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Idioms Of Uttarakhand - उत्तराखण्डी (कुमाऊँनी एवं गढ़वाली) मुहावरे

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 05:14:02 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Rajesh JI,

Sahi kaha aap ne. I have also heard this Muhawra..

Quote from: rajesh.joshee on October 29, 2007, 03:03:25 PM
एक और मुहावरा याद आ रहा ही 
मुसे की गाव गाव बिराऊ का खेल
अर्थात किसी दूसरे के दुःख में किसी को आनंद मिलता है.

राजेश जोशी/rajesh.joshee

Mehta ji
एक और मुहावरा है
सिसौण क जस पात उल्ट लै लागूं सुल्ट लै
अर्थात दुगल्ला पना करना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

राजेश जी.

एक मुहावरा एक देखिये ..
" माघ महीना बाकर हरायो, चैत महीना में हक हाक !!"

इसका मतलब है भी घटना के घटने के बहुत देर मे react करना !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एक प्रसिद्ध उत्तराखंड का मुहावरा  ..

"जैली  थाई, वैली पाई "

इसका मतलब है .. जिसने धीरज रखा या कष्ट को सहा उसने विजय पाई .


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक और उत्तराखंडी मुहबरा ..

"सौ घात चोर की , एक घात गुसाई क".

इसका मतलब चोर कितना भी शातिर क्यो न हो, एक बार को फस जाता है.   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक और कहावत

रात वियान क भाल -२ सिवनी 

इसका मतलब खोखले सपने

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




हाथा की त्येरी, तवा की म्यरी ।




लेजान्दी दाँ हौल, देन्दी दाँ लाखड़ु ।


कखी डालु ढली, खक गोजु मारी ।


जन मेरी गौड़ी रमाण च, तन दुधार भी होन्दी ।


स्याल, कुखड़ों सी हौल लगदु त बल्द भुखा नि मरदा क्या ?(मेंढकुं सी जु हौल लगदु त लोग बल्द किलै पाल्दा ?)


बुडीड पली ही इदगा छै, अब त वेकु नाती जु हुवेगी ।


हैंका लाटु हसान्दु च, अर अपडु रुवान्दु च ।


बर्तियुं पाणी क्य बरतण, तापियुं घाम क्य तापण ।


बाखुरी कु ज्यू भी नि जाऊ, बाग भी भुकु नि राऊ ।


लौ भैंस जोड़ी, नितर कपाल देन्दु फ़ोड़ी ।


जख मेल तख खेल, जख फ़ूट तख लूट ।


लगी घुंडा, फ़ूटी आँख ।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जख सोणु च तख नाक नि च, जख नाक च तख सोणु नि च ।


जाणदु नि च बिछी कु मंत्र, साँपे दुली डाल्दु हाथ ।


तू ठगानी कु ठग, मी जाति कु ठग ।


ठुलो गोरू लोण बुकाओ,छोटु गोरू थोबड़ु चाटु।



लूण त्येरी व्वेन नी धोली,आंखा मीकु तकणा।



भुंड न बास, अर शरील उदास ।


भिंडि खाणु तै जोगी हुवे अर ब्याली रात भुक्कु ही रै ।


अपड़ा जोगी जोग्ता , पल्या गौं कु संत ।


बिराणी पीठ मा खावा, हग्दी दाँ गीत गावा ।


पैली खयाली छारु(खारु), फ़िर भाडा पोछणी ।


ब्वारी खति ना... , सासु मिठौण लग्युं... ।


खाँदी दाँ गेंडका सा, कामों दाँ मेंढका सा ।(कामों दाँ आंखरो-कांखरो, खाँदी दाँ मोटो बाखरो ।)


खायी ना प्यायी, बीच बाटा मारणु कु आयी ।



बांटी बूंटी खाणि गुड़ मिठै, इखुलि इखुलि खाणि गारे कटै।


भग्यानो भै काल़ो, अभाग्यू नौनू काल़ो।


नोनियाल की लाईं आग , जनाना को देखुयुँ बाघ


जै बौ पर जादा सारू छौ वे भैजी भैजी बुन्नी


बाग गिजी बाखरी बिटि, चोर गिजी काखड़ी बिटि ।


म्यारू नौनु दूँ नि सकुदु , २० पता ख़ूब सकुदु ।

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