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If You Were CM Of Uttarakhand? - यदि आप उत्तराखंड के मुख्यमंत्री होते?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 15, 2007, 03:18:24 PM

Raje Singh Karakoti

Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on August 13, 2010, 03:38:38 PM

मै अगर बन जाता हूँ तो मुख्यमंत्री :-

  १)   तो राजधानी दुसरे दिन ही Gairsain .

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


किसी भी राज्य के मुख्य मत्री का पद एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी का पद है! जिस तरह से उत्तराखंड के निर्माण के लिए logo ने अपने प्राणों के आहुति दी थी, उसके पीछे सिर्फ एक उद्देश्य था की desh का यह पहाड़ी इलाके का विकास हो! लोगो का यहाँ से playan रुके लेकिन राज्य बनाने के १० सालो बाद ऐसा कुछ दिखने को नहीं मिला!

इन १० सालो में राज्य में 5 मुख्य मंत्री जरुर बने पर कोई विकास पुरुष के रूप में नहीं पैदा हुवा! सबके सब अपने कुर्सी और निजी स्वार्थो में लिप्त रहे !

यहाँ "अगर मुख्य मंत्री होते " जो यह टोपिक खोला गया है उसका उद्देश्य सिर्फ यह जानने का है कि लोगो के क्या-२ नीतिया हो सकते है जिससे राज्य विकास हो सकता है ! हाँ थोडा सा टोपिक व्यग्य के रूप में जरुर है परन्तु गंभीर भी है!


नवीन जोशी


हमारे राज्य में इतनी संभावनाएं है की क्या कहूं, जहाँ से शुरू करो, केवल राज्य के बाहरी राज्यों में पर्यटन के लिहाज से प्रचार-प्रसार करके और सड़क व रेल सुविधाएं बढाकर राज्य को पर्यटन से इतनी आय पैदा की जा सकती है कि सडकों के लिए हमें पेड़ भी न काटने पड़ें, ऐसे में हम पेड़ व पर्यावरण बचाने के बदले देश-दुनियां से इतना कार्बन क्रेडिट ले सकते हैं कि अपने दूरस्थ गाँवों को सस्ती या मुफ्त रोप-वे या हैलीकोप्टर सुविधा तक दे सकते हैं. पर्यटन, खासकर ग्रामीण पर्यटन से ही हमारी आधी से अधिक जनसँख्या अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकती है.

हम अपने अमृत तुल्य पानी से बड़े बाँध बनाने की बजाये बिना महंगी शुद्धीकरण प्रक्रिया के भी R .O . से अधिक शुद्ध पानी सीधे ही भरकर बेचकर भी कमा सकते हैं.

वनों का पुनरुद्धार करने की भी जरूरत है, १००० मीटर से अधिक ऊँचाई पर पेड़ काटने पर लगी रोक हटाने की जरूरत है, ताकि बूढ़े पेड़ काटें, उन्हें बेचें. नए लगाएं. जल श्रोतों के पास पेड़ लगाकाr उन्हें रिचार्ज  करें. जडी-बूटियों का उत्पादन बढायें, पारंपरिक खेती के साथ ही नयी तकनीकों को बाधाएं. खासकर जैविक कृषि करें, तो उसके सही दाम भी वसूलें,

किसी काम की शर्म न करें, क्यों न खतरे की सीमा के भीतर खनन, शराब इत्यादि के अछूत माने जाने वाले परन्तु अत्यंत लाभप्रद कारोबार हम दूसरों को देने के बजाये खुद करें.

देश-दुनियां में बेहतर कार्य कर रहे प्रवासियों को घर वापस लायें व उनकी ऊर्जा का अच्छे अधिकारी, कारोबारी व राजनीतिज्ञ के रूप में राज्य के लिए उपयोग करें. ताकि हमारा पैसा राज्य में ही रहे.

राजनीति में पूरी सरकार पांच वर्ष में बदलने की बजाये उन लोगों को बदलें, जो राज्य के हित में न हों. सरकार में बैठे लोगों को भरोषा हो कि अच्छा कार्य करने पर वह सत्ता में बने रहेंगे, वरना कभी भी जा सकते हैं तो शायद उन्हें भ्रष्टाचार करने की जरूरत भी न पड़े.

शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, भोजन आदि की ऐसी व्यस्था हो कि लोगों को आन्दोलन की जरूरत ही न पढ़े, आन्दोलनों से बने राज्य में ऐसे वक्त की कल्पना साकार हो कि आन्दोलनों की जरूरत ही न पढ़े. लोग हक़ मांगने की बजाये अपने दायित्वों और कर्तव्यों की बात करें.

लोगों को उनके परंपरागत उद्यमों की ओर वापस मोड़ा जाए, जिन कार्यों को वह बेहतर कर सकते हों, वह करें. पहाड़ पर उद्योग चढ़ाए जाएँ.

शायद मुख्यमंत्री बनने के लिए इतना भी काफी नहीं होगा, पर मैं कोशिश करता भी इससे भी अधिक कुछ करने की कोशिश करता...... दिल के साथ दिमाग से भी सोचता. आखिर मुझ पर अपने लगभग एक करोड़ राज्य वासियों की जिम्मेदारी जो होती.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जोशी जी,

एक बहुत ही सुंदर विचार आपने यहाँ पर व्यक्त किये है! हम पहले से भी कहते आ रहे है, उत्तराखंड की धरती से महापुरुष बहुत आये पर विकास पुरुष का जनम होना अभी भी बाकी है, जो अपने निजी स्वार्थो को त्याग कर उत्तराखंड राज्य का चहुमुखी विकास कर पाए!

