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Should Gairsain Be Capital? - क्या उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण होनी चाहिए?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2007, 12:23:04 PM

Do you feel that the Capital of Uttarakhand should be shifted Gairsain ?

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


That is why we need capital in Gairsain . see the news.


27 किमी पैदल चलकर पहुंचते हैं लोग नामिक

Pithoragarh | अंतिम अपडेट 23 मई 2013 5:30 AM IST पर
नामिक (पिथौरागढ़)। बुनियादी सुविधाओं को तरसे 2700 मीटर की ऊंचाई में बसे नामिक के लोगों ने अब सरकार और सरकारी तंत्र के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है। आजादी के 65 साल बीतने के बाद भी सड़क न बनने, स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती न होने, एएनएम सेंटर तक की सुविधा न मिलने से गुस्साए उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोग आंदोलन के बूते अपना हक हासिल करने का मन बना चुके हैं।
बात नामिक के 118 परिवारों की 700 आबादी की दिक्कत की करें तो इन लोगों को सड़क में आने के लिए बिर्थी के पास द्वालीगाड़ तक 27 किमी की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। अंतिम छोर पर बसे इस गांव के लोग आजादी के बाद से होकरा नामक स्थान से नामिक तक सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन आज तक सड़क को मंजूरी नहीं मिली। वर्ष 2011 में नामिक के जूनियर हाईस्कूल को हाई स्कूल का दर्जा दिया गया लेकिन शासन ने हाईस्कूल में एक भी पद सृजित नहीं किया। 70 छात्र संख्या वाला हाईस्कूल जूनियर हाईस्कूल के एकल शिक्षक के हवाले है। हाल में विभाग ने एक शिक्षक की तैनाती के आदेश दिए, लेकिन उक्त शिक्षक ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
लगातार मांग के बाद भी बागेश्वर जिले की सीमा में बसे नामिक में एएनएम सेंटर स्थापित नहीं किया जा रहा है। ग्राम प्रधान तुलसी देवी शासन और सरकारी तंत्र की उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन्हें लगता ही नहीं कि नामिक के लोग भी इस देश के नागरिक हैं। कहती हैं अब नामिक के लोग आंदोलन के बल पर अपना हक हासिल करेंगे। 20 जून को द्वालीगाड़ में थल मुनस्यारी सड़क चक्काजाम लगाया जाएगा। उसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। इसकी सूचना डीएम, एसपी, एसडीएम, सीएमओ, शिक्षा विभाग को भेजी जा रही है। (amar ujala)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

-गैरसैंण विधानसभा भवन का शिलान्यास पट्ट ही गायब!

- नेता प्रतिपक्ष ने किया खुलासा

- बोले-गैरसैंण में ईट तो लगी नहीं, विस भवन के शिलान्यास में लगे पत्थर भी उड़ा ले गई सरकार

- कहा-विज्ञापनबाजी में ही सीएम ने 22.77 करोड़ किए बर्बाद

नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, साथ में कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मोहन नेगी। जागरण

जाका, रानीखेत : 'गैरसैंण' के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष के राज्य सरकार को आड़े हाथ लेने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि विधान भवन की ईट तो लगी नहीं, उल्टा सरकार शिलान्यास के पत्थर ही उड़ा ले गई। आरोप लगाया कि विज्ञापनों से वाहवाही बटोरने को मुख्यमंत्री पखवाड़े भर में 22.77 करोड़ रुपये बर्बाद कर चुके हैं। जो जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है।

नेता प्रतिपक्ष बुधवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। गैरसैंण के मसले पर कहा कि बीते वर्ष तीन नवंबर को आठ करोड़ रुपये खर्च कर कैबिनेट की बैठक की गई। 14 जनवरी को विधान भवन, सचिवालय, विधायक व अधिकारी हॉस्टल की नींव रखी गई। खुलासा किया कि वहां भवन निर्माण के नाम पर मुख्यमंत्री ईट तो नहीं लगा पाए उल्टा शिलान्यास पट ही उड़ा दिए गए हैं। भट्ट ने यह भी आरोप लगाया कि केदारनाथ मंदिर में पूजा के प्रचार-प्रसार को बहुगुणा सरकार ने जहां करीब दो करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं झूठी वाहवाही बटोरने के लिए विज्ञापनबाजी में ही 13 अक्टूबर से अब तक 22.77 करोड़ स्वाहा कर चुके हैं।

