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Uttarakhand Suffering From Disaster - दैवीय आपदाओं से जूझता उत्तराखण्ड

Started by पंकज सिंह महर, August 06, 2010, 11:46:48 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

भूस्खलन की चपेट में आकर मजदूर की मौत
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जनपद के दयूरी-भनार गांव में हुए भूस्खलन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। युवक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल मृतक के परिजनों को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है।

विकासखंड बिण के द्यूरी भनार गांव का रहने वाला नरेन्द्र नाथ कलौनी मंगलवार सायं लगभग छह बजे बाजार से घर की ओर लौट रहा था। गांव से कुछ सौ मीटर पूर्व पैदल मार्ग पर अचानक भूस्खलन हो गया।

भूस्खलन की चपेट में आए नरेन्द्र की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह बोहरा और राजस्व टीम गांव पहुंची। जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने मृतक के परिजनों को सांत्वना दी।

बुधवार को मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। घटनास्थल पर आबादी नहीं होने से अन्य कोई भूस्खलन की चपेट में नहीं आया। बताया गया है कि नरेंद्र नाथ अविवाहित था और अपनी बूढ़ी मां के साथ रहता था। मजदूरी कर वह अपनी आजीविका चला रहा था। जिला पंचायत अध्यक्ष ने दैवीय आपदा के तहत मृतक की मां को अविलंब आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है। घटना से गांव में शोक व्याप्त है।

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अतिदुर्गम पर नहीं पड़ी अब तक नजर
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  सोमेश्वर (अल्मोड़ा): सोमनाथ घाटी के दो और गांवों में आपदा ने कहर बरपाया था। मगर अतिदुर्गम में बसे इन गांवों तक पहुंचना तो दूर प्रशासनिक टीम की इन पर नजर तक नहीं पड़ी है। सुदूर बुगाड़ का पुल नेस्तनाबूद होने से जहां कई गांवों क संपर्क कट गया है।

वहीं तीताकोट पेयजल योजना ध्वस्त होने से लगभग दो हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। दुरुह रास्तों से पैदल सफर तय कर यहां पहुंचे पीड़ितों ने इसका खुला
सोमवार मध्य रात्रि बाद करीब दो बजे न्याय पंचायत चनौदा व कौसानी के बीच बादल फटने से नौ नहीं बल्कि 11 गांवों में तबाही मची थी। तहसील के अतिदुर्गम इन इलाकों की प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। गुरुवार को ग्रामीणों ने व्यथा सुनाते हुए बताया कि ग्राम पंचायत तीताकोट की पेयजल योजना का हेड ही बरसाती गधेरे में बह गया है।
ग्राम प्रधान पार्वती राना के मुताबिक इससे तीताकोट, मेल्टी पांडे व धौलरखोला के ग्रामीण पानी के लिए तरस गए हैं। उधर
सहजारी तोक में उफनाए बुगाड़ गधेरे में पुल बह गया। नतीजतन डौनी, खावखेत, बुगाड़ सहजारी आदि गांवों का आपसी संपर्क भंग हो गया है। इन इलाकों में मुख्य मार्ग से पांच किमी दूर पहाड़ी पर पैदल सफर तय कर पहुंचा जा सकता है।

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बरसात में छोड़ देतें हैं आशियाना
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  उत्तरकाशी : बरसात की आहट से भटवाड़ी ब्लाक के कुज्जन, गुणगा, भंगेली, हुर्री, संगलाई, और डुंडा ब्लॉक के गुनाल गांव और चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के बड़ेथी गांव के लोगों की रुह कांप जाती है। यहां के लोग भूस्खलन की डर से घर छोड़ कर किराए के मकानों में दिन गुजारते हैं।

वर्ष 2010 की अतिवृष्टि से जिले में कुछ भूभाग ऐसे दरके कि वहां की बसावत के लिए ही मुसीबत बन गए। जिले के आधा दर्जन गांवों में तो हालात काफी विकट हैं। इन बरसात शुरू होते ही इन गांवों के लोग अपने भूस्खलन और भू धंसाव के डर से अपने आशियानों को छोड़ देते हैं।

ऐसे लोग गांव से दूर बनी गौशालाओं या फिर किराये पर घर लेकर रहते हैं। बरसात बीतने के बाद ही ये लोग अपने घरों में लौटते हैं। अधिकांश परिवार तो हर साल बरसात की शुरुआत में ही गांव से सात किमी दूर अपनी गोशालाओं में चले जाते हैं। जिन जगहों पर ये ग्रामीण अपना बरसात का समय काटते हैं, वो भी बहुत सुरक्षित नहीं कही जा सकती, लेकिन गांव के मौजूदा हालात से कुछ बेहतर जरूर रहती हैं।

कुज्जन के प्रधान रघुवीर सिंह राणा, हुर्री के बिहारीलाल, गुनाल गांव के हर्षमणि सहित प्रभावित विनोद लाल, पह्लाद आदि बताते हैं कि सुरक्षित आवास के लिए उन्होंने काफी चक्कर काट दिए हैं, लेकिन अभी तक पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन से कई बार गुहार भी लगा दी है, पर ठोस मदद नहीं मिल रही है।
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कपकोट में जमकर वर्षा, मार्ग का मलबा घरों में घुसा
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बागेश्वर : जनपद के कपकोट क्षेत्र में हो रही तेज बरसात से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरुवार की सायं हुई तेज बरसात से दूणी-सुकुंडा मोटर मार्ग का मलवा कपकोट के कुछ मकानों में घुस गया तथा कई नाली भूमि भी मलबे में पट गई। जनपद के कपकोट क्षेत्र में तेज बरसात से नुकसान के समाचार हैं।

गुरुवार की सायं तेज बरसात से दूणी-सुकुंडा मोटर मार्ग का मलवा कपकोट के कुछ परिवारों के घरों में घुस गया साथ ही कपकोट बाजार के निवासियों के खेतों में भी मलवा आने से फसल को नुकसान हुआ है। उपप्रधान महिमन कपकोटी व एडवोकेट चामू सिंह देवली ने प्रशासन से प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा प्रदान किए जाने की मांग की है।


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सड़क पर गिरा पेड़ हादसा होने से टला



   घनसाली : मुख्य बाजार घनसाली में भारी भरकम चीड़ का पेड़ गिर गया। संयोग था कि उस समय वहां पर लोग नहीं थे। अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था। पेड़ के मुख्य सड़क पर गिरने से मार्ग  एक घंटे तक बाधित रहा।


बुधवार की सुबह मुख्य बाजार घनसाली में एक बड़ा हादसा होने से बच गया। सुबह दस बजे के करीब मेन मार्केट के ऊपर पहाड़ी से भारी-भरकम चीड़ का पेड़ टूट कर सड़क पर आ गया। वहां भीड़ न होने से एक बड़ा हादसा टल गया। साथ ही सड़क पर खड़ी चार गाडि़या भी बाल बाल बच गई।

पेड़ गिरने से बाजार की विद्युत लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं चमियाला मोटर मार्ग पर एक बोलेरो गाड़ी व यूटिलिटी की आपसी भिड़ंत में मोटर मार्ग पर एक घटे तक जाम लगा रहा। बड़ी मशक्कत बाद जाम खोला गया।
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तरकाशी में बादल फटने से 7 मरे, 50 लोग लापता
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Story Update : Saturday, August 04, 2012    11:07 AM
     


7 killed 50 missing in uttar kashi avalanche
[/t][/t]    उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बादल फटने से 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 लोग लापता हैं। यह हादसा स्वर्णघाट और संगमचट्टी इलाके में हुआ हैं। शुक्रवार रात बादल फटने से जिले के असी गंगा घाटी में दयारा बुग्याल के पास पापड़गाड, स्वारी गाड, नहरी गाड, गवाना गाड और असी गंगा क्षेत्र में जल प्रलय जैसे हालत पैदा हो गए हैं।

जिले के चिन्यालीसौड़ से लेकर भटवाड़ी तक लगभग 70 किमी के इलाके में कोहराम मच गया है। वहीं स्वर्णघाट और संगमचट्टी में बादल फटने से 7 लोगों की मौत हो गई है और 50 लापता हैं। गंगोत्री राजमार्ग पर 150 तीर्थ यात्रियों के फंसने की खबर है। बारिश्‍ा से 304 मेगावाट की मनेरी भाली जलविद्युत परियोजना-2 को भी नुकसान हुआ है। परियोजना के फोरवे इनटेक में गाद आ गई थी। बारिश और बाढ़ की आशंका के चलते परियोजना के कर्मचारियों में भी अफरा-तफरी है।

आपदा से कितना नुकसान, अंदाजा मुश्किल
लगभग दस बजे रात को आई इस आपदा के बाद कई लोगों के बह जाने की आशंका है। एक दर्जन होटल, घर बह गए हैं। 70 किलोमीटर के दायरे में तबाही की बात कही जा रही है। बादल फटने के आधी रात के बाद तक इलाके में भारी बारिश हो रही थी। हालांकि देर रात तक यह अनुमान लगाना मुश्किल था कि इस आपदा से कितना नुकसान हुआ है।

मौसम विभाग ने दी भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने शनिवार को खासकर कुमाऊं में भारी बारिश की चेतावनी दी है। देहरादून में भी कई दौर की बारिश का अनुमान लगाया गया है। पिछले तीन दिनों में जोरदार बारिश से गढ़वाल के चमोली और कुछ अन्य इलाकों में जनजीवन पर असर पड़ा है।

मनाली में भी बादल फटा
मनाली के पलचान इलाके में भी बादल फटने की खबर है। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मिट्टी खिसकने से मनाली रोहतांग लेह हाइवे पर यातायात बंद हो गया है। प्रशासन ने खतरे को देखते हुए पलचान, बांहग, आलू ग्राउंड, सोलंगनाला और पतलीकूहल में हाई अलर्ट जारी करते हुए इन इलाकों को खाली करवा दिया है। वहीं, सोलंग गांव का पुल भी बाढ़ में टूट गया है।

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धारी देवी मंदिर में बाढ़ का पानी कम होना शुरू हो गया है। रविवार को मंदिर परिसर में नदी का जलस्तर घटकर 588 मीटर पर आ गया। फिलहाल पानी घटकर मंदिर परिक्रमा स्थल तक आ गया है। मंदिर परिसर में लगभग 15 फीट पानी है।

झूला पुल टूट जाने से कलियासौड से कटे धारी गांव के ग्रामीणों ने आधारभूत जनसुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है। एसडीएम रजा अब्बास ने धारी गांव के लोगों को जरूरत के वक्त आवाजाही के लिए कंपनी की राफ्ट बोट उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

एसडीएम ने आदेश जारी कर कहा है कि श्रीनगर-श्रीकोट गंगानाली में नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग नदी का जलस्तर बढ़ने पर राबाइंका, राइंका और श्रीकोट में होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र तथा पंचायत घर में पहुंच जाएं।

तहसील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आपदा की सूचना आपदा केंद्र के दूरभाष नंबर 251178 पर दी जा सकती है। एसडीएम ने कहा कि कंपनी से मिली सूचना के अनुसार बांध स्थल का तीसरा गेट दो-एक दिन में खुल जाने की संभावना है।

प्रशासन ने बंद पड़े तीनों गेट खोलने के निर्देश एएचपीसी कंपनी को दिए हैं। बांध की झील के जलस्तर में भी रविवार को लगभग डेढ़ मीटर की कमी देखी गई। बाढ़ के पानी से टापू बने धारी देवी मंदिर को देखने के लिए रविवार को भी बड़ी संख्या में लोग आए।

धारी गांव के लिए बिजली आपूर्ति करने वाली विद्युत लाइन और बिजली खंभे भी धारी मंदिर परिसर और हनुमान मंदिर के पास झील में डूबे हैं। जिससे क्षेत्र में अंधेरा छाया है। एसडीएम ने बिजली को सुचारू करने के लिए निर्देश दे दिए हैं।

धारी गांव के लिए मंदिर परिसर के समीप से कंपनी के बड़े डीजल जेनरेटर से विद्युत व्यवस्था करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। धारी मंदिर परिसर में लगी कंपनी की तीन बड़ी फ्लड लाइटों से फिलहाल गांव की ओर रोशनी की जा रही है। एसएसबी जवानों की सहायता के लिए श्रीनगर का खाद्यान्न गोदाम एहतियातन खाली करवा लिया गया है।


धारी देवी मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद पांडे और पुजारी मनीष पांडे ने कहा कि मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि प्रात: पूजा अर्चना और आरती के बाद मंदिर में दिनभर पुजारी नहीं रहे। रविवार को भी प्रात: पुजारी मनीष पांडे और रामस्वरुप पांडे पुलिस आपदा टीम के साथ राफ्ट से मंदिर पहुंचे। प्रशासन ने श्रीनगर और श्रीकोट गंगानाली में नदी किनारे रहने वाले लोगों से सजग रहने को भी कहा है।


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उत्तरकाशी: असीगंगा व भागीरथी का रौद्र रूप दिल दहलाने वाला था। आपदा की उस रात को इस गांव में कोई भी ग्रामीण सोया नहीं और पूरी रात जागकर वह बेबस होकर इस विनाश लीला को टकटकी लगाए देखते रहे। जिन का सब कुछ तबाह हो गया वह यादों को संजोने के लिए रोजाना गंगोरी आ रहे हैं।

असीगंगा और भागीरथी घाटी में कुदरत का रूठना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जैसी जलप्रलय इस बार हुई वैसी पहले कभी नहीं देखी। यह अनुभव है जीवन के 70 से अधिक बसंत देख चुकी उत्तरौं गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं का। दोनों यह भी आगाह करने से नहीं चूकते कि अभी असी गंगा अपने पुराने संगमस्थल तक पहुंचेगी।

जिस दिन से असी गंगा और भागीरथी की बाढ़ आई, उस दिन से उत्तरौं गांव की 70 वर्षीय हसली देवी, 72 वर्षीय शिवदेई देवी रोजाना गंगोरी पहुंच रही हैं। कई घंटों तक पत्थरों पर बैठकर या फिर टूटी सड़क के किनारे खड़े होकर दोनों तबाही के इस मंजर को आशंकित नजरों से घंटों तक निहारती रहती हैं। दोनों महिलाएं बताती हैं कि वर्ष 1978 में भी बाढ़ आई थी।

तब भी यह दोनों नदियां उफान पर थी, लेकिन तब ना तो इतना पानी आया और ना ही इतना नुकसान ही हुआ। आदमी और मवेशी तो सकुशल बच गए थे। साथ ही खेती बाड़ी को भी कोई खास क्षति नहीं पहुंची थी। उसके बाद वर्ष 1991 में आई भूकंप की विभीषिका के भी यह दोनों गवाह बने।


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आधा दर्जन गांव का पौड़ी से संपर्क टूटा
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पौड़ी: पिछले दिनों हुई भारी बरसात के चलते मुख्यालय के लिंक मार्ग कई जगह क्षतिग्रस्त हो गए हैं जिससे कई गांवो का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। लोनिवि का पूरा ध्यान मुख्य मार्गो पर लगे होने के चलते ग्रामीण हिस्सों को जोड़ने वाली सड़कें पिछले कई दिनों से बंद पड़ी हुई हैं।

पौड़ी-खिर्सू-आदिबदरी मोटरमार्ग खिर्सू डबरूखाल के बीच पिठुंडीखाल में पिछले दस दिनों से क्षतिग्रस्त है। मार्ग क्षतिग्रस्त होने के चलते तकरीबन आधा दर्जन गांवो का संपर्क मंडल मुख्यालय से टूटा हुआ है।

ग्रामीणों को जिला कार्यालय सहित अन्य जनपदीय कार्यालयों में पड़ने वाले कार्यो को निपटाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। दस दिनों से मार्ग बाधित होने के चलते जहां ग्रामीणों को अपने पुराने वैकल्पिक मार्गो के जरिए गंतव्य तक पंहुचना पड़ रहा है, वहीं क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं का टोटा भी बना हुआ है।

मार्ग पर यातायात बाधित होने के चलते डबरूखाल, मोल्खाखाल, टीला, खंड, स्योली, भैसोंडा आदि कई गांवो में स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। क्षेत्र में जहां खाद्यान्न आपूर्ति पूरी तरह बाधित है वहीं मरीजों को भी खासी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग को सरकार ने ग्रामीणों की जरूरत को देखते हुए टीला तक ही यातायात के लिए चालू करवाया था लेकिन पिछले दिनों हुई भारी बरसात के चलते मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है।


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60 गांवों की स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे
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60 गांवों के ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। दरअसल छह साल बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पजिटिलानी का भवन पूरा न होने से इसका लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

सरकार ने पजिटिलानी में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने को पीएचसी का भवन बनाने का कार्य छह साल पहले शुरू कराया था, जो अफसरों की लापरवाही के चलते आज तक अधूरा है। इसके चलते पजिटिलानी क्षेत्र के ग्रामीणों को उपचार कराने के लिए 15 किलोमीटर दूर सीएचसी साहिया जाना पड़ता है। गंभीर बीमारी में तो विकासनगर या देहरादून की राह पकड़नी पड़ती है।

ग्राम प्रधान खोई भीम सिंह का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2007-08 में पजिटिलानी में पीएचसी भवन निर्माण के लिए 22 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन आज तक भवन निर्माण पूरा नहीं हो पाया और न ही लोगों को पीएचसी का लाभ मिल पाया। पजिटिलानी के पास चंदेऊ खोई ग्राम सभा में एएनएम सेंटर अधिकतर बंद रहता है।

उधर, सीएमओ डा.आरपी भट्ट का कहना है कि हाल ही में निर्माण एजेंसियों की बैठक हुई है। बैठक में निर्देश दिए कि यदि कोई भी कार्यदायी संस्था ने निर्माण पूरा न होने पर पैसा निकाला होगा तो इन संस्था को नोटिस जारी किया जाएगा।

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