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Uttarakhand Suffering From Disaster - दैवीय आपदाओं से जूझता उत्तराखण्ड

Started by पंकज सिंह महर, August 06, 2010, 11:46:48 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

 उत्तराखंड में इस साल कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है की हर कोई सोचने पर मजबूर हो गया है...राज्य सरकार आपाद प्रभावितों इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश का दावा कर रही है राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर आपादा प्रभआवितों का विस्थापन किया जाएगा


आपदा की आहट पता लगाने के लिए राज्य सरकार एक हाईटैक रडार लगाने पर विचार कर रही है ताकि रडार कि मदद से आपदा के आने की जानकारी हासिल कर आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके


उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में कुदरत का कहर लगातार जारी है। रुद्रप्रयाग के उखीमठ में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ में बादल फटने से हुई तबाही में अब तक 60 लोगों में मारे जाने की खबर है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में इनसे अलग है। राहत बचाव का काम अभी भी जारी है। जो लोग लापता है उनकी तलाश की जा रही है।

Devbhoomi,Uttarakhand

पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। हरिद्वार में गंगा फिर से उफान पर है। गंगा खतरे के निशान से महज डेढ़ मीटर नीचे है। ऐसे में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।

आपको बता दें कि पिछले दो साल से लगातार गंगा का पानी अक्सर हरिद्वार के अलावा रुड़की, लक्सर और यूपी के बिजनौर इलाके में भारी तबाही मचाता आ रहा है। अगर पहाड़ों में बारिश लगातार जारी रहती है तो हरिद्वार में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को छू जाएगा।

ऐसे में इन इलाकों में बाढ़ के हालात बन सकते है। उधर गंगा में सिल्ट आने से गंगनहर को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। सिंचाई विभाग का कहना है कि जब तक गंगा में सिल्ट आना बंद नहीं हो जाता है गंगा को खोलना खतरे से खाली नहीं है।

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तरकाशी के पुरोला में एक सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई हादसा पुरोला के हुडोली इलाके में हुआ बताया जा रहा है कि नौगांव से पुरोला जा रही एक बोलेरो गाडी बेकाबू होकर सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी... गाडी में सवार पांच लोगो में से तीन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो लोग बुरी तरह घायल हो गए ..घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन घायलो की हालत बिगडने की वजह से उन्हे देहरादून रैफर कर दिया गया चश्मदीदों के मुताबिक बोलेरो गाडी के ड्राइवर ने शराब पी रखी थी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




The toll in the series of cloudbursts that struck Rudraprayag rose to 35 on Saturday with six more bodies recovered from the affected villages.
The bodies were recovered on Saturday morning from the debris of flattened houses in the worst-hit Ukhimath area of the district, Disaster Management and Mitigation Centre officials in Dehradun said.
Twenty six are still missing while 11 of the 15 injured are critical, they said, adding that search and rescue operations by nearly 124 ITBP and Army personnel are on.
Twenty nine bodies had been pulled out during rescue operations on Friday.
Accompanied by state Disaster Management Minister Yashpal Arya and Garhwal MP Satpal Maharaj, Chief Minister Vijay Bahuguna visited the affected villages, took stock of the damage inflicted by the disaster and reviewed the ongoing relief and rescue operations, officials said.
The cloudbursts on Friday wreaked havoc in Chunni, Mangoli, Kimana, Sansari, Giriya, Barhmankholi, Premnagar and Juatok in the Ukhimath area of Rudraprayag, killing most of the victims while they were asleep.
The injured are being treated at hospitals in Ukhimath and Srinagar. Those who were critical were referred to hospitals in Dehradun, officials said.
Keywords: Uttarakhand cloudbursts, Ukhimath, Rudraprayag district


http://www.thehindu.com

C.S.Mehta

उत्तराखंड के उखीमठ ब्लोक मैं आयी भयंकर प्रकृतिक आपदा मैं मलवे मैं दबे शवों को निकालते हुए स्थानीय लोग....

C.S.Mehta

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on September 15, 2012, 07:41:42 AM



The toll in the series of cloudbursts that struck Rudraprayag rose to 35 on Saturday with six more bodies recovered from the affected villages.
The bodies were recovered on Saturday morning from the debris of flattened houses in the worst-hit Ukhimath area of the district, Disaster Management and Mitigation Centre officials in Dehradun said.
Twenty six are still missing while 11 of the 15 injured are critical, they said, adding that search and rescue operations by nearly 124 ITBP and Army personnel are on.
Twenty nine bodies had been pulled out during rescue operations on Friday.
Accompanied by state Disaster Management Minister Yashpal Arya and Garhwal MP Satpal Maharaj, Chief Minister Vijay Bahuguna visited the affected villages, took stock of the damage inflicted by the disaster and reviewed the ongoing relief and rescue operations, officials said.
The cloudbursts on Friday wreaked havoc in Chunni, Mangoli, Kimana, Sansari, Giriya, Barhmankholi, Premnagar and Juatok in the Ukhimath area of Rudraprayag, killing most of the victims while they were asleep.
The injured are being treated at hospitals in Ukhimath and Srinagar. Those who were critical were referred to hospitals in Dehradun, officials said.
Keywords: Uttarakhand cloudbursts, Ukhimath, Rudraprayag district


http://www.thehindu.com

C.S.Mehta


C.S.Mehta

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति dwara khabar
उखीमठ -
बस कर ऐ बैरी बादल क्या दुश्मनी है तेरी हमसे ? क्या चाहता है तू कि चले जाएँ हम इस धरती को छोड़ कर. तेरे पानी की तरह.
जानता हूँ कि वैज्ञानिक हमें ही दोष देंगे, कहेंगे गलत जगह क्यूँ बसते हो . पर कैसे छोड़ दें पुरखों कि माटी को और फिर कहाँ जायेंगे ? क्या करेंगे ? ऐ जालिम हम न रहे तो तू ही अकेला बचेगा इन पहाड़ों से सर टकराने के लिए, हमारे गीत न गूंजे इन घाटियों और चोटियों में तो तेरी ही गर्जना का क्या मोल रहेगा. अरे हम हें तो तेरी रूमानियत के गीत हैं. हम बिन तेरी भी क्या हस्ती.

विपदा से आहत एक मन



Devbhoomi,Uttarakhand

 



आपदा ने छीनी कईयों की रोजी रोटी
   

बरसात का सीजन तो निकला गया लेकिन बरसात के समय आई आपदा ने क ईयों की रोजी रोटी छीन ली। आपदा के कारण चम्बा-ऋषिकेश मोटर मार्ग पर व्यापार करने वाले दर्जनों लोगों की दुकानों में ताले लटके है। सड़क पर दुकानों के आगे अभी इतना मलबा पड़ा है कि दुकानों के जल्द खुलने के आसार नजर नही आ रहे हैं।
चम्बा-ऋषिकेश मोटर मार्ग पर जगह-जगह वर्षो पूर्व खुली अधिकांश दुकानों में आपदा के कारण ताले लटके हैं। कई दुकानें ऐसी भी है जो पिछली बार की बरसात से बंद पड़ी है। विदित हो कि उक्त मोटर मार्ग के आमसेरा, बिडोन, सेलूपाणी, उपली खाड़ी, जाजल और बेमुण्डा में बरसात के समय सड़क के ऊपर से भारी मात्रा में मलबा व पत्थर आने के कारण दुकानें बंद हो गयी थी।


आज भी इतना मलबा पसरा है कि दुकानों के खुलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। सीमा सड़क संगठन अभी जोखिम उठाने को तैयार नही है उसने केवल इतना मलबा हटा रखा है कि वाहनों की आवाजाही ही हो पा रही है। अलग-अलग जगहों पर करीब दो दर्जन दुकानें बंद है जिनमें होटल भी शामिल हैं।


दुकानें बंद होने पर दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। दुकानदार भगवान सिंह, बचन सिंह आदि का कहना है कि वे बेरोजगार हो गये हैं। मलबा इतना अधिक है कि वे खुद उसे हटा नही सकते हैं।



Source Dainik Jagran

Devbhoomi,Uttarakhand

दैवीय आपदा के कार्यो में भी सैट सीमेंट

रुद्रप्रयाग : सिंचाई विभाग दैवीय आपदा जैसे महत्वपूर्ण कार्यो में भी एक्सपायरी सीमेंट का प्रयोग कर रहा है। वर्तमान में दौ सो से अधिक योजनाओं का निर्माण विभाग करा रहा है। सिंचाई विभाग के सीमेंट गोदाम सीज होने के बाद इन सभी योजनाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

विदित हो कि दैनिक जागरण ने अपने चार दिसंबर के अंक में सिंचाई विभाग के गोदामों में सैट सीमेंट होने का खुलासा किया था। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग के तीन गोदाम सीज भी कर दिए पर सवाल यह उठता है कि खुलासे से पूर्व तो विभाग योजनाओं पर यही सैट सीमेंट लगा रहा था। ऐसे में जो निर्माण हो चुके हैं या जो योजनाएं निर्माणाधीन है उनकी गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।

सिंचाई विभाग के गोदाम में बड़ी संख्या में सीमेंट रखा गया है, जिसमें अधिकांश सीमेंट के सैट होने की बात सामने आ रही है। वहीं सिंचाई विभाग नियमित रूप से इस वित्तीय वर्ष में निर्माणाधीन दौ सौ से अधिक योजनाओं पर इस खराब हो चुके सीमेंट को लगा रहा है।

दैवीय आपदा मद में भी 75 योजनाओं पर निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें से कुछ पर निर्माण शुरू किया गया था, इसमें भी इसी सीमेंट का प्रयोग किया जा रहा था। हालांकि गोदाम सील होने से इस गोदाम के सीमेंट का प्रयोग अभी नहीं किया जा सकता है, लेकिन सिंचाई विभाग के अन्य गोदाम रतूड़ा से भी अभी सीमेंट सप्लाई की जा रही है।
प्रशासन जिन योजनाओं पर यह सीमेंट लगाया जा रहा है, उनकी जांच करने की कवायद में जुट गया है। जिला प्रशासन इस खेल में उच्च से लेकर स्थानीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।

Source dainik jagran