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Gopal Babu Goswami - गोपाल बाबू गोस्वामी उत्तराखंड के महान गायक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 11:08:58 AM



पंकज सिंह महर

Quote from: rbrbist on June 03, 2009, 04:56:26 PM
kya kisne CHANDER SINGH RAHEE JEE ke baare main suna hai


बिष्ट जी,
       चन्द्र सिंह राही जी उत्तराखण्ड के नामी गायक हैं, आजकल वे शायद रिकार्डिंग नहीं करते, उनका एक प्रसिद्ध गाना है "दारु बोला....." । उन्होंने लोक गाथाओं के ऊपर बहुत काम किया था, शायद गढ़्वाली लोककथाओं और जागरों को कैसेट के जरिये सबसे पहले उनकी ही आवाज में सुना गया था। ज्यादा जानकारी उनके बारे में अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन शीघ्र ही जानकारी आपके सामने होगी।

Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के छोटे से गांव चांदीकोट में जन्मे गोपाल बाबू गोस्वामी का परिवार बेहद गरीब था. बचपन से ही गाने के शौकीन गोपाल बाबू के घरवालों को यह पसंद नहीं था क्योंकि रोटी ज़्यादा बड़ा मसला था. घरेलू नौकर के रूप में अपना करियर शुरू करने के बाद गोपाल बाबू ने ट्रक ड्राइवरी की. उसके बाद कई तरह के धंधे करने के बाद उन्हें जादू का तमाशा दिखाने का काम रास आ गया.

पहाड़ के दूरस्थ गांवों में लगने वाले कौतिक - मेलों में इस तरह के जादू तमाशे दिखाते वक्त गोपाल बाबू गीत गाकर ग्राहकों को रिझाया करते थे.एक बार अल्मोड़ा के विख्यात नन्दादेवी मेले में इसी तरह का करतब दिखा रहे गोपाल बाबू पर कुमाऊंनी संगीत के पारखी स्व. ब्रजेन्द्रलाल साह की नज़र पड़ी
और उन्होंने नैनीताल में रहने वाले अपने शिष्य (अब प्रख्यात लोकगायक) गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' के पास भेजा कि इस लड़के को 'देख लें'. गिर्दा बताते हैं कि ऊंची पिच में गाने वाले गोपाल बाबू की आवाज़ की मिठास उन्हें पसंद आई और उनकी संस्तुति पर सांग एंड ड्रामा डिवीज़न की नैनीताल शाखा में बड़े पद पर कार्यरत ब्रजेन्द्रलाल साह जी ने गोपाल बाबू को बतौर कलाकार सरकारी नौकरी पर रख लिया.यहां से शुरू हुआ गोपाल बाबू की प्रसिद्धि का सफ़र जो ब्रेन ट्यूमर से हुई उनकी आकस्मिक मौत तक उन्हें कुमाऊं का लोकप्रिय गायक बना गया था. जनवरी के महीने में हल्द्वानी में होने वाले उत्तरायणी मेले में निकलने वाले जुलूस में हज़ारों की भीड़ उनके पीछे पीछे उनके सुर में सुर मिलाती थी. "कैले बाजै मुरूली",
"घुरु घुरु उज्याव है गो", "घुघूती ना बासा" और "रुपसा रमोती" जैसे गाने आज भी खूब चाव से सुने जाते हैं और कुछेक के तो अब रीमिक्स तक निकलने लगे हैं.


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Gulabi Mukhdi by Gopal Babu Goswami

Hai teri rumala, yo gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli

Hai teri rumala
Hai teri rumala, yo gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli
Teri kae bhali cha ji re, naake ki nathuli
Hai teri rumala
Hai teri rumala, gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli
Teri kae bhali cha ji re, naake ki nathuli
Hai teri rumala

Gawein galobanda, hathon ki thakuli -2
Cham cham chamki re, kapahi binduli -2
Hai teri rumala
Hai teri rumala, gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli -2
Hai teri rumala

Sani re ghaghare, makhmali angadi -2
Kae bhali cha ji re rangeeli pichodi -2
Hai teri rumala
Hai teri rumala, gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli -2
Hai teri rumala

Teri gawwein jangeera, hathon mein paunjiya -2
Chann chann channkani haathun chudiyaan -2
Hai teri rumala
Hai teri rumala, gulabi mukhadi
Kae bhali cha ji re, naake ki nathuli -2
Hai teri rumala


[youtube]http://www.youtube.com/watch?v=N7k33Z_0CGs


Devbhoomi,Uttarakhand


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स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी एक महान गायक एवं सन्गीतकार होने के साथ साथ समाज के प्रति बडा जागरुक थे। मैं यहां पर उनके द्वारा गाये और रचित गीतों के माध्यम से उनके पर्यावरण प्रेम के बारे में जानने व समझने का प्रयास करुंगा।गोस्वामी जी को पहाड और पहाड़ के प्राकर्तिक स्वरूप से बड़ा प्यार था, उनके हर गीत में पहाड़ और उसका अंग प्रत्यंग एक नये रूप में उपस्थित होता है जैसे नीचे के गीत में गोस्वामी जी पहाड की हवा को गले लगने को कह रहे हैं, ये कुछ कुछ कालीदास के मेघदूत की याद दिलाता है,
पर यहां सन्देशवाहक मेघ की जगह हवा है:-गोस्वामी जी पहाड़ और पर्यावरण प्रेमी तो थे ही जोकि उनके गीतों से स्पष्ट है पर साथ ही वह पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक थे। जैसे नीचे के गीत में गोस्वामी जी बान्ज के जंगल को न काटने का सन्देश दे रहे हैं:-सरकारी जंगल लछिमा बान्ज नी काट लछिमा बान्ज नी काटा.....इसी प्रकार इस गीत में गोस्वामी जी की पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता प्रदर्शित होती है:-आज यौ मेरी सुन लो पुकारा, धाद लगौं छ यौ गोपाला.......