त्यागपत्र दे दें विस अध्यक्ष

रानीखेत : नेता प्रतिपक्ष ने गैरसैंण में विधानसभा भवन निर्माण न होने पर विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की नाराजगी को जायज ठहराया। साथ ही सलाह दी कि यदि सरकार अपने ही अध्यक्ष की बात को तवज्जो नहीं दे रही तो तत्काल तलब करें। तब भी बाज न आए तो कुंजवाल त्यागपत्र दे दें।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अब दो राजधानियों का प्रदेश होगा उत्तराखंड!
  अमर उजाला, देहरादून Updated @ 11:10 AM IST  uttarakhand has two capital  संबंधित ख़बरें राज्य स्थापना के 13 साल बाद अब उत्तराखंड दो राजधानियों का प्रदेश बनने जा रहा है। स्थापना दिवस पर प्रदेश सरकार गैरसैंण में विधान भवन का शिलान्यास करने जा रही है।

रायपुर में होगा शिलान्यास
19 नंवबर को देहरादून में रायपुर में प्रदेश सरकार विधान भवन का भी शिलान्यास होगा। यह तब है जबकि प्रदेश में स्थायी राजधानी के चयन के लिए बाकायदा एक आयोग का गठन किया गया था और इस आयोग ने पूरे आठ साल के इंतजार के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी। हालांकि आयोग की रिपोर्ट भी स्थायी राजधानी के मुद्दे को और उलझाने वाली ही साबित हुई।

पढ़ें, सीएम की चाची ने दी आत्मदाह की 'धमकी'

गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग राज्य गठन के तुरंत बाद से ही उठनी शुरू हो गई थी। हाल यह था कि पहली अंतरिम सरकार को ही इस मसले पर आयोग का गठन करना पड़ा था। इस आयोग की रिपोर्ट हालांकि कई साल केबाद ही सरकार को मिल पाई।

राजधानी चयन आयोग ने जनभावना को देखते हुए गैरसैंण को राजधानी मानना स्वीकार किया था पर अन्य मानकों में देहरादून को आगे रखा। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि राजधानी का मसला बहुत कुछ जनभावनाओं पर निर्भर करता है। साफ है कि आयोग की रिपोर्ट ने स्थायी राजधानी के मसले को सुलझाने की बजाय और उलझा दिया।

स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी
दून की सुविधा और जनभावनाओं की इस टकराहट का ही नतीजा रहा कि पिछले 12 सालों तक राजनीतिक दलों ने स्थायी राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी साध कर रखी। कवर्तमान कांग्रेस सरकार ने हिम्मत दिखाई और गैरसैंण में बाकायदा विधानभवन बनाने की घोषणा की।

पढ़ें, केदारनाथ-बदरीनाथ में बर्फबारी, दून वासियों पर भारी

यहां तक भी मामला ठीक ही था पर इसकेतुरंत बाद ही सरकार ने देहरादून में नया विधानभवन बनाने का ऐलान कर दिया।

तर्क यह दिया गया कि देहरादून में विधानभवन की जरूरत है और इसके लिए 13वें वित्त आयोग से 80 करोड़ रुपए भी मिल चुके हैं। इस पैसे का उपयोग करने के लिए देहरादून में विधानभवन बनाया जा रहा है। दो विधानसभाएं बनने से साफ है कि प्रदेश को फिलहाल स्थायी राजधानी नहीं मिल पाएगी।

सरकार हालांकि अगले सत्र से एक विधानसभा सत्र गैरसैंण में आयोजित करने का इरादा जाहिर कर रही है पर यह भी उत्तराखंड को जम्मू कश्मीर की तरह ही प्रदेश को दो राजधानियों की ओर ले जा रहा है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गैरसैंण में होगा विस भवन

