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Kumaoni-Garwali Words Getting Extinct-कुमाउनी एव गढ़वाली के विलुप्त होते शब्द

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 27, 2011, 03:56:06 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


निझरक्क  -  किस भी चीज की चिंता नहीं होना.! चिंता मुक्त

कपाव  -    सिर

ख्वर   -  सिर..

ब्रमांड   - खोपड़ी


Anil Arya / अनिल आर्य


Anil Arya / अनिल आर्य

महिपाल दा , यो टोपिक मै तुम इकले लैगि रै छिया .. मैलि सुवेचि एकाद मै लै पोस्ट करौ !

Anil Arya / अनिल आर्य

हमारे यहां
सिपाल (सिपाव) - किसी भी पेशे का विशेशग्य.
कोची - ओवर ईटिन्ग
Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on March 15, 2011, 06:52:12 AM

आम बोलचाल की भाषा से विलुप्त होते कुछ शब्द

सिपाल    -    An expert of any friend

आंडकस्से  -   To be over exited for anythng. (This word is going to be disappeared)

दाल्दरी    -  बहुत जयदे खाने की लालसा फिर भोजन मिलने पर नहीं खा पाना ! अधीर

कोची     -    जल्दी जल्दी खाना..




Devbhoomi,Uttarakhand

बर्मंड                      सर
कपाल                    सर
खोप्डू                     सर
गयार                     पेट
पोटगी                    पेट
हथ्गुली                  हथेली

Devbhoomi,Uttarakhand

कुडू                            मकान
ओवरू                        मकान की नीचे वाली मंजिल का एक कमरा
कुख्डयासु                   जहां मुर्गे और मुर्गियों को रखा जाता है
फुन्ग्डू                       खेत
ख्ल्याण                     घर के आगे की जगह जिसे आँगन भी कहते है

Devbhoomi,Uttarakhand

बाँदर                                   बन्दर
गौणी                                  लंगूर
कुकूर                                   कुत्ता
बिरालू                                  बिल्ली
गौडू                                    गाय
बल्द                                   बैल
भेन्सू                                  भेंस
बाखुरु                                बकरी
भेरू                                   भेड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हूंक  -  यह शब्द शायद अब काफी कम बोल चाल की भाषा में प्रयुक्त होता है! 

मुझे याद है बचपन में ... जब खेलते खेलते बच्चे आपस में लड़ते थे और किसी ने किसी को पीठ में मार दी और उसकी रोने की आवाज भी नहीं निकल रही हो तो, उसे कहते है इसे हूंक पड़ गया!

C.S.Mehta

आखिर क्यों बिलुप्त हो रहे है इतने सारे उत्तराखंडी भाषा के सब्द..?
आप सभी लोग जानते है की जिस तरह से हिंदी भाषा को आज के लोग काफी इंग्लिश के सब्दो को मिलकर वार्तालाप कर रहे है उसी तरह हमारी उत्तराखंडी भाषा में भी काफी  हिंदी और इंग्लिश भाषा के सबदों का परकोप छा गया है इसी कारण आज हमारे उत्तराखंड में बोल चाल की भाषा में भी काफी मात्रा में लोग इन अलग सब्दो का प्रयोग  कर रहे है जिस के कारण से उत्तराखंडी भाषा के सब्द बिलुप्त हो रहे है
अब देखिए यहाँ लोग कैसे कर रहे है बात चीत.....?
पुरानी उत्तराखंडी भाषा और वर्तमान भाषा का अंतर-
पुरानी भाषा                                          वर्तमान भाषा
म्यार ब्युंत नि छु में न आ सकन-                                       म्यार टाइम नि छु मी न आ सकन (टाइम
त्यर किताब मेज मा छु                                त्यर किताब टेबल मा छु (टेबल)
आब चारपाय मा सी जणू                              आब बेड मा सी जणू (बेड)
देवता पड़ जणू हीटो                                   देवता मंदीर जणू हीटो (मंदीर)
अरे भोते जाड़ लगुडो                                  अरे भोते ठण्ड लगुडो (ठण्ड)
   





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


निगरगंड - यह शब्द निर्लज आदमी के लिए प्रयुक्त होता था!

झरफर  -  नयी ताज़ी.. काम काज शादी विवाह आदि.

अलबलाट  - जल्दी बाजी.