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Should Gairsain Be Capital? - क्या उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण होनी चाहिए?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 12:23:04 PM

Do you feel that the Capital of Uttarakhand should be shifted Gairsain ?

Yes
97 (71.3%)
No
26 (19.1%)
Yes But at later stage
9 (6.6%)
Can't say
5 (3.7%)

Total Members Voted: 136

Voting closed: March 21, 2024, 12:04:57 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गैरसेंण राजधानी बना कर प्रायश्चित करें उत्तराखण्डी नेता

अगर प्रदेश के नेताओं को जरा भी शर्म व लोकशाही के प्रति श्रद्धा रहती तो वे 2000 में ही स्थाई राजधानी गैरसेंण घोषित करके यह आयोग बनाते कि गैरसेंण में कितनी जल्दी राजधानी बने परन्तु यहां तो सन 2000 से 2012 तक ऐसे जनविरोधी नेता सत्ता में काबिज रहे जो जन भावनाओं का गला घोंटते हुए राजधानी बलात देहरादून में ही थोपने का षडयंत्र करते रहे। लोकतंत्र में आयोग नहीं जनभावनायें सबसे महत्वपूर्ण होती है। जो राजधानी चयन आयोग ही प्रदेश की जनभावनाओं को रौंदने के लिए बनाया गया था। ऐसे आयोगों को बनाने वालों को जब उत्तराखण्ड राज्य गठन व राजधानी गैरसेंण बनाओं का 1994 से 2000 तक चला व्यापक जनांदोलन ही नहीं दिखायी दिया तो उनसे क्या आशा की जा सकती है। अब देर सबेर चाहे किसी भी भाव से वर्तमान सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने व शिलान्यास करने का ऐतिहासिक काम किया है। यह गैरसेंण राजधानी बनाने के लिए मील का पत्थर उसी प्रकार से होगा जिस प्रकार से पूर्व प्रधानमंत्री देवगोडा जी ने 15 अगस्त के दिन उत्तराखण्ड राज्य गठन करने का राष्ट्रीय संकल्प लिया था। प्रदेश की राजधानी गैरसेंण बनाने के बजाय देहरादून में थोपे रखने का काम करने में लिप्त रहे तिवारी, खण्डूडी व निशंक जैसे मुख्यमंत्रियों के लिए यही अब सबसे उत्तम होगा कि वे गैरसैंण राजधानी बनाने के लिए सरकार पर दवाब बना कर अपना प्रायश्चित करें। शायद इस कार्य से भगवान बदरीनाथ उनके उत्तराखण्ड विरोधी कृत्य को माफ कर दें।

विनोद सिंह गढ़िया

सांसद प्रदीप टम्टा बोले, 12 वर्षों बाद भी राजधानी तय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण

गैरसैंण स्‍थायी राजधानी बने

सांसद प्रदीप टम्टा ने राज्य निर्माण के 12 वर्षों बाद भी प्रदेश की स्थायी राजधानी तय नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन नहीं बल्कि पूर्णकालिक राजधानी बनाया जाना चाहिए। बेहतर शिक्षा व्यवस्था तथा पलायन पर अंकुश लगाने के लिए सरकारों को ठोस नीति बनाकर उसे क्रियान्वित करना होगा। श्री टम्टा ने अमर उजाला से मुलाकात में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के 12 वर्षों बाद भी राजधानी तय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा तथा विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने गैरसैंण में विधान भवन बनाने की पहल की है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की पैरवी कर रहे लोग राज्य निर्माण की अवधारणा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
गर्मियों में कुछ दिन गैरसैंण में गुजारने से कुछ हासिल नहीं होगा। पूरी तरह पहाड़ में रहकर जब तक अधिकारी, कर्मचारी और नेतागणों को अभाव और असुविधा का एहसास नहीं होगा, तब तक वह न तो पहाड़ का दर्द महसूस कर सकते हैं और न ही जनाकांक्षा के अनुरूप योजनाओं का निर्माण हो सकता है। सांसद टम्टा ने गैरसैंण को पूर्णकालिक राजधानी बनाने की भी मांग की है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पलायन बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इसका त्वरित समाधान होना चाहिए। उन्होंने जनता से भी समस्याओं के समाधान को मुखर होने का आह्वान किया है।
जब तक अधिकारी, कर्मचारी और नेतागणों को अभाव और असुविधा का एहसास नहीं होगा, तब तक वह न तो पहाड़ का दर्द महसूस कर सकते हैं और न ही जनाकांक्षा के अनुरूप योजनाओं का निर्माण हो सकता है।
- प्रदीप टम्टा, सांसद

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

I second Mr Pradeep Tamta's views on this issue.

Quote from: विनोद सिंह गढ़िया on February 01, 2013, 11:44:24 AM
सांसद प्रदीप टम्टा बोले, 12 वर्षों बाद भी राजधानी तय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण

गैरसैंण स्‍थायी राजधानी बने

सांसद प्रदीप टम्टा ने राज्य निर्माण के 12 वर्षों बाद भी प्रदेश की स्थायी राजधानी तय नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन नहीं बल्कि पूर्णकालिक राजधानी बनाया जाना चाहिए। बेहतर शिक्षा व्यवस्था तथा पलायन पर अंकुश लगाने के लिए सरकारों को ठोस नीति बनाकर उसे क्रियान्वित करना होगा। श्री टम्टा ने अमर उजाला से मुलाकात में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के 12 वर्षों बाद भी राजधानी तय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा तथा विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने गैरसैंण में विधान भवन बनाने की पहल की है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की पैरवी कर रहे लोग राज्य निर्माण की अवधारणा से खिलवाड़ कर रहे हैं।
गर्मियों में कुछ दिन गैरसैंण में गुजारने से कुछ हासिल नहीं होगा। पूरी तरह पहाड़ में रहकर जब तक अधिकारी, कर्मचारी और नेतागणों को अभाव और असुविधा का एहसास नहीं होगा, तब तक वह न तो पहाड़ का दर्द महसूस कर सकते हैं और न ही जनाकांक्षा के अनुरूप योजनाओं का निर्माण हो सकता है। सांसद टम्टा ने गैरसैंण को पूर्णकालिक राजधानी बनाने की भी मांग की है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पलायन बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इसका त्वरित समाधान होना चाहिए। उन्होंने जनता से भी समस्याओं के समाधान को मुखर होने का आह्वान किया है।
जब तक अधिकारी, कर्मचारी और नेतागणों को अभाव और असुविधा का एहसास नहीं होगा, तब तक वह न तो पहाड़ का दर्द महसूस कर सकते हैं और न ही जनाकांक्षा के अनुरूप योजनाओं का निर्माण हो सकता है।
- प्रदीप टम्टा, सांसद