गैरसैंण: राज्य स्थापना दिवस पर शनिवार को गैरसैंण के पास भरारीसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास किया गया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि जो जनसेवक पहाड़ और पहाड़ियों के हित में कार्य नहीं करेंगे उन्हें पहाड़ के लोग कभी माफ नहीं करेंगे।
भराड़ीसैंण में भूमि पूजन के बाद आयोजित जनसभा में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 110 करोड़ की लागत से विधानसभा भवन सहित अन्य निर्माण किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कार्यदाई संस्था एनबीसीसी को निर्माण कार्य 18 महीनों में पूर्ण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। पर्वतीय शैली में बनने वाला यह भवन पर्यटन के हिसाब से भी अद्वितीय होगा। पलायन व रोजगार को पहाड़ की प्रमुख समस्या बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने इसके लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है। सांसद सतपाल महाराज ने गैरसैंण में विस सत्र चलाने को पहाड़ की समस्या का एकमात्र निदान बताया। पर्यटन मंत्री अमृता रावत ने केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से शुरू किए जा रहे ट्रिपल सेवन योजना से पर्यटन के क्षेत्र में आ रही बाधाओं को शीघ्र ही दूर कर पाएंगे। बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र भंडारी ने कहा कि अगर मैं नहीं होता तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ही नहीं होती। उन्होंने जनपद चमोली को पिछड़ा घोषित करने के लिए भी एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आंदोलन की सलाह दी और इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के न आने पर तंज कसते  कहा कि प्रदेश में जनता की सरकार है न कि बाप-बेटे की सरकार। लिहाजा जनता के हिसाब से चलनी चाहिए। इस मौके पर
डॉ.जीतराम, कफकोट विधायक ललित फस्र्वाण कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरि सिंह,नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार, जीएमवीएन के निदेशक सुरेश कुमार बिष्ट, नंदा देवी राजजात के संयोजक भुवन नौटियाल,  नगर पंचायत कर्णप्रयाग के अध्यक्ष मुकेश नेगी, सुरेंद्र बिष्ट, वीरेंद्र सिंह रावत, जगदीश प्रसाद, पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह नेगी, जानकी रावत सहित कई नेता उपस्थित थे। इस मौके पर उत्ताराखंड सूचना निदेशालय की नया उत्ताराखंड पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
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-गैरसैंण में विस भवन पूजन का कार्यक्रम प्रात: 11 बजे से प्रस्तावित था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष समेत अन्य लोग हेलीकाप्टर से 11:30 बजे भरारीसैंण पहुंचे। इससे यह कार्यक्रम देरी से शुरू हुआ

  -सभा स्थल पर उमड़ी भीड़ को देख गदगद नेताओं ने इशारों ही इशारों में आगामी पंचायत व लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने का संदेश भी दे डाला
-भूमि पूजन के कार्यक्रम में सिलपाटा के ग्रामीणों ने बैनर सहित पहुंचकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि सिलपाटा तक सड़क निर्माण का मसला वन अधिनियम के चलते आठ वर्षो से खटाई में है।
-खंसर विकास संघर्ष समिति माइथान ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर 2012 में अष्टमी के दिन माइथान मंदिर में पशुबलि को लेकर हुए विवाद में ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया।http://www.jagran.com/uttarakhand/chamoli-10851803.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
राजधानी बनाने की मांग को लेकर दिया धरना

कर्णप्रयाग: उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के साथ एक समान रवैया एवं गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय में राज्य आंदोलनकारियों ने जुलूस प्रदर्शन निकालकर धरना दिया। उपजिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को ज्ञापन प्रेषित किया।

