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If You Were CM Of Uttarakhand? - यदि आप उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 15, 2007, 03:18:24 PM

लेकिन आपने लिखा तो अपने गाँव तक के लिए है ना
इसलिए इसे फोकस कर रहा हु।
कि आप अगर उत्तराखण्ड की सी एम होती तो अपने गाँव तक सडक बनवाती है ना?

Quote from: Meena Rawat on December 10, 2009, 02:12:20 PM
सुंदर जी  अपने गाँव का मतलब ये नहीं की सिर्फ मेरा गाँव , इसका मतलब है हर डिस्ट्रिक्ट में गाँव मेन बाज़ार से काफी दूर होता है तो छोटी दुरी के लिए जिस प्रकार दिल्ली में बसे चलती है उस ही प्रकार छोटी बस सुविधा :)

वहा पे जीप चलती है जिनका किराया काफी महंगा होता है अगर ऐसे ही छोटी दूरियों के लिए बसे चलेगी तो गाँव वालो के लिए ठीक रहेगा

सुधीर चतुर्वेदी

अगर मे उत्तराखंड का मुख्यमंत्री होता तो ढेर सारे काम करवाता
१) पहाड़ो को जोडने वाली सडको को ठीक करवाता और चोडी करवाता
२) हर घर और गावो मे बिजली , पानी , शिक्षा और स्वास्थ का विस्तार करता
३) गैरसैण को उत्तराखंड की राजधानी banvata
४) छेत्रवाद की भावना को छोड़कर पूरे उत्तराखंड का विकाश करता
५) नौकरी और शिक्षा  मे आरक्षण को समाप्त कर देता जिसमे क़ाबलियत है वो आगे बडे
6  ) पहाड़ो मे रोजगार के साधन मुहैया करता जिससे पलायन रुकता

ये हुई ना बात

Quote from: jagmohan singh jayara on December 10, 2009, 02:06:07 PM
"उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते"

बन जाता जो अगर मैं, कवि सम्मलेन करवाता,
कवि मित्र जैसा कहते, वैसा विकास करवाता.
गंगाजल बोतल बंद करके, पूरे देश में भिजवाता,
पीते लोग ख़ुशी ख़ुशी, उत्तराखंड का राजस्व बढ्वाता.
गाँव गाँव में फल,संतरे, मौसमी के, सघन बाग़ लगवाता,
छोड़ों शीतल पेय पीना,  फलों का रस उपलब्ध करवाता.
जो राजस्व आता तो,  प्रकृति सरंक्षन्न  में लगाता,
केंद्र से जल, जंगल सरक्षण हेतु, राजस्व स्वीकृत करवाता.
प्राकृतिक मिजाज उत्तराखंड का, अगर जो ठीक रहेगा,
आएगा जो भी प्रकृति प्रेमी, कैसा सुन्दर है  कहेगा?
उत्तराखंड के प्राकृतिक स्रोतों का, पूरा देश है लाभ लेता,
सोचा है कभी आपने, प्रदूसन्न के सिवा क्या है देता.
आज हिमालय पिघल रहा है, सूख रहा है पानी,
बढ़ रहा है ताप पहाड़ों में, हो गई है भारी नादानी.
उत्तराखंड बना था इस सोच से, रूकेगी वहां जवानी और पानी,
तीव्र सतत विकास पहाड़ में होगा, रुकेगी गांवों की वीरानी.
पहाड़ की जनता जो चाहती, वैसे विकास के काम मैं करता,
ईमानदारी का पालन करते हुए, बद्रीविशाल  जी का नाम जपता.  
यथार्थ यही है मित्रों,
जैसा पार्टी चाहती, वैसे हँसते और रोते,
घर आई गंगा में, अपने  दोनों हाथ धोते,
क्योंकि नेता ऐसा ही करते हैं.....


रचनाकार: जगमोहन सिंह जयारा "ज़िग्यांसू"
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
ग्राम: बागी-नौसा, चन्द्रबदनी, टेहरी गढ़वाल
E-mail: j_jayara@ yahoo.com
10.१२.२००९



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Jayara Ji,

Excellent you have covered all the Agenda points in a poetic Form. Hat off 4 u.

Thanks Meena JI, Lalit Ji, Sunder ji for sharing your Dreams of UK and that action plans to develop the state.

Views from others are also expected.

Quote from: jagmohan singh jayara on December 10, 2009, 02:06:07 PM
"उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते"

बन जाता जो अगर मैं, कवि सम्मलेन करवाता,
कवि मित्र जैसा कहते, वैसा विकास करवाता.
गंगाजल बोतल बंद करके, पूरे देश में भिजवाता,
पीते लोग ख़ुशी ख़ुशी, उत्तराखंड का राजस्व बढ्वाता.
गाँव गाँव में फल,संतरे, मौसमी के, सघन बाग़ लगवाता,
छोड़ों शीतल पेय पीना,  फलों का रस उपलब्ध करवाता.
जो राजस्व आता तो,  प्रकृति सरंक्षन्न  में लगाता,
केंद्र से जल, जंगल सरक्षण हेतु, राजस्व स्वीकृत करवाता.
प्राकृतिक मिजाज उत्तराखंड का, अगर जो ठीक रहेगा,
आएगा जो भी प्रकृति प्रेमी, कैसा सुन्दर है  कहेगा?
उत्तराखंड के प्राकृतिक स्रोतों का, पूरा देश है लाभ लेता,
सोचा है कभी आपने, प्रदूसन्न के सिवा क्या है देता.
आज हिमालय पिघल रहा है, सूख रहा है पानी,
बढ़ रहा है ताप पहाड़ों में, हो गई है भारी नादानी.
उत्तराखंड बना था इस सोच से, रूकेगी वहां जवानी और पानी,
तीव्र सतत विकास पहाड़ में होगा, रुकेगी गांवों की वीरानी.
पहाड़ की जनता जो चाहती, वैसे विकास के काम मैं करता,
ईमानदारी का पालन करते हुए, बद्रीविशाल  जी का नाम जपता.   
यथार्थ यही है मित्रों,
जैसा पार्टी चाहती, वैसे हँसते और रोते,
घर आई गंगा में, अपने  दोनों हाथ धोते,
क्योंकि नेता ऐसा ही करते हैं.....


