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ON-LINE KAVI SAMMELAN - ऑनलाइन कवि सम्मेलन दिखाए, अपना हुनर (कवि के रूप में)

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 11, 2010, 11:45:47 AM

Raje Singh Karakoti

एक नजराना मेरा पहाड़ फोरम के दोस्तों की शान में     खुशी भी दोस्तो से है,
गम भी दोस्तो से है,

तकरार भी दोस्तो से है,
प्यार भी दोस्तो से है,

रुठना भी दोस्तो से है,
मनाना भी दोस्तो से है,

बात भी दोस्तो से है,
मिसाल भी दोस्तो से है,

नशा भी दोस्तो से है,
शाम भी दोस्तो से है,

जिन्दगी की शुरुआत भी दोस्तो से है,
जिन्दगी मे मुलाकात भी दोस्तो से है,

मौहब्बत भी दोस्तो से है,
इनायत भी दोस्तो से है,

काम भी दोस्तो से है,
नाम भी दोस्तो से है,

ख्याल भी दोस्तो से है,
अरमान भी दोस्तो से है,

ख्वाब भी दोस्तो से है,
माहौल भी दोस्तो से है,

यादे भी दोस्तो से है,
मुलाकाते भी दोस्तो से है,

सपने भी दोस्तो से है,
अपने भी दोस्तो से है,

या यूं कहो यारो,
अपनी तो दुनिया ही दोस्तो से है

प्यार न करना प्यारे राजे, प्यार बनकर जिया करो.
है बहुत यह मिठा जहर, छानकर इसे पिया करो.
अंजान ही बन जाते है राजे इस प्यार मे बेजान.
आंसु न बहाओ प्यार मे उसके, कहता है तनहा इंसान.

तनहा इंसान-17-08-2010.

दोस्त तुमने मिसाल दी दोस्ती की,
मै तो दोस्त हुआ, तनहा इंसान.
सोच समझ कर करना दोस्ती,
मै तनहा निकल सकता हु, बडा वेईमान.

तनहा इंसान-17-08-2010

अब किसका है इंतजार, दिपक जी.
और कितना कराओगे हमे इंतजार.

अपनी इंतजारी का क्या हाल बताउ.
आपके इंतजार मे, तनहा है वेकरार.

तनहा इंसान-17-08-2010

Raje Singh Karakoti

रहो जमीं पे मगर आसमां का ख्वाब रखो
तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो
खड़े न हो सको इतना न सर झुकाओ कभी
तुम अपने हाथ में किरदार की किताब रखो
उभर रहा जो सूरज तो धूप निकलेगी
उजालों में रहो मत धुंध का हिसाब रखो
मिले तो ऐसे कि कोई न भूल पाये तुम्हें
महक वंफा की रखो और बेहिसाब रखो.....
   



Quote from: sunder singh negi/तनहा इंसान on August 17, 2010, 01:15:44 PM
दोस्त तुमने मिसाल दी दोस्ती की,
मै तो दोस्त हुआ, तनहा इंसान.
सोच समझ कर करना दोस्ती,
मै तनहा निकल सकता हु, बडा वेईमान.

तनहा इंसान-17-08-2010

Raje Singh Karakoti

दर्द कैसा भी हो आंख नम न करो
रात काली सही कोई गम न करो
एक सितारा बनो जगमगाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
बांटनी है अगर बाँट लो हर ख़ुशी
गम न ज़ाहिर करो तुम किसी पर कभी
दिल कि गहराई में गम छुपाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
अश्क अनमोल है खो न देना कहीं
इनकी हर बूँद है मोतियों से हसीं
इनको हर आंख से तुम चुराते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
फासले कम करो दिल मिलाते रहो
ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो..
   

Quote from: sunder singh negi/तनहा इंसान on August 17, 2010, 01:15:44 PM
दोस्त तुमने मिसाल दी दोस्ती की,
मै तो दोस्त हुआ, तनहा इंसान.
सोच समझ कर करना दोस्ती,
मै तनहा निकल सकता हु, बडा वेईमान.

