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COW Protection गौ संरक्षण

Started by विनोद सिंह गढ़िया, August 15, 2010, 04:05:05 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

गाय ने जन्मे दो बछड़े, ग्रामीणों में कौतुहल
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   पुरोला: गाय ने एक साथ दो बछड़ों को जन्म दिया। इसको लेकर ग्रामीणों में कौतुहल है। सुबह से ही बछड़ों को देखने गांव के बच्चों महिलाओं व पुरुषों का तांता लगा हुआ है।


शुक्रवार सुबह तहसील मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कुरुड़ा में जर्बीलाल की जर्सी गाय ने दो स्वस्थ बछड़ों को एक साथ जन्म दिया। यह बात ग्रामीणों के लिए आ‌र्श्चय की घटना बनी हुई है। ग्रामीणों समेत दूर-दूर से लोगों का गाय व बछड़ों को देखने सुबह से ही जर्बी लाल के घर तांता लगा हुआ है।

जर्बी लाल सहित ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गाय द्वारा दो बछड़ों को जन्म देने की घटना केवल सुनी थी, देखी नहीं। जर्बी लाल की पत्‍‌नी बिजमा देवी ने बताया कि इस गाय ने अभी तक नौ बार बछड़ों को जन्म दिया गया है, लेकिन एक साथ जुड़वा बछड़ों को पहली बार जन्म दिया।

गाय सहित दोनों बछडे़ स्वस्थ हैं। इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक रैडे का कहना है कि गाय द्वारा एक साथ दो बछड़ों को जन्म देना सामान्य घटना है। इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं है।


Source dainik jagran

   

Devbhoomi,Uttarakhand

गो पालकों की बेरुखी का फायदा पशु तस्कर उठा रहे है। रात भर बांधने और दूध दोहने के बाद मां कही जाने वाली गाय को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। इससे गोवंश सड़कों पर यातायात जाम का कारण तो बनती ही हैं साथ ही इनकी जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।


तीर्थनगरी में कई धार्मिक और गैर सरकारी संस्थाऐं गोवंश पालन के नाम पर चल रही हैं। मगर सड़क में धक्के खा रहे गौवंश के प्रति यह संस्थाएं कभी संवेदनशील नजर नहीं आती। लक्ष्मणझूला मार्ग पर गाय पालने वाली धार्मिक संस्थाऐं भी रात को गोशाला में गायों के रखने के बाद दिन में सड़क पर छोड़ देती है।

घरों में गाय पालने वाले अधिसंख्य लोगों की भी यही स्थिति है। सुबह शाम दूध दूहने के बाद इन गायों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। चारे के लिए दुकानों में मुंह मारने कर सजा इन गायों को डंडे के रूप में मिलती है। मुख्य मार्गो पर इन गायों का झुंड यातायात में भी बाधा बनता है।


कई गाय तो दुर्घटना का शिकार भी हो जाती है। गोवंश को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने से गोपालकों में यह प्रवृति बढ़ रही है। इसको रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।


Sabhar Dainik Jagran

विनोद सिंह गढ़िया

पहाड़ी गाय का दूध सबसे पौष्टिक

रिसर्च : विश्वास पर विज्ञान ने लगाई मोहर


पहाड़ की गाय देखने में भले छोटी हो, लेकिन उसके गुण का कोई सानी नहीं। यह बात हमारे पूर्वज और बड़े लोग अपने अनुभव के आधार पर कहते थे। सालों पुराने इस विश्वास पर अब विज्ञान ने भी मोहर लगा दी है। पंत विश्वविद्यालय के पटवाडांगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक लैब में पहाड़ की बद्रीगाय समेत तीन और प्रजाति की गायों के दूृध, खून और यूरीन पर शोध किया गया था। इसमें बद्रीगाय में सबसे ज्यादा न्यूट्रीशन वैल्यू और प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का गुण मिले हैं।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पटवाडांगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक लैब में शोध हुआ है। शोध के तहत साहीवाल, क्रास ब्रीड, गुजरात की गिर गाय और पहाड़ के गिर गाय के दूध, खून और यूरीन की अलग-अलग जांच की गई। पहाड़ की बद्री गाय के दूध में वैज्ञानिकों को ए-2 जीन मिला है।
रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक अंकिता जोशी कहती हैं कि यह एक खास तरह का जीन होता है, जो सबसे ज्यादा न्यूट्रीशन वैल्यू होती है। इससे प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है। बायोटेक लैब के निदेशक डा. आरएस चौहान कहते हैं कि इसके बाद गौ मूत्र का टेस्ट करने का फैसला किया गया। इसके तहत चूहों और खरगोश की पहले टीएलसी, डीएलसी और हीमोग्लोबीन की जांच की गई। इसके बाद खरगोश, चूहों को बांटकर सभी गायों का गौ मूत्र दिया गया। कुछ दिनों बाद फिर से इनकी जांच की गई, तो उन चूहों में ज्यादा टीएलसी, डीएलसी और हीमोग्लोबीन की मात्रा मिली, जिन्हें बद्रीगाय का गौमूत्र दिया गया था।


