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Tribute to Great Poet and Our Beloved Girda आखिर गिरदा चले गये.. श्रद्धांजली

Started by हेम पन्त, August 22, 2010, 11:57:47 AM

हेम पन्त

हमारे मोहिले गिरदा चले गये... भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे...

Noted Uttarakhandi Culturist, Writer and Poet Girish Tiwari "Girda" was shifted to Haldwani from Nainital due to his serious condition. He was operated in Sushila Tiwari Hospital yesterday. Today morning he left us.. may his soul rest in peace..

कमल

कल सुबह ही उनसे मिलने हम लोग आई.सी.यू. में गये थे। उनसे बात भी हुई, वह पहचान भी गये हम लोगों को। तब यह तो लग रहा था कि उनकी हालत चिताजनक है लेकिन इस बात अंदाज ना था कि उनसे यह मेरी आखिरी मुलाकात है।

गिरदा तुम हमारी यादों में हमेशा रहोगे। एक अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली।



हेम पन्त

गिरदा का 3-4 दिन पहले ही फोन आया था.. मैं परसों गिरदा से मिला था, बड़े स्नेह से उन्होंने बात की. अल्सर फटने के बावजूद वह होश में थे.

गिरदा के पार्थिव शरीर को नैनीताल ले जाने की तैयारी हो रही है... हल्द्वानी-नैनीताल में भारी बारिश हो रही है. अन्तिम संस्कार आज होगा या कल ये अभी निश्चित नहीं हुआ है...

गिरदा तो नहीं रहे लेकिन उनकी प्यारी छवि हमारे दिलों में जीवन भर अंकित रहेंगी...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यह एक बहुत बड़ी क्षति है!

भगवान् गिर्दा की आत्मा को शांति दे!  गिर्दा के द्वारा किये गए काम हमारे बीच सदा याद किये जायंगे!

उत्तराखंड राज्य के लिए यह वर्ष शुभ नहीं रहा है कही पर प्राकर्तिक घटनाये कही पर यहाँ के लोक कलाकारों की दुर्घटनाये एव मौत की खबरे!

I had a word with Girda on Harela festival. He had given wishes to all the community members on Harela Festival.

फ़ोन पर जरुर Girda से बात हुयी पर उनसे मिल नहीं पाया !गिर्दा से ने मिल पाने की मेरे दिल में हमेशा कशिश रहेगी


हेम पन्त

गिरदा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर कुछ सूचनाएं हमने फोरम के इस लिंक पर उपलब्ध करायी हैं..

http://www.merapahadforum.com/uttarakhand-language-books-literature-and-words/%27%27-girda-his-poems/

धनेश कोठारी

Girda ka awsan pahad ke sahitiyik aur sanskritik samaj ke liye badi kshati hai. ab hamare beech garda ke karntikari sabda hi jinda rahenge. joki bar bar hamen 'asahmati' par prahar karne ko prerit karenge. Ishwar unki aatma ko jannat de.

पंकज सिंह महर

गिर्दा के स्नेहिल वात्सल्य से अब हम कभी भी आच्छादिन नहीं हो पायेंगे, फोन पर गिर्दा से बात होती थी पर रुबरु होने का मौका विगत १४ अगस्त को ही मिला। जितनी आत्मीयता से गिर्दा मिलते थे, बोलते थे.....अब वह सुनने को नहीं मिलेगा। उनका जाना उत्तराखण्ड के सरोकारों से सरोकार रखने वालों के लिये अपूरणीय क्षति है, वह ऐसा स्थान रिक्त कर गये, जिसे भर पाना नामुमकिन है।

जाना तो सबको होता है एक दिन,
पर यूं ही चले जाओगे गिर्दा,
सोचा भी न था,
यूं ही मुंह मोड़ के चले गए,
इतनी निष्ठुरता क्यों गिर्दा ?
पर दिल में, जज्बातों में हमेशा,
याद तुम्हारी संजोये रखेंगे हम गिर्दा|

अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि|

दीपक पनेरू

 भगवान गिर्दा की आत्मा को शांति प्रदान करे, तथा उनके परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे, ये एक अतुलनीय क्षति है जिसे शताब्दियों तक नहीं भरा जा सकता, हालाकि मैं गिर्दा से कभी मिल नहीं पाया लेकिन उनके बारे मैं जितना सुना, और पढ़ा है उससे ज्ञात होता है कि हमने एक अनमोल हीरा खो दिया है....

Vinod Jethuri

उत्तराखन्ड के महान कवि गिर्दा के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ, हम उनके आत्मा की शान्ति के लिये भगवान से प्राथना करते है.."उत्तराखन्ड काव्य" जैसे महान पुस्तको की रचना करने वाले और अपनी उत्तराखन्डी सस्क्रति को देश विदेश मे कविताओ के माध्यम से फ़ैलाने वाले गिर्जा जी का नाम उत्तराखन्ड काव्य ईतिहास मे सदा ही आदर के साथ लिया जायेगा और सदा ही अमर रहेगा..

विनोद सिंह गढ़िया

उत्तराखंड के साहित्य को अपना अमूल्य योगदान देकर आज गिर्दा हमारे बीच नहीं रहे |

                    "भगवान आपकी आत्मा को शान्ति दे |"