Author Topic: Flora Of Uttarakhand - उत्तराखंड के फल, फूल एव वनस्पति  (Read 248528 times)

Bhishma Kukreti

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उत्तराखंड  परिपेक्ष में सफेद मूसली      की सब्जी ,औषधीय व अन्य   उपयोग और   इतिहास

                                                 
          History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of  Himalayan  Safed Musli ,  Chlorophytum borivilianum in Uttarakhand context

उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  जंगल से उपलब्ध सब्जियों  का  इतिहास - 37

    History of Wild Plant Vegetables ,  Agriculture and Food in Uttarakhand - 37                       
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --  78

       History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -78
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      आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम - Chlorophytum borivilianum
सामन्य अंग्रेजी नाम - Safed Musli, Safed Moosli
संस्कृत नाम -मुशाली:
हिंदी नाम -सफेद मूसली
नेपाली नाम -मूसली
उत्तराखंडी नाम -मूसली
 उत्तराखंड में पहाड़ों में व घाटियों में जंगलों में मिलता है और अब उगाया भी जाने लगा है।  डेढ़ फ़ीट ऊँचे पत्तीदार पौधे के ेजदें दस इंच गहरे भी जाती हैं।  फूल सफेद होते हैं।
जन्मस्थल संबंधी सूचना - भारत
------------औषधि -----------------
सफेद मूसली की जड़ों के सत का प्रयोग यौन शक्ति वृद्धि , बांझपन दूर करने , सम्भोग शक्ति वृद्धि के अतिरिक्त  अन्य पौधों के आठ मिलाकर 100  से अधिक आयुर्वेदिक दवाई निर्माण में प्रयोग होता है।
 ------------------ धार्मिक महत्व ----------
राहु ग्रह  शांति में , देवी पूजन व नेपाली समाज में कुछ उतसवो में मूसली का प्रयोग होता है।
----------- पत्तियों की सब्जी -------
उत्तराखंड में भी अन्य स्थानों की तरह दवाई में प्रयोग होता है किन्तु पहले अकाल व सब्जी की कमी के समय पत्तियों की सब्जी बनाई जाती थी।  अब भी कभी कभी सब्जी बनाई जाती है।
 सब्जी बनाने के लिए पहले पत्तियों को उबाल लेते  निथार कर अलग रख दिया जाता है।

फिर कढ़ाई में तेल गरम कर प्याज , अदरक, जीरा , जख्या को भूरे होने तक भूना जाता है।  फिर उबली पत्तियों को कम मिश्रित  मसाले व नमक के साथ 5 मिनट तक पकाते हैं।  भीगी दाल जैसे चना व गहथ के साथ भी  सब्जी बनाई जा सकती है . फाणु, कपिलु हेतु भी मूसली पत्तियां प्रयोग की जा सकती है किन्तु शक्ति वर्धक दवाई होने के कारण लोग सब्जी कम ही प्रयोग करते हैं .



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 ( उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )





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       उत्तराखंड  परिपेक्ष में   भरंगी   की सब्जी ,औषधीय व अन्य   उपयोग और   इतिहास

                                                 
          History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of  Himalayan Blue Fountain Bush   Clerodendrum serratum in Uttarakhand context

          उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  जंगल से उपलब्ध सब्जियों  का  इतिहास - 38