राज्य आंदोलनकारी नगर क्षेत्र के अपर बाजार रामलीला परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए तहसील परिसर पहुंचे। मौके पर निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य भुवन नौटियाल, हरिकृष्ण भट्ट, दिनेश जोशी, हरनाम सिंह लूथरा ने कहा कि प्रदेश सरकार को राज्य आंदोलनकारियों के लिए पेंशन व नौकरी दिए जाने के मानकों में शिथिलीकरण लाया जाना चाहिए। आंदोलनकारियों को एक समान पेंशन व सुविधाएं दिए जाने, चिह्नीकरण प्रक्रिया पुन: शुरू करने, आउट सोर्सिग के तहत रमसा, उपनल, पीआरडी में राज्य आदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को प्राथमिकता देने, एक दिन भी जेल रहने वाले आंदोलनकारी को पेंशन सुविधा देने और उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में अन्य प्रांतों में निशुल्क यात्रा करने तथा पट्टी कपीरी के सक्रिय आंदोलनकारियों को चिह्नित सूची में दर्ज करने की मांग की है। इस अवसर पर जगदीश डिमरी, अरुण मिश्रा, चंद्रकिशोर पुरोहित, हरनाम सिंह, दीपक बहुगुणा, दिनेश जोशी, किशोरी प्रसाद, महिमानंद भट्ट, हरिकृष्ण भट्ट आदि मौजूद थे।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सरकार राजधानी का मुद्दा जनभावना अनुरूप हल करे
अल्मोड़ा। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा है कि वह गैरसैंण में स्थायी राजधानी बनाए जाने के पक्ष में हैं। सरकार को स्थायी राजधानी के मुद्दे को जनभावना के अनुरूप हल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय मंजूरी के बाद ही विकास संकल्प दिवस पर विकास कार्यों का शिलान्यास हुआ है। इसमें बजट की कमी नहीं होगी।
अमर उजाला से भेंट में उन्होंने कहा कि गैरसैंण को लेकर उनका विचार स्पष्ट है। वह गैरसैंण में स्थायी राजधानी बनाए जाने के हिमायती हैं। पिछले साल सरकार ने गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन सत्र चलाने की घोषणा की है। राजधानी तय करने का निर्णय सरकार को करना है। सरकार को चाहिए कि जनभावना के अनुसार ही स्थायी राजधानी निर्माण का मामला घोषित करे। विकास संकल्प दिवस पर राज्य के सभी जिलों में अरबों रुपये लागत के विकास कार्यों के शिलान्यास हुए हैं। कार्यों को पूरे करने के लिए बजट की क्या व्यवस्था होगी। इस पर उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही सरकार ने विकास कार्य स्वीकृत कर धनावंटन किया है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बजट की कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वनभूमि के निस्तारण में समय लगने से कई काम वर्षों तक लटके रहते हैं। सरकार को इस काम में तेजी लाने और शुरू हो चुके कामों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय पर पूरे कराने के प्रयास करने होंगे।

http://www.amarujala.com/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सेवामे,
         
विषय: 23 मार्च- 2014 से मलेथा - गैरसैण पद यात्रा को लेकर सहभागिता व आमंत्रण हेतु I

महोदय/महोदया,

        विगत कई वर्षों से हिमालय बचाओ आन्दोलन व अन्य संगठन द्वारा हिमालय के विभन्न मुद्दों पर अनेक गोष्ठी व गहन विचार विमर्श करते आयी है I जल, जंगल, जमीन के सवाल व हक हकूको को लेकर अनेक प्रस्ताव आये हैं, जिसमे प्राथमिकता के तौर पर ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है I आप सभी अपने-अपने माध्यम से पहले ही इस तरफ अग्रसर है I इस सामाजिक अभियान को मजबूती प्रदान करने हेतु 2013 के 3 मई से 18 मई तक युवाओं द्वारा शिवपुरी से मलेथा तक प्रथम चरण की 16 दिवसीय पद यात्रा की थी I

इस पद यात्रा के दौरान उन गाँव का भ्रमण किया गया जो सड़क से लगभग बहुत दूर है और जहाँ विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग कर या स्थानीय रोजगार में माध्यमो को सृजित किया गया है I यात्रा के दौरान विकास के नाम पर प्राकृतिक सम्पदा के दोहन के बारे में ग्रामीणों को जानकारी दी गयी थी व इससे उत्पन्न होने वाले गंभीर परिणाम को लेके सचेत किया गया, जिसका यथार्थ पद यात्रा के एक माह पश्च्यात 16 जून, 2013 को आयी भीषण आपदा में देखने को मिला, जिसे हम प्राकृतिक आपदा की संज्ञा दे रहे है वो असल में मानव जनित आपदा थी I

यात्रा के पश्च्यात विकास को हमने : सर्वागीण विकास - "स्थानीय संसाधनों का प्रयोग, स्थानीय जनता द्वारा, स्थानीय जनता के लिए" से व्याख्या की I प्रथम पद यात्रा के दौरान हमनें निम्न परिक्षेत्र का भ्रमण किया और आंकलन किया :

1.       गाँव जो सड़क या अन्य प्रकार के यातायात से दूर थे लेकिन इन इलाकों में जल था I अपने पौराणिक तरीके के खेती के माध्यम से वे अपनी आजीविका के श्रोत के जन्मदाता थे I सम्पन्नता व शालीनता और संस्कृती का प्राय: ये गाँव सिर्फ शिक्षा के गिरते स्तर व चिकित्सा सुविधा का आभाव को गाँव की जरुरत मानते है I