तनहा इंसान-17-08-2010

Raje Singh Karakoti

सत्यदेव जी आज गुमसुम और चुप्चुपाये से है   लगता है है अपनी कविताओ की पुस्तक घर ही भूल आये है   दीपक जी भी आज चुपचाप और थकेहाल है   लगता है कविताओ की तंगी से वो भी बेहाल है

दीपक पनेरू


मैं थके हाल नहीं बस यूँही,
कुछ तस्सली दिल को दे रहा हूँ,
आप लोगो की लेखनी से,
कुछ नयी सीख ले रहा हूँ,

मन भर आये जिस कवि,
अपनी ही कविताओं से,
ओ कवि नहीं कहलाता है,
पूछो इन आबो हवाओ  से,

Quote from: Raje Singh Karakoti on August 17, 2010, 02:40:10 PM
सत्यदेव जी आज गुमसुम और चुप्चुपाये से है   लगता है है अपनी कविताओ की पुस्तक घर ही भूल आये है   दीपक जी भी आज चुपचाप और थकेहाल है   लगता है कविताओ की तंगी से वो भी बेहाल है

दीपक पनेरू


"सुंदर जी" आपने याद किया,
इसमें मन की गहराई हो,
जो मुस्कान है चेहरे पर आज,
ओ न कभी पराई हो,

सच मैं सुंदर हो आप,
क्या मुख दृष्टी आपने पाई है,
आपकी यही मुस्कान परबस,
मेरे चेहरे पर भी मुस्कान लायी है....

Quote from: sunder singh negi/तनहा इंसान on August 17, 2010, 01:29:35 PM
अब किसका है इंतजार, दिपक जी.
और कितना कराओगे हमे इंतजार.

अपनी इंतजारी का क्या हाल बताउ.
आपके इंतजार मे, तनहा है वेकरार.

तनहा इंसान-17-08-2010

Raje Singh Karakoti

दीपक यार ज़िंदगी है छोटी, हर पल में ख़ुश रहो...
ऑफिस मे ख़ुश रहो, घर में ख़ुश रहो...
आज पनीर नही है दाल में ही ख़ुश रहो...
आज जिम जाने का समय नही, दो क़दम चल के ही ख़ुश रहो...
आज दोस्तो का साथ नही, टीवी  देख के ही ख़ुश रहो...
घर जा नही सकते तो फ़ोन कर के ही ख़ुश रहो...
आज कोई नाराज़ है उसके इस अंदाज़ में भी ख़ुश रहो...
जिसे देख नही सकते उसकी आवाज़ में ही ख़ुश रहो...
जिसे पा नही सकते उसकी याद में ही ख़ुश रहो
लैपटॉप  ना मिला तो क्या, डेस्कटॉप  में ही ख़ुश रहो...
बीता हुआ कल जा चुका है उसकी मीठी यादें है उनमे ही ख़ुश रहो...
आने वाले पल का पता नही... सपनो में ही ख़ुश रहो...
हसते हसते ये पल बिताएँगे, आज में ही ख़ुश र


Quote from: दीपक पनेरू on August 17, 2010, 03:11:40 PM

मैं थके हाल नहीं बस यूँही,
कुछ तस्सली दिल को दे रहा हूँ,
आप लोगो की लेखनी से,
कुछ नयी सीख ले रहा हूँ,

मन भर आये जिस कवि,
अपनी ही कविताओं से,
ओ कवि नहीं कहलाता है,
पूछो इन आबो हवाओ  से,

Quote from: Raje Singh Karakoti on August 17, 2010, 02:40:10 PM
सत्यदेव जी आज गुमसुम और चुप्चुपाये से है लगता है है अपनी कविताओ की पुस्तक घर ही भूल आये है दीपक जी भी आज चुपचाप और थकेहाल है लगता है कविताओ की तंगी से वो भी बेहाल है