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Song Expressing Grief Of Women - पहाड़ के महिलाओ की पीडा व्यक्त करते ये गाने

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 04, 2009, 12:05:49 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तों

उत्तराखंड के कई लोग गीतों मे यहाँ के महिलाओ के कठिन जीवन और दुःख का वर्णन है ! प्रकृति ने पहाड़ को जितनी सुन्दरता दी है लेकिन वही दूसरी तरफ यहाँ के लोगो के आम जिन्दगी भी बहुत की कठिनाई भरी है और खासतौर से महिलाओ के लिए ! एक तरफ पहाड़ के खेतो में कठिन मेहनत वही दूसरी तरफ पारिवारिक सुख से वंचित!

जैसेकि यहाँ एक प्ररम्परा सी बनी है कि यहाँ के नवजवानों को नौकरी के पहाड़ छोड़ के बहार जाना होता है और महिलाओ को कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है जिसका कि हमारे लोक गीतों काफी वर्णन है!

हम यहाँ पर एसे लोक गीतों के बारे में लिखेंगे !

एम् एस मेहता






एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड के एक लोक गायक श्री प्रहलाद सिंह मेहरा ने पहाड़ की महिलाओ की कठिन जीवन पर यह हिर्दय स्पर्शी गीत लिखा है :
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पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले
कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले

पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले

राति उठी, पोश गाड़ना
पानी ले भरी लियूना
बिना कलेवा रुवाटा,
तिवीली जाण घास का मगना
बार बाजी तू घर आयी
सासू के गाली पायी

     पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले
      कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले

पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले

भान माजी ले चूल लिपि ले
फिर गोरु मुचूणा,
गोरु का दगाड, ब्वारी तिवीली रित घर नी उणा
सूख लाकडा तोडी लाई, सासू की गाली पायी

        पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले
        कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले

पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले

अशौज में धान कटाना, चैत में ग्यू टीपना
मंगसिर में तवील जाण, घास के मागन
छय ऋतू बीत गयी, तेरी बुति पूरी नी भयी
बार मास बीत गयी तेरी बुति पूर नी भयी

पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले
कैभे नि खाया द्वि रुवाटा, सुख ले

पहाड़ की चेली ले, पहाड़ की ब्वारी ले
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हेम पन्त

पहाङ की नारी के संघर्षपूर्ण जीवन की झलक देता हुआ नरेन्द्र नेगी जी का यह गाना बहुत संवएदनशील है, मां अपने बच्चे को सुला रही है वो उसे बोल रही है - "हे मेरी आँखों के रतन सोजा उसे अभी घर के बहुत सारे काम करने हैं. सो जा मेरे साथ की सहेलियों ने सारे काम कर दिए हैं और मेरे सभी काम ऐसे ही पड़े हुए हैं..."

हे मेरी आंख्युं का रतन
बाला स्ये जादी,बाला स्ये जादी
दूध भात दयोलू मी ते तैन
बाला स्ये जादी-२
हे मेरी आंख्युं का रतन
बाला स्ये जादी-४

मेरी औंखुडी पौन्खुड़ी छै तू, मेरी स्याणी छै गाणी
मेरी स्याणी छै गाणी
मेरी जिकुड़ी उकुड़ी ह्वेल्यु रे स्येजा बोल्युं मानी
स्येजा बोल्युं मानी
न हो जिधेर ना हो बाबु जन बाला स्ये जादी
दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी

तेरी घुन्द्काली तू की मुट्ठ्युं मा मेरा सुखी दिन बुज्याँन
मेरा सुखी दिन बुज्याँन
तेरी टुरपुरि तों बाली आंख्युं मा मेरा सुप्न्या लुक्याँन
मेरा सुप्न्या लुक्याँन
मेरी आस सांस तेम ही छन बाला स्ये जादी
हे मेरी आंख्युं का रतन, बाला स्ये जादी

हे पापी निंद्रा तू कख स्येंयी रैगे आज
स्येंयी रैगे आज
मेरी भांडी कुण्डी सुचण रै ग्येनी, घर बोण कु काम काज
घर बोण कु काम काज
कब तै छनटेलु क्या बोन क्या कन, बाला स्ये जादी
दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी

घात सार सारी की लै ग्येनी, पंदेरों बटी पंदेनी
पंदेरों बटी पंदेनी,
बाणु पैटी ग्येनी मेरी धौडया दगडया लखड्वेनी घस्येनी
लखड्वेनी घस्येनी
क्या करू क्या नि करू जतन बाला स्ये जादी
हे मेरी आंख्युं का रतन,बाला स्ये जादी

घर बौडू नि व्हायु जू गै छौ झुरै की मेरी जिकुड़ी
झुरै की मेरी जिकुड़ी
बिसरी जांदू वीं खैरी बिपदा हेरी की तेरी मुखड़ी
सम्लौ न वो बात वो दिन बाला स्ये जादी
दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी
बाला स्ये जादी-4

ये गीत के बोल ऑरकुट में नेगी जी की कम्युनिटी में योगेश जी द्वारा उपलब्ध कराये गए है

हेम पन्त

नरेन्द्र नेगी जी की एल्बम "माया कु मुंडारु" का गाना.....