2.       गाँव जो सड़क के करीब हैं, जल भी है, खेती भी भरपूर है, पलायन भी है (गाँव से सडक की तरफ) लेकिन यहाँ खेती नेपालियों की मेहनत पर आश्रित है I खनन का भी यहाँ बोल बाला है लेकिन जन संघर्ष के सामने वो घुटने टेकता है I

3.       गाँव जो सड़क से जुड़े तो है लेकिन जल नहीं है; अपितु पीने के पानी तक की उपलब्धिता नहीं है I दिन दोपहर शराब का प्रचलन, बिजली के हाई टेंशन पॉवर लाइन से खेती नष्ट होती, शराब की दूकान का आवंटन महिलाओं के नाम, मनरेगा के माध्यम से गाँव की महिलाओं को रोजगार, खेती की तरफ नकारात्मक रवैया, आजीविका के लिए पलायन, मनी आर्डर जैसे इकॉनमी का प्रचलन, आदि स्पष्ट तौर पर सामने आयी I

4.       गाँव जहाँ शिक्षा का स्तर ठीक है, आजीविका के साधन खड़े किये गए, खेती है लेकिन जंगली जानवरों के कारण हताश है I पलायन है, युवाओं में रोजगार की ललक है लेकिन संसाधन नहीं है I पशु पालन, कुटीर उद्योग है लेकिन प्रबल मात्रा में विपणन की बहुत बड़ी समस्या है I बड़ते हुए पलायन से चिंतित गाँव के लोग आने वाले भविष्य को अन्धकार मानते है I

इस अध्यन यात्रा के पश्च्यात दूसरे चरण में हम लोग bilateral डायलॉग्स को प्राथमिकता देना चाहते है I  गाँव को जागरूकता के साथ- साथ ग्रामीणों के हिसाब से विकास कैसे हो, रोजगार के कैसे साधन उनके पास है और ऐसे कौन से साधन या प्रतिदर्श विभिन्न स्थानों में है जो ग्रामीण अपने इलाको में भी कर सकते है I ऐसे कौन – कौन से पॉलिसीस है जो ग्रामीणों के विकास के लिए सहायक हो सकती है I यह यात्रा मलेथा से 23 मार्च – 2014 से प्रारंभ होगी व पौड़ी जिले के दूरस्थ गाँव से होते हुए अप्रैल में गैरसैण में समाप्त होगी I यात्रा के दौरान जिन बिन्दुओं पर जन जागरूक अभियान चलाया जाएगा वे निम्न प्रकार है;

1.       सर्वागीण विकास : " स्थानीय संसाधनों का प्रयोग, स्थानीय जनता द्वारा, स्थानीय जनता के लिए" I

2.       5 हजार से 15 हजार कमाने के लिए पलायन कर रहे नौजावानो के लिए रोजगार के साधन पर जागरूक करने I इसमें मूलत: पहाड़ में स्थापित विकास या रोजगार के मॉडल (प्रतिदर्श) व सरकारी नीतियाँ जो युवाओं को रोजगार सृजित करने में सहायक हो तक पहुचाया जाएगा I

3.       उत्तराखंड को मिल रहे ग्रीन बोनस का नियोजन किस प्रकार हो; पहाड़ के उन इलाके को केन्द्रित किया जाना चाहिए जिसके बदौलत ग्रीन बोनस उत्तराखंड को तोहफे के रूप में मिल रहा है I

4.       चकबंदी तो प्राथमिकता के तौर स्वीकार किया जाना चाहिए, राज्य सरकार व आमजन अपनी सहभागीता सुनिश्चित करें I

5.       उत्तराखंड में ग्राम स्तर के विकास के लिए ग्राम सभा को ताकत मिले, पंचायत के विकास के लिए ग्रामीणों व पंचायत की भागीदारी सुनिश्चित हो I ग्राम सभा अपने क्षेत्र के विकास को खुद नियोजित कर सके इसके लिए संविधान संसोधन 73 व 74 का अनुपालन होना अनिवार्य है I

चूंकि आप सभी सामाजिक अभियान के अभिन्न अंग है, अत: आपकी सहभागिता प्राथनिय है I आपसे निवेदन है की पद यात्रा में शामिल होने के साथ – साथ अपनी राय व मार्ग दर्शन करायें ताकि इस यात्रा को और भी साकारत्मक बनाया जा सके I 


                                                      निवेदक:

                                                      (कोर कमिटी)

                                                    हिमालय बचाओ आन्दोलन