रचनाकार: जगमोहन सिंह जयारा "ज़िग्यांसू"
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
ग्राम: बागी-नौसा, चन्द्रबदनी, टेहरी गढ़वाल
E-mail: j_jayara@ yahoo.com
10.१२.२००९



कोंन क्या करेगा ये तो तभी पता लगेगा जब इतने सारे सभी लोग सी एम बनगे।
फिलहाल यह हमारा एक जानने का प्रयास है कि अगर आप कभी बन बैठे य़ूके के सी एम तो क्या करोगे।

आप सभी लोगो का धन्यबाद।

Devbhoomi,Uttarakhand

Quote from: sunder singh negi "poet" on December 10, 2009, 02:21:11 PM
लेकिन आपने लिखा तो अपने गाँव तक के लिए है ना
इसलिए इसे फोकस कर रहा हु।
कि आप अगर उत्तराखण्ड की सी एम होती तो अपने गाँव तक सडक बनवाती है ना?

Quote from: Meena Rawat on December 10, 2009, 02:12:20 PM
सुंदर जी  अपने गाँव का मतलब ये नहीं की सिर्फ मेरा गाँव , इसका मतलब है हर डिस्ट्रिक्ट में गाँव मेन बाज़ार से काफी दूर होता है तो छोटी दुरी के लिए जिस प्रकार दिल्ली में बसे चलती है उस ही प्रकार छोटी बस सुविधा :)

वहा पे जीप चलती है जिनका किराया काफी महंगा होता है अगर ऐसे ही छोटी दूरियों के लिए बसे चलेगी तो गाँव वालो के लिए ठीक रहेगा



सुन्दर जी, मीना जी जोकहा है सही कहा है कि-जो भी सी यम बनेगा वो सबसे पहले अपने गाँव और अपने क्षेत्र का विकास करेगा वही एक अच्छे मंत्री कि पहचान है!

सीधी सी बात जब तक हम अपने घर कि सफाई नहीं करेंगे तो राज्य और देश को कैसे साफ़ रखेंगे,देश या राज्य का विकास करने के लिए जरूरी है!

सबसे पहले अपने गाँव और क्षेत्र का विकास करना तभी हम दुसरे क्षत्रों मैं गांवों और जिल्लों में विकास कर सकते हैं, जब  सी यम साहब अपने गाँव और क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते तो क्या दुसरे गांवों और क्षेत्रों ख़ाक करेंगे विकास, अपने गाँव और गलियों को साफ़ रखने के लिए जरूरी सबसे पहले हमें अप्निआप को साफ़ रखना पड़ेगा तभी हम अपने क्षेत्र और राज्य को साफ़ रख सकते हैं !
और वैसे भी जब कोई किसी गाँव सेन किसी उच्च पद पर नियुक्त होता है !

तो उत्तराखंड  के मिनिस्टर हो या कोई सरकारी अफसर हो, सबसे पहले वो लोग अपने गाँव और क्षेत्र को छोड़कर सहरों में बस जाते है भूल जाते हैं उस गाँव गलियों को जहाँ उन्होंने अपना बचपन बिताया था !

"अगर सी यम बनते ही हम अपने गाँव और क्षेत्र को छोड़कर सहरों में चलें जाय तो क्या ये विकास का संकेत ही या विनास का"
ये सब कने वाली बातें कि में वो करूंगा वो करूंगा, हम लोग यहाँ इतनी बातें करते हैं कि में सी यम होता तो अपने गाँव में ऐसा करता वैसा करता, ये कहने कि बातें हैं कोई भी कुच्छ करता है ये हमरे नेता भी ऐसे ही बोलते थे और बोलते हैं,जन उनको वोट कि भीख मांगनी पड़ती है, उसके बाद भूल गाते हैं वो कि किस गाँव के हैं और कौन !

lpsemwal

I think my focus would be on
Better performance of officers (More socially concerned team).
Resources planning and implementation of schemes with Human face
opportunities creation for employment.
Co-creation of public properties (civic facilities) with help of all citizens.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Nice Thought Semwal Ji.

There is definitely need to look into these areas.

Quote from: lpsemwal on July 24, 2010, 01:10:08 PM
I think my focus would be on
Better performance of officers (More socially concerned team).
Resources planning and implementation of schemes with Human face
opportunities creation for employment.
Co-creation of public properties (civic facilities) with help of all citizens.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मै अगर बन जाता हूँ तो मुख्यमंत्री :-

  १)   तो राजधानी दुसरे दिन ही Gairsain .


सत्यदेव सिंह नेगी

मेहता जी नौछमी पोखरियाल सुरु हो जाय
फिर आपकी कुर्सी पक्की और गैरसेन राजधानी भि
जय उत्तराखंड
जय भारत 
Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on August 13, 2010, 03:38:38 PM

मै अगर बन जाता हूँ तो मुख्यमंत्री :-

  १)   तो राजधानी दुसरे दिन ही Gairsain .