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Don’t Mind Mahraj Holi hai - बुरा न मानो होली है

Started by dayal pandey/ दयाल पाण्डे, February 24, 2010, 05:34:57 PM

ye hai dayal pandey jyu..

Quote from: dajyu/दाज्यू on February 25, 2010, 11:47:39 AM
सीयू संयोजक कहलाते
हर फंक्शन में छा जाते
माइक पकड़ लोगों को बुलाते
माइक ढो कर घर ले जाते
अच्छी अच्छी कविता करते
सबको टाइटल देकर जाते
जोड़े सबको करके फोन
पहचानो आखिर ये कौन??

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हमारे है ये वीर सिपाही
मन में रहती इनकी हर वक्त पहाड़ की नराई
हर काम की करते अगुवाई
नाम है इनका दयाल पाण्डेय !

होलियार !!!! 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नाम छो इनार ठेठ पहाड़ी,
पहाड़ क नाम पर लड़नी हर लडाई..
की रात की दिन, यो छि ठेठ पहाड़ी ?

पछियानो यो को छि होलियार ??


          आप सभी को होली मुबारक


होली है आई, सुनो मेरे भाई।
हसी खुशी से खेलना, भावी हो या बहना।

दुशमनी न किसी से करना,
इज्जत से किसी के न खेलना।

माँ हो,पिता हो,भाई हो,भावी हो,
या हो फिर आपकी प्यारी बहना।

अबीर,गुलाल का प्रयोग करना,
रसायन कलरों को न कहना।

रंगो का है त्यैहार होली,
यही है बडे बुजॅगो कहना।

होली का त्यैहार मुबारक,
यही है "सुन्दर" का कहना।

बुरा मत मानना भाईयो,बहनों,
मै बिचारक हु, बहुत पुराना।

सुन्दर सिंह नेगी 25-02-2010



पंकज सिंह महर

जहां न पहुंचे सके है रवि,
वहां पहुंच जाते मोर सिंह जाखि,
अनछुये पहलुओं से कराते रुबरु,
उत्तराखण्ड का मान ही इनकी आबरु,
लन्दन इनकी कर्मभूमि,
लेकिन मन में संजोये मातृभूमि,
फोरम में कहलाते 'देवभूमि'।

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

Pankajda main aaj bahut bg huin jara jo log chhut gaye hain sabki holiyarun ka technical introduction kara do

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

सुबह सुबह मुर्गा बन जाते
Googmorning कह सबको जगाते
अच्छे अच्छे सन्देश सुनाते
सबके प्यारे सबको भाते
यही हैं उनकी ताकत
वो हैं साब दिनेश पाठक

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

जन सेवा मैं सबसे आगे
पल भर मैं मन को हर लेते
नए नए योजना वो लाते
UK को US वो बनाते
शादी से पाहिले सबके अघाड़ी
शादी के बाद चले पिछाडी
साड़ी दुनियां उनको जाने
वो तो हैं संजू पहाड़ी 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


पहाड़ में होली की धूम मची छो.

होलियार गैनी होली और लोग बीच-२ में लोग करनी थेटर (स्वांग)!

एक बार हमर गौ में एक सूबेदार साब क थेटर बनाई गे ! क्यों की सूबेदार साहब ले एक बार अपुन द्वि बल्दो के मोटा होल के भे, यूरिया खाद खिला दी! द्वि बलद मी बाटी एक एक तो बच गयी, पर दुसर बलद यूरिया खा भे, मर गयी और मोट हो गयी उसा भे!

यह हास्य नाटक सूबेदार साब पर बांयी गयी! द्वि नानतिन के पारद में चीनी खिलाई गयी फिर देखो हास्य स्वांग 

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

कभी ना सबके सांथ मैं चलते
फ़ोन पर ही इडिया देते
यू. के. से U  K  मैं जाते
इन्टरनेट पर hidden रहते
ज्ञान के भंडार कहलाते
वो to हैं हमारे साथी
नाम है शैलू त्रिपाठी