Author Topic: Folk Songs Of Uttarakhand : उत्तराखण्ड के लोक गीत  (Read 47277 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मेको पाड़ नि दीण पितैजी (गढ़वाली लोकगीत )


इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती


मेको पाड़ नि दीण पिताजी मेको पाड़ नि दीण पिताजी
उख पाड़ी लोग खराब होंदन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी उख पाड़ी लोग खराब होंदन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी
उख फाणु मा बाड़ी खान्दन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी उख फाणु मा बाड़ी खान्दन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी
उख मा बैणि की गाळी दीन्दन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी उख मा बैणि की गाळी दीन्दन
मेको पाड़ नि दीण पिताजी उख पाड़ी लोग खराब होंदन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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By -प्रयाग पाण्डे

यो बाटो कां जान्या होला ?

यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा ।
चमकनी गिलास सुवा रमकनी चाहा छ ।
तेरी - मेरी पिरीत को दुनिये ड़ाहा छ ।
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा ।
जाई फ़ुली , चमेली फुली, देणा फुली खेत ।
तेरो बाटो चानै - चानै उमर काटी मेता ।
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा ।
गाडा का गडयार मारा दैत्या पिसचे ले ।
मैं यो देख दुबली भ्यूं तेरा निसासे लै ।
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा ।

तेरा गावा मूंगे की माला मेरा गावा जंजीरा।
तेरी - मेरी भेंट होली देबी का मंदीरा।
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा ।
अस्यारी को रेट सुवा अस्यारी को रेट ।
यो दिन यो मास आब कब होली भेंट ।
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा।
भावार्थ :
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर ।
चमकते गिलास में तेज रंग की चाय रही हुई है ।
तुम्हारे , मेरे प्रेम से सभी लोग ईर्ष्या करने लगे हैं ।
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर ।
जाई और चमेली के फूल खिले हैं , खेतों में सरसों फूली है ।
तुम्हारी राह देखते - देखते मैंने अपनी सारी उम्र मायके में ही बिता दी है ।
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर ।
दैत्य- पिचास ने छोटी नदी की मछलियाँ मार डाली हैं ।
देखा , तुम्हारे विरह में कितनी दुर्बल हो गई हूँ ।
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर।
तुम्हारे गले में मूंगे की माला है और मेरे गले में जंजीर ।
तुम्हारे और मेरी भेंट होगी देवी के मन्दिर में।
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर।
असेरी (स्थानीय माप का बर्तन )का घेरा ।
आज के दिन , इस माह ,हम मिले , अब कब भेंट होगी ?
इस राह से किधर जा रही हो तुम ? सीधे देवी के मंदिर की ओर ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

रिता कूडों की तीसा भांडों की -२
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की

कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

सर्ग तेरी आशा कब आलू चौमासा -2
गंगा जमुनाजी का मुल्क मनखी गोर प्यासा

कख लगाण छविं
क्या रूडी क्या हयुन्द, पाणी नीच बूंद-2
फिर बणी च योजना बल देखा अब क्या हून्द

कख लगाण छविं
रिता कूडों की तीसा भांडों की -२
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

बैख डुबयाँ दारू मा नौना टुन्न यारू मा-2
कजेणी आन्दोलन चलाणी, दफ्तर बाजारू मा

कख लगाण छविं
कच्ची गद्न्य छान्यु मा, पक्की खुली दुकान्यु मा-2
दारू का उद्योग खुल्याँ उंकी मेहर्बंयु मा

कख लगाण छविं
रिता कूडों की तीसा भांडों की -२
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

कुड़ी टूटणी ठेस मा छिपाडा लाग्यां रेस मा-2
भीतर मूसा बिराला बस्याँ मनखी भैर देश मा

कख लगाण छविं
न भीतर न भैर कखी भी नीच खैर-२
दिन मा गिज्युं बाघ रात भ्युन्चाला की डैर

कख लगाण छविं
रिता कूडों की तीसा भांडों की -२
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की

कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

जंगल घेर बाड़ मा, खेती बाड़ी त्याड मा-२
सार खायी बान्दरून, सगोडी गै उज्याड़ मा

कख लगाण छविं
कर्ज गाडी पैन्छू, फैलूं मा अल्झी भैन्सू-2
गोर दुब्याँ बाड़ मा सूखू पोडी ऐंसू

कख लगाण छविं
रिता कूडों की तीसा भांडों की -२
बगदा मनख्यूं की रडदा डाँडों की

कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं
ये पहाड़ की कुमौ गड़वाल की
कख लगाण छविं कैमा लगाण छविं

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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त्यारा रूप कि झौळमां

त्यारा रूप कि झौळमां, नौंणि सि ज्यू म्यारु
गौळि भि ग्याई, जौळि भि ग्याई,
ना हैंस ना हैंस, दंतुड़ि दग्येली, भौंरु ना बैठुं,
उंठुंड़ि ढकेली
रंग देखीकि त्यारु हो-------------- रंग देखीकि त्यारु,
बुरांस बिचारु खौळ्ये भी खौळ्ये भी ग्याई, बौळ्ये भी ग्याई,
कख बटि लैई स्य घुघती सि सांखी, कख पाई
होली सि छुंयाल आंखि
तौं आँख्यूँको रगर्याट हो---------------------तौं आँख्यूँको रगर्याट
, त्यारा मन की बात- खोलि भी
खोलि भी ग्याई, बोलि भी ग्याई,

द्यब्तौं की टक्क त्वैंमां, मनख्यौं कु ज्यूं चा,
मुखड़िका सासा चकोर लग्यूं
चा तेरि मुखड़िका सारा चकोर लग्यूं चा
त्वै देखी हे राम! हो----------------- त्वै देखी हे राम! स्यु ब्यखुनी को घाम,
स्येळ्ये भि अछ्ल्ये भी ग्याई, स्येळ्ये भि ग्याई
लो अछ्ल्ये भी ग्याई
जै कैमा क्वी सुद्दी माया नि लाँद, कौज्याल
पाणिमा छाया नि आंद
त्यारा छाळा मन बीच हो-------- त्यारा छाळा मन बीच तस्वीर कैकी,
जाणि भी हालि, पछ्याणि भी हालि,
जाणि भी हालि, पछ्याणि भी हालि
त्यारा रूप कि झौळमा, नौंणि सि ज्यू म्यारु
गौळि भि ग्याई, जौळि भि ग्याई,
गौळि भि ग्याई लो जौळि भि ग्याई.....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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धरती हमरा गढ़वाल की

धरती हमरा गढ़वाल की,धरती हमरा गढ़वाल की,
कथगा रौंतेली स्वाणी चा,कथगा रौंतेली स्वाणी चा
धरती हमरा गढ़वाल की,धरती हमरा गढ़वाल की (कोरस)
कथगा रौंतेली स्वाणी चा,कथगा रौंतेली स्वाणी चा (कोरस)
हो……कथगा रौंतेली स्वाणी चा, हो …
हो….कथगा रौंतेली स्वाणी चा, हा …कथगा रौंतेली स्वाणी चा (कोरस)


पांच बदरी, पांच केदार, पांच प्रयाग एखी छन, पांच प्रयाग एखी छन
पांच प्रयाग एखी छन,पांच प्रयाग एखी छन (कोरस)
पांच पंडोव ऐनी एखी, भाग हमरा धन धन, भाग हमरा धन धन
भाग हमरा धन धन्, भाग हमरा धन धन् (कोरस)
कुण्ड छीन, इक ताल छीन, मठ यखे महान छीन
मठ यखे महान छीन,मठ यखे महान छीन
ताल सहस्त्र घाटी, फुलु की असमान छीन
हो……गंगा जमुना, एखी बटी सभु की, भूख तीस बुझाणी चा
हो… कथगा रौंतेली स्वाणी चा
धरती हमरा गढ़वाल की,कथगा रौंतेली स्वाणी चा, (कोरस)
हो….कथगा रौंतेली स्वाणी चा, हा …कथगा रौंतेली स्वाणी चा (कोरस)

डांडी कांठीयों का देखा, लैन्जा लग्यान,लैंजा लग्यान
लैंजा लग्यान, लैंजा लग्यान (कोरस)
देवतों की धरती मा, मनखी बस्यान, मनखी बस्यान
मनखी बस्यान, मनखी बस्यान (कोरस)
देवदार बुरांश बाँझा, कुलै पय्या डाली कुलै पय्या डाली
देब्तों रोपी, मन्ख्युन पाली
हो ……..भेद देव -देवता मनखी को डोंरु – थाली मिटाणी चा
कथगा रौंतेली स्वाणी चा, (कोरस)
धरती हमरा गढ़वाल की,कथगा रौंतेली स्वाणी चा, (कोरस)


पति व्रता नारी एख, बांध कीसाण छीन, बांध कीसाण छीन
बांध कीसाण छीन, बांध कीसाण छीन (कोरस)
तीलू रौतेली एख, रामी बौराण छीन, रामी बौराण छीन
रामी बौराण छीन, रामी बौराण छीन (कोरस)
भांडू का पवड़ा सुणा, बीरू का देखा गढ़
बीरू का देखा गढ़,बीरू का देखा गढ़
नरसिंह,नागराजा, पंडों का देखा रण
हो… तुम ते लाकुड, दमो, ढोलकी.. धै लगे की, भटियाणी च,
कथगा रौंतेली स्वाणी चा
धरती हमरा गढ़वाल की ,धरती हमरा गढ़वाल की,कथगा रौंतेली स्वाणी चा, (कोरस)
हो….कथगा रौंतेली स्वाणी चा, हा …कथगा रौंतेली स्वाणी चा (कोरस)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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मथी पहाड़ भति निस गांगडु
स्कुल दफ्तर गौं बजार भति

मथी पहाड़ भति निस गांगडु
स्कुल दफ्तर गौं बजार भति

मनख्यूं दार धार धार भति
हिटण हिटण लग्यां छं
हिटण हिटण लग्यां
हिटण हिटण लग्यां छं
भैठाना कु लगा नि
बाटा भरयां छं सड़कियुं मा जगा नि
दीदा कख जाणा
भैजी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
दीदी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
भुला कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा

बेरोजगार ज्वानि सड़कियुं मा
दुकी लाचार बुढ्पा सड़कियुं मा

बेरोजगार ज्वानि सड़कियुं मा
दुकी लाचार बुढ्पा सड़कियुं मा

भविष्य नौन्याल लुक सड़कियुं मा
माँ भैनों कु दुक सड़कियुं मा

हिटण हिटण लग्यां छं
हिटण हिटण लग्यां
हिटण हिटण लग्यां छं
भैठाना कु लगा नि
बाटा भरयां छं सड़कियुं मा जगा नि

बोला कख
बोला कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
कख क कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
सबी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा

भूक ना तिस ना दर ना फ़िक्र छ
मुठी बोटी छं कसी कमर छ

भूक ना तिस ना दर ना फ़िक्र छ
मुठी बोटी छं कसी कमर छ

हाथ मा मुछ्ला आँखों मा आंगार
खुथ धरती मा आकास नजर छ

हिटण हिटण लग्यां छं
हिटण हिटण लग्यां
हिटण हिटण लग्यां छं
भैठाना कु लगा नि
बाटा भरयां छं सड़कियुं मा जगा नि

दीदा कख जाणा
भैजी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
दीदी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
भुलू कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा

बाबा बी दादा बी नाती सड़क मा
एक वें सबी जाती सड़क मा

बाबा बी दादा बी नाती सड़क मा
एक वें सबी जाती सड़क मा

माँ बेटी सासु ब्वारी सड़क मा
आच बनी सबी चिंगारी सड़क मा

हिटण हिटण लग्यां छं
हिटण हिटण लग्यां
हिटण हिटण लग्यां छं
भैठाना कु लगा नि
बाटा भरयां छं सड़कियुं मा जगा नि

बोला कख
बोला कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
कख क कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
सबी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा

मथी पहाड़ भति निस गांगडु
स्कुल दफ्तर गौं बजार भति

मथी पहाड़ भति निस गांगडु
स्कुल दफ्तर गौं बजार भति

मनख्यूं दार धार धार भति
हिटण हिटण लग्यां छं
हिटण हिटण लग्यां
हिटण हिटण लग्यां छं
भैठाना कु लगा नि
बाटा भरयां छं सड़कियुं मा जगा नि

बोला कख
बोला कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
कख क कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा
सबी कख जाणा छं तुम लोक
उत्तराखंड आंदोलन मा

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सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा।

........कण लाग जी आप थे जरूर बतवा जी

सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली …२
अन्देरी रात , बरखा की झामणाट , खुद तेरी लागली
सोणा का मैना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली ..
चौ डाण्ड्यों पोर सर्ग गगड़ान्द…२
हिरिरिरी पापी बरखा झुकी आंद…२
बडुली लागाली ई ई ई
सोणा का मैना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली
सोणा का मैना , ब्वे कनु के रैणा ...

गाढ़ गद्नियों सी , स्विस्याट घनाघोर ..…२
तुम परदेस , मी याख़ुली घोरा..…२
ज़ीकूड़ी डॉराली ई ई ई
सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली
अन्देरी रात , बरखा की झामणाट , खुद तेरी लागली
सोणा का मैना , ब्वे कनु के रैणा ...
.
यकुलू सरेला , उनी प्राणी क्वासु ..…२
सेरा बस्ग्याल , अब दन मन आंसू..…२
आखी धोलाली ई ई ई
सोणा का मेहना , ब्वेकनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली
सोणा का मैना , ब्वे कनु के रैणा ...
.

तेरा नौन्यल , आर पूँगाद्यों धान.....२
बरखा का दीडो माँ घांस कु बे जान.....२
झूली मेरी रूझालीई ई ई
सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली
सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा

सोणा भादों बर्खिकी चली गैनी -2
ऋतू गेनी मेरी आँखें नि ऊबेइनि -2
कनु के उबाली ई ई ई
सोणा का मेहना , ब्वे कनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली
अन्देरी रात , बरखा की झामणाट , खुद तेरी लागली
सोणा का मैना , ब्वेकनु के रैणा , कुएड़ी लौन्काली .
अन्देरी रात , बरखा की झामणाट , खुद तेरी लागली

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डांडा चली जौंला चकोर (श्रृंगार, प्रेम लोक गीत )
(Garhwali , Kumaoni Love Folk Song )

( साभार - डा नन्द किशोर हटवाल )

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

डांडा चली जौंला चकोर
ये घामिला बार चकोर
ये चैत बैसाख चकोर
तू स्याळी मी भीना चकोर
गौड़ भैंस्यों दगड़ी चकोर
कन भलो लगंद चकोर
निति का बौडर चकोर
कन स्वाणो लगंद चकोर
रिम खिम बौडर चकोर
हर्याळी घूरा चकोर
उन्याणी पातल चकोर
पंवाळी कांठा चकोर
बुरांशी पातल चकोर
निंगाली छमा चकोर
सौ हाथ सागर चकोर
ये चैत बैसाख चकोर
मुल्या मुल्या घाम चकोर
ठंडी ठंडी हवा चकोर
बुग्या बुग्या घास चकोर
छूम्यां छुम्या पाणी चकोर
कन भलो मन्यान्द चकोर
ये चैत ....
कन ऋतु जाण्यांदी चकोर
बारा ऋतु जाण्यांदी चकोर
बण प्वथल्यों बासंदी चकोर
बण फून्यों फुलंदी चकोर
डांडा चली जौंला चकोर
ये घामिला बार चकोर
भैंस्यों का दगड़ा चकोर
भैंसवाळा ह्वेक रला चकोर
तू घास काटली चकोर
मी पूळी बांधलु चकोर
तू रवटि पकैली चकोर
मी भुज्जी बणौलू चकोर
तू छांछ छवोळली चकोर
मी नौणि गाडलू चकोर
डांडा चली जौंला चकोर
ये घामिला बार चकोर
तखी ली जौंला भैंसी चकोर
डांडा चली जौंला चकोर

कन भलो मन्यान्द चकोर
ये सौण अर भादों चकोर
चौमास्यों का दिन चकोर

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डांडा औ हे ! साबाशी जवा

(Garhwali , Kumaoni Love Folk Song )

( आभार डा नन्द किशोर हटवाल )

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

मेरी साबाशी जवा ! डांडा औ हे !
तेरा बाना जवा ! डांडा सारी गोठ , डांडा औ हे !
तेरा बाना जवा ! घौर छोड्यो बार , डांडा औ हे !
उखि पिजौला भैंसी , उखि चरौला गोर , डांडा औ हे !
उखि छांछ छोळळा , उखि नौण पिंडोला , डांडा औ हे ! उखि गळौळा घिउ , उखि घास काटला , डांडा औ हे !
उखि पूळा बांधला , उखि लगौला हौळ , डांडा औ हे !
मेरी निगुरी जवा ! डाळा लांदू फांस , डांडा औ हे !
मौरणो ह्वै जैन , त्वी कबी नि छोड़ू , डांडा औ हे !
हे निगुरी जवा ! उखि पाणी को धारो , डांडा औ हे !
उखि सतु को भारो , उखि लिजौला हौळ , डांडा औ हे !

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तेरि सूरत देखि रजुवा निन् नैं औंनी -- प्रेम श्रृंगार लोकनृत्य गीत

(Garhwali , Kumaoni Love Folk Song )
( आभार डा नन्द किशोर हटवाल ,उत्तराखंड हिमालय के चांचड़ी गीत व नृत्य )

इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

ओ तेरि सूरत देखि रजुवा , निन् नि औंनी एक झलक।
ओ मेरि कमला तेरि बलाया , बनवासा बिजुलि चमक।
ओ आसमानी जहाज उड़ो , निन् नैं औंनी एक झलक।
ओ रंगूनै डाकै कु रजुवा बनवासा बिजुलि चमक।
ओ पंछि हुनू उड़ि औंनू ,निन् नैं औंनी एक झलक।
ओ मै बिना पांखैकू कमला , बनवासा बिजुलि चमक।
ओ ऊन खोली बाटो लायो ,निन् नैं औंनी एक झलक।
ओ भैंसि की थोरिल कमला ,बनवासा बिजुलि चमक।
ओ क्या दुःख दैबले दिया ,निन् नैं औंनी एक झलक।
ओ क्या मेरी खोरील कमला , नवासा बिजुलि चमक।

Garhwali , Kumaoni Folk Songs, Community Poems,

 

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