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COW Protection गौ संरक्षण

Started by विनोद सिंह गढ़िया, August 15, 2010, 04:05:05 PM

विनोद सिंह गढ़िया

गो माता को मिलेगा आसरा
रानीखेत/मौलेखाल। गढ़वाल मंडल से लगे स्याल्दे के सुदूरवर्ती बरंगल गांव में महर्षि दयानंद विद्या मंदिर समिति द्वारा गोवंश की रक्षा और पुनर्वास का संकल्प लिया गया है। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा वित्त पोषित गो सदन में छह सौ गायों को पालने का लक्ष्य है। इसकी शुरूआत हो चुकी है।
बरंगल के ग्राम प्रधान बाला दत्त शर्मा ने बताया कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड चेन्नई की मदद से महर्षि दयानंद विद्या मंदिर समिति ने यह उत्साहजनक पहल की है। यह कार्य ग्राम पंचायत के सहयोग से हो रहा है। बोर्ड ने बरंगल गो सदन के लिए 22 लाख का प्रस्ताव पास किया है। जिसमें से 12 लाख रुपये मिल चुके हैं। इस राशि से आठ बड़े कमरे बनाने का लक्ष्य है। एक कमरा बन चुका है, जिसमें 22 गाएं रखी गई हैं। समिति के प्रबंधक बची राम शर्मा ने बताया कि समिति कलियालिंगुड़, बरंगल, चंथरखाणी, चिंतोली, मुनानी आदि गांवों में गोवंश की रक्षा कर रही है। ग्रामीण अनुपयोगी गायों को छोड़ देते हैं। उनका गो सदन में पुनर्वास किया जाएगा। जबकि ग्रामीणों को गो सदन की तरफ से दुधारू गायें दी जाएंगी। बाद में ग्रामीण उन्हें वापस भेज सकते हैं। दुधारू गायों पर मामूली शुल्क लिया जाएगा। फिलहाल 72 गायें समिति की तरफ से ग्रामीणों को बांटी गई हैं। उन्होंने बताया कि गोमूत्र एकत्र करने के लिए हौज बनाया गया है। भविष्य में दूध, गोमूत्र तथा गोबर के व्यवसाय से आमदनी होगी और गो सदन को व्यापक रूप दिया जाएगा। भविष्य में सभी आठ कमरे बनने पर छह सौ गायें एक साथ पाली जाएंगी। गायों के प्रजनन की भी व्यवस्था की गई है।

Source : http://epaper.amarujala.com

विनोद सिंह गढ़िया

बात पते की

गौमूत्र से बनाएं कीटनाशक

रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से फसलों की रोग प्रतिरोधी क्षमता घट रही है और किसानों को अधिक कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ जमीन की उर्वराशक्ति में भी कमी आ रही है। गौमूत्र से तैयार कीटनाशक फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के अलावा जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ाते हैं। कृषि वैज्ञानिक सुरेश मोटवानी बताते हैं कि-गौमूत्र में मौजूद गंधक, तांबा, मैंगनीज, काबरेलिक एसिड बेहद असरदार कीटनाशक हैं।

कीटनाशक बनाने की विधि

देसी गाय के करीब 10 लीटर गौमूत्र को तांबे के बर्तन में एक किलो नीम की पत्तियां मिलाकर 15 दिनों के लिए रख देते हैं। इसके बाद इस मिश्रण को तांबे की कड़ाई में तब तक उबालते हैं जब तक यह जलकर आधा न रह जाए। इसी दौरान इसमें करीब 100 ग्राम लहसुन भी डालते हैं। ठंडा होने पर इस मिश्रण को छानकर करीब 500 लीटर पानी में मिलाते हैं। इस मिश्रण में नीम की पत्तियों के अलावा आंक, धतूरा, करंज और बेशरम की पत्तियां मिला देने से कीटनाशक अधिक दमदार बनाया जा सकता है।[/color]

उपयोग का तरीका


गौमूत्र से बने कीटनाशक का छिड़काव अन्य कीटनाशकों की तरह ही स्प्रे पंप से कर सकते हैं। बेहतर प्रभाव के लिए फसल बुवाई के 15 दिन बाद पहली बार कीटनाशक का छिड़काव करें। इसके बाद प्रत्येक 15-20 दिन के अंतराल पर खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करें। दस लीटर गौमूत्र से तैयार कीटनाशक करीब दो से ढाई एकड़ खेत में फसल को कीटों से बचाने के लिए पर्याप्त होगा।

