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Tribute To Movement Martyrs - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, October 03, 2007, 02:14:22 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड गठन हेतु मसूरी २ सितम्बर 1994 के   अमर शहीदों को भावभीनी  श्रधांजलि ...
१- श्रीमती हंशा घनई
२- बेल्मती चौहान
३-रामसिंह बंगारी
४- मदन मोहन ममगाई


Devbhoomi,Uttarakhand

कीर्तिनगर: अमर शहीद नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी की स्मृति में आयोजित मेले में शनिवार दूसरे दिन स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जहां लोगों का मनोरंजन किया।

मेले के दूसरे दिन कार्यक्रम का उद्घाटन करते घनसाली के पूर्व ब्लाक प्रमुख धनी लाल शाह ने कहा कि यह वही स्थान है जहां माधों सिंह भंडारी, नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी जैसे महा पुरूषों ने अपना इतिहास रचा और आने वाले भविष्य के लिए एक मिसाल कायम की। कार्यक्रम के दूसरे दिन नन्हें-मुन्नों बच्चों की प्रस्तुति जहां दर्शकों के लिए मनोरंजन का केन्द्र रही वही हिमालयन लोक कला संस्कृति पौड़ी के साथी कलाकारों ने कार्यक्रम पर चार चांद लगा कर तालियां बटोरी। इस मौके पर उद्यान, कृषि, समाज कल्याण, स्वयं सहायता समूह संघ, उद्योग, पशुपालन, स्वास्थ्य, शिक्षा, राष्ट्रीय सेवा योजना राइंका कीर्तिनगर, बाल विकास, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभागों के द्वारा अपने स्टाल भी लगाए गए है। इस मौके पर स्थानीय व्यापार संघ ने अम्बेडकर पार्क में तीन दिवसीय कैरम प्रतियोगिता का आयोजन शनिवार से शुरू किया गया है जिसमें क्षेत्र की पंद्रह टीमों ने पंजीकरण करवाया गया है।

विनोद सिंह गढ़िया

आज उत्तराखण्ड की महान विभूति श्री बाबा मोहन उत्तराखंडी जी का शहादत दिवस है।

उत्तराखण्ड की इस महान विभूति को "मेरा पहाड़" परिवार का शत-शत नमन एवं अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खटीमा गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि.......आओ हम प सब लोग इन् लोगो को याद करते है..इन् को प्रणाम करते है...उत्तराखंड आन्दोलन की असली शुरुवात यही से हई थी . राज्य निर्माण में अपनी शहादत देने वाले आन्दोलनकारियों के योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता है।इन शहीदों पर हम सभी को गर्व है..एक सितंबर 1994 को को उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन का काला दिन माना जाता है,, क्योंकि इस दिन की जैसी पुलिस बर्बरता की कार्यवाही इससे पहले कहीं और देखने को नहीं मिली थी। पुलिस द्वारा बिना चेतावनी दिये ही आन्दोलनकारियों के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसके परिणामस्वरुप सात आन्दोलनकारियों की मृत्यु हो गई।उत्तराखंड राज्य गठन जनांदोलन में 1सितम्बर 1994 को तत्कालीन उप्र मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुलिस द्वारा खटीमा में शांतिपूर्ण ढ़ग से आंदोलनकर रहे राज्य आंदोलनकारियों को गोलियांे से भूना गया, उस काण्ड की 19 वीं बरसी पर सभी शहीदों की पावन स्मृति को शतः शतः नमन्। उत्तराखंड राज्य बनाने को लेकर देवभूमि के लोगों ने आंदोलन किया था। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान एक सितंबर 1994 को खटीमा में पुलिस गोलीकांड में छह लोग शहीद हुए थे। इनमें सलीम अहमद, गोपी चंद, रामपाल सिंह, धर्मानंद भट्टं, प्रताप सिंह मनोला व परमजीत सिंह ने कुर्बानी दी थी,,उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान एक सितंबर 1994 को खटीमा में कोतवाली का घेराव करने जा रही आंदोलनकारियों की भीड़ पर पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी थी। दरअसल, आंदोलनकारी एक स्थान पर सभा कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। जिसके बाद आंदोलनकारियों की भीड़ उग्र हो गई और कोतवाली घेराव करने पहुंच गई। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी..राज्य आन्दोलन के शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के चहँमुखी विकास के लिये हम सबको एकजुट होकर कार्य करना होगा। शत शत नमन अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।आपके बलिदान के लिये पूरा उत्तराखण्ड आपका आजन्म आभारी रहेगा। इस ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो पायेंगे। कन्न लाडा छाई,कन्न जीता छाई
कन्न कन्न खेला छाई हमल खंड
एक छाई जब मांगू हमल उत्तराखंड
याद कारों पौड़ी ,मंसूरी ,खटीमा गोलीकांड
कैकी कन्ना छोव अब हम जग्वाल