              History of Wild Plant Vegetables ,  Agriculture and Food in Uttarakhand -   38                   
         
           उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --   79

       History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -79
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      आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम - Rotheca serratum, Clerodendrum serratum
सामन्य अंग्रेजी नाम - Blue Fountain Bush
हिंदी नाम -भरंगी
नेपाली नाम - अखंडी
उत्तराखंडी नाम -भरंगी
 भरंगी की झाडी 1. 8 मित्र ऊंची हो सकती हैं। डंठल जोड़ में पत्तियां गुच्छे में पायी जाती हैं और फूल सफेद , नीले व बैंगनी रंग के होते हैं।
जन्मस्थल संबंधी सूचना - पूर्वी भारत व श्रीलंका को भरंगी  का जन्मस्थल माना जाता है।
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन -
भरंगी का वर्णन धन्वन्तरी निघण्टु (ग्यारहवीं सदी से पहले ),कैयदेव निघण्टु , शो निघण्टु , रा निघण्टु , भाव प्रकाश निघंटु में उल्लेख हुआ है।
  ----औषधीय उपयोग ---
  भारत,  श्रीलंका में भरंगी का उपयोग सब्जी हेतु कम दवा हेतु अधिक होता है और आयुर्वेद में भरंगी का महत्वपूर्ण स्थान है। भरंगी से बनाई गयी दवाइयां स्वास रोग , कफ , बुखार ,पेट दर्द ,क्षय रोग निवारण हेतु जले  व  घाव पर लगाए जाती हैं। सर्प दंश में भी उपयोग होता है।
       ---भरंगी की सब्जी ----
भरंगी की पत्तियों से सब्जी बनाई जा सकती है किन्तु टॉक्सिक भय से बहुत काम उपयोग होता है।  आज तो सुनने में नहीं आता है।  भरंगी की हरी सब्जी अकाल या हीन समय में प्रयोग होता था।
 हरी पत्तियों को धोकर उबाला जाता है (जिससे कडुवापन कम हो जाय ) . फिर कढ़ाई में तेल, जख्या , जीरा , अदरक , लहसुन , प्याज को छौंका जाता है , फिर टमाटर के साथ भूना  जाता है , फिर नमक ,मिर्च हल्दी ,धनिया ,  भांग का मसाले डाले जाते हैं व् कुछ देर पकाते हैं।  अब भरंगी के उबले पत्तियों को कढ़ाई में डालकर 5 मिनट तक पकाया जाता है।  गरमागरम परोसा जाता है , वैसे अरहर , चना दाल , मटर के साथ  भी पकाई जाती है।  भीगी दालें , गहथ , राजमा ,चना ,  सूंट के साथ भरंगी की पत्तियों का सूखा साग बनाया जाता है। बिना उबाले भी पालक जैसे सब्जी भी बनाई जाती है। 


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Myths and Religious Importance of Kusha/Kansilu, Halfa Grass in Uttarakhand
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) -22
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
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Common English name –Halfa Grass
Botanical name –Desmostachya bipinnata
Local name –Kusha or Kansilu
Hindi Name – Kusha
Sanskrit Name –Darbha, Darbhah
Economic benefits –it was used as folk medicine and medical uses in dysentery, menorrhagia. Is used as fodder 
                   Myths, Religious Importance and Traditions
  There are mentions of Kusha ,  Halfa Grass/ Kush in Rig Veda, Mahabharata and Buddhist literature as sacred plant. In Rig Veda, it is mentioned that in special ceremony, priests and scholars use Kusha seat. In Bhagvat Geeta , Krihna advices for Kusha seat for mediation. Early Buddha accounts also mention that Buddha used Kusha Asan or Kusha seat for meditation (3).
 Kusha pen was supposed to be auspicious pen for writing on leaves
    Still, many mediators use Kusha Asan / Halfa Grass seat for meditation.
           Uses of Kusha /Halfa Gras in Various Shradha Tarpan  (tribute to forefathers) etc
  Priests use Kusha , Halfa Grass in various Shradha rituals as follows –
1-Darbha or Kusha Chat – 10 numbers each of five inch wide bundled in 10 tags
2- 3 Kusha of 8 inches each bundled by ‘klava’ for Tarpan
4- 3 Kusha of 8 inches each for base for Pind
5- Kusha ring used at Tarpan processes
6- One Tied Kusha for Marjan ritual
7- 15 Kusha of 3 inches for putting/using at various times and places.

