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Surkanda Devi Temple,Uttarakhand, सुरकंडा देवी मंदिर टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, September 26, 2009, 07:02:51 AM

Devbhoomi,Uttarakhand


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सुरकंडा क्षेत्र में थुनेर व राई मुरेंडा का जंगल अब समाप्ति की कगार पर है। थुनेर के पुराने पेड़ यहां धीरे-धीरे सूखते जा रहे है, जबकि राई मुरेडा के पेड़ यहां करीब समाप्त हो गए।

एक समय था जब सुरकुड पर्वत स्थित सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर के आसपास थुनेर व राई मुरेडा का घना जंगल था, जहां तीर्थ यात्री अपनी थकान मिटाने के लिए घंटों विश्राम करते थे। आज यह यह जंगल समाप्ति की कगार पर हैं। इस क्षेत्र में दो सौ से अधिक थुनेर के बड़े पेड़ सूख गए हैं और जो पेड़ बचे हैं उनकी भी टहनियां लोगों द्वारा तोड़ी जा रही हैं। इससे यह पेड़ भी सूखते जा रहे हैं। राई मुरेडा के पेड़ तो यहां अब दर्जनभर भी नहीं हैं।

वन विभाग अभी तक जंगल के लगातार कम होने को लेकर चिंतित नहीं दिख रहा है। चिपको नेता विजय जड़धारी का कहना है कि वन विभाग वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपये की अनुपयोगी पौधों की नर्सरी तैयार करवाते है, जबकि विभाग ने इस तरह के उपयोगी पौधों की नर्सरी अभी तक तैयार नहीं की है। रेंजर यशवंत लाल का कहना है कि सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते है जो प्रसाद के रूप में थुनेर और राई मुरेडा के पेड़ तोड़कर ले जाते है, इससे पेड़ों का लगातार नुकसान हो रहा है।

धार्मिक भावनाएं जुड़ी होने से लोगों को इस कार्य से रोका भी नहीं जा सकता है। बीज देने वाले पडे़ कम होने से जंगल में प्राकृतिक रूप से नई पौध तैयार नहीं हो पा रही है। थुनेर के पेड़ तो अज्ञात बीमारी के कारण भी सूखते जा रहे है। उनका कहना है कि वन विभाग के पास इन पेड़ों की नर्सरी निकालना कठिन काम है।

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नौगांव तथा पुरोला प्रखंड में बसे टिहरी के विस्थापितों ने दशहरे के पावन पर्व पर पहली बार टिहरी से मां राजराजेश्वरी तथा सुरकंडा देवी की डोलियों को रवांई घाटी लाए। मां की डोलियों के आगमन पर ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ मा की डोलियों का स्वागत किया।

विभिन्न गांवों के लोगों ने नवरात्र के अवसर पर देवथल पुरोला में मां राजराजेश्वरी तथा मां सुरकुंडा देवी की पूजा अर्चना की। गौरतलब है कि टिहरी बांध बनने पर टिहरी की पट्टी ओबा, भदूरा बनकुडाली सहित दर्जनों गांव के सैकडों परिवार विस्थापित हो कर रवांई घाटी के पुरोला, बसंतनगर, डेरिका,धेवरा तेगडा, गेंडा, तलडा, नौगांव, पोल, राजतर आदि गांव में बस गए हैं।

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Surkanda peak lying at an altitude of 2,750 m. in the western part of tahsil Tehri, and is famous for the temple of Surkanda Devi.The legend is that Sati, the wife of Siva, gave up her life in the yajna started by her father.

Siva passed through this place on his way back to Kailash with the dead body of Sati whose head fell at the spot where the temple of Surkhanda Devi stands. It commands a beautiful view of Dehra Dun, Rishikesh, Chandrabadni, Pratapnagar and Chakrata.

Flowers of varied kinds and colours and indigenous herbs grown in abundance here and some of the beautiful birds of the western Himalayas are also found in the neighbourhood. A local fair is held on the occasion of Ganga Dasahra in Jyaistha when hundreds of devout pilgrims

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                    एक लाख श्रद्घालुओं ने किए मां सुरकंडा के दर्शन
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चम्बा (नई टिहरी गढ़वाल)। गंगा दशहरे के उपलक्ष्य में कद्दूखाल में आयोजित मेला शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। इस मौके पर प्रसिद्ध सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। मेले के सफल आयोजन पर मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं का आभार प्रकट किया।[/color]गंगा दशहरे के अवसर पर इस बार तकरीबन एक लाख श्रद्वालुओं ने सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर पहुंचकर देवी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर में पिछले चार दिनों तक खूब भीड़ जुटी। मौसम की बाधाओं के बावजूद भी लोगों की आस्था में कोई कमी देखने को नहीं मिली। बारिश और अंधड़ की परवाह किए बिना लोगों ने देवी के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।

इन दिनों मंदिर में अलग-अलग धार्मिक संगठनों ने भगवती जागरण, भजन, कीर्तन आदि कार्यक्रम किए। इस दौरान देवी को ढोल नगाड़ों के साथ नचाया गया और देवी से क्षेत्र में सुख शांति व खुशहाली की मन्नत मांगी गई। इस मौके पर कद्दूखाल में तीन दिन तक विशाल मेला लगा रहा, जिसमें लोगों ने देवी दर्शनों के बाद मेले में खरीददारी की।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6514910.html

Kiran Rawat

Hi,
I also went for the blessings of Maa Surkanda Devi, we drived from Maal Devta side on Chamba Raod & literary ran out of petrol but blessing of Maa, we get petrol in a village & we reach Kadhukhanl on time.

On return we meat Kalpana Chauhan, Gurela Ji & Uniyal Ji (Namaskar Dev Bhumi)

It was very refershing & unforgatable trip

Cheers

Keep watching ................photos will be coming soon ..................

हेम पन्त

माँ सुरकण्डा देवी के पावन धाम में जाकर मन प्रसन्न हो जाता है... देखिये किस तरह भक्त भावविभोर होकर ढोल की थाप और माँ के भजनों पर नाच रहे हैं.

Video by - Bharat Bhushan Lekhwar ji

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                               मां सुरकंडा डोली चम्बा से रवाना


चम्बा (टिहरी गढ़वाल)। क्षेत्र की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए चम्बा-मसूरी टैक्सी यूनियन ने गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी मां सुरकंडा की डोली यात्रा का आयोजन किया गया। डोली चम्बा से सुरकंडा मंदिर को रवाना हुई।

नगर क्षेत्र में सोमवार सुबह टैक्सी यूनियन के पदाधिकारी एवं स्थानीय निवासियों ने ढोल नंगाड़ों के साथ झांकी निकालकर मां सुरकंडा की डोली विधिवत पूजा अर्चना के बाद सुरकंडा मंदिर के लिए रवाना की। डोली यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष सूरज राणा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से लोगों में श्रद्धा व आस्था की भावना जागृत होती है।

साथ ही संस्कृति का संरक्षण भी होता है। इस मौके पर टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष बलवीर सिंह पुंडीर ने कहा कि उनकी यूनियन पिछले कई वर्षो से इस तरह की देव डोली यात्रा निकालकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए ऐसा आयोजन कर रही हैं।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6601630.html