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Gopal Babu Goswami - गोपाल बाबू गोस्वामी उत्तराखंड के महान गायक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 11:08:58 AM





Devbhoomi,Uttarakhand

thank you mehta shab sayad maine ise galat jagah post kiya tha,achha kiya apne ise topik ko yahn add kar diya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


This is song of Gopal Babu Goswami.. calling people to come Dev Bhoomi Uttarakhand and stay here for a while see natural beauty and also drink cold natual water.

Pee Jao, myar pahad ko thando Pani
Thando Pani

http://www.esnips.com/doc/986bd7bd-1aeb-4f8b-868c-95f297bd65dc/Pee-Pee-Jawo-Mero-Pahad-ko-Thando-Pani

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


This is the title Song by Gopal Babu Goswami in first Kumaoni Film. Megha AA.

[youtube]dMUrMfW_kqg

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मीठी मीठी पहाडो कि बोली, रंग रंगीला लोग पहाडी

गोपाल बाबु गोस्वामी जी का यह गाना
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http://www.esnips.com/doc/70ba9116-a0d0-4c8a-8cfa-1c4a8873ca3e/pahad-ki-meeti--2-boli

हेम पन्त

From Nainital Samachar - http://nainitalsamachar.in/a-tribute-to-gopal-babu-goswami-on-13th-death-anniversary/

उत्तराखण्ड के लोकगायक गोपाल बाबू गोस्वामी की तेरहवीं पुण्यतिथि (25 नवम्बर) पर उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में पहली बार उनकी जन्मस्थली चाँदीखेत चौखुटिया में 'धात' कला-संस्कृति संवर्द्धन एवं जनजागरण समिति चौखुटिया, गोस्वामी बन्धु चाँदीखेत तथा क्रिएटिव उत्तराखण्ड 'म्यर पहाड़', नई दिल्ली की पहल पर दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए।

ब्लॉक प्रमुख श्रीमती मीना काण्डपाल के साथ द्वारा स्व. गोस्वामी के चित्र पर माल्यार्पण कर गोपाल बाबू की पत्नी, परिजनों, इष्ट-मित्रों व गणमान्य लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके सुपुत्र रमेश गोस्वामी ने अपने पिता की स्मृति में उन्हीं के गीत-''कैलै बजै मुरूली" और "हिमाला को ऊँचा डाना......'' प्रस्तुत किया। इस अवसर पर स्थानीय बोनाफाइड पब्लिक स्कूल, दिशा शिक्षण संस्थान, सरस्वती शिशु मन्दिर, विद्यामन्दिर, एस.एस. हीत बिष्ट पब्लिक स्कूल तथा हरीश चन्द्र एण्ड पार्टी द्वाराहाट द्वारा स्व. गोस्वामी के गीतों पर ही आधारित नृत्य-गीत प्रस्तुत किये गये। जबकि धात संस्था के कलाकारों ने लोकविधा छपेली के माध्यम से....''बाँज बुरूँशी सब काटीगो, बाँकि रैगो छा खिन। गाड़-गध्यार साब सुकी गई, कसी काटिनी दिन।।'' जैसे ज्वलन्त समस्याओं को उजागर किया। इन कार्यक्रमों के बीच में वर्तमान में लोक संस्कृति की दशा एवं भविष्य की आशा पर विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में अमर उजाला के हेम कांडपाल, डॉलक्ष् मण सिंह मनराल, पूर्व अध्यापक नन्दन सिंह बिष्ट, दिशा शिक्षण संस्थान के प्रभारी राजेन्द्र तिवारी, उ.रा.प्रा.शि.सं के राज्य संरक्षक एवं जिलाध्यक्ष कुवेर सिंह कड़ाकोटी आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।

द्वितीय दिवस 26 नवम्बर को दिशा शिक्षण संस्थान द्वारा प्रस्तुत 'पर्यावरण जागर' के रूप में पानी, हवा, खनन, जलवायु परिवर्तन व जंगल के माध्यम से जन-जन को सचेत करने का प्रयास किया गया। नव प्रभात पब्लिक स्कूल बसभीड़ा के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गढ़वाली, कुमाउनी गीतों के साथ नृत्य प्रस्तुत किये। इससे पूर्व गोपाल बाबू की धर्म पत्नी मीरा गोस्वामी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा बुजुर्ग लोक कलाकारों तथा स्कूली बच्चों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। आभार व्यक्त करते हुए 'धात' के अध्यक्ष जसी राम ने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोक कलाओं को पुनर्जीवित करने और युवा पीढ़ी को उनके प्रति प्रेरित करने के प्रयास किये जा सकते हैं। क्रियेटिव उत्तराखण्ड, 'म्यर पहाड' के प्रतिनिधि एवं जनपक्ष पत्रिका के कार्यकारी सम्पादक चारु तिवारी का मानना है कि गोपाल बाबू गोस्वामी को इस तरह श्रद्धांजलि देना हमारा सामाजिक दायित्व है।