  Kusha as Blessing Medium
 Priests use Kusha for blessing the jajman too by putting Kusha Grass on Jajman’s heads
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References-
1-Griffit, 1896,Hymes of Rigveda , Vol1 p.4
2-BhagvatGita VI:11
3-Williams P., 2006,Buddhism,Vol.1  page 4
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Myths and Religious Importance of Palash, Dhak, * Teak in Uttarakhand 
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 23
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name – Butea monosperma
Local Name – Dhak, Dhank
Hindi Name – Palash , Tesu, Tensu
Sanskrit Name – Kimshuka
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Dhak is used for removing skin, cough, cold, stomach, worm, leprosy , dysentery etc.
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc and for making coal, roots are used for rope materials and leaves container
Decoration – For color
                   Myths, Religious Importance and Traditions
    The three united leaves of Dhak are considered Brahma (Creator), Vishnu (Preserver) and Shiva (Destroyer) .
People believe that Palash, Dhak is the form of Agni (Fire). In a Purana story, parvati cursed deities for taking birth in tree form and Agni took birth in the form of Palash .
     In Grihvasutra, it is advised to use Dhak stick for Brahmin young man in Yagyopavit (thread ceremony) ritual.
 In Shrotra Sruti, there are many methods for making Dhak, Palash wood as ‘samidha’  for various Yagya, homa.
 In  Vayu Puran, using Dhak wood for Homa or Yagya is called auspicious.
In Indian Hindu astrology, Budh grah is the master of Dhak. Surya is also connected with Dhak 
 Palash, Dhak is also an auspicious tree for Buddhist as second Buddha got gyan (Enlightenment)  under this tree.
 In Mahabharata, the Dhak, plash is narrated in Aranyaka parva  when Pandavas travel to Garhwal for vanvas 
 Dhak leaves are also used for blessing rituals or ceremonies.
 Learned people suggest for rooting Dhak tree on est south of village.
 People offered Dhlk flower to Devi.
      Auspicious Importance in Holi Festival
   In Uttarakhand, playing Holi with Palas color is very auspicious important aspect of Holi celebration.
                    Palash in Astrology
 Purva Falguni Nakshatra is related to Palash and astrologers use Kadamb for person effected by Poorva Falguni Nakshatra.    
                    Palash in Tantric –Mantric Rituals
  People use Palash , Dhak (White flower is supposed to be best) in Tantric Vshikran and Smridhi rituals.
  There is importance of Dhak, Palash in Shankaracharji Mantra too.
 There is uses of Palash in Damar Tantra डामर तंत्र
As per Uddamareshwar Tantra, Palsh is offered to please Kalkarni Yakshani.
                    --- Dhak, Palas in Proverb---
 The Hindi proverb ‘Dhak ke Teen pat’ is famous and common proverb for showing unchangeable.
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Myths and Religious Importance of bamboo, Bans in Uttarakhand 
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 24
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name –Bambusa vulgaris
Local Name –Bans
Hindi Name –Bans
Sanskrit Name –Vetasah वेतस:
                                           ---Economic Benefits –--
Medical uses- One ingredient in Banshlochan an Ayurveda medicine
   
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc.- Various containers, combs , soop, fodder, fences, camp (Pall)  roof and wall,  Hockey (Hingor) stick. In old age, bridges were made by bamboo. Musical instrument as fluet.
Food Uses – Banskil Vegetable
Decoration – Less but is used
                   Myths, Religious Importance and Traditions
  Bamboo is symbol of friendship.
 Lord Krishna had deep relation with bamboo and his name are derived from bamboo as Venugopal, Vanshidhar (due to his playing bamboo fluet).
--------------------Auspicious for making pens ------------------
Bamboo and other varieties are perceived as auspicious pens.
 ----------- Stick for Anchorite---
 Anchorites use Bamboo stick while they are travelling 
         _ Representing Punya Nakshatra---------
Bamboo is representative of Punarvasu Nakshatra in Hindu astrology.

----------------In Marriage --------------
 In Hindu marriage rituals, Bamboo Sup, Soop (सूप) is used at the time of Kanya dan by brother  and father.
 Bamboo baskets are also used in marriage ritual.
------------ Bamboo flowering year means Plague Year --------------
  It was believed that  bamboo flower after twelve years gap and flower together. In past, there was a myth that the year of bamboo flowering meant plague was on the way.
               ------------------Uses in Funeral Ceremony -------------
   Bamboo logs are compulsory used in carrying dead body to crematorium even on motor or ambulance.
  The fire (burning uple, dry cow dung) container is always put on triangle base made by bamboo.
 Bamboo log used for carrying dead body is never burnt but thrown out. Bamboo burning is perceived calling forefather’s cursing (Pitri Dosh)