Devbhoomi,Uttarakhand

 


सर्वसुख संपन्न करती है गौमाता की पूजा

   मसूरी: श्री गोपाल गौ लोक धाम समिति मसूरी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय दिव्य गौ कथा बुधवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हो गई। धूमधाम से निकली कलश यात्रा सिल्वरटन मैदान पहुंची जहां कथा वाचक गोपालमणि महाराज ने गौ कथा का रसपान कराया।
कथा का वर्णन करते हुए गोपालमणि महाराज ने कहा कि जिस घर में गौमाता होती है उस घर में कभी कोई संकट नहीं होता। अगर कोई परेशानी होती भी है तो गौमाता की कृपा से वह बिना नुकसान पहुंचाए स्वत: ही समाप्त हो जाती है।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी पर जो भी मानव अपनी जन्म देनी वाली मां और गौमाता की सेवा करता है, वह सर्वसुख सम्पन्न हो जाता है। इस दौरान उन्होंने लोगों से गौमाता के संरक्षण और सेवा करने का आग्रह किया। इससे पहले निकली कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।


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विनोद सिंह गढ़िया

गाय के महत्व बता रहे हैं दंत चिकित्सक

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का निर्वहन करने में गौ माता अनुपम स्थान रखती है। इतना सब कुछ जानते हुए भी कई लोग गायों को घर से निकाल देते हैं। भतरौंजखान क्षेत्र के एक दंत चिकित्सक लोगों को अपनी सेवा देने के बाद गौ सेवा में मशगूल हैं। वह गौ पालन के साथ ही लोगों को पर्चे बांटकर जीवन में गाय के महत्व के बारे में बताते हैं।
लोगों में बांटे जा रहे इन पर्चों में दंत चिकित्सक डा. केएन खुल्बे ने कहा है कि हजाराें वर्ष पहले जन्मे वेदव्यास द्वारा लिखित श्रीमद् भागवत की लगभग हर पंक्ति गोकर्ण महराज की उत्पत्ति से लेकर श्रीकृष्ण के गौ लोकधाम तक गाय के बारे में अवगत कराती है। गाय हिंदू धर्मावलंबियों के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी कर्मों की साक्षी बनती है। भगवान श्री कृष्ण के पास नौ लाख गायें थीं उन्होंने अपनी पूरी उम्र गौ सेवा में ही लगा दी। गढ़वाल के कई गांवों में आज भी बच्चे गौशाला में पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि गाय का सिर्फ आध्यात्मिक महत्व नहीं है बल्कि वह एक चलता फिरता अस्पताल भी है। गोमूत्र के सेवन से कब्ज, जकड़न, गैस, चर्म तथा कैंसर जैसे लाइलाज रोग भी ठीक हो जाते हैं। गाय का इतना अधिक योगदान होने के बाद भी उसका तिरस्कार किसी भी हद तक अच्छा नहीं है। उन्होंने पर्चे के माध्यम से लोगों से अपील की है कि वह उन्हें गौकशी के लिए कतई नहीं दें।

स्रोत - अमर उजाला

Devbhoomi,Uttarakhand

गाय के मल की पूजा से होते हैं कष्ट दूर: जोशी
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दुनिया में गोमाता एकमात्र जीव हैं, जिनके मल की पूजा से कष्ट दूर होते हैं। गोमाता दु:ख निवारणी हैं। गाय की पूजा मात्र से मानव के सांसारिक, मानसिक व शारीरिक कष्टों का निवारण होता है।