खेतों पर प्रभाव

विभिन्न वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के अनुसार गौमूत्र में करीब 33 तत्व मौजूद होते हैं। इसमें शामिल गंधक एवं तांबा जहां बेहतर कीटनाशक का काम करते हैं। वहीं नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, लोहा, चूना, सोडियम आदि तत्व फसल को निरोगी एवं सशक्त बनाते हैं। इसके अलावा मैंगनीज तथा काबरेलिक एसिड कीटनाशक एवं कीटों के प्रजननरोधक का काम करते हैं। बकौल डॉ. मोटवानी गौमूत्र से बने कीटनाशक के उपयोग से उपज में 10-12 प्रतिशत की वृद्धि होती है। रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल पर 400 से 800 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से खर्च करने पड़ते हैं। वहीं गौमूत्र से कीटनाशक तैयार करने में खर्च मुश्किल से एक चौथाई रह जाता है और इस तरह गौमूत्र से बना कीटनाशक खेती की लागत को भी कम करता है।

संपर्क करें: डॉ. सुरेश मोटवानी (कृषि वैज्ञानिक)
फोन: 09329439167

साभार : अमर उजाला


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विनोद सिंह गढ़िया

गो-रक्षा का बीड़ा उठाए हैं शीशराम सुंदरियाल

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गाय की खातिर अपने हुए पराये
मौलेखाल/सल्ट। थला मनराल निवासी शीश राम सुंदरियाल को गो रक्षा की ऐसी धुन चढ़ी की अपने पराये हो गए। उम्र के 40 साल उन्होंने भटकती गायों के संरक्षण में लगा दिया। आवारा गायों को जब घर में आसरा नहीं मिला तो उन्होंने खुद घर छोड़ दिया। झोपड़ी बनाकर रहने लगे और अब 24 घंटे गायों के सेवा में रमे रहते हैं।
फिलहाल शीश राम 48 गायों का पालन पोषण कर रहे हैं। गो रक्षा के नाम पर चलने वाले सरकारी अभियानों का आज तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिला लेकिन गो रक्षा के लिए उनकी निष्ठा में कमी नहीं आई। अपने स्तर से उन्होंने गायों को जिंदा रखने के लिए हर संभव कोशिश की।
गो रक्षा के इस हो-हल्ले के बीच एक शख्स ऐसा भी है जो सुनसान गो माता की सेवा में लगा है। आजीविका का कोई मजबूत साधन नहीं है। जुगाड़ पर जिंदगी चल रही है लेकिन गायों को रोज जंगल में चुगाने ले जाते हैं स्रोत पर ही पानी पिलाते हैं और फिर बांध देते हैं झोपड़ी के पास। ठंड तथा खराब मौसम के दौरान शीश राम उन्हें आसपास के छूटे हुए मकानों के अंदर बांध देते हैं। पिछले दिनों खुले आसमान के नीचे ठंड के कारण 12 गाएं मर गईं तो मानो उन पर पहाड़ ही टूट पड़ा हो। वर्तमान समय में उनके पास 40 गाएं और आठ बछड़े, बछिया हैं।
गाय के प्रति उनकी निष्ठा देख अब लोग दूध न देने वाली गायों को उनके पास छोड़ जाते हैं। इसके एवज में शीश राम को कभी कभार सौ-दो सौ रुपये भी मिल जाते हैं। इससे ही गो-माता और शीश राम दोनों की ही दावत होती है। गायें भी उनकी आजीविका की समस्या को शायद समझती हैं इसी के चलते कई गायें जो दूध न देने के कारण छोड़ी जा चुकी हैं, वह भी उनकी सेवा से दूध देने लगती हैं। शीश राम के इस सेवाभाव पर आज तक किसी की नजर नहीं पड़ी वरन खुले आसमान के नीचे रहने वाली गायों को छत तो मिल ही जाती। शीश राम इतने सक्षम नहीं कि उनके लिए गोशाला बना सकें।

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Devbhoomi,Uttarakhand

गाय पूजन के साथ ही बसंत पंचमी मेला शुरू


घनसाली में चतुर्थ बसंत पंचमी मेले का शुभारंभ गाय पूजन के साथ शुरू हो गया है, जिसमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।   कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सुशील कोटनाला ने कहा कि गाय पूजन व हिन्दु संस्कृति को बचाए रखने के लिए इस प्रकार के मेलों का आयोजन किया जाना चाहिए और आने वाली पीढ़ी को भी इसका अनुसरण करना चाहिए।

उन्होंने सभी लोगों को गो माता के पूजन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गाय का पूजन हिन्दु संस्कृति में सर्वोपरी है। गाय पूजन के बाद ही हिन्दु धर्म के  व्यक्ति को कार्यो में सिद्धि प्राप्त होती है, जिसका वर्णन कई पुराणों में भी किया गया है।

दस दिवसीय चतुर्थ बसंत पंचमी मेल के अध्यक्ष महादेव नौटियाल ने कहा कि मेलों व संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा। इस अवसर पर नगेंद्र पुरी महाराज, प्रयाग दास, सुन्दर सिंह कठैत, मोहन लाल डंगवाल, राजेंद्र सजवाण, विजय कुमांई, जसवीर नेगी सहित कई लोग उपस्थित थे।


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Devbhoomi,Uttarakhand

गाय पालन व दान करना बड़ा पुण्य : गोपालमणी
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संत गोपाल मणी महाराज ने कहा कि गोदान करने से जन्मों जन्मों के पाप धुलकर परलोक का मार्ग प्रशस्त होता है। गाय की सेवा से भी पुण्य का भागीदार होता है।

जौनपुर के भवान में स्थानीय गो गंगा समिति के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन में कथा वाचक संत गोपाल मणी महाराज ने कहा कि आज हर व्यक्ति अपने धर्म, समाज व संस्कृति से दूर भाग कर पाश्चात्य संस्कृति की ओर दौड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में फैल रही कुरीतियां कथा श्रवण व संत्सग से दूर कर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि जिस घर में गाय का पालन व गाय की पूजा होती उस घर में देवता निवास करते है। प्रत्येक घर परिवार को गौ पालन करना चाहिए। इस मौके पर रतनमणी, विक्रम सिंह, शैलेन्द्र, श्रीमती एलमा देवी, दयापी देवी आदि उपस्थित थे।

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Anil Arya / अनिल आर्य

हर घर में हो गाय की पूजा : गोपालमणि
मसूरी। गाय हर परिवार के लिए पूजनीय है। सभी देवी-देवताओं का इसमें वास रहता है। ज्योतिष के साथ-साथ गाय और गो उत्पादों का वैज्ञानिक महत्व भी है।
बुधवार को भवान में श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर कथावाचक गोपाल मणि महाराज और उनके पुत्र सीता शरण महाराज ने गाय का महत्व बताया। इस दौरान उन्होंने कथा सुनने आए लोगों से घर में गाय पालने का संकल्प भी लिवाया। महाराज ने कहा कि जिन घरों में गाय होती है, उसके सदस्यों पर सुख, शांति बनी रहती है। गोमूत्र, गोबर का भी विशेष महत्व है। इस दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश नौटियाल, देवेंद्र प्रसाद चमोली ने भी विचार रखे।
इस मौके पर कुशहाल चौहान, विक्रम पडियार, रत्नमणि भट्ट, देवी सिंह चौहान, जोत सिंह बिष्ट, कुंदर सिंह रावत, विनोद नौटियाल, विनोद सेमवाल, राजपाल पडियार, डा. शैलेंद्र चौहान आदि शामिल रहे।
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विनोद सिंह गढ़िया

हमारी देवभूमि में ये क्या हो रहा है ? क्या  देवभूमि में इसी प्रकार से गौ वंश पर अत्याचार होते रहेंगे ? क्यों कर रहे हैं लोग ऐसा अत्याचार ? क्यों सरकार चुप बैठी हैं ? क्या कोई इन अत्याचारियों को सजा नहीं दिला सकता ?


Anil Arya / अनिल आर्य

गाय में लोगों की आस्था बढ़ी
देहरादून।
दून विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख शंकर लाल ने कहा कि गायों के प्रति हाल-फिलहाल में लोगों की आस्था बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि संरक्षण के लिए विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा शुरू की गई। देश भर में 28500 किलोमीटर की इस यात्रा के बाद गाय के प्रति लोगों में आस्था बढ़ी। उन्होंने बताया कि गाय के गोबर से सभी प्रकार के चर्म रोग दूर किए जा सकते हैं। उत्तराखंड का गो मूत्र सबसे अधिक रोग निरोधक है।
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विनोद सिंह गढ़िया



आज सभी लोगों की सोच रिया बनकोटी जैसी होती तो आज पालतू जानवर आवारा नहीं होते।