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Chardham In Uttarakhand - देवभूमि के चारधाम और अन्य मंदिरों,पहाडों की झांकियां

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, May 02, 2009, 07:18:41 AM


Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand

बूढ़ाकेदार,BUDHAKEDAR


उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। बदरी, केदार, गंगोत्री और यमुनोत्री चार धामों के यहां स्थित होने से यह देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है, लेकिन राज्य में ऐतिहासिक, पौराणिक मंदिरों की परंपरा इन्हीं चार धामों पर खत्म नहीं होती, बल्कि यहां कई ऐसे मंदिर स्थित हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक है टिहरी जनपद स्थित बूढ़ाकेदार।



मान्यता के मुताबिक यही वह स्थान है, जहां कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांडवों को गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन अधिक प्रसिद्ध न मिलने से यह उपेक्षित सा है। अब स्थानीय लोगों ने बूढ़ाकेदार को पांचवां धाम घोषित करने की मांग शुरू कर दी है।

केदारखंड में वर्णित मान्यता के आधार पर गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति लिए पांडव शिव दर्शन के लिए उत्तराखंड आए थे। इस स्थान पर शिव ने उन्हें बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन दिए और उन्हें गोत्र हत्या से मुक्ति दी। तभी से यह स्थान नाम बूढ़ाकेदार नाम से प्रसिद्ध हुआ। भारी संख्या में यात्रियों के आवागमन से चार धाम यात्रा वाले जनपदों के विकास पर सरकार की खास नजर रहती है।

इसी के चलते टिहरी जनपद में भी विभिन्न क्षेत्रों की जनता अपने देवी-देवता और नदियों के संगम, उद्गम स्थल को पांचवें धाम की मान्यता दिलवाने क लिए वक्त-वक्त पर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन उनकी यह मांग पूरी होती नजर नहीं आ रही है। जनपद में कई पौराणिक तीर्थ स्थल हैं इनकी महत्ता वेदों व पुराणा में भी वर्णित है। जनपद के पौराणिक धाम बूढ़ाकेदार की बात करें, तो पूर्व में यह चार धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव था।

उस समय देश व विदेश के श्रद्धालु व पर्यटक यहीं से होकर चार धाम यात्रा पूरी करते थे। मान्यता है कि चारों धाम के साथ यदि बूढ़ाकेदार के दर्शन नहीं किए, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है, लेकिन चारों धाम के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध होने के बाद यह स्थान यात्रा मार्ग से अलग-थलग पड़ गया। अब चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु भी कम संख्या में इस ओर रुख करते हैं। इसके चलते मंदिर क्षेत्र का पर्याप्त विकास भी नहीं हो सका है।

यही वजह है कि लोग इसे पांचवें धाम की मान्यता दिलाने के लिए आवाज उठाते आ रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि मंदिर के समीप ही गंगा की सहायक भिलंगना नदी का उद्गम खतलिंग ग्लेशियर है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

मखमली बुग्यालों में पसरी प्रकृति की सुंदरता पर्यटकों का मन मोह लेती है। यह साहसिक पर्यटक के लिहाज से भी बहु़त उपयोगी स्थान है। बूढ़ा केदार को पांचवें धाम के रूप में मान्यता दिलाने के लिए उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले स्व. इंद्रमणी बडोनी ने वर्ष 1985 सितंबर माह में खतलिंग महायात्रा का शुभारंभ किया था, जो तब से अनवरत चली आ रही है।

इस बाबत जिला पर्यटन अधिकारी किशन सिंह रावत का कहना है कि जनता पांचवें धाम की मांग तो कर ही है, लेकिन इसके लिए अभी तक कहीं से भी औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है। यदि प्रस्ताव आता है, तो उसे शासन को भेजा जाएगा।

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कसार देवीमंदिर ALMODA

यह मुख्य नगर से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर से हिमालय की ऊँची-ऊँची पर्वत श्रेणियों के दर्शन होते हैं। कसार देवी का मंदिर भी दुर्गा का ही मंदिर है।
कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना ईसा के दो वर्ष पहले हो चुकी थी। इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत अधिक आंका जाता है।



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तपकेश्वर मंदिर DEHRADUN

यह मंदिर सिटी बस स्टेंड से 5.5 कि.मी. की दूरी पर गढ़ी कैंट क्षेत्र में एक छोटी नदी के किनारे बना है। सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां एक गुफा में स्थित शिवलिंग पर एक चट्टान से पानी की बूंदे टपकती रहती हैं। शिवरात्रि के पर्व पर आयोजित मेले में लोग बड़ी संख्या में यहां एकत्र होते हैं और यहां स्थित शिव मूर्ति पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।



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हेम पन्त

16 मई से शुरु होने वाली महत्वपूर्ण चारधाम यात्रा की सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं.पिछले साल तक ऋषिकेश से होकर ही चारधाम यात्रा का मार्ग निर्धारित था लेकिन इस बार रामनगर से रानीखेत-> द्वाराहाट->गैरसैंण->चमोली रूट को भी चारधाम की यात्रा में शामिल किया गया है, जिससे चारधाम यात्रा में कुमाऊँ की तरफ़ से जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों को बहुत सहूलियत होगी.