिता ने मुझे चार पहाड़ों के पार दे दिया

भाइयों ने भी रुपया लेने पर ज़ोर दिया ।

भाई जी से कहना : मैं बाट जोहूंगी

यहाँ की हालत तभी सुन लेना ।

इस गाँव का पानी बहुत दूर है, माँ!

माघ-पूस का जाड़ा भी बहुत बुरा है