भूली ग्यो सब सौं करार ,रंगत मा छिन्न गौं बज्जार
ना बिसरा उ आन्दोलन -हड़ताल , उ चक्का जाम
एकजुट रावा, बोटिकी हत्थ,ख़्वाला आँखा अब
कैकी कन्ना छोव अब हम जग्वाल.. रचनाकार :गीतेश सिंह नेगी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखण्ड राज्य गठन के लिए
1 व 2 सितम्बर 1994 को
खटीमा व मसूरी में
तत्कालीन मुलायम सिंह यादव
की जनविरोधी सरकार के क्रूर दमन काण्ड की बरसी पर
खटीमा व मसूरी काण्ड सहित राज्य गठन आंदोलन के तमाम शहीदों की पावन स्मृति व आंदोलनकारियों
के महान योगदान को शतः शतः नमन्।

Devbhoomi,Uttarakhand


हमले में शहीद हुए बेटे को शान से किया विदा



तहसील क्षेत्र के ग्राम रुईसांण के निवासी और 19आरआर बटालियन के सूबेदार राजेंद्र सिंह का पैतृक घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वे 24 अक्तूबर की रात को गश्त के दौरान गोली चलने से जम्मू- कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र में शहीद हो गए थे।
रविवार को सेना के वाहन से शहीद का शव थराली से होते हुए पैतृक गांव रुईसांण पहुंचाया गया। इस मौके पर माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया था। शहीद के 70 वर्षीय पिता त्रिलोक सिंह, मां गांवली देवी रोते-रोते बेहोश हो गए।


छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर गएराजेंद्र सिंह एक माह पहले ही 60 दिन की छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर गए थे। उन्हें नवंबर में 15 दिन की छुट्टी लेकर अपने भतीजे की सगाई के लिए घर पहुंचना था। मृतक अपने पीछे वृद्ध माता-पिता सहित पत्नी सुशीला देवी और तीने बेटों को छोड़ गया है।उनका बड़ा बेटा योगेंद्र भी सेना में है। जबकि दो छोटे बेटे पढ़ रहे हैं।

गांव से शव को प्राणमति के तट पर स्थित पैतृक घाट लाया गया, जहां सिख रेजीमेंट रुद्रप्रयाग और गढ़वाल स्काउट जोशीमठ के जवानों ने शस्त्र झुकाकर भावभीनी अंतिम विदाई दी।अचानक गोली चलने से मौके पर ही मौतशहीद के शव के साथ यहां पहुंचे नायक सूबेदार योगेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 24 अक्तूबर को जिला अनंतनाग के राजोरी सेक्टर में रात करीब 10 बजे गश्त कर रहे थे।


इसी दौरान अचानक गोली चलने से सूबेदार राजेंद्र सिंह मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मौके पर एसडीएम� विवेक प्रकाश, सब इंस्पेक्टर अनिरुद्ध मैठाणी सहित कई लोग मौजूद थे।


http://www.dehradun.amarujala.com/news/city-hulchul-dun/depart-gracefully-son-was-killed-in-terrorist-attack/

विनोद सिंह गढ़िया

रामपुर तिराहा (मुजफ्फ़रनगर) कांड में शहीद सभी आन्दोलनकारियों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन.