Author Topic: Champawat - चम्पावत  (Read 44311 times)

Rajen

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Champawat - चम्पावत
« on: January 03, 2008, 12:07:45 PM »
 
CHAMPAWAT

76 kms. from Pithoragarh, Champawat is situated 1615 meters. above sea level. Champawat, once the capital of the rulers of the Chand dynasty,  is    famous  for its natural beauty and well known temples.  The ancient fort, now houses headquarters of the Tehsil office. A historical spot, Champawat has many well known temples of high artistic value. The Baleshwar temple is the noted attraction of Champawat. The Nagnath temple at Champawat is also an excellent example of ancient architecture of Kumaon. 4 - 5 kms. from Champawat is the   'Ek Hathiya Ka Naula', which is said to have been constructed in just one night by the one handed artisan. The story of Golla Devta is also associated with Gorilla Chaur of Champawat.     It was in Champawat that Lord Vishnu is said to have appeared as 'Kurma avatar' (incarnation as tortoise). This hill is also known as Mt. Kandev.  There  is  a  small  fort  at   Champawat.   Jim Corbett had  come  to  this region in the first decade of the twentieth century in order to hunt for man eating tigers.
 
 

Rajen

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Re: CHAMPAWAT
« Reply #1 on: January 03, 2008, 12:12:42 PM »
General Information 

 

 
CHAMPAWAT:

Season :Round the year

Clothing Summer: light Woolens or cotton,
Winter: Heavy Woolens

Language: Kumaoni, Hindi and English

Local Transport : Jeeps/Taxis/Ponies/Dandi

Area : 5 Sq. kms.
 

Rajen

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Re: CHAMPAWAT
« Reply #2 on: January 03, 2008, 12:15:03 PM »
एक हथिया नौला (एक हाथ से बना हुआ नौला)

          यह ऐतिहासिक धरोहर है शहर से मात्र् 4 किमी दूर चम्‍पावत मायावती पैदाल मार्ग के किनारे स्थ्लि है जब चन्‍द राजा ने श्री जगन्‍नाथ मिस्‍त्री से गालेश्‍वर मंदिर बनवाया तो राजा ने ऐसी कला का अन्‍यत्र् प्रचार प्रसार न हो सके, इस हेतु मिस्‍त्री का दाहिना हाथ कटवा दिया तब मिस्‍त्री  ने अपनी लडकी कुमारी कस्‍तुरी की मदद से बालेश्‍वर मंदिर से भी ज्‍यादा भव्‍य कलात्‍मक इस ऐतिहासिक नौला (वावली) का निर्माण कर दिखा दिया कि प्रबल इच्‍छा शक्ति  से कोई भी कार्य असम्‍भव नहीं यह कलात्‍मक द्वष्टि से एक अदभूत नमूना है


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Re: CHAMPAWAT
« Reply #3 on: January 03, 2008, 12:16:09 PM »
घटोत्‍कच का मंदिर

          यह शहर से 2 किमी, की दूर चम्‍पावत तामली माटर मार्ग के किनारे पर बसा है यह भीम पुत्र् घटोत्‍कच का मंदिर है महाभारत की लडाई में घटोत्‍कच का सिर धड से कट कर यहां पर गिरा यह क्षेत्र् एक जलाशय के रूप में था पांडव अपने पुत्र् के सिर को न देखकर बहुत दुखी हुए तो स्‍वप्‍न में स्‍वंय घटोत्‍कच ने बताया कि मेरा सिर अमुक क्षेत्र् में है तो पांडव लोग डुढते हुए यहां आये व जलाशय को देखकर घबरा गये कि कैसे सिर को निकाला जाय उन्‍होंने मॉ भगवती अखिल तारणी से प्रार्थना की तथा भीम ने गदा प्रहार कर जलाशय को तोड डाला घटोत्‍कच का श्राद्व किया जिसके चिन्‍ह, हवन कुन्‍ड, नेदी,दीपे आदि आज भी खण्‍डहर के रूप में विद्यमान है जिस स्‍थान पर श्राद्व किया वह शिला धर्म शिला के नाम से नाम से जानी जाती है धार्मिक पर्वो पर आज भी यहां पर स्‍नान करने का महत्‍व है


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Re: CHAMPAWAT
« Reply #4 on: January 03, 2008, 12:19:04 PM »
दीप्‍तेश्‍वर महादेव

          शहर से 2किमी दूर पूर्व भी तरह चम्‍पावत पिथौरागढ मार्ग से मात्र् 1 किमी, दूर स्थित है उत्‍तर वाहनी गंडकी नदी के किनारे पर बसा बहुत संदर स्‍थान है यहां श्रद्वा से पूजा पाठ करने पर भाग्‍यवश दीप के दर्शन होते है यहां पर शिव गाथा काफी जाग्रत है


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Re: CHAMPAWAT
« Reply #5 on: January 03, 2008, 12:25:01 PM »
BALESHWAR MAHADEV

 Baleshwar Mahadev is the most artistic temple of  the   district.  There are  evidences that the  group  of    temples  dedicated  to  Baleshwar, Ratneshwar and Champawati Durga were built by the early kings of the Chand dynasty. The temple once had intricate structural features and a  sanctuary with a mandap. The intricate  carving still visible on the ceilings of these temples is an evidence of their ancient glory and artistic excellence.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: CHAMPAWAT
« Reply #6 on: January 03, 2008, 12:27:54 PM »

कुमाऊं के चंद शासकों की प्रथम राजधानी, चंपावत, संस्कृति एवं कला की धनी विरासत का एक प्राचीन शहर है। 10वीं से 18वीं सदी के बीच यहाँ उदित धार्मिक विश्वासों तथा सांस्कृतिक विचारों का अब भी कुमाऊं में पालन किया जाता है। यहां का बालेश्वर मंदिर बीते युगों के गौरव का झलक दिखाता है तथा चंपावत की यात्रा अतीत की आकर्षक झलकियों को देखने के समान है।


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Re: CHAMPAWAT
« Reply #7 on: January 03, 2008, 12:30:26 PM »
Stone Carving at Baleshwar

The entire kumaun region by virtue of its proximity with the Himalayas, has by tradition and legends been associated with numerous gods and goddesses. Champawat district has acquired the unique distinction of being the holy land of gods and therefore, temples of very large variety dedicated to diverse gods including local deities and demons of  restricted influence are spread over the whole expanse.  These temples  either   possess  the architectural features of great interest to a scholar or provide sustenance to faith through setting local, associated legends or fantastic design formations. The urge to come back to them is irresistible in as much as they exercise an impact on human psyche that beats all scientific logic.  Apart from this these temples are of  great interest to a casual tourist from the point of view of design, landscape around and several other features unique to them.



 

Rajen

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #8 on: January 03, 2008, 12:37:10 PM »
मां भगवती हिंगला

          शहर से 4 किमी, तथा चम्‍पावत- ललुवापानी मोटर सडक से 2किमी, दूर पर्वत शिखर पर मंदिर है यहां से चम्‍पावत मुख्‍यालय के विस्‍त`त क्षेत्र् का द्रश्‍य बहुत संदर दिखाई देता है यह उपशक्ति पीठ है नवरात्रयों में बडी भीड रहती है शहर के समीप स्थित होने से धर्मिक एंव पर्यटन की द्रष्टि से काफी महत्‍वपूर्ण स्‍थल है पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है

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Re: चम्पावत जिला - CHAMPAWAT -
« Reply #9 on: January 03, 2008, 12:39:00 PM »
ताडकेश्‍वर महादेव

          चम्‍पावत मुख्‍यालय से 5 किमी चम्‍पावत टनकपुर  मुख्‍य मोटर मार्ग के किनारे पर स्थित है भगवान शिव का बहुत ही प्राचीन मंदिर है चम्‍पावत नगर तथा ग्रामीण क्षेत्र् का श्‍मशान घाट भी है शासन द्वारा इसी के बगल पर शीतल मत्‍स्‍य पालन केन्‍द्र तथा कोल्‍ड स्‍टोर भी  बनाया है प्राचीन मान्‍यताऔं के अनुसार यहां पर स्थ्ति सीताकुन्‍ड में नहाने का बडा भारी महत्‍व है

 

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