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाली हास्य व्यंग्य हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा                                             गैरसैण से  भौं भौं डाउ ( विभिन्न प्रकार के दर्द )                                                                    चबोड़्या-चखन्यौर्या:  भीष्म कुकरेती(s =आधी अ )                           गैरसैण उत्ताराखंडै  स्थाइ राजधानी ना सै रुड्यूं राजधानी त बौणि इ गे। पण कथगौं तैं डाs  बि दीणी च। अब चीमा जन पहाड़ अर पहाड़ी विरोधी नेता चैक बि गैरसैण की  स्थाइ राजधानी या परमानेंट कपिटल ना सै पण  रुड्यूं राजधानी,ग्रीष्म कालीन राजधानी,  टेम्पोरेरी कपिटल या समर कैपिटल को ताज/पद नि लूठी सकदन। विजय बहुगुणाs निर्णयन  पहाड़ विरोधी लौबिक  मुख पर इन बुज्यड़ लगाइ बल चैक बि या  धुर पहाड़ विरोधी लौबि ये परमानेंट बुज्या तैं नि निकाळ सकदि। पहाड़ अर पहाड़ी विरोधी लौबि कथगा बि चूं-चां कौरलि अब या पहाड़ -पहाड़ी विरोधी लौबिम  एक बात स्वीकार करणों अलावा क्वी चारा नी च बल उत्तराखंडs आन्दोलन पहाड़ अर पहाड्यूं बान छौ। बिचारि पहाड़-पहाड़ी विरोधी लौबि बान गैरसैणौ कणसि राजधानी बणण छाती पर एक बड़ो गुल च, एक दर्द च। अर बिचारि पहाड़ -पहाड़ी विरोधी लौबि रोइ बि नि सकदि बलकणम यीं धुर पहाड़ विरोधी लौबि तै खुलेआम विजय बहुगुणा को निर्णयों तारीफ़ इ करण पड़नु च।                     गैरसैणों कणसि राजधानी बणन से भारतीय जनता पार्टी का नेता जन कि अजय भट्ट, वी . सी . खंडूरी, कोशियारी, डा. रमेश निशंक आद्यूं तैं बि नानिन्दिs बीमारि लग गे ह्वेलि बल "इ क्या कौंग्रेसन भलो काम करि दे। अब हम विरोध क्यांक करला? अब हम कौंग्रेस पर भगार क्या लगौला?" आजकाल क्वी बि प्रतिपक्ष नि चांदो कि राजकीय पार्टी जन हितमा क्वी फैसला ल्याउ! विरोधी पार्टी चान्दि बल राजकीय पार्टी जन विरोधी निर्णय ल्याओ अर वूं तैं सरकार तैं गाळी दीणो मौक़ा मीलि जावो। अब बिचारि भाजापा कणाणि च, दुखि च, खिन्न च,उदास च बल यि क्या कनै कौंग्रेसन जन-जजबातों, जन -भावना कदर  वाळो फैसला ली याल! पण समणि खुसिम दांत निपोड़ी हंसणि च। नाटक करणम भाजापा त कौंग्रेस से भौत अगनै च। जु भाजापा गैरसैण तै रूड्यूं राजधानी बणाण से खुसि जतांद त यूं तै पुछण छौ तुम इथगा सालोंम किलै सियां रौवां भै? पण बिचारा भाजापाई दुखि छन, सन्न छन त यूं तैं क्या पुछण बल जब आन्दोलन चलणो छौ त तुमन किलै नि ब्वाल बल पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ोंम ना मैदानम होलि?   गैरसैणो कणसि राजधानी बणन से बनि बनि क  उत्तराखंड क्रांति दल का कथगा इ नेता त बेहोश पड्याँ छन बिचारोंम जनता तै बौगाणो एकि त नारा छौ अर विजय बहुगुणा वो नारा बि लूठिक ली ग्यायि।त यूं कंगाल नेताओंन बेहोश हूणि च।मै नि लगद यूं उत्तराखंड क्रान्ति दलौ नेताओं बेहोशी दूर ह्वेलि। अब यूंको ऑक्सीजन इ 'गैरसैण' छे त ऑक्सीजन को सिलिंडर त अब विजय बहुगुणा क पास च। हां एक बात च उत्तराखंड क्रांति दल का कै बि नेताक घौ, घाव, चोट, व्यथा, पर कैन बि मलम नि लगाण किलैकि अब कैको बि यूं कमजोर बेकार का नेतौं  पर कैको भरवस नि रै गे। भितरै बात क्वी भैर नि लाणों ह्वालो पण कौंग्रेस का भौत सा नेता बि निरस्यां छन, अब क्वी बि जळतमार कॉंग्रेसी कनकैक सहन कारल कि दुसर कॉंग्रेसीs  बडै ह्वावो, प्रशंसा ह्वावो; त इन मा गैरसैण को उत्ताराखंडै स्थाइ राजधानी ना सै रुड्यूं राजधानी बणन से ज्याठा नेता बि निरास ही छन बल इन कनो  विजय बहुगुणा सरा क्रडिट अफिक ली जावो!  तुम इ सचि बथावदि बल क्या जनता द्वारा विजय बहुगुणा की प्रसशा  से अपणा सतपाल महाराज, हड़क सिंग रावत, गोविन्द सिंह कुंजवाल, हरीश रावत खुस, प्रसन्न ह्वाला  ?          पण गैरसैणो कणसि  राजधानी बणन से   पहाड़ी जनता खुस च कि पूरो नि सै एक बाटो त खुलि गे। Copyright@ Bhishma Kukreti 10/2/2013

--


Regards
B. C. Kukreti

krantiveer

I'm agree to make Gairsain   capital of Uttarakhand,as I'm  a Uttarakhandi andolankari i can understand  its very important ,emotional issue ,but I'm also afraid it will be become other  Deharadun-- concreet jungle ,high crime,land mafia[many leaders already bought land their as investment].local peoples will element by  land mafia And business mans from Delhi .
its important we have strong land law as Himachal pradesh ,so we can insure local peoples interests ,without proper planning and environmental  safety it will be disaster .i can see all this thing in Dehradun  .
Uttarakhand is "khulla khait ,jo chahey chaar jayey".   after state formation non of pahadi force stand  to save Jal,Jungle ,Zameen.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

I second your views on this crucial issue.

