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9 November - उत्तराखंड स्थापना दिवस: आएये उत्तराखंड के विकास का भी आकलन करे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 24, 2007, 10:56:55 AM

आपके अनुसार विकास की दृष्टि से उत्तराखंड ने १०० % मैं से कितना विकास किया है ?

below 25 %
46 (74.2%)
50 %
11 (17.7%)
75 %
5 (8.1%)
100 %
2 (3.2%)
Can't say
2 (3.2%)

Total Members Voted: 62

Voting closes: February 07, 2106, 11:58:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Is isthiti par mujhe Hindi filmo ke ek gaana yaad haa raha hai :

Kaun Sunega, Kisko Sunayee..

lekin Chhup nahi rah sakte.

Our political leaders are just fighting for their political interest. Development is still too far from the reach of the people in the state.

If the pace of the development remains the same, i am sure even in 80 yrs Uttarakhand can not be developed state.

So what has after all changed ?


Quote from: पंकज सिंह महर on November 04, 2008, 03:34:49 PM
१)    क्या उत्तराखंड के स्थायी राजधानी बन पायी ?
  २)    क्या उत्तराखंड से विस्थापन की दर कम हुयी
३)   क्या उत्तराखंड में रोजगार के साधन जगे !
  ४)   क्या उत्तराखंड के गावो तक सड़क मार्ग का विस्तार हुवा ?
  ५)   क्या उत्तराखंड के पर्यटन का विकास हुवा ?
  ६)   क्या उत्तराखंड के स्वाथ्य सुविधा मे सुधार हुवा ?
  ७)  क्या उत्तराखंड के शिक्षा के स्थर मे सुधर हुवा ?
  ८)  आखिर प्रशन, आखिर क्या बदला उत्तराखंड में

मेहता जी,
    इन सातों सवालों का जबाब है नहीं, कुछ भी नहीं हुआ...हालत पहले से भी बदतर हो गई है। आठवें प्रश्न में मेरी ओर से यह जोड़ दीजिये कि आखिर क्या होगा उत्तराखण्ड का? विकास की आस लिये बच्चे बूढे़ सड़कों पर उतरे, कर्मचारियों ने नौकरी दांव पर लगा दी ४२ लोग शहीद हुये, मुजफ्फरनगर में अस्मत तक तार-तार हुई, अपने भविष्य की परवाह किये बिना छात्र शक्ति ने आंदोलन किया.....परिणिति....पहली सरकार ने कहा, हम नये हैं, पहली निर्वाचित सरकार राजनीतिक अस्थिरता और सत्तारुढ़ दल की आपसी कलह में उलझी रही...अब सत्तारुढ़ दल बदला तो पुरानी सरकार की ही विरासत को ढो रही है। ऎसे में उत्तराखण्ड का आम आदमी जो दो हली जमीन पर दिन भर हाड़-तोड़ मेहनत कर रहा है, उसका क्या होगा? बेरोजगारी बढ़ रही है, आम आदमी आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मर रहा है...आठ सालों में तीन सरकारों के राज में हम अपनी राजधानी निर्धारित नहीं कर पाये.....।
       शिक्षा का स्तर, बेरोजगारी की दर, मूलभूत सुविधायें.....सब जस की तस हैं।

खीमसिंह रावत

Q-आखिर प्रशन, आखिर क्या बदला उत्तराखंड में?
Ans: 1- परिसीमन से विधानसभा क्षेत्र
        2- राज्य का नाम उत्तराँचल से उत्तराखंड

श्री सुरेश नौटियाल जी के साप्ताहिक पत्र "उत्तराखंड प्रभात" में एक लेख में पढ़ा था एक ग्रामीण औरत लेखिका से ही पूछती है हमारे गाँव से हमारे बच्चे पढ़ कर शहर जाते है शहरी लोग पढ़ कर विदेश /
ये समझ में नही आता है कि पढ़े लिखे लोग हमेशा पलायन ही क्यों करते है/   

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on November 04, 2008, 03:11:35 PM


(  ८)  आखिर प्रशन, आखिर क्या बदला उत्तराखंड में ???


KAILASH PANDEY/THET PAHADI

political leaders apne political interest ke liye aapas me lad rahe hain aur ham log mera pahad forum me samsyawo kaa rona ro rahe hain.... :(

Daju logo meri samajh me ek baat aaj tak nahi aayi ki kya hamare paas enn samasyawo kaa kuch samadhan hai?

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



हेम दा के प्रश्नों में पूर्ण दंग से सहमत हूँ मै !

Quote from: H.Pant on November 04, 2008, 03:55:17 PM
इन सवालो का उत्तर देने की कोशिश में एक तुकबन्दी बन पङी है...

परिसीमन के मुद्दे पर कुछ न कर पाने का मलाल है..
बेरोजगारी, विस्थापन का सवाल अब भी सिर्फ सवाल है..

यातायात को कौन सुधारे, भ्रष्टाचार को रोके कौन? 
गैरसैण राजधानी बनाने के सवाल पर, राजनेता मौन...

आठ साल में दो पार्टियों की, तीन सरकारें नाकाम रहीं,
जनता को 'अपनों' ने लूटा, ये खबर आम रहीं.






Rajen

प्रश्न ये नहीं कि हल कौन करेगा
प्रश्न ये है कि पहल कौन करेगा.

पंकज सिंह महर

प्रश्न यह नहीं है कि जिम्मेदारी कौन ओढ़ता है,
प्रश्न यह है कि हवाओं का रुख कौन मोड़ता है,
हम सब एक लम्बे इंतजार में बैठे हैं,
और बैठे रहने से कुछ नहीं होता।

भागो नहीं! समाज को बदलो.......।

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

wah-wah Bahut badiya Daju maja aa gaya........

JAI UTTARAKHAND


Quote from: पंकज सिंह महर on November 04, 2008, 04:52:57 PM
प्रश्न यह नहीं है कि जिम्मेदारी कौन ओढ़ता है,
प्रश्न यह है कि हवाओं का रुख कौन मोड़ता है,
हम सब एक लम्बे इंतजार में बैठे हैं,
और बैठे रहने से कुछ नहीं होता।

भागो नहीं! समाज को बदलो.......।


Rajen

यार कैलाश ज्यूँ, सीरियस टाक हो रही है और आप मजे ले रहे हो?  (डोंट माइंड, मजाक कर रहा हूँ). ;D ;D

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

Mere khayal se to hame samasyawo par discussion ke sath-sath unke samadhano par bhi kuch na kuch discuss karana chahiye aur uske baad kuch naa kuch effords bhi apni Devbhumi ke liye karna chahiye.......yahi hamari sabse badi suruwat hogi.

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

Daju, mere hisab se sirf serious talk karne walo ne naa to aaj tak ish duniya me kuch kiya hai aur naa hee aage kuch kar payenge......Serious talk kewal 1 chingari kaa kaam kar sakti hai.

ab hame serious talk ke sath-sath apni Devbhumi ke liye kuch karna bhi chahiye.......

Jago re pahadiyo jago....:)


Quote from: R@jeN on November 04, 2008, 05:11:05 PM
यार कैलाश ज्यूँ, सीरियस टाक हो रही है और आप मजे ले रहे हो?  (डोंट माइंड, मजाक कर रहा हूँ). ;D ;D