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Footage Of Disappearing Culture - उत्तराखंड के गायब होती संस्कृति के चिहन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 17, 2007, 03:35:52 PM



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



shailesh

उत्तराखंड मैं लोक गीतों का जब भी जिक्र होगा गिर्दा के बिना वह अधूरा ही रहेगा ! गिरीश तिवारी 'गिर्दा' ने अपनी कविताओं को जनता के स्वर दिए है ! पहाड़ के तमाम जनांदोलन मैं शामिल होकर उन्होंने जन चेतना जगाने का काम किया है ! सत्तर के दशक के वन बचाओ आन्दोलन से लेकर उत्तराखंड आन्दोलन मैं उनकी भूमिका अग्रणीय रही है! ख़राब स्वास्थ्य के बावजूद अभी भी वह तमाम जनसरोकारों से जुड़े हुए हैं ! श्याम देउपा की उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश
read on following link :
http://www.creativeuttarakhand.com/cu/culture/girda-ivw.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Shilesh Da,

Great... We should preserve his poems.





Quote from: shailesh on January 20, 2008, 04:05:32 PM
उत्तराखंड मैं लोक गीतों का जब भी जिक्र होगा गिर्दा के बिना वह अधूरा ही रहेगा ! गिरीश तिवारी 'गिर्दा' ने अपनी कविताओं को जनता के स्वर दिए है ! पहाड़ के तमाम जनांदोलन मैं शामिल होकर उन्होंने जन चेतना जगाने का काम किया है ! सत्तर के दशक के वन बचाओ आन्दोलन से लेकर उत्तराखंड आन्दोलन मैं उनकी भूमिका अग्रणीय रही है! ख़राब स्वास्थ्य के बावजूद अभी भी वह तमाम जनसरोकारों से जुड़े हुए हैं ! श्याम देउपा की उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश
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http://www.creativeuttarakhand.com/cu/culture/girda-ivw.html



हेम पन्त

तुलसी का पौधा पहाड के हर आंगन में अनिवार्य रूप से रखा जाता था..... अब भी कुछ परिवारों/घरों में यह दिख जाता है....