Quote from: krantiveer on February 11, 2013, 11:38:26 AM
I'm agree to make Gairsain   capital of Uttarakhand,as I'm  a Uttarakhandi andolankari i can understand  its very important ,emotional issue ,but I'm also afraid it will be become other  Deharadun-- concreet jungle ,high crime,land mafia[many leaders already bought land their as investment].local peoples will element by  land mafia And business mans from Delhi .
its important we have strong land law as Himachal pradesh ,so we can insure local peoples interests ,without proper planning and environmental  safety it will be disaster .i can see all this thing in Dehradun  .
Uttarakhand is "khulla khait ,jo chahey chaar jayey".   after state formation non of pahadi force stand  to save Jal,Jungle ,Zameen.



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

राजधानी बनाओ गैरसैंण

माफिया, नेता और नौकरशाह यूं बनियांच आज काल
उत्तराखण्डियों की एक ही मांग आज राजधानी गैरसैंण
उत्तराखण्ड का जू च विरोधी, तों कू क्यूं च दून प्यारी,
गैरसैंण मां बसियां च उत्तराखण्डी वीर शहीदों का प्राण
तख नी च कखी भू माफिया, खाली कलंक न लगावा
देहरादून माॅ कख रन देवता भेजी जरा ये भी बतावा
एक बात सभी आज कान लगावा गैरसैंण ना गैर बतावा
गैरसैंण च उत्तराखण्ड की आन मान शान की पहचान
दीदा गैरसैंण को न गैर बतावा, शहीदों की भूमि यो च
उत्तराखण्ड की प्राण यो च, गैरसैण राजधानी गैरसैण
लखनऊ से जब छोडी मोह क्यों थोपी अब देहरादून
आओ मिलके गीत गावा, राजधानी हमारी च गैरसैंण
-देवसिंह रावत
www.rawatdevsingh.blogspot.com

Ajay Pandey

 :) मैंने इस मुद्दे को नवभारत टाइम्स की साईट पर अपने ब्लॉग में दिया है वह अभी ताजा रीडर्स ब्लॉग में है आप इस लिंक से मेरा आर्टिकल दिखा सकते हैं
एचटीटीपी..// रीडर्स ब्लोग्स. इंडिया टाइम्स .कॉम
इस लिंक से आप मेरा लेख इस फोरम पर दिखा सकते हैं में नवभारत टाइम्स और जागरण जंक्शन पर भी अपने लेख लिखता हूँ आपकी लड़ाई में साथ देते हुए मैंने नवभारत टाइम्स के ब्लॉग पर दे  दिया है
धन्यवाद

Ajay Pandey

 :) मेरा पहाड़ फोरम का जूनियर मेम्बर पद पाकर बहुत ख़ुशी हुई है मेरा पहाड़ फोरम ने जूनियर मेम्बर के पद हेतु पहली बार मुझे चुना है इसके लिए में फोरम का आभार प्रकट करता हूँ और में यह पद पाकर खुश तो हुआ ही साथ ही यह कहना चाहता हूँ की मेरी पढाई है पर में थोडा सा भी योगदान इस फोरम को दूंगा तो वह मेरे लिए बहुत बड़ी बात होगी इस सामाजिक प्रोजेक्ट से जुड़कर मुझे ख़ुशी है जो उत्तराखंड की राजधानी के लिए लड़ रहा है आपदा पीड़ितों के मदद करता है और विकास के मुद्दे उठाता है इस फोरम का जूनियर मेम्बर बनना बहुत बढ़िया लगा है फोरम का आभार प्रकट करता हूँ और फोरम में अपना योगदान देने की निष्ठा रखता हूँ
धन्यवाद

विनोद सिंह गढ़िया

दोस्तों क्या आप मानते हैं आज गैरसैण राजधानी का मामला निम्नांकित कुमाऊँ के एक किस्से की तरह हो गया है। आज गैरसैंण राजधानी का मसला सभी ने भुला दिया है। बीजेपी की हालत उस गूंगे की तरह हो गयी है जिसे इस मुद्दे पर बोलने की शक्ति ही नहीं रह गयी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस बहरी हो चुकी है जो कुछ सुनती ही नहीं और दूसरे मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है। गैरसैण में राजधानी का शिलान्यास कर चुके उक्रांद के नेता घराट लगाने वाले उस अनाड़ी की तरह हो चुके हैं जो लक्ष्य से भटक चुके हैं। सत्ता के मोह में लिप्त उक्रांद के नेता गैरसैण को ही भूल चुके हैं। उत्तराखण्ड की जनता की हालत लंगड़े की जैसी हो गयी है जो कहीं कुछ कर ही नहीं सकती है।