• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
August 29
परेशान मन

परेशान मन
अशांत कर के ये तन
आकुल है ये बहता जीवन
चिंतातुर गहन विषय बड़ा
वो विक्षुब्ध दिल क्या बोले चल
अताह सागर जल तल

औंधा है वो उलटा है वो
घबराना उसका वो पल प्रतिपल
रंजीदा है वो कमज़ोर नसों का
मनोबल बना बेचैन उसका करे सतह चिड़चिड़
मतलब से भरा हुआ वो
अकेला अकेला ही लगा हुआ है वो

भाववाहक घबड़ाया हुआ
वो विमूढ़ व्याकुल अस्तव्यस्त वो भ्रांत
संकोचित उत्तेजित रेखादार उभारे
अनेक रंगों रेखाओं से चिह्नित उसका स्थान
व्यग्र मोहित ऋण-ग्रस्त प्राण उसके
तंग हैरान अप्रसन्न नाराज मन कर वो किधर चला

परेशान मन
अशांत कर के ये तन
आकुल है ये बहता जीवन
चिंतातुर गहन विषय बड़ा
वो विक्षुब्ध दिल क्या बोले चल
अताह सागर जल तल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
August 28 · Edited
आ जाओ भगवन मेरे ......२

आ जाओ भगवन मेरे ......२
बैठा हूँ नैन बिछाये
कब से तेरी राह लगाये
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

विश्व के अधिनायक तुम हो
प्रथम पूज्य के भारक तुम हो
मैं सेवक तुम हो स्वामी
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

शिव पर्वती बालक तुम हो
कार्तिके के भ्राता तुम हो
मूषक की आपकी सवारी
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

ऋद्धि-सिद्धि के तुम हो दाता
तुम ही प्रभु मेरे भाग्य-विधाता
प्रभु और कितना मैं बाट निहरों
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

भगवन इतना विलंब ना लाओ
सिहासन आप बिन खाली पड़ा है
दस दिन इस पर विराजमान हो जाओ
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

आ जाओ भगवन मेरे ......२
बैठा हूँ नैन बिछाये
कब से तेरी राह लगाये
दर्शन दे जाओ भगवन मेरे ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
15 mins · Edited ·

चिड़िया कुछ बोलती है

पत्ते पत्ते डोलती है
चिड़िया कुछ बोलती है
जमा कर खाना जिंदगी का
घोसलों को जोड़ती है

रहनुमा है कोई किसी का
फासले पर वो दौड़ती है
पकड़ ले वो तेरी किस्मत
छुट जाती तो बस रोती है

दर्द रहता है बहता
बिलखते हुये वो कहता
जिसने समझा सब कुछ
ना समझ बस वो नाखुश

पत्ते पत्ते डोलती है
चिड़िया कुछ बोलती है
जमा कर खाना जिंदगी का
घोसलों को जोड़ती है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी


फिर भी ना कह पाऊंगा मै

अकेले तेरे बिन
अब अकेले ना रह पाऊंगा मै........ २
कहने को बढ़ाये कदम तेरी ओर
फिर भी ना कह पाऊंगा मै........ २

खोया हूँ ऐसे सोया हूँ ऐसे
यादों में अकेले तेरे रोया हूँ ऐसे
जैसा दिया जला उजाला हुआ
बत्ती का जलना ना देख पाया कोई ........ २

एक ही ओर है सबक जोर है
बिकता है वो दिखता है जो
कहा ना मैंने बस जमाने का शोर है
उस शोर में मेरी आवाज ना सुन पाया कोई ........ २

अकेले तेरे बिन
अब अकेले ना रह पाऊंगा मै........ २
कहने को बढ़ाये कदम तेरी ओर
फिर भी ना कह पाऊंगा मै........ २

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 8 at 9:18am ·

एक शायर को और क्या चाहिये

तालियों की भीख चाहिये
और तुम्हरी बस वाह वाह चाहिये
अच्छा लिखने के लिये ये ध्यानी
आप लोगों की इनायत चाहिये

और ना कुछ चाहिये
बस इस शायर को वो ही दर चाहिये
जंहा सुनने वाले समझने वाले मिल जाये
फ़क्त वो तुम्हरे दो पल चाहिये

खून खून जलता है
उस कलाम की रवानगी में
मरता है वो हर्फ़ अपने आप रोज यूँ ही
बस आप ही मर्ज आप ही वो दवा चाहिये

तालियों की भीख चाहिये
और तुम्हरी बस वाह वाह चाहिये
अच्छा लिखने के लिये ये ध्यानी
आप लोगों की इनायत चाहिये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 8 at 3:02am ·

बस अब

हम से रूठ गये
जो दिन पीछे छूट गये

ऋतू बेईमानी है
हाय ये झूठी जवानी है

लफ्जों की कहानी है
दुनिया आनी जानी है

खंडहर बोल रहा
जर्जर मुख खोल रहा

कल कल बहता रहा
व्यर्थ गंगा जल रोता रहा

हिमाला पुकारे किसे
उसका अपना सोता रहा

हम से रूठ गये
जो दिन पीछे छूट गये

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 7 at 10:54pm ·

आज किसी ने

आज किसी ने पूछ लिया
मेरे दिल का हाल

पहाड़ों पर मंडरा रहा क्यों
ये तहस नहस का काल

बेहाल हुआ हिमाल
टूट चुके सब उसके ताल

रो रहा हिमचाल प्रदेश
उत्तराखंड अब कश्मीर ये रब

कहर बरपा रही
क्यों कर हर बरस बरसात

निशब्द खड़ा हूँ मै
क्या कहूँ कैसा है दिल का हाल

सुन लो दोस्तों मेरे दिल का हाल
मै और मेरा उत्तर क्षेत्र है बेहाल

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 7 at 8:30am · Edited ·

टूट रहा है पहाड़
जैसा कह रहा हो वो मेरा हाल
गिरा वो पत्थर पहाड़ के शीर्ष अभी अभी
कहा उसने पास आकर मुझसे अभी अभी
अब तो खुद को जान ले पहचान ले
टूटने का कारण अब तो तू आ खंगाल ले
टूट रहा है पहाड़
जैसा कह रहा हो वो मेरा हाल

ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 7 at 8:16am ·

लाज इतनी संभली अब ना संभली जाये
माँ तेरी चड़िया कैसे अकेले दाना चुगने जाये
सियार खड़े हैं घर घर लाल टपकाये माