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COW Protection गौ संरक्षण

Started by विनोद सिंह गढ़िया, August 15, 2010, 04:05:05 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

धर्म की जय हो - अधर्म का नाश हो - प्राणियो में सदभावना हो - विश्व का कल्याण हो - गोबध बंद हो - भारत अखंड हो - सनातन समिधान शास्त्रीय हो - धर्म और शिक्षा में सरकारी हस्तक्षेप बंद हो - ''धर्ममेण शासिते राष्टेय न च बधा प्रवर्तते'' - धर्म शासित राष्ट होगा तो कोई बाधा उत्पन्न हो ही नही सकती .. धर्म यानि बैल जो भगवान शंकर का वाहन है {बैल} अगर वही नही बचेगा तो सब कुच्छ गुड गोबर हो जायेगा . गोवंश कैसे बचे . भारत फिर से विश्व गुरु कैसे बने आईये सनातन वेद - शास्त्रो के अनुसार विचार करे ? ''सा धेनुवर्र्दास्तु मे'' . ''नमस्ते जायमानायै जाताया उत ते नमः ! बालेभ्यः शफेभ्यो रुपयाध्न्ये ते नमः !!'' हे अवध्य गौ ! उत्पन्न होते समय तुम्हे नमस्कार और उत्पन्न होने पर भी तुम्हे प्रणाम . तुम्हारे रूप {शरीर } रोम और खुरो को भी प्रणाम !! समुंदर मंथन के समय पांच गौए उत्पन हुई उनके नाम नंदा ,सुभद्रा , सुरभी , सुशीला और बहुला पडा . ये सभी पाचो गायो को लोक कल्याण निमित देवताओ को बलिष्ठ बनाये रखने के लिये हविष्य हेतु दूध ,दही ,घी की नदीया बहाने और ब्राह्मणो का सहयोग करने हेतु श्रीहरी द्वारा प्रकाटय किया गया .इनको हमारे विद्वान ब्राह्मण महर्षी जमदग्नी ,भारद्वाज ,असित , वशिसठ ,और गौतम मुनि को समर्पित किया गया .क्योकी ब्राह्मणो में नारायण ने मंत्र बल की प्रतिष्ठा की है, इनके अलावा भगवान ने वेद और अग्नी को भी प्रगट किया ताकी ब्राह्मण वेदो को पडकर मन्त्रो से घी ''हविष्य'' के सहयोग से अग्नी में आहुती दे .और देवता वलीष्ठ हो कर हम मानवो की रक्षा करे . भगवान ने कहा गौए से उत्पन्न दूध ,दही ,घी , गोबर ,मूत्र और रोचना ये छः अंग {गोषडण्ग} अत्यंत पवित्र है,प्राणियो के सभी पापो को समाप्त कर उन्हे शुद्द करने वाला है .ब्राह्मणो में मन्त्रो का निवास है गायो में हविष्य स्थित है ; इन दोनो के संयोग से ही विष्णु स्वरूप यग्य संपन्न होते है {यज्ञो वै विष्णु : } गायो से ही यग्य की प्रवर्ति होती है और गायो में सभी देवताओ का निवास है . छहो अंगो -शिक्षा ,कल्प ,निरुक्त ,व्याकरण ,छंद ,जोतिषी और पद ,जटा, शिखा, रेखा आदि क्रमो के साथ सभी वेद गायो में ही सुप्रतिष्ठीत है . गायो को बचाने के लिये वेद पडने वाले ब्राह्मणो को बडाना होगा . वेदो की शिक्षा अनिवार्य करनी होगी . जब वेद पाठी ब्राह्मण यग्य करेंगे तो शुद्ध गाय के घी की आवश्यकता होगी . एक वेदो को जानने वाला ही शुद्ध गाय के घी की महत्ता को समझ सकता है . जब शुद्ध यग्य होंगे तब देवता बलिष्ठ , प्रसन्न हो कर समय पर वर्षा करेंगे , वर्षा से जल और हरे चारे की समुचित व्यवस्था होगी गायो को हरे चारे की प्रचुर मात्रा में प्राप्ति पर दूध की नदीया बहेंगी. गौ दूध खूब मिलने से सभी मानवो की बुद्धी सतोगुणी होगी, जीससे संसार में प्रेम और भाईचारे का वातावरण बनेगा . जब भाई चारे का वातावरण ही हो जायेगा तो कोई भी एक दुसरे की निंदा ,हिंसा, अपकार नही करेगा . इस सब के जड में गोमाता के दूध का चमत्कार ही छुपा है . आज पैकेट और सिंथेटिक दूध की वजह से मनवो का धन ,मन, तन सब खतरे में है . अगर हम सब लोग सिर्फ गोमाता का ही दूध पीने का संकल्प ले लेंगे तो हर हालत में {गव्ली} दूध बेचने वाले को भी भैस और नकली दूध की जगह गायो को पलना पडेगा गाय के दूध का व्यापार करना पडेगा . ताकी उसका व्यापार बंद ना हो . इससे ग्वली का धन और धर्म दोनो बडेगा जीससे उसका इस लोक और परलोक सुधरेग . देखा गाय के दूध पीने से कितने बडे -बडे सत्य धर्मका पालन अपने आप हो जाते है . गोमाता के बेटो- भक्तो से अपील एक बार जरूर पडे ..''नयाल सनातनी गोचरण दास'' ....





Devbhoomi,Uttarakhand

गो और गंगा के प्रति सभी हों जिम्मेदार
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विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि गंगा की धारा को अविरल और प्रदूषण मुक्त रखना पूरे देश का सामूहिक कर्तव्य है।

स्वर्गाश्रम परमार्थ निकेतन में आयोजित विहिप पूर्णकालिक कार्यकर्ता सम्मेलन के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. प्रवीण तोगड़िया यहां पहुंचे। परमार्थ निकेतन में मुनि महाराज के साथ बातचीत में डॉ. तोगड़िया ने भारतीय बाजार में स्वदेशी उत्पादों के पिछड़ने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गोमूत्र और गोबर में कई औषधीय गुण है। उन्होंने गंगा आरती में शिरकत करने के बाद जनसमुदाय को संबोधित करते हुए गो और गंगा के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि गंगा की धारा अविरल रहनी चाहिए, इसे प्रदूषण मुक्त रखना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। छह दिसंबर को याद करते हुए डॉ. तोगड़िया ने कहा कि आज ही के दिन राम भक्तों ने अयोध्या में कलंक को मिटाया था। डॉ. तोगड़िया यहां विहिप के उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में शामिल होने आए हैं। मंगलवार को उन्होंने दो सत्रों में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

Dainik Jagran

विनोद सिंह गढ़िया

अब गोमाता की जगह ली स्वर्ण प्रतिमा ने

जन्म से लेकर मृत्यु तक के तमाम संस्कारों में जिस दान की सर्वाधिक महत्ता वेद व पुराणों में कही गई है, वह गोदान है। 33 करोड़ देवी देवताओं का वास स्थल मानी जाने वाली गाय ही हर पाप को हरने वाली है। सांस्कारिक कर्मो में जरूरी कही जाने वाली गाय की उपलब्धता भी बढ़ते शहरीकरण ने कम कर दी है। आबादी के बढ़ते दबाब के साथ शहरीकरण तेजी से हो रहा है। कृषि योग्य भूमि पर लगातार निर्माण हो रहे हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र में पशुपालक भी अब पशुपालन से विमुख हो रहे हैं। साथ ही यह मजबूरी भी हो गई है। हल्द्वानी शहर के अलावा आसपास का क्षेत्र भी कृषि योग्य भूमि के लिहाज से सिमटता जा रहा है। यही कारण है कि गो माता की उपलब्धता भी लगभग नहीं के बराबर हो गई है। इससे लोगों को विभिन्न सांस्कारिक कर्मो के लिए गाय के गोबर, मूत्र और दूध आदि भी मिलना मुश्किल हो रहा है। गोदान तो महज रस्म अदायगी हो रहा है। हालांकि कुछ लोग जिनके पास पहले से ही गाय मौजूद हैं वह गोदान कर्म के लिए धनराशि लेकर गाय वापस ले जाते हैं। ज्योतिषाचार्य डा. नवीन चंद्र जोशी कहते हैं कि वेद, पुराण, उपनिषद सभी में गाय की महत्ता बताई गई है। सभी देवी देवताओं को वास गाय में होता है। इसीलिए इसे माता के रूप में पूजा जाता है। जीवात्मा के अंतिम समय में या मृत्यु के उपरांत गोदान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि गाय के स्पर्श मात्र से प्रेतात्मा वैतरणी नदी को पार कर निष्पाप होती है। डा. जोशी कहते हैं कि इस संस्कार के लिए गाय का प्रत्यक्ष रूप में होना जरूरी है, लेकिन यदि उपलब्ध ही नहीं हो पा रही हो तो स्वर्ण प्रतिमा को गाय के रूप में गोदान का प्रचलन भी अब बढ़ने लगा है।

साभार : दैनिक जागरण

विनोद सिंह गढ़िया

पहाड़ में गो वंश के पशुओं की दुर्गति

हिंदू धर्म में जिस गाय को मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक का मोक्ष का मुख्य माध्यम बताया गया है वह गाय आज दर दर भटक कर लोगों के क्रोध का शिकार बन रही है। राज्य में गो संरक्षण कानून लागू होने के बाद पर्वतीय क्षेत्र में गोवंश का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। बिकवाली के अभाव में लोग अनुपयोगी जानवरों को छोड़ दे रहे हैं जिससे इनकी दुर्गति हो रही है। यह आवारा जानवर काश्तकारों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे पहाड़ के कई इलाकों में नई समस्या उठ खड़ी हुई हैं।
पर्वतीय इलाकों में गाय, बछड़े आदि पालना पुरानी परंपरा रही है। दुधारू पशु और बैलों की जोड़ी को पहाड़ के किसानों की संपन्नता से भी जोड़ कर देखा जाता था। लोग इन्हें बड़ी तमन्ना से पाला करते थे और इनके व्याध पर घर में खुशी का इजहार होता था लेकिन आज गो वंश के यह पशु दर दर भटकने को मजबूर हो गए हैं। वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने गो संरक्षण कानून लाकर गो वंश के पशुओं को संरक्षण देने की बात कही लेकिन इस कानून के आने के बाद सबसे अधिक त्रासदी गायों को ही झेलनी पड़ी।
पूर्व में पर्वतीय किसान अपनी जरूरतों के अनुसार गाय और बैल पालते थे और उम्र दराज पशुओं को बदल लेते थे और उन्हें बेचकर मनपसंद पशु खरीद लेते थे। कुमाऊं के रामनगर के बैल पड़ाव में पशु मेला लगता था। जिसमें पर्वतीय क्षेत्र के किसान उम्र दराज बैलों को यहां बेचकर नए बछड़े ले जाते थे और उन्हें खेती योग्य बनाते थे लेकिन पशु मेला बंद होने के बाद अब यह क्रम भी समाप्त हो गया है और लोग बूढ़े होने पर पशुओं को छोड़ दे रहे हैं। जिससे पशु लोगों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

श्रोत: अमर उजाला

Devbhoomi,Uttarakhand

Salil Dimri
इस्लाम में गाय का महत्व

1. "गाय चौपायों की सरदार है" – कुरान

2. " गाय का दूध-घ...ी शिफा (दवा) है और गौमांस बीमारी है" मोहम्मद साहब
...
3. "खुदा के पास खून और गोश्त नहीं पहुँचता – त्याग की भावना पहुँचती है"

4. एक धार्मिक महिला को बिल्ली को मारने के कारण दोजख मिला, एक बदनाम महिला को कुत्ते को पानी पिलाने के कारण जन्नत मिली.

5. जिस राज्य में रहते हो वहाँ के राजा के रीति-रिवाजो का पालन करो.

6. पडोसी को दुःख पहुँचाना पाप है.

7. बाबर से बहादुर शाह जफ़र तक के शासन काल में गोहत्या प्रतिबंधित थी.

8. बहादुर शाह जफर ने स्वयं मुनादी फिरवाई थी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी करने वाले को तोप से उड़ा दिया जायेगा

Devbhoomi,Uttarakhand

गाय बैलों की तस्करी बदस्तूर जारी
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पुलिस ने पकड़े 14 बैल व 4 गाय

-एक कैंटर और टवेरा सीज, चार आरोपी गिरफ्तार

फोटो फाइल संख्या- 25 आरएमएनपी-01,02

परिचय -कैंटर में गाय-बैल व पुलिस गिरफ्त में कैंटर

रामनगर : उत्तर प्रदेश के लिए पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार गाय व बैलों की तस्करी चरम सीमा पर है। पहले से उदासीनता का रवैया अपनाये पुलिस इन दिनों गाय व बैलों को पकड़ने में गंभीर दिख रही है। शनिवार की रात्रि पुलिस ने पशु तस्करों द्वारा पर्वतीय क्षेत्र से कैंटर व टवेरा वाहन में जबरन ठूंसकर लादकर लाये जा रहे 18 मवेशी मुक्त कराये। साथ ही चार पशु तस्करों को भी धर दबोचा। कई गाय व बैलों की हालत खराब बताई जा रही है। पुलिस ने चारों के खिलाफ पशु कू्ररता अधिनियम व गौ संरक्षण के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।

