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Chardham In Uttarakhand - देवभूमि के चारधाम और अन्य मंदिरों,पहाडों की झांकियां

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, May 02, 2009, 07:18:41 AM

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रति देवता के मंदिर चंबा टेहरी गढ़वाल,रारी देवता मेले की एक झलक



हेम पन्त

उत्तरकाशी। बरसात ने यात्रा सीजन की रंगत बिगाड़ दी है। सीजन की शुरूआत में दर्ज की गई रिकार्ड तादाद के उलट अब तीर्थयात्री व पर्यटक नदारद हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित अन्य पर्यटक स्थल सूने नजर आ रहे हैं।
गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में इस बार सीजन की शुरुआत काफी बेहतर रही। बीते सालों की तुलना में इस बार रिकार्ड तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की आमद से पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए थे। पंद्रह दिन के बाद यानी जून के पहले सप्ताह से ही यात्रियों की तादाद में भारी गिरावट देखी जाने लगी। जुलाई माह का पहला पखवाड़ा भी इस मामले में निराश करने वाला रहा। उसके बाद शुरू हुई बरसात ने तो इस साल बेहतर सीजन की उम्मीदों पर और भी पानी फेर दिया। देशी पर्यटकों के साथ ही इस बार विदेशी पर्यटकों की आमद भी बहुत कम दर्ज की जा रही है। इससे गंगोत्री व यमुनोत्री धाम समेत अन्य पर्यटक स्थल सूने नजर आ रहे हैं। हालांकि 25 जुलाई के बाद का समय कांवड़ यात्रा के नाम रहा, जिससे तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की तादाद बढ़ने की संभावना भी जाती रही। ऊपर से आए दिन दरकते पहाड़ों व टूटती सड़कों ने बाहर से आने वालों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी लंबी यात्रा करने से रोका हुआ है। यात्रा व्यवस्थाओं पर नजर डालें प्रशासन के पास आपदा की स्थिति से निपटने के लिये बहुत अधिक संसाधन मौजूद नहीं है। इस संबंध में चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल ने बताया कि बरसात के दौरान हर साल यात्रा प्रभावित होती है। फिर भी जो तीर्थयात्री व पर्यटक पहुंच रहे हैं उनकी सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। राजमार्गो के बंद होने की स्थिति में उन्हें शीघ्र ही खुलवाने के लिये संसाधन जुटाए गये हैं.

"दैनिक जागरण" की खबर

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                                पडियार देवता का प्राचीन मंदिर
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पडियार देवता का प्राचीन मंदिर है। औली नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क वन क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। औली में फिलहाल ८ नं० प्वाइंट तक छोटी गाड़ियों से जाया जाता है जबकि जोशीमठ से गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा संचालित रोपवे से औली के १० नं० प्वाइंट तक पंहुचा जा सकता है। पर्यटकों की सुविधा हेतु यहां जीएमवीएन के विश्राम गृह व क्लिफ टाप जैसे तीन सितारा होटल हैं औली के ऊपर स्थित ५० से ६० किमी तक फैला गार्सन बुग्याल है। कंवारी पास, नन्दा देवी, कामेट आदि हिमालयी चोटियों तक पंहुचने के लिये मुख्यत: औली से ही ट्रैकिंग रुट है। समुद्र तल से औली की ऊंचाई लगभग ३०४९ मी० है। इसके अलावा औली भारत के हिमाचल स्थित सोलन, रोहतांग, कश्मीर स्थित गुलमर्ग जैसे स्की स्थलों में से एशिया का प्रथम तीव्रतम ढलान वाला डेढ किमी का स्की ट्रैक है। यहां समय-समय में नेशनल गेम आयोजित किये जाते हैं।


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कासी महोत्सव के लिए सजी है भगवान बद्रीनाथ जी की डोली


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