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Typical Words of Folk Music of Uttarakhand-क्या है लोक संगीत के ये शब्द

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, April 13, 2010, 12:12:50 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हौसिया रूपसी -

सुन्दरता ब्या करने के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया है !


विनोद सिंह गढ़िया

मित्रो, मैंने श्री उदय टम्टा जी (से०नि० वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी) से पहाड़ी गानों का एक मुखड़ा 'रहट की तान' के बारे में पूछा।  उनका कहना था-

विनोद जी, रहट की तान का अर्थ बिल्कुल ही सिंपल है। रहट की तान उस डोरे को कहा जाता है, जिससे रहट घूमता है। यह रहट पहाड़ में तब चलता था, जब रुई की कताई से घर में ही कपडा बुना जाता था। पहाड़ में तब घर-घर रहट होते थे। 1950 तक रहट कहीं कहीं घरों में मिल जाते थे। अब समाप्त हो गये हैं। इसका प्रयोग गानों में आसान तुकबंदी के कारण होता था, जैसे--पहाडै की बान, गोरबछों को थान, रहटकि की तान --इत्यादि।



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढ़वाल की आदि कविताएँ -बाजू बंद काव्य


Garhwali Bajuband Kavya -1 (Garhwali Love Poems )
presented by Bhishma Kukreti
Beauty of Lover
1- फुर्कली पौन : छाजा माँ खड़ी ह्वै धार माँ कि सी जोने/जून

२-बांज को बुरीज : धार ह्वै जा दिख्वाली कांठा सी सुरीज
३-भुजेलो गुदयूं : मुखडी उदंकार जोनी कु सी उद्यौ
३-भेसो नि च चाँद : दुनिया घुमु पण कवी न देखी त्वै जन बांद
४- लोहा गढी छेणी: पिंग्लू रंग मुखडी को नथुली नि दिखेणी
५- पानी भरिया सोत : बांदू माँ कि बांद दिया जसी जोत
६- सुतरा कि दौंली : मुखडी बतौन्दी गोरी छे बल सौंली
Courtsey : Malchand Ramola from his book; Bajuband Kavyaa