इस गाने में नयी नयी शादी शुदा वाली नारी का दुःख को प्रकट किया गया है, जिसका आदमी शादी करके अपनी नौकरी पर दिल्ली गया और अभी तक अपने घर वापिस नहीं आया है, वह औरत दिल्ली से आये किसी अन्य युवक से अपने पति के हाल-चाल जानने को उत्सुक है.. बङा अर्थपूर्ण और मार्मिक गाना है, एक बार फ़िर नेगी जी ने "पलायन" की समस्या पर अपनी सशक्त कलम चलायी है...


हे दिल्ली वला दयुरा, हे दिल्ली वला ...........
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..२

चोंठी मा तिल वाली भोजी, चोंठी मा तिल वली.......
चोंठी मा तिल वली भोजी हुन्दू क्वी अता पता भेजी कु त खोजी ल्यान्दा....2
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..

भंडी बरस व्हेगीन यून्की, चिट्ठी पतरी ना खबर सार ....2
नयु- नयु ब्यो व्हे छो हमरू, छोड़ी चली गीन घरबार
चोंठी मा तिल वली भोजी हुन्दू क्वी अता पता भेजी कु त खोजी ल्यान्दा

मैं शक-सुभा हूनू भोजी फड़कणी च आँखी मेरी....2
भेजी मेरु रशिलू मिजाज, क्वी बाँध ना हो तख धेरीं

हट ठठा ना कर भे दयुरा, स्यना त नि छिन तेरा भेजी
छोवं आश मा कभी त ल्याली, मेरी खुद तों खेन्ची खेन्ची
हे दिल्ली वला दयुरा, तेरा भेजी भी दिखेंदिनी रे कभी आन्दा जांदा..

तू फिकर ना कर बो पंछी, कख जालू घोलू छोड़ी
बाटू बिरर्युं च भेजी, ए जालू त्वेमा बोड़ी
चोंठी मा तिल वाली भोजी, काटेनी तिन भी दिन याखुली रून्दा रून्दा...

यह गाना आप इस लिंक से Download भी कर सकते हैं.

http://www.esnips.com/doc/d552a3d7-e8b4-4c6f-bd9c-7c15e81f967b/dilli-wala-dyura

हेम पन्त

नरेन्द्र सिंह नेगी जी का ये गाना बड़ा ही मार्मिक और भावपूर्ण है, इसमें नेगी जी ने पहाडो की नारी की जीवन गाथा का वर्णन किया है, की हमारे पहाडों की नारी किस तरह से प्रीत की कोमल डोर की तरह हैं और पर्वत की तरह कठोर भी है. और साथ में उसकी दिनचर्या का भी वर्णन है

प्रीत सी कुंगली डोर सी छिन ये
पर्वत जन कठोर भी छिन ये
हमारा पहाडू की नारी.. बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-२

बिन्सिरी बीटी धान्यु मा लगीन, स्येनी खानी सब हरचिन-२
करम ही धरम काम ही पूजा, युन्कई ही पसिन्यांन हरिं भरिन
पुंगड़ी पटली हमारी बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-२

बरखा बतोन्युन बन मा रुझी छन, पुंगडा मा घामन गाती सुखीं छन-२
सौ सृंगार क्या होन्दु नि जाणी
फिफ्ना फत्याँ छिन गालोडी तिड़ी छिन
काम का बोझ की मारी बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-२

खैरी का आंसूंन आंखी भोरीं चा,मन की स्याणी गाणी मोरीं चा -2
सरेल घर मा टक परदेश, सांस चनि छिन आस लगीं चा
यूँ की महिमा न्यारी बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-२

दुःख बीमारी मा भी काम नि टाली,घर बाण रुसडू यखुली संभाली -२
स्येंद नि पै कभी बिजदा नि देखि, रत्ब्याणु सूरज यूनी बिजाली

युसे बिधाता भी हारी बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-२
प्रीत सी कुंगली डोर सी छिन ये
पर्वत जन कठोर भी छिन ये
हमारा पहाडू की नारी.. बेटी ब्वारी
बेटी ब्वारी पहाडू की बेटी ब्वारी-2

इस गाने के बोल मुकेश जोशी जी ने उपलब्ध कराये हैं

Risky Pathak

Heera Singh Rana Jee Ki Pahad Ki Naari Ki Vyatha Pe Ye Geet


Kya Likhu Pahada sainyo Ka Geetaaa...
Roj re bhaag me thuka bhanjetaa...
Kya Gareebo ki Kya saukaaru saini...
Pahadaa sainiya le ghuguti raini..