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Myths and Religious Importance of Safed Musli in Uttarakhand 
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 25
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name –  Chlorophytum borivilianum
Local Name – Safed Musli, Safed Moosli
Hindi Name –Safed Musli, Safed Moosli
Sanskrit Name –Mushali 
                                           ---Economic Benefits –--
Medical uses- Roots are used as * tonic
Food Uses – Leaves are cooked for vegetables
                   Myths, Religious Importance and Traditions
   Safed Musli/Moosli/Musali is used in Rahu Shanti Rituals.  Astrologers advice that the effected person by Rahu Grah should take bath with  mixer of Bala, Kuth, Nagmotha, Sarson, Laja, Lodh Devdar and Musli for eight Tuesday for downing or ending the Rahu’s negative effects.
  Karmkandi Pundit also use Musli in Devi Pujan.
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Myths, Religious Importance, uses in Astrology and Tantra-Mantra of Khirni, Milk Tree in Uttarakhand 
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 26
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name –Manilkara hexandra
Local Name –Khirni
Hindi Name –Khirni
Sanskrit Name –Kshirini , Nimbbij
                                           ---Economic Benefits –--
Medical uses- Used in disease as –Anorexia , cough-cool, bronchitis and colic 
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc.-Wood are very hard and used for heavy structure work as gates, beams etc
Food Uses –Fruits edible
Decoration – Flowers used in garland
                   Myths, Religious Importance and Traditions
 In Hindu Astrology, Astrologers suggest using Khirni root for satisfying the curs or negative effects of Chandra Rashi.)चन्द्र ग्रहशांति )
  Astrologers suggest for putting the Khirni roots with two Rudraksh seeds on a white cloth or white tag and is put into an amulet and tied on hand or hung on neck onMonday at chandra Hora and Chandra Nakshtra. The purifying mantra for the Khirni root is as under –
चन्द्र बीज मंत्र--- ऊँ श्रां, श्रीं , श्रौं स: चंद्रमसे नम:
or
ऊँ सों सोमाय नम:
  Astrologers suggest donating Khirni fruits on Monday for pacifying bad effect or enhance good effect of Chadra nakshtra (Kark rashi too)
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      उत्तराखंड  परिपेक्ष में   छोपछीनि /कुकरदार   की सब्जी ,औषधीय व अन्य   उपयोग और   इतिहास

                                                 
          History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of  Himalayan Smilax,  Smilax aspera  in Uttarakhand context

          उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  जंगल से उपलब्ध सब्जियों  का  इतिहास - 39

              History of Wild Plant Vegetables ,  Agriculture and Food in Uttarakhand -39                       
         
           उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --  80

       History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -80
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      आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम - Smilax aspera
सामन्य अंग्रेजी नाम - Smilax, Prickly Ivy
संस्कृत नाम -छोपछीनि , द्वीपांतरा
हिंदी नाम -कुकुरदार
छोपछीनी /कुकरदार  लतानुमा पौधा है जो पेड़ों पर चढ़कर 45 मीटर तक लम्बी लता रूप ले लेता है। छोपछीनी /कुकरदार  के पत्ते गदगदे व हृदय शक्ल के होते हैं। सफ़ेद फूल वाले छोपछीनी /कुकरदार के फल पककर लाल व सुखकर भूरे या काले हो जाते हैं। छोपछीनी /कुकरदार हिमालय में 1200 -2500 मीटर की ऊंचाई में पाए जाते हैं।
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संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - भावप्रकाश निघण्टु में द्वीपांतरा नाम से उल्लेख हुआ है।
 
     --- औषधीय उपयोग ---
छोपछीनी /कुकरदार का मुख्य उपयोग औषधि हेतु होता आया है।  छोपछीनी /कुकरदार के विभिन्न भागों का उपयोग , सिफिलिस , साजोफेनिया, पेट दर्द ,  बबासीर , नपुंसकता जैसी बीमारियां दूर करने हेतु होता है।
       -----  भोज्य पदार्थ उपयोग ---
  छोपछीनी /कुकरदार के  कच्चे डंठल  की कलियों से हरी सब्जी बनाई जाती है जैसे एस्पेरेगस की सब्जी बनाई जाती है।   छोपछीनी /कुकरदारके कंद को किसी तरीदार सब्जी में भी डाला जा सकता है।  किन्तु मुख्यतया  छोपछीनी /कुकरदारडंठल कली की सब्जी या कंद का सब्जी में उपयोग वास्तव में वैद्यों के परामर्श से ही उपयोग किया जाता है।  जब अकाल या कम सब्जी का समय हो तो  छोपछीनी /कुकरदारके क्लीनुमा डंठलों की सब्जी बनाई जाती है। 
   



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      उत्तराखंड  परिपेक्ष में  सिरळ , भूकुशमंडी   की सब्जी ,औषधीय व अन्य   उपयोग और   इतिहास

