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Tribute to Great Poet and Our Beloved Girda आखिर गिरदा चले गये.. श्रद्धांजली

Started by हेम पन्त, August 22, 2010, 11:57:47 AM

दीपक पनेरू



अब ओ उद्वेलित करने वाले स्वर,
  अब ओ जनगीतों की हुंकार,
  अब नहीं सुनाई देगी ओ प्यारी बोली,
  ओ बच्चों का जैसा अतुलित प्यार,



जीवन की तस्वीर और जीने का अंदाज,
  आपका संघर्ष आपका सीधापन,
  कर गए ओ सब एक पल सदिय करे इन्तजार,
  आपकी सोच और आपका लेखन...



आपकी हर संघर्ष को दिल में बसा लेंगे,
  आपके सपने को "गिर्दा" अपनी मंजिल बना लेगे,
  खोने पाने की बात नहीं अब बस,
  आपके सपने को पूरा कर ही दम लेंगे.....

दीपक पनेरू






प्रसिद्ध जनकवि (अब  दिवंगत) पूज्यनीय स्व० श्री गिरीश चन्द्र तिवारी  "गिर्दा" को मेरी ओर से भावपूर्ण श्रंधांजलि........

गिर्दा का हमसभी के बिच से चला जाना बहुत ही बड़ी त्रासदी के बराबर है... और हम सभी के लिए असहनीय है , उनके जैसा  संस्कृति कर्मी, जनांदोलन कारी, जन कवी , जनता की आवाज़ सायद ही  फिर से कभी पहाड़ मे पैदा होगा.. गिर्दा की पीड़ा को हम उनकी कविताओ के माध्यम से ही समझ  सकते है. मैं  गिर्दा को अश्रुत श्रधांजलि देता हूँ... गिर दा आप हमारे हमेशा ही दिलो मे रहेंगे...
भागवान गिर्दा  की  आत्मा को शांति दे. और पुरे पहाड़ को इस दुःख को सहने की शक्ति दे.
जिस तरह से युवा पीडी और अपने समकक्ष के लोगो से गिर्दा का जुड़ाव था उसके लिए हम सभी को अभी ही ये संकल्प करना होगा की हम सभी को गिर्दा को हर साल याद करना होगा और उनकी आवाज़ बन कर जनता तक पहुचना होगा... तभी गिर्दा का सपना साकार होगा...

गिर्दा क्या चाहते थे हम उनकी कविता पढ़ कर अंदाजा लगा सकते है .. इसलिए उनके सपनो का उत्तराखण्ड बनाने का भी हमें संकल्प लेना ही होगा..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
Dosto,

Girda was a man of multi-skilled qualities. Apart from a poet, singer, social worker, activist, he was a great actor. Girda had also done acting in a Hindi Film. Vasiyat.

He has also acted in Bela Negi's un-released film Daye or Baye wherein Girda has played School Head Master role.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देहरादून।। उत्तराखंड के विख्यात जनकवि गिरीश तिवारी उर्फ गिरदा का रविवार को हल्द्वानी में निधन हो गया।       
           [/t]  वह 68 साल के थे।

उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक पुत्र हैं। हल्द्वानी स्थित एक निजी अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रख्यात जन कवि गिरदा ने रविवार सुबह लगभग 10 बजे अंतिम सांस ली। वह पेट का अल्सर फटने के बाद गत 20 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुए थे।

उनका 21 अगस्त को ऑपरेशन किया गया, मगर आंत फटने के बाद हुए इन्फेक्शन के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। गिरदा के नाम से मशहूर गिरीश तिवारी चिपको आंदोलन से लेकर उत्तराखंड आंदोलन तक सभी जन आंदोलनो में सक्रिय रहे। वह अपनी कविताओं के माध्यम से जनता को जागरूक करने के साथ ही बुराइयों पर प्रहार करते रहे।



http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/6392712.cms


Almoraboy_reborn

बहुत खेद हुआ यह सुनके. काफी दुखद समाचार है.

Manish Mehta

अति दुःख हुआ ये जान के की गिर्दा हमारे बीच ना रहे...आपकी रचनाएँ  प्रेणा स्रोत बनी रहेंगी युगों युगों तक..और आप अपनी रचनाओं के माध्यम से हमारे बीच सदैव बने रहेंगे...

भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे....

खीमसिंह रावत

Girda

हम छिलुक ल्युल राँख  ल्युल,
उणा कुणा सब चहुल
तुम मिलो ना मिलो हम जरुर चहुल
धुरिम ज्युल धात लगुल
एक फ्यर क्या कतुक फ्यर लगुल
जतुले हओल हम याद करुल
खुशीम करुल या दुखम करुल
भाटुई लागो ना लागो हम याद करुल ||
:(      :(     :(

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

Ye jankar bahut dukh hua ki Great poet Girish Tiwari ji "Girda" hamare beech me nahi rahe...


Bhagwan unki atma ko shanti de.......