आपके द्वारा द्वारा लिखे गये सुझाव अति सराहनीय है!


Devbhoomi,Uttarakhand

दोस्तों ये सब कहने की बात है कि मैं वो कर देता मैं ये कर देता ,जो ये मुख्यमंत्री बने हैं सायद,ये भी यही कहते मुख्य्मंतिर बनने से पहले लेकिन जब लोग इन ऊँचे पदों पर विराजमान होते हैं तो सब कुछ भूल जाते हैं और वही करते हैं जो कि ये भ्रष्टाचारी कर रहे हैं !

Piyushchauhan

कम्युनिटी के सभी प्रिय मित्रो को मेरा नमस्कार,

jagmohan singh jayara

"अगर उत्तराखंड का मुख्यमंत्री होता"

स्वपन में देखा मैंने,
बन गया उत्तराखंड का मुख्यमंत्री,
चारों ओर मुझे घेरे हुए  थे,
प्रिय मित्र, मंत्री और संत्री.

कहा मैंने सुनो तुम,
उत्तराखंड के घर गाँव में जाओ,
पूछो लोगों से क्या कस्ट हैं आपके,
सही तस्वीर उकेरकर लाओ.

अफसरों को कहा मैंने,
जहाँ पोस्टिंग है वहीँ रहना,
दूर करो परेशानी जनता की,
ये आदेश है फिर मत कहना.

क्योंकि अफसर गाड़ी  घुमाकर,
जिल्ला मुख्यालय से दून हैं आते,
मौज मनाकर पांच दिन के लिए,
फिर ड्यूटी पर लौट हैं जाते.

जनता को भी कहा मैंने,
अपने इलाके में चल रहे कार्यों पर,
पैनी नजर जरूर रखना,
दिखे  कहीं दाल में काला,
मन में बिलकुल मत सहना.

सूचना दो और लो सरकार से,
आपका ही है सारा पैसा,
सही विकास हो आप सबका,
मेरा है सोचना ऐसा.

फल, फूल खूब उगाकर,
आप अपनी आय बढाओ,
वृक्ष लगाकर फैलाओ हरियाली,
समृधि का मूल मंत्र अपनाओ.

होगा भागीरथ प्रयास मेरा,
पहाड़ का पानी और जवानी,
पलायन करके नहीं जाये,
विकास ऐसा करना चाहता हूँ,
सभी प्रवासी उत्तराखंडी,
अपनी जड़ जमीन की तरफ लौट,
विकास का लाभ,
देवभूमि उत्तराखंड जन्मभूमि में पाए.

रचना: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
दिनांक:१६.९.२०१०
(सर्वाधिकार सुरक्षित, यंग उत्तराखंड, मेरा पहाड़ और पहाड़ी फोरम पर प्रकाशित)

Anil Arya / अनिल आर्य

I would have stated publicly sorry for my statement on my statement in jauljiwi fair, Pithoragarh on migration issue , being a responsible CM, as I was not in sense at that time!

Rajen

Nice one 8)

हमारे मुख्यमंत्री ऐसा क्यौं नहीं सोच सकते...? :(


Quote from: jagmohan singh jayara on September 16, 2010, 04:28:11 PM
"अगर उत्तराखंड का मुख्यमंत्री होता"

स्वपन में देखा मैंने,
बन गया उत्तराखंड का मुख्यमंत्री,
चारों ओर मुझे घेरे हुए  थे,
प्रिय मित्र, मंत्री और संत्री.

कहा मैंने सुनो तुम,
उत्तराखंड के घर गाँव में जाओ,
पूछो लोगों से क्या कस्ट हैं आपके,
सही तस्वीर उकेरकर लाओ.

अफसरों को कहा मैंने,
जहाँ पोस्टिंग है वहीँ रहना,
दूर करो परेशानी जनता की,
ये आदेश है फिर मत कहना.

क्योंकि अफसर गाड़ी  घुमाकर,
जिल्ला मुख्यालय से दून हैं आते,
मौज मनाकर पांच दिन के लिए,
फिर ड्यूटी पर लौट हैं जाते.

जनता को भी कहा मैंने,
अपने इलाके में चल रहे कार्यों पर,
पैनी नजर जरूर रखना,
दिखे  कहीं दाल में काला,
मन में बिलकुल मत सहना.

सूचना दो और लो सरकार से,
आपका ही है सारा पैसा,
सही विकास हो आप सबका,
मेरा है सोचना ऐसा.

फल, फूल खूब उगाकर,
आप अपनी आय बढाओ,
वृक्ष लगाकर फैलाओ हरियाली,
समृधि का मूल मंत्र अपनाओ.

होगा भागीरथ प्रयास मेरा,
पहाड़ का पानी और जवानी,
पलायन करके नहीं जाये,
विकास ऐसा करना चाहता हूँ,
सभी प्रवासी उत्तराखंडी,
अपनी जड़ जमीन की तरफ लौट,
विकास का लाभ,
देवभूमि उत्तराखंड जन्मभूमि में पाए.

रचना: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
दिनांक:१६.९.२०१०
(सर्वाधिकार सुरक्षित, यंग उत्तराखंड, मेरा पहाड़ और पहाड़ी फोरम पर प्रकाशित)


Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा


So far i have not seen any Pahadi leader who has really vision for developing the hill state.

Long back, first CM Of UP, Bharat Ratna Govind Ballab Pant had tried to give a development path to the state and later a bit by ND Tiwari and Hemwanti Nandan Bahuguna.

Rest of the leaders proved to be "Good for nothing"..

I become the CM of this UK.

   -   Capital will move to Gairsain first.
   -   Concentration would be developing hill areas first.
   -   To stop the migration
   -   To stop generate employment sources.