चाल या हिटण
१- घट को भगवाडी : रुब्सी खुट्योंन तू चल अग्वाडी
२-बन्दूक कु गज : तू चल अग्वाडी मैं देखलू सज
मधुर वाणी
१-केला तोडी फली --- कै जगह सुणेली तेरी मोछंग सी गौल्ली (मोछंग एक वाद्य का नाम है )
२- घुघती को घोल ---गुद-बुद्या गिच्चिन हैक्कू बोल बोल
३-घुघती को घोल--- पाथो रुपया पड़ी जयां तेरी जुबानी को मोल (पाथो --अनाज नापने का लकडी का बर्तन )
४- बाखरी को रान : सौ रुप्यौं की दांती हजार की जुबान
सुकुमारता
१-साग लाई तोर --- नाक -डंडी tutige नथुली का जोर
कुच-कांति अथवा स्तन सौंदर्य
१-धनिया को बीज ----छाती का अनार तेरा तर्सौनिया चीज
माया --प्रेम
११- हरिया जौ का कीस--जन जन पे ठंदू पाणी तन तन बड़ी तीस
१२- यकुली को कंसो -माया लाण मन, शूरबीर करदू सान्सू
१३-सोना गढी संकल-- कित ब्यौना जयमाला की त रौलू खन्कल (खन्कल--अविवाहित)
१४-कुठारी कु खाना - अमीरू की माया छोडी फकीरूं बना
१५- कमोली को घ्यू --इन लाणी माया , माछी जन ज्यू
१६--- फूली जालो आरू- गौं पर की माया नजरूं कु सहारू
१७-- बखरा की सींगी ---फूल माथि भौंर बैठ्यूं त क्या करदी रिंगी
१८- सेरा लाई कूल ---रस चूसी भौंर ल्हीगे , रेगे बेरस फूल
१९- पाणी भरी घौडू-- परदेशी भौंरू कबी नि होन्दू अपडू
२०- बाखरा की सींगी - मायालू कु मायादार आंख्युं रिंगी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चाल या हिटण
१- घट को भगवाडी : रुब्सी खुट्योंन तू चल अग्वाडी
२-बन्दूक कु गज : तू चल अग्वाडी मैं देखलू सज
मधुर वाणी
१-केला तोडी फली --- कै जगह सुणेली तेरी मोछंग सी गौल्ली (मोछंग एक वाद्य का नाम है )
२- घुघती को घोल ---गुद-बुद्या गिच्चिन हैक्कू बोल बोल
३-घुघती को घोल--- पाथो रुपया पड़ी जयां तेरी जुबानी को मोल (पाथो --अनाज नापने का लकडी का बर्तन )
४- बाखरी को रान : सौ रुप्यौं की दांती हजार की जुबान
सुकुमारता
१-साग लाई तोर --- नाक -डंडी tutige नथुली का जोर
कुच-कांति अथवा स्तन सौंदर्य
१-धनिया को बीज ----छाती का अनार तेरा तर्सौनिया चीज
माया --प्रेम
११- हरिया जौ का कीस--जन जन पे ठंदू पाणी तन तन बड़ी तीस
१२- यकुली को कंसो -माया लाण मन, शूरबीर करदू सान्सू
१३-सोना गढी संकल-- कित ब्यौना जयमाला की त रौलू खन्कल (खन्कल--अविवाहित)
१४-कुठारी कु खाना - अमीरू की माया छोडी फकीरूं बना
१५- कमोली को घ्यू --इन लाणी माया , माछी जन ज्यू
१६--- फूली जालो आरू- गौं पर की माया नजरूं कु सहारू
१७-- बखरा की सींगी ---फूल माथि भौंर बैठ्यूं त क्या करदी रिंगी
१८- सेरा लाई कूल ---रस चूसी भौंर ल्हीगे , रेगे बेरस फूल
१९- पाणी भरी घौडू-- परदेशी भौंरू कबी नि होन्दू अपडू
२०- बाखरा की सींगी - मायालू कु मायादार आंख्युं रिंगी
विविध
२१- भैंस को नाम छ चाँद ---मायालू की मायादार बांदू माँ की बांद
२२- कलम की रेक --बान्दून दुन्या भरीं मेरी मन की तू एक
२३-तिम्ला की पात ---सज्जन को संजोग लम्बी ह्वै जा रात
२४-नथुली पौंर---डाल्यूं डाल्यूं रस लेंदू रस-लोभी भौंर
२५-मालू तोड्या taantee ---घौन् गन का बतु नि आणू माया जांदी बाँटीं
वाजुबंद काव्य में स्वप्न (गढ़वाल , उत्तराखंड, हिमालय के लोक गीतों में स्वप्न )
Dream in Folk Songs , Folk Poems of Garhwal, Uttarakhand, Himalayas
Collection: Ramchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
१- मलेऊ की पांत --रातू का सुपिना नि औनु होंदी उकरांत
२- काटी जाली सुपारी --सुपिना की नींद टूटी आंखी ना उफारी
३- कू तोडी बंद --झट दर्शन दे जा सुपिना का धन्द
४- बाखरा की सींगी ---रातु का सुपिनी माँ आयी दिन आंख्युं माँ रीँगी
खुदेड़ बाजूबंद गीत (विरह श्रृंगारिक कवितायेँ Folk Songs of Separation)
१- तिमली को पट: बाटा हेरी मरयूं ठाडी कपाली हात
२- बखरी बिन्वार : कै पर देखुलू तेरी अन्वार
३- परोठो दूध को : मुखडी को पाणी सुकी तुमारी खुद को
४-चरीजालू भैरो : जादा नि खुदेणु रंग जालो तेरो
५- डाला पकी बेर : आज कु मिलणु ह्वै गे बरसू को फेर
संग्रह कर्ता : मालचंद रमोला
प्रस्तुति: भीष्म कुकरेती मुंबई