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Kumaoni-Garwali Words Getting Extinct-कुमाउनी एव गढ़वाली के विलुप्त होते शब्द

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 27, 2011, 03:56:06 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


१. फतक  -  हलके से मरना.
२. सटक  -  जोर से मारना
३ कुतुक  -  किसी लचीले डंडे या वास्तु से मारना
४. कटक  -  हथोड़े से किसी धातु के ऊपर मारना


विनोद सिंह गढ़िया

१ : पटा    -    थकान 
( वर्तमान में कुमांऊनी बोली में 'पटा' शब्द का कम प्रयोग होने लगा है, उसकी जगह हिंदी भाषा का 'थकान' शब्द प्रयोग किया जा रहा है। जैसे : मीकें आज भौत थकान है गे ।)

२ : कलेऊ - नाश्ता   
( कलेऊ शब्द भी प्रायः प्रचलन में नहीं है, कलेऊ की जगह 'नाश्ता' शब्द का प्रयोग होने लगा है। जैसे : त्वील नाश्ता में कि खा ? )

kundan singh kulyal

रौख्ड -   नदी के किनारे के मैदान,                               जैसे - तेर्मोक भैस पार रौख्ड मैं चर्नोऊ|
निस्वाश - दुःख भरा शब्द,                                          जैसे - म्यार बज्युक तम्मन दिनों बठी चिट्टी न आरे मी खान निस्वाश लग्गो|
कुच्ची - ताला,                                                           जैसे - बाज्यू इल्मरि मैं कुच्ची लगारै|
गरोव्वी -लकड़ी के डंडों से बना घर के आँगन का गेट,  जैसे - वो इजा गरोव्वी लगा रै|
ख्वर - शिर,                                                               जैसे  - आज तम्मान ख्वर पीड़ हैगे|
मुर  - मच्छर,                                                           जैसे - दाज्यू आज तम्मान मुर बुकुने|   
शिश्त - निशाना,                                                        जैसे - दाज्यू आमै दान मैं शिश्त मार द्यू|
कव्स्यक - सांवला,                                                      जैसे - राजूक भिन कव्स्यक छान|
जाव - खिड़की,                                                           जैसे - राजू जाव बठी चा धं कु औनो|
पटौर - माकन की दिवार मैं बनी अलमारी,                   जैसे -राजू पटौर मै दूध छ चा धं|
द्य्वी - माकन का मुख्य द्वार,                                   जैसे - राजू द्य्वी बठी चा धं कु ओउनो|
चुलान - रसोई,                                                         जैसे - दाज्यू इज चुलान मैं छ|
चाख - बैठक वाला कमरा,                                       जैसे - बाज्यू माम दगड़ी चाख मै बैठ्याँ छान
 
 
                                                                               कुन्दन सिंह कुल्याल
                                                                               लाधिया घाटी (चम्पावत)

kundan singh kulyal

 
ब्यंजन-: आज इन को सायद ही कोई बनाता हो नए बच्चे तो इनका नाम तक नहीं जानते.....