Mov ki daali le chaapi muneli..
Madua rwaat loon ki deli...
Ko suno chhaat ki peed pukaar
saini daanyu me to mensh bjaar

Ko lijhaa pahadaa dhaiya me paani
Kasi kaatuna me jethi ugaani
Fir le pahaad ki hosiya cheli
in pahado peri muneyi deli..

Pahada sainya ka tap or tyaag
aafi bdaa jaile aapuno bhaag

Risky Pathak


Poem By Heera Singh Rana

क्या लिखु पहाडा सैन्यो का गीत
रोज रे भाग में थूका भंजेत

क्या गरीबो का, क्या सौकारू सैनी
पहाडा सैनिया ले घुगुती रैनी

मोव की डाली ले च्यापी मुनेली
मडुवा रवातु लून की डेली

घागेरी कोछेणी धोती को चाव
हाय बोला आइटम रातिया ब्याव

जेठ की धापर चौमास सून
हयून के ठीन मा दाथुलि दयून

को सुनो छात की पीड़ पुकार
सैनी डान्यु में तो मैन्स बाजार

को ल्ही जा पहाडा धैया में पानी
कासी काटू खेती उगानी

फिर ले पहाड़ की हौसिया चेली
इन पहाडो पर मुनेई देई

पहाडा सैनी को तप और त्याग
आफि बना जैले आपुन भाग

राजुला सौक्यना मालू घस्यारी
रामी बौराणी पहाड़ की नारी

पहाड़ सैनिया ले येस काटि दीना
इतिहास जूनो लूं नि लेना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एक और खास बात, आपने उत्तराखंड के कई गानों में घुघूती पक्षी का जिक्र सुना होगा! इनके अधिकतर गानों में महिलाओ अपने दुःख व्यक्त करते घुघूती पक्षी का सहारा लिया है ! चाहे अपने पिया की निराई (याद), अपने मायके की याद और पहाड़ के कठिन खेती और काम काज पर है :

देखिये यह गाना देखिये :


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Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki
Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet ki

       Dandi kanthiyon ko hue, gauli gae holu
       Myara maeta ko bon, mauli gae holu
       Chakula gholu chodi, udana hwala -2
       Bethula maetuda ku, paetana hwala
      Ghuguti ghuron lagi hoooooo
      Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki
      Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet ki
      Ritu, ritu chaet ki, ritu, ritu chaet ki


Dandiyun khilana hola, burosi ka phool
Pathiyun haisani holi, phyoli mol mol
Kulari phulpaati leki, delhiyun delhiyun jaala -2
Dagdya bhagyaan thadya, chaupala lagala
Ghuguti ghuron lagi hoooooooooooooooooo
Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki
Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet ki
Ritu, ritu chaet ki, ritu, ritu chaet ki

       Tibari ma baithya hwala, Babaji udaas
        Batu heni holi Maaji, lagi holi saas
       Kab myara maeti auji, desa bhenti aala -2
       Kab myara bhai behno ki raaji khushi lyala
       Ghuguti ghuron lagi hooo

Ghuguti ghuron lagi myara maeta ki
Baudi baudi aaye gi ritu, ritu chaet की


Ritu, ritu chaet ki
Ritu, ritu chaet ki
Ritu, ritu chaet ki
Ritu, ritu chaet की



http://www.youtube.com/watch?v=fUR4rEHr0VE

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



रेखा धस्माना ने यह गाना घुघूती पर गाया है जो की उनकी एक एल्बम कुमोअनी गीतमाला जो प्रताप सिह बफिला के साथ थी उसका यह गाना बहुत ही मधुर है :

ओह घुघूती तू ना घुर
त बुरुशी रुख (पेड) मा

बाली उम्र दुःख
फाड़ छो
आज ले मा दुःख मा रे

  ओह घुघूती तू ना घुर
  त बुरुशी रुख (पेड) मा

  वो निरमोही तू ना घुरू
  मन होंछो उदास रे - २

  ओह घुघूती तू ना घुर
  त बुरुशी रुख (पेड) मा

   पहाड़ का ऊँचा नीचा
   डाना गंगा जी बगड़ भागी- २

   ठंडी हवा चली रू, फूल बुरुशी फूली
   ओह भागी तू उदासी ना लगा.

ओह घुघूती तू ना घुर
त बुरुशी रुख (पेड) मा


   



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यह गाना जिसे कभी आकाशवाणी में सुना करते थे ! इस गाने पर एक महिला अपने पति से मायके के याद आने पर मायके जाने के लिए कहती है :

पतनी

   तेरी खुटी मेरी सलाम
    मै मेता जाण, दे भागी
    मै ईजू की नाराई
    मै मेता जाण, दे भागी