                                                 
          History /Origin /introduction, Food uses , Economic Uses of  Himalayan  Indian Kudzu , Pueraria tuberosa  in Uttarakhand context

   उत्तराखंड  परिपेक्ष  में  जंगल से उपलब्ध सब्जियों  का  इतिहास - 40

              History of Wild Plant Vegetables ,  Agriculture and Food in Uttarakhand -  40                     
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --   81

       History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -81
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 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
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वनस्पति शास्त्रीय नाम - Pueraria tuberosa
सामन्य अंग्रेजी नाम - Indian Kudzu
संस्कृत नाम -भूकुशमंडी
हिंदी नाम - सिरळ , सुराल , बिलाईकंद , बिदारी  कंद
नेपाली नाम - बराली कुंद
उत्तराखंडी नाम - सिरळ
 सिरळ एक लतावान , झाडी नुमा झाडी है जिसके पत्तियां 10 से 15 सेंटीमीटर लम्बी होती हैं। सिरळ  के  कंद उपयोग औषधि व सब्जी बनाने हेतु होता है। 
जन्मस्थल संबंधी सूचना - सिरळ का जन्मस्थल हिमालय ही है , चीन में भी पाया जाता है। विंग मिंग केयुंग  की पुस्तक  Pueraria the genus में इस प्रजाति के कई स्पेसीज व  इस जिनस का कृषिकरण होने  और फिर कृषिकरण से प्रजाति वन वनस्पति में तब्दील होने का वर्णन है इस पुस्तक में इस कंद के कई उपयोग व परीक्षओं का भरपूर वर्णन भी है। वास्तव में सिरळ  एक खर पतवार है और जब भी खेती उगाई गयी तब तब इस वनस्पति ने अन्य खेती को नुक्सान पंहुचाना शुरु  कर दिया था।

संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - विदारी कंद का उल्लेख सुश्रुता संहिता , भावप्रकाश निघंटु , धन्वन्तरि निघण्टु , कैव्य देवा निघण्टु व राज निघण्टु में हुआ है।
औषधीय उपयोग -सिरळ  कंद का अलग या अन्य हर्ब्स में मिश्रण से बुखार , जोड़ों के दर्द जय बीमारी निवारण हेतु व स्त्रियों में दूध बढ़ाने , वीर्य वर्धन , मांस वृद्धि व त्वचा असुन्दरी हेतु उपयोग होता है।

      -सिरळ  की सब्जी -
सिरळ  कंद से सब्जी वैसे ही बनाई जाती है जैसे पिंडाळू , आलू से बनाई जाती है।  इसको उबालकर नमक मिलाकर भी सलाद रूप में खाया जाता था।  अब लगता नहीं सिरळ खाया जाता है।  इसकी जड़ें बहुत मंहगी बिकती है




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Bhishma Kukreti

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Plants used in Lord Shiva Rituals and Worships in Uttarakhand
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Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 31
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
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  Mahabharata and Lord Shiva influenced the most Uttarakhand in terms of religious rituals, culture and society.
   There are following important plants for worshipping or performing Lord Shiva Rituals.-
                     Bel or Wood Apple
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Botanical name –Aegle marmelos correa
Local name – Bel
Hindi Name –Bel, Bael
Sanskrit Name –Vilva, Bilva
Economic benefits –Fruits are used for pickle and medical uses.

                   Myths, Religious Importance and Traditions
  Bel or Wood apple is a sacred tree. The three leaves together of Wood Apple or Vilva or Bel look like trident (Trishul ) the emblem of Lord Shiva.  It is belief that these three leaves represent Shiva for s ‘Creation’, Preservation’ and ‘Destruction’.  The three leaves of Bel or wood apple as Sin removers too. People pay tribute to Lord Shiva in his temple by offering Vilva/bel leaves as bilpatri/belpatri on Shiv Linga
 Shiva devotees worship bel tree in moths as Marshirsha and  Falgun. .
  In Banhadadharma Puran, the sacred tree came in existence from the cut breast of Lakshmi while she was worshiping Shiva.That is why bel fruit is called fruit of destiny.
 As Banhi Puran, Lakshmi was cow in a birth and from her dung, Bel tree was born.
 There are stories about bel related to Lord Rama too.
In Skand Puran, the tree merged from sweat from  Parvati forehaed.
        Likewise, there are many other region wise folk stories and stories of  legends connected with Bel tree in Shiv Puran, Garur Purans,.
  Ritual Performers use Bel wood for Homa or havan.
 There are more than 108 mantras for offering belpatra on Shiva Linga.

Myths, Religious Uses and Traditions about Plant Ak , Milk Weed  for Lord Shiva rituals

Botanical name –Calotropis procera
Local Name – Ank, Ak
Hindi Name –Ak
Sanskrit Name – Madar
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- used in stomach ulcer, diarrhea, constipation, toothache, cramps, joint pains etc.
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc.- Fibers from stem and was sued in making ropes, bags and paper. The plant is useful for soil fertility too.
                                            Ak for Rituals
  Ak has white flowers with blueish color touch, Therefore, the Ak is connected with the blue throat of Lord Shiva by gulping and stopping poison at the time of Samudra Manthan or ocean Churning. 
Myths, Religious Uses and Traditions about Rudraksha, Utrasum Bead Plant for Lord Shiva Rituals
      Rudrakasha beads are called tears of l Lord Shiva and people perceive Rudrakasha beads as auspeciou  beads and use in Shiva worshipping
Botanical name – Elaeocarpus granitus
Local Name – Rudraksha
Hindi Name –Rudraksha
Sanskrit Name – Rudrakasha
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- As Electromagnetic and inductive uses
         Myths, Religious Uses and Traditions about Datura Plant for Lord Shiva rituals
  Datura plants are symbolic to Lord Shiva for
Botanical name – Datura metel
Local Name – Dhatura
Hindi Name – Dhattura
Sanskrit Name –Dhattura
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Ayurveda medicines used in curing asthma, impotency, glaucoma, urine troubles and anesthetic uses.
Myths, Religious Uses  and Traditions  about Peeli Kaner, Lucky Nut Plant for Lord Shiva rituals
   Lord Shiva liked Peeli Kaner and people offer Peele Kaner flowers to Lord Shiva
Botanical name –Thevitia peruviana
Local Name – Peeli Kaner
Hindi Name – Peeli Kaner
Sanskrit Name – Haripriya
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- A poison plant but its parts are used in Ayurveda medicines
Antifungal uses for painting trees base

Myths, Religious Uses and Traditions about Chandan, Sandal Plant for Lord Shiva rituals
             Apart from Chandan wood being used in funeral, homa /yagya, in various social functions, making agarbattis; Hindus  paste Chandan paste to Shiva Linga in three lines, People also use Chandan paste on putting on forehead. It is believed that Lord Shiva is always in highly inflammable state and it is essential to paste Chandan paste on Shiv Linga for calming down Lord Shiva.   
Botanical name – Santalum album
Local Name –Chandan
Hindi Name – Chandan
Sanskrit Name – Anindita
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Sandal oil is used in treating skin disorder, acne, dysentery , gonorrhea and other disorder   
Myths, Religious Uses  and Traditions  about  Hemp , Cannabis Plant for Lord Shiva rituals
  People believe that Lord Shiva uses Bhang for anti-cold purpose. People also believe that Lord take hemp for lowering down his anger and for long meditation.
  On Shiv Ratri day, people take hemp juice (crushed seeds with milk and other spices).  People also take Bhang leaves Pakaude on that auspicious day.
Botanical name – Canabis sativa
Local Name –Bhang
Hindi Name –Bhang
Sanskrit Name – Bahuvadini
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- used in various Ayurveda medicines.
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc. wood, fibers for various uses. In past hemp fiber clothing was very common In Uttarakhand
Food Uses – Important and a must spices of Uttarakhand.
Decoration -
Myths, Religious Uses and Traditions  about Ber, Jujube  Plant for Lord Shiva rituals
   People offer Jujube fruits to Lord Shiva, especially is compulsory on Shiva Ratri. People offer ber /Jujube as jujube fruit is symbolic for longevity and gratification of desire.
Botanical name –Zizyphus mauritiana
Local Name – Ber
Hindi Name –Ber
Sanskrit Name – Badari
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Fruits are used as sedative in cuts and injuries. Ber parts are  used in various medicines
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc.--hard wood for various wood uses .
Food Uses – Fruits as fruits and for making beverages and making pickles too.
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Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai 2017
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