लिट्टू       -      छास, आटा और गुड से बनता हैं
मैर्ज़ोवी     -     छास और चावल को खिचड़ी की तरह बनाया जाता था
रापड़ी      -     दूध मैं आटा और गुड को मिलाकर बनाते हैं   
खाज़      -      बहुत सरे दलों को उबाल कर घी मैं फ्राई करके बनाते थे (छोले की तरह)
बेणु रवट   -      रोटी के अन्दर उड़द की दाल मिलाकर घी मैं सेक कर बनाया जाता था (पराठे की तरह)
बेणु लगड़  -      पूरी के अन्दर उड़द की दाल और मसाले मिलते हैं
बड़       -       उड़द को भिगाकर उसको सिल मैं आधा पीसते हैं फिर उसमै सरे मसाले मिलाकर घी मै तलकर बनाते हैं 
त्व्प्प      -      गेहूं का आटा और गुड को घोल कर तेल मैं तलकर बनाया जाता हैं
बाबर      -     चावल को भीगाने के बाद सिल मै पीसकर इसके घोल मैं नामक या गुड मिलाकर तेल मै ताल कर बनाया जाता हैं
रोट       -    गेहू के आटे मैं गुड मिलाकर मोटी रोटी बनाकर उसमें छेद छेद करके घी मैं खूब पकाते हैं
उतौव     -     नए धन को भिगाकर फिर उनको भून कर ढेकुली मैं कूट कर तयार करते हैं
उम      -      गेहू की हरी बालों को आग मैं भुन कर हाथ से मड़ते हैं
मुस्योलू   -     चावल को भिगा कर उसमे गुड मिलाकर घी मैं तलने के बाद पकाकर तयार करते हैं
माड़      -     चावल को भिगाकर फिर सिल मैं पीसकर नामक मिर्च मसाले मिलाकर उसके घोल को तवे मै पकाते हैं (लगभग ढोसा के जैसा)
भट्टे डुप्क  -   भट्ट की दल को आधा पीस कर चावल के साथ सभी मशाले और आटे को मिलाकर खूब पकाकर गाढ़ा बनाते हैं
मासे बड़ी  -   उड़द की दल को पीसकर भुज (पेठा)के छिले हुवे रेसो मैं मसाले के साथ मिलाया जाता हैं धुप मैं सुखा देते हैं
आलू बड़ी  -   आलू को पकाकर उनको छिलने के बाद पतले पतले काटकर सुखा देते हैं बाद मैं उसकी मजेदार सब्जी बनायीं जाती हैं
पिनावे बड़ी -   अरबी को पकाकर उनको छिल्कार बारीक़ बारीक़ काटकर धूप मैं सुखा देते हैं इसकी भी बहुत अच्छी सब्जी बनती हैं
भुगरै खटाई -  भुगारू को भुनकर उसमें सरे मसाले हरा धनिया और थोड़ा नीबू का रस डालकर सिल मैं पीसने के बाद मजेदार चटनी बनती हैं
भंगैं खटाई  - भंग के दानो को भुन के पीसने के बाद उसके रस मैं मसाले और खट्टा चीज मिलाकर बहुत मजेदार चटनी बनती हैं
क्योलै सुर्रू  -  क्योल(हिंदी का नाम पता नहीं) के जड़ो का सूप बनाकर पीवो इतना स्वादिस्ट होता हैं और आपकी शर्दी जुखाम सब दूर हो जायेगा
कैरू सुर्रू    -  इसमें सरे मसाले मिलाकर इसका सूप बना कर पीवो बहुत मजेदार होता हैं (ये जंगल मैं पाया जाता हैं इसका हिंदी नाम पता नहीं)
अम्टौव     - आम के कच्चे दानो को उबालकर उनको छिलने के बाद गुड और मसाले मिलाकर सूप बनाते हैं
जुमुवी फुल  - जुमुवी(हिंदी नाम पता नहीं)को माड़ने के बाद उनको तवे मै भुनकर गुड मैं मिलाकर बहुत स्वादिस्ट होता हैं
सक्नै शाग  - सक्नै फूल(हिंदी नाम पता नहीं जंगलों मै २ मीटर के पौधे होते हैं)फूलने से पहले उनको तेल मैं तलकर सूखी सब्जी बनाई जाती हैं
बेथ्वे टपकी  - 
                                इन ब्यंजनो को याद करता हु तो मुझे मेरी परदादी (पापा की दादी) याद आ जाती हैं बचपन मैं वो हमको  बड़े प्यार से खिलाती थी आज तो इन ब्यंजनो को घर मैं भी नहीं बनाते इन की जगह panjabi  और south indian खाना बन्ने लगा हैं............

                                                                                                                                          kundan singh kulyal
                                                                                                                                          ladhiya ghati (champawat)       

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

It has been seen that many words of kumoani-garwali languages are gradually dis-appearing from common conversation.

इस टोपिक में हम उत्तराखंड की भाषा में आम बोलचाल से विप्लुप्त होते शब्दों को यहाँ पर प्रस्तुत करंगे! आशा है आप भी इस प्रकार के शब्दों को यहाँ पर पोस्ट करंगे!    आम बोल चाल के भाषा में सबसे बड़ा परिवर्तन तो, माँ बाप को संबोधित करने वाले शब्दों में aa गया जैसे : 


      ईजा /बोई   -    माँ              बदल गया -  मम्मी   

      बाजू / बाबा  -      पिताजी          - do -  पापा / डैडी   

Regards,

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


रिश्तो में प्रयुक्त शब्दों में परिवर्तन :-

    पुराने शब्द      नये

१)   सियाणी    -     घरवाली

२)   च्यल       -    बेटा

३)    खुवैन      -   पति / घरवाल  (खुवैन शब्द बहुत ही पुराना है जो विलुप्त हो चुका है )

४)    ज्वै      -     जवाई 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


अब ये शब्द -

१)   संग्जियु      -   दोस्त  / साथी

२)   दगडी        -  दोस्त

३)   दाद           - बड़े भाई (दाजू)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


विलुप्त शब्द       -   नए शब्द

1)   कुड           -   मकान
2)  गुनियार        - आगन
३)  कराडी (मकान का पीछे का हिस्सा) -
४) खल्दी          - जेब
५) लुकुड / ख्ताड    - कपडे
६)  ठेकी           -  दही जमाने वाला काठ का वर्तन
७)  पाई           -   मखन्न रखने वाले काठ का वर्तन
८)  नेई           -    मठ्ठा बनाने काठ का उपकरण
९)  नौव           -   कुवा
१०) हुसुक         -    जोश



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आम बोलचाल की भाषा से विलुप्त होते कुछ शब्द

सिपाल    -    An expert of any friend

आंडकस्से  -   To be over exited for anythng. (This word is going to be disappeared)

दाल्दरी    -  बहुत जयदे खाने की लालसा फिर भोजन मिलने पर नहीं खा पाना ! अधीर

कोची     -    जल्दी जल्दी खाना..



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


घन्तर   -  पत्थर मारना

घाटि    -  पत्थर मारना

मुन्ग्सियार -  यह शब्द इत्सेमाल किया जाता है, जब खेत में फसल कट गयी हो और जानवरों के खेत चराने के लिए खोला जाता है !

निमण - खतम होना किसी चीज  का