शनिवार की रात्रि गर्जिया चौकी पर पर्वतीय क्षेत्र से एक कैंटर व एक टवेरा वाहन आते दिखे। चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने संदेह होने पर दोनों वाहनों को रोककर उनकी तलाशी ली तो कैंटर में जबरन हाथ पांव बांधकर 12 बैल व चार गाय ठूंसी हुई थी। जबकि टवेरा वाहन में भी दो बैल जबरन ठूंसे गये थे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8680289.html


विनोद सिंह गढ़िया

कांटों से भरे आंचल से भी दी मानवता को छांव

कपकोट/ बागेश्वर। ग्राम पंचायत भंडारी गांव के कन्यूटी तोक का एक परिवार लोगों के लिए नजीर बन गया है। परिवार के सदस्यों का आंचल कांटों भरा होने के बावजूद उन्होंने उसे मानवता को छांव देने के लिए दान कर दिया।
भंडारीगांव के कन्यूटी तोक निवासी पूर्व सैनिक हरिदत्त जोशी का दो साल पहले निधन हो गया था। गत वर्ष उनका इकलौता बेटा पीतांबर जोशी भी घर से लापता हो गया। बाद में उसका कंकाल चिरपत कोट के जंगल में मिला। इसके बाद हरि दत्त जोशी की विधवा खष्टी जोशी और उनकी पुत्रवधू हेमा जोशी पर दु:खों का पहाड़ ही टूट गया। लेकिन उन्होंने जिंदगी के गमों को भुलाकर खत्म हो रही मानवता को जिंदा रखने की मन में ठानी। इस दौरान ग्राम प्रधान गिरीश चंद्र जोशी गिर्दा ने बताया कि लोग गायों को दूहने के बाद उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं। इससे जहां गौवंश समाप्त होने का खतरा बढ़ रहा है वहीं लोगों की फसल भी प्रभावित हो रही है। गौ सदन बनेगा तो इससे गायों को संरक्षण मिलेगा। इससे प्रेरित होकर खष्टी जोशी, पुत्रवधू हेमा जोशी और पोते विवेक (18) ने अपने प्रियजनों की याद में गौ सदन के निर्माण के लिए बेलंग तोक में डेढ़ नाली भूमि दान करने का निर्णय लिया।
खष्टी जोशी और उनकी स्वास्थ्य कर्मी पुत्रवधू के इस कदम की लोग सराहना कर रहे हैं। उधर, ग्राम प्रधान श्री जोशी ने बताया कि तहसील में यह भूमि गोसदन के नाम पर पंजीकृत हो गई है।
                                                                                                       स्रोत- अमर उजाला

विनोद सिंह गढ़िया

गोमूत्र से तैयार की जाएगी कैंसर की दवा

गाय मनुष्य के लिए ऐसा चलता फिरता औषधालय है, जिसके मूत्र, गोबर, दूध, दही, घी के जरिए कई रोगों का उपचार किया जा सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय नस्ल की गायों के मूत्र से अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के उपचार के लिए दवाएं तैयार की जा रही हैं। अब लोगों को दूध के साथ गोमूत्र का भी दाम मिलने लगेगा। स्थानीय नस्ल की गायों के संरक्षण के लिए प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। इस दिशा में धेनु ग्रीन गार्डन कानपुर द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। योगीराज बसंत महाराज का कहना है कि गोमूत्र के जरिए तमाम ऐसी बीमारियों के लिए औषधियों का निर्माण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अकेेले गोमूत्र को कॉटन के कपड़े में आठ तह बनाकर छानने के बाद उसका सेवन करने पर यह कब्ज की अचूक औषधि है। यदि इसमें अरंडी का तेल मिला दिया जाए तो यह वात रोगों के लिए रामबाण दवा बन जाती है। बसंत महाराज का कहना है कि जंगल में चरने वाली बांझ गाय के शोधित 500 एमएल गोमूत्र में वन तुलसी की 10 बूंद और गंधक रसायन की दो बूंदें मिलाकर दवा तैयार की जाती है। इस तरह तैयार की गई 10 एमएल दवा में दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से कैंसर में लाभ मिलता है। शरीर को चुस्त दुरस्त, रोग मुक्त करने के लिए ईश्वर ने गोमूत्र के रूप में मनुष्य को ऐसी महाऔषधि दी है, जिसमें 33 क्लोराइड एवं पांच विटामिन के अलावा स्वर्ण क्षार होता है। स्थानीय नस्ल की कठुवा गायों को पालने वाले लोगों को धेनु ग्रीन गार्डन की ओर से हर प्रकार का प्रोत्साहन दिया जा रहा है।