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Tribute to Great Poet and Our Beloved Girda आखिर गिरदा चले गये.. श्रद्धांजली

Started by हेम पन्त, August 22, 2010, 11:57:47 AM

Charu Tiwari

गिर्दा का जाना हम सबके लिये असहनीय है। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने उत्तराखंड की आंदोलन की परंपरा को नये आयाम दिये। आंदोलनों को स्वर देने वाले गिर्दा की आवाज उनके लिये थी जो बोल नहीं सकते। उनकी आवाज हमेशा आम जन के हकों को पाने के लिये प्रतिकार के रूप में हमेशा मेहनतकश और आंदोलनरत जनता के साथ रही। यह आवाज उनकी खामोशी के बाद और सुनी-समझी जायेगी। वर्षों तक, सदियों तक। गिर्दा को अश्रुपूर्ण श्रद्वांजलि। आज दिल्ली में विभिन्न संगठनों ने गढ़वाल भवन में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया। बहुत ही गमगीन माहौल में लोगों ने लोगों ने उन गीतों और कविताओं का जिकz किया जिसमें वे नई चेतना का रास्ता दिखाते रहे हैं। गिर्दा आपका अपनत्व, प्यार, स्नेह, हमें तब-तब आपकी याद दिलायेगा जब-जब हम आपके उन बिताये पड़ावों से गुजरेंगे, जिसने हम सबकों चेतना का बड़ा पफलक दिया। आपके स्वर वैसे ही रहेंगे-

हम ओड, बारूड़ी, कुलि, कबाड़ी,
जब य दुनि हं हिसाब ल्यूलो,
एक हांग निं मांगू, पफांग नि मांगू,
खाता-खतौनी क हिसाब ल्यूलो।

..............................................

मेरी हाड~नकि बनि छू य कुर्सी,
जेमज भैबैर कर छां तुम राज,
कैकि बाबूकि निहुनि य कुर्सी,
तुमरि मैवाद छु पांचे साल

...............................................

कस होलो उत्तराखंड, कस हमार नेता,
कस होलो पधान गौंक, कसि हलि व्यवस्था,
जड़ि-कंजड़ि उखेलि सबुकि, पिफर पफैसाल करूल,
उत्तराखंड ल्यल, उकड़ि मन कस बनूलो।



dramanainital

तुम हमेशा पहाड़ में रहे,
उसके सभी सरोकारों में रहे,
चाहते तो सरोकारों की जगह,
सरकारों में भी रह सकते थे.

...बाढ़ पर उत्तरकाशी रहे,
पेड़ कटने पर जंगल में.
भीड़ में लाठियाँ खाते रहे,
भीड़ पर राज कर सकते थे.

तुम जन की आवाज़ में रहे,
आवाज़ के शब्दों में रहे,
होली गाई, तो जाग्रिति की,
रंग बरसे भी गा सकते थे.

तुम इतिहास बनते-बनाते रहे.
तुम विश्वास बनते बनाते रहे.
हमेशा सुनाई,मनवाई नहीं,
चाहते तो मनवा सकते थे.

तुम लिखते लिखते गीत हो गए,
तुम गा गा कर संगीत हो गए,
तुम रंगकर्मी के कर्म में रहे,
उसके ग़ुरूर में रह सकते थे.

पहाड़ का सरोकार,पहाड़ के जन की आवाज़,पहाड़ का गीत मर नहीं सकता.गिर्दा तुम मर नहीं सकते.तुम ज़िन्दा हो और सदा रहोगे.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


A condolence meeting held in Delhi on 22 Aug 2010 where tribute was given to Girda and 18 School children who were killed in Sumgarh village of District Bageshwar.

Many people including Bageshwar MLA Chandan Ram Das, Minister Puran Chandra Nainwal and people from various social organizations attended this meeting.



Parashar Gaur

 Girdaa ki ekaa ek chale jane se ...

MAI AUR MERI PAHADI KI BOLI VASHA, AAJ ANAATH HOGAYEE HAI ...

baad me likhungaa vistaar se.

parashar gaur
canada

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


नवीन जोशी

गिर्दा को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ:









कृपया इस लिंक पर भी जाएँ: http://rashtriyasahara.samaylive.com/epaperpdf//2382010//2382010-md-dd-12.pdf

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  हल्द्वानी (नैनीताल)। प्रसिद्ध रंगकर्मी व जनकवि गिरीश तिवारी 'गिर्दा' ने रविवार को सुशीला तिवारी चिकित्सालय में अंतिम सांस ली। पिछले कई दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। उनके निधन की सूचना से शोक की लहर दौड़ गयी।




नैनीताल में निवास कर रहे जाने-माने रंगकर्मी 67 वर्षीय गिरीश तिवारी गिर्दा को गत 20 अगस्त को पेट में तेज दर्द होने पर सुशीला तिवारी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। अगले दिन पेट का सफल ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। आज दोपहर 11 बजकर 31 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे पत्‍‌नी हेमलता व बेटे प्रेम पिरम को छोड़ गये हैं। उनका अंतिम संस्कार 23 अगस्त को पाइन्स श्मशान घाट नैनीताल में होगा। उनके निधन की सूचना से चारों तरफ शोक की लहर दौड़ गयी। अस्पताल में ही पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, राजीव लोचन साह समेत रंगकर्मी, लेखक एवं शिक्षाविदों का जमावड़ा लग गया। वर्ष 1945 में अल्मोड़ा के ज्योली गांव में माता जीवन्ती व पिता हंसा दत्ता तिवारी के घर जन्मे गिरीश तिवारी को जनमानस गिर्दा उपनाम से पुकारते थे। गिर्दा बचपन से ही जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे। मेहनतकश अभावों से जूझती जिन्दगी को स्वर देने वाले गिर्दा का दर्द लोक गीतों में भी झलकता है। पर्यावरण को बचाने के लिए भी जुझारूपन से लगे रहे तथा पहाड़ के हर संघर्ष में लोगों का भरपूर साथ दिया। क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में लेखों के माध्यम से उन्होंने अपने विचार व्यक्त किये। लोक गायक झूसिया दमाई पर शोध कार्य भी किया। राजीव कुमार निर्देशित फिल्म वसीयत में गिर्दा का अभिनय भी यादगार रहेगा। वर्ष 1996 में गिर्दा को उत्ताराखंड लोक संस्कृति सम्मान से नवाजा गया। जनवादी लेखन के लिए भी मसूरी में भारतीय जन नाट्य संघ ने उन्हें सम्मानित किया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, राज्य सभा सदस्य तरुण विजय एवं परिवहन मंत्री बंशीधर भगत ने गहरा दु:ख व्यक्त किया है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6667178.html