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Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में?

Started by Jai Dimri, December 02, 2009, 01:06:58 PM

सत्यदेव सिंह नेगी

 
   

डीएमएमसी की अपनी इमारत ही महफूज नहीं
 
   
आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र पर है भूकंप और अन्य तरह की आपदाओं से बचने की सलाह देने का जिम्मा डीएमएमसी की नई इमारत के निर्माण में होगा भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल: आपदा राज्य मंत्री खजान दास
देहरादून (एसएनबी)। ''दीया तले अंधेरा'', यह कहावत यूं ही नहीं बनी। दिलचस्प बात तो यह है कि इस कहावत को आप प्रदेश के आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के लिए भी इस्तेमाल कर सकते है। आपको यह बात अटपटी लग रही होगी लेकिन प्रदेश के आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (डिजास्टर मैनेजमेंट एंड मिटिगेशन सेंटर-डीएमएमसी) की इमारत ही आपदाओं से महफूज नहीं है। डीएमएमसी राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के तहत चलने वाली एक स्वायत्तशासी संस्था है जिस पर प्रदेश में भूकंप और अन्य तरह की आपदाओं से बचने की तमाम तरह की सलाह देने की जिम्मेदारी है। डीएमएमसी सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं को यह सलाह ही नहीं देता कि इमारतों को किस तरह ज्यादा सुरक्षित बनाए बल्कि वह लोगों को भूकंप व आपदा के दौरान खुद को महफूज रखने के तौर तरीके भी बताता है। इतना ही नहीं डीएमएमसी अब तक प्रदेश के कई शहरों का यह अध्ययन भी कर चुका है कि इन शहरों की इमारतें भूकंप की दृिष्ट से कितनी सुरक्षित है। अब असली मुद्दे पर आते है। दरअसल सचिवालय परिसर में डीएमएमसी जिस इमारत में है उसके निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। इस पर भी तुर्रा ये कि जब लगभग चार साल पहले डीएमएमसी ने अपनी इमारत को भूकंपरोधी बनाने लिए शासन से कुछ धनराशि की मांग की तो उसे टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक डीएमएमसी ने इमारत को रेट्रोफिटिंग के लिए शासन को लगभग 15 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया था लेकिन उसे यह कहकर टाल दिया गया कि शासन की जल्द ही उस स्थान पर नई इमारत बनाने की योजना है इसलिए रेट्रोफिटिंग की जरूरत नहीं है। बहरहाल कई साल बाद डीएमएमसी की इमारत की हालत यह है कि कई अधिकारी तो अपनी मेजों को नीचे बिलकुल खाली रखते है। वे मजाक में कहते भी है कि अपनी मेजों के नीचे वे इसलिए कुछ नहीं रखते कि अगर कोई भूकंप आ गया तो इमारत का तो कोई भरोसा नहीं, मेज के नीचे छिपकर कम से कम उनकी जान तो बच ही जाएगी। डीएमएमसी की इमारत के भूकंपरोधी न होने के बाबत जब आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के अधिशासी निदेशक डॉ. पीयूष रौतेला से बात की गई तो उन्होंने पहले तो मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की मगर बाद में कहा कि दरअसल डीएमएमसी जिस पुरानी इमारत में है वह डीएमएमसी की खुद की नहीं है बल्कि राज्य संपत्ति विभाग की है। डीएमएमसी ने कभी भूकंप या अन्य दैवीय आपदा को लेकर इस इमारत की बनावट का विश्लेषण भी नहीं किया है। डीएमएमसी की इमारत की इस स्थिति के बारे में जब प्रदेश के आपदा राज्य मंत्री खजानदास से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उनके खुद के लिए यह हैरतअंगेज जानकारी है कि डीएमएमसी की इमारत ही भूकंपरोधी नहीं बहरहाल उनका कहना है दरअसल डीएमएमसी पुरानी इमारत में चल रहा है। इमारत जिस जमाने में बनी थी उस समय भूकंप रोधी तकनीक पर आधारित इमारत बनाने का चलन नहीं था। बहरहाल सरकार जब डीएमएमसी के लिए नई इमारत बनाएगी तब उसके निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
http://rashtriyasahara.samaylive.com/epapermain.aspx?queryed=14

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


What I have observed there there are a lot of corruption cases which are un-reported at village level. We should take-up these matters with the appropriate level.

RTI should be filled where we observe that thers is discrepancy in any cases. I am going to lodge complaint of some cases in my village area shortly. Let us see how the concern people react and work on my complaint


सत्यदेव सिंह नेगी

Dear mehta ji

Please mention here how to be an RTI activist, is that work requires licence
Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on September 08, 2010, 01:18:49 PM

What I have observed there there are a lot of corruption cases which are un-reported at village level. We should take-up these matters with the appropriate level.

RTI should be filled where we observe that thers is discrepancy in any cases. I am going to lodge complaint of some cases in my village area shortly. Let us see how the concern people react and work on my complaint



Devbhoomi,Uttarakhand

एक और हरामजादे की करतूत,यस डी यम बा गया तो क्या पहाड़ उखाड़ लिए किसी को भी थप्पड़ मार देगा,यस डी यम होता है पब्लिक रक्षा के इए और ठीक से काम नहीं करे तो पब्लिक की थप्पड़ कहने के लिए



एसडीएम के थप्पड़ ने लगाया आठ घंटे जाम
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निज प्रतिनिधि: उप जिलाधिकारी जखोली के दो टैक्सी चालकों को तमाचा जड़ने पर शनिवार को जमकर बवाल हुआ। आक्रोशित तिलवाड़ा व मयाली टैक्सी यूनियन ने मयाली में आठ घंटे से अधिक समय तक जाम लगाए रखा। वहीं, समर्थन में व्यापार संघ मयाली ने भी बाजार बंद रखा। एसडीएम के मौके पर आकर खेद जताने के बाद ही जाम खुल सका।

शुक्रवार शाम को मयाली-तिलवाड़ा मोटरमार्ग में पैंताल के समीप एसडीएम शिवकुमार बरनवाल चेकिंग कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने दो टैक्सी चालकोंपर बेवजह थप्पड़ जड़ दिए। शनिवार को सूचना मिलने पर टैक्सी यूनियन गुस्साए चालकों ने सुबह सात बजे मयाली बाजार में जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान स्थानीय व्यापार संघ व मजदूर यूनियन मयाली ने भी बाजार बंद कर टैक्सी यूनियन को अपना समर्थन दिया। जाम लगने के चलते चारधाम यात्रा से आने वाले सैकड़ों तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बाद में एसडीएम बरनवाल खुद मौके पर आए तथा उन्होंने थप्पड़ मारने की घटना पर खेद व्यक्त किया। दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक वार्ता होने पर यूनियन ने दोपहर तीन बजे जाम खोल दिया।

प्रदर्शन में टैक्सी यूनियन अध्यक्ष पुरुषोत्तम पुरी, संरक्षक जसपाल बुटोला, कोषाध्यक्ष वीर सिंह रावत, सचिव विजय प्रकाश, संजय पाल नेगी, जसराम काला, आशीष काला, अमरीश भट्ट, संदीप, मस्तान सिंह, दिनेश नेगी, शूरवीर सिंह, भरत सिंह चौधरी, सांसद प्रतिनिधि कपूर पंवार, व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेन्द्र सकलानी व नागेन्द्र पंवार आदि शामिल रहे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6715048.html

Devbhoomi,Uttarakhand

दोस्तों इस कहानी को जरूर पड़िए एक सच्चाई है जो की उत्तराखंडियों की आखों में पट्टी बांधे हुए है माधौसिंह भंडारी के कार्यकर्म के दौरान हुए कारनामे !

From: ram chamoli <ramchamoli1980@gmail.कॉम

माधोसिँह भंडारी शिकायत
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माननीय ममता भट्ट जी मेरा नाम राम चमोली है । मैँ माधोसिँह भंडारी का एक
छोटा सा कलाकार सदस्य हूं । जो कि अपनी शिकायत आपके सामने रखना चाहता हूँ
। सबसे पहली बात यह है कि हम कलाकारोँ को एक भी पास आपने नहीँ दिया था ।
मेरी माँ 5.30 से बाहर गेट पर खडी थी रात 8.30 बजे तक जब मुझे पास नहीँ
मिला तो मैँने अपनी माँ को कलाकारोँ के महिला डरैसिँग रुम मेँ लाकर बिठा
दिया क्योँ कि मेरी माँ को कमर दर्द की शिकायत थी । लेकिन माननीय गजेँद्र
सिँह ने मेरी माँ को अंदर लाने पर मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया । मैँने
भी जबरदस्ती पास माँगकर अपनी माँ को स्टेज के अंदर के दरवाजे से हॉल के
अंदर प्रवेश करवाया । गीता चमोली जो कि कार्यक्रम की एक कलाकार थी उनकी
माँजी मुझे बाहर गेट से फोन कर बार बार पास के बारे मेँ पूछ रही थी मैँने
किशोर से 5 टिकट लेकर गजेन्द्र से अनुमति लेकर कार्यक्रम शुरु होते ही
उनको दे दिये जिनका कोई औचित्य नहीँ रह गया था । वैसे कुछ टिकट आपने
कलाकारोँ को बेचने के लिये दिये थे जो कि कलाकार बेच नहीँ सके और ये टिकट
आखिरकार किसी काम के भी नही हो सके । उत्तराखँडी कलाकारोँ को उनके आने का
किराया तक आपने नहीँ दिया लेकिन गैर उत्तराखँडियोँ को उनका पूरा मेहताना
मिला 5.30 से आये कलाकारोँ के लिये रात 12 बजे तक चाय पानी की व्यवस्था
भी नहीँ की और कार्यक्रम को रात 9 बजे से शुरु करवाया । मैँ भी अपने काम
से आधा दिन लेकर अपने घर से ढोल दमाऊ लाद कर जल्दबाजी मेँ बिना खाये पिये
कार्यक्रम मेँ पहुँच गया । अब मुझे भी सीख मिल गई जो भी उत्तराखँडी अब
ढोल दमाऊ माँगेगा उनसे यही विनती करुँगा कि अपने आप ढोल दमाऊँ लेकर
जाइये और सुरक्षित मेरे घर तक पहुँचाने का कष्ट करेँ ।

lpsemwal

बहुत जल्दी कुछ ऊँचे अधिकारीयों के खिलफ फिर होनी वाली है उम्मीद है भ्रस्ताचार से परेसान उत्तराखंड में इससे लोगों का आतम विस्वास बढेगा.

Devbhoomi,Uttarakhand

ये उतराखंड की चोर और रिस्पत खोर पुलिस


लुटते रहे लोग, सोती रही पुलिस
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उत्तरकाशी,  सिलसिलेवार मारपीट व राहजनी की पांच घटनाओं ने नगरवासियों को हैरत में डाल दिया। विभिन्न जगहों पर लगभग एक ही अंदाज में अंजाम दी गई इन घटनाओं में तीन युवकों के शामिल होने की बात कही जा रही है। शुक्रवार को पुलिस पूरे दिन युवकों की तलाश में जुटी रही, लेकिन उसके हाथ कुछ कपड़े ही लग सके हैं।

गुरुवार को पहली घटना सायं साढ़े छह बजे टीचर्स कॉलोनी के समीप हुई। यहां दाणी बहादुर नाम के नेपाली मजदूर को तीन युवकों ने मारपीट कर जेब से पंद्रह सौ रुपये निकाले और चंपत हो गये। इसके बाद जड़भरत घाट के निकट कंचन विज नाम की महिला के गले से 22 ग्राम की सोने की चेन झपटी गई। महिला के मुताबिक चेन लूटने वाले तीन युवक थे। इसके बाद जिला कोर्ट में कर्मचारी रुकम सिंह को भी केदारघाट के समीप मारपीट कर घायल किया गया और उसकी जेब से 35 हजार रुपए लूट लिये गये। ये सभी लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे। इसी दौरान उजेली में शाहिद नाम के युवक के साथ तीन युवकों के मारपीट करने की सूचना आई। पुलिस हरकत में आती इससे पहले ही रात करीब दस बजे ज्ञानसू में दुकानदार नेत्रमणि भट्ट के साथ तीन युवकों ने मारपीट कर मोबाइल छीन लिया।

महज चार घंटे में इतनी घटनाएं होने पर गुस्साए लोग थाना कोतवाली में एकत्र हो गये। एसपी अरुण मोहन जोशी ने भी कोतवाली में पहुंचकर जानकारी ली। पुलिस उक्त युवकों की तलाश में रात से ही विभिन्न जगहों पर दबिश देती रही।

शुक्रवार को करीब एक दर्जन युवकों को पकड़कर उनसे पूछताछ की गई। पुलिस को ज्ञानसू में एक जगह पर कुछ कपड़े व एक बैग मिला। माना जा रहा है कि यह उन्हीं युवकों का सामान है। एसपी अरुण मोहन जोशी ने कहा कि इन घटनाओं पर लूट का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस को कुछ जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर उन्हें तलाशा जा रहा है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6731136.html

Devbhoomi,Uttarakhand


दरोगा बताने वाले दीवान को सब्जी व्यवसायियों ने धुना,बहुत खूब
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बंधक बना कमरे में डाला, लाइन में है तैनात

-पुलिस ने लिया हिरासत में

चित्र परिचय: 28यूडीएन-पी5

रुद्रपुर के संजय नगर खेड़ा स्थित सब्जी मंडी केकमरे में बंद फर्जी दरोगा से पूछताछ करते एसएसआई विक्रम राठौर। जागरण

जागरण कार्यालय, रुद्रपुर: संजय नगर खेड़ा स्थित सब्जी मंडी में दरोगा बता व्यवसायियों को धमका रहे दीवान की पकड़ कर धुनाई लगा दी गई। बाद में लोगों ने बंधक बनाकर उसे कमरे में बंद कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दीवान को हिरासत में ले लिया।

किच्छा बाईपास रोड स्थित मोहल्ला संजय नगर खेड़ा स्थित सब्जी मंडी में मंगलवार की रात काफी चहल पहल थी। इसी दौरान लंबी कद का एक व्यक्ति मंडी पहुंचा और खुद को दरोगा बताते हुये उसने एक व्यवसायी से सब्जी मांगी। बिना रुपये के सब्जी देने से मना करने पर वह व्यवसायी से उलझ पड़ा। इस दौरान हंगामा होने पर सभी सब्जी व्यवसायी मौके पर एकत्र हो गये। उन्होंने दरोगा बताने वाले व्यक्ति से किस चौकी में तैनात होने की बात पूछा तो वह संतोष जनक जवाब नहीं दे सका। इस दौरान लोगों ने उसके फर्जी होने के शक पर ट्रांजिट कैंप पुलिस चौकी फोन कर उसके बारे में जानकारी ली। चौकी पुलिस ने उसके दरोगा होने से मना कर दिया। इससे आक्रोशित लोगों ने उसकी धुनाई लगा दी और बंधक बनाकर कमरे में बंद कर दिया गया। सूचना पर एसएसआई विक्रम राठौर, एसआई अरविंद चौधरी, पूरन अंगारी मौके पर पहुंच गये। इस दौरान उन्होंने कमरे में बंद फर्जी दरोगा से पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना नाम जयप्रकाश बताते हुये पुलिस लाइन में दीवान होने की बात कही। एसएसआई ने लाइन फोन कर जयप्रकाश नाम के व्यक्ति के दीवान होने के बारे में जानकारी की तो वह सही निकला। इस दौरान सब्जी व्यवसायियों ने बताया कि दीवान ने खुद को दरोगा बताकर कई सब्जी वालों से रुपये ऐंठे है। इस दौरान मना करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया। पुलिस आरोपी को कोतवाली ले आई। इधर सब्जी व्यवसायी भोपाल वाईन ने उसके खिलाफ तहरीर सौंप दी है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6766251.html

Devbhoomi,Uttarakhand

                खेल अरबों का, काम फूटी कौड़ी का नहीं

                   
                                                                                   






                                                                                                                                               

पिछले करीब तीन दशक से टिहरी बांध प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की  छाती पर मूंग दलने के बाद भले ही टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन  (टीएचडीसी) अरबों रुपये का खेल जमा रहा हो, लेकिन बीते करीब एक माह से  टीएचडीसी ने टिहरी बांध झील से सटे करीब ढाई दर्जन गांवों के ग्रामीणों के  चैन उड़ाने के बाद उसके कार्यो की गुणवत्ता की भी पोल खुल गई है। झील से  सटे अधिकांश गांव के प्रभावितों को जहां टीएचडीसी ने अब तक सिर्फ कृषि  भूमि का ही मुआवजा दिया है जिसमें से सैकड़ों प्रभावित वंचित चल रहे हैं,  वहीं झील के जलस्तर बढ़ने से इन गांवों में अब प्रभावितों के आवासीय मकान  भी झील में समाने के कगार पर पहुंच गए हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं  है।
टिहरी जिले के भिलंगना घाटी के बाद भागीरथी घाटी में भी टीएचडीसी  द्वारा झील के जलस्तर को अधिकतम जलभराव तक पहुंचाने के बाद प्रभावित  गांवों के हालात नाजुक हैं। इन गांवों में ग्रामीणों की बेबसी देखें तो  झील के पानी के आवासीय भवनों तक पहुंच जाने के बाद भी ग्रामीणों की उन पर  डटे रहना अब मजबूरी जैसे बन गई है। ग्रामीणों के सामने ताजे हालातों को  देख गंभीर समस्या तो बन ही गई है कि अब ऐसी दशा में वह जाएं भी तो जाएं  कहां। ऐसे ही टीएचडीसी की लापरवाही के चलते झील पानी के इस घाटी में  दर्जनभर गांवों में पहुंच जाने के कारण ऐसे ही समस्याओं के मकड़जाल में  फंसा है थौलधार प्रखंड की ग्राम पंचायत खांड बिड़कोट।
यहां बता दें कि खांड गांव का तो पूर्व में विस्थापन कर दिया गया लेकिन  इस ग्राम पंचायत के खांड व रमोलगांव का अब कोई पूछनहार नहीं है। टिहरी  बांध के आंशिक डूब क्षेत्र में शामिल इस ग्राम पंचायत के खांड गांव में  वर्तमान में 120 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें से बमुश्किल आधे अधूरे  लोगों को ही अब तक सिर्फ कृषि भूमि का ही मुआवजा मिल पाया है, जबकि अन्य  लोग पहले तक जहां सिर्फ कृषि भूमि मुआवजे की मांग करते आ रहे थे। वहीं अब  खेती-बाड़ी के साथ-साथ ग्रामीणों के पहले तक जहां मकानों को छोड़ सब कुछ झील  में समा गया वहीं अब उनके आवासीय भवन भी झील कटाव के कारण बुरी तरह से  भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। बगैर विस्थापन व पुर्नवास के ऐसे में गांव  के प्रभावित लोग अपना आशियाना छोड़े भी तो कैसे। ऐसे ही इसी ग्राम पंचायत  के रमोल गांव में भी झील के कारण हालात इससे इतर नहीं हैं। 60 परिवारों  वाले इस गांव में तो ग्रामीणों का ऐसी दशा में सुरक्षित रहना मौत को  आमंत्रण देने से कम नहीं रह गया है, क्योंकि बांध झील के आरएल 832 तक  पहुंचने के बाद इस गांव के नीचे झील के कटाव के कारण लगातार हो रहे  भूस्खलन से यह गांव बेहद खतरनाक मोड़ पर आकर ठहर जैसे गया है। टीएचडीसी की  लापरवाही के कारण गांव के लोगों की बची खुची जिंदगी भी अब झील के भंवर में  फंसी पड़ी है। टिहरी बांध से हर माह करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाले  टीएचडीसी की सोच देखें तो बांध झील के करीब से सटे इन गांवों से अभी तक एक  भी परिवार का विस्थापन व पुनर्वास नहीं किया गया। आखिर ऐसे में टीएचडीसी  मासूम ग्रामीणों को जिंदा झील में डुबोने की तैयारी नहीं कर रहा तो और  क्या है।
ग्राम प्रधान मुरारीलाल ने बताया कि खांड व रमोलगांव में जहां  कारपोरेशन के द्वारा अब तक सिर्फ कुछ ही लोगों को कृषि भूमि का मुआवजा  दिया गया है वहीं झील में समाए व झील कटाव के बाद प्रभावित गांव के किसी  भी परिवार का अब तक विस्थापन पुर्नवास नहीं किया जा सका है। उन्होंने  बताया कि गांव के लोग मजबूरी में अब यहां पर रह रहे हैं और जिस हिसाब से  झील के कटाव के कारण गांव के नीचे भूस्खलन शुरू हो गया है उसे देखते हुए  नहीं लगता कि अब दोनों गांव के ग्रामीण किसी भी सूरत में सुरक्षित रह  पाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही गांव का पुनर्वास न किया गया तो वह  टीएचडीसी के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6773427.html

             

Devbhoomi,Uttarakhand


साहब! मैं जिंदा हूं
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सरकारी सिस्टम, न सुनता है और न देखता है, यह तो बस फैसले देता है। जिंदे को मृत व मृत को जिंदा दिखाना यहां बाएं हाथ का खेल है। मानवीय संवेदनाओं के लिए इसमें कोई जगह नहीं। चमोली जिले के कर्णप्रयाग इलाके में वृद्धावस्था पेंशन पर गुजर बसर कर रहे एक बुजुर्ग को सरकारी दस्वावेजों में कब मृत घोषित कर दिया, खुद बुजुर्ग सज्जन को भी पता नहीं चला। उन्हें बिना प्रमाण पत्र के किस आधार पर मृत घोषित किया गया, यह अभी रहस्य है। पेंशन लेने गए बुजुर्ग अपनी मौत की खबर सुन सकते में आ गए। अफसरों के सामने वे गिड़गिड़ाए कि 'साहब मै जिंदा हूं', लेकिन सिस्टम को तो प्रमाण चाहिए। ऐसे में उनकी कौन सुनता। खैर, आठ महीने बाद स्टांप पेपर पर अपने जिंदा होने का प्रमाण देने के बाद उनके घर में चूल्हा जलने की उम्मीद बंध गई है।

कर्णप्रयाग ब्लॉक के डिम्मर गांव के 78 वर्षीय मगनलाल वृद्धावस्था पेंशन के सहारे ही जीवन काट रहे हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से इस बुजुर्ग को प्रतिवर्ष चार हजार रुपये बतौर पेंशन मिलते हैं। हर साल मार्च में उन्हें यह राशि प्राप्त हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ। सरकारी काम में अक्सर देर हो जाती है, यह सोचकर वह कुछ दिन पेंशन की राह ताकते रहे। वक्त बीतने के साथ जब घर में जलने वाले चूल्हे की लौ धीमी पड़ने लगी, तो उन्होंने ग्राम प्रधान से संपर्क साधा। प्रधान के कहने पर वह जून, 2010 में समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचे। यहां जब उन्होंने अधिकारियों से पेंशन न मिलने के बारे में जानकारी ली, तो पता चला कि पेंशन बंद कर दी गई है। वजह सुन उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक मगनलाल की दिसंबर, 2009 में मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अधिकारियों को बहुत मनाने की कोशिश की कि वह अभी जिंदा हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। चार महीने हो गए इधर से उधर सरकारी कार्यालयों में एड़ियां घिसते। अब मगनलाल के स्टांप पेपर पर खुद के जीवित होने का प्रमाण देने के बाद विभाग ने उसकी पेंशन को पुन: स्वीकृति दे दी है। इसके बाद उसे पिछले वर्ष की बकाया पेंशन समेत प्रतिवर्ष पेंशन का रास्ता भी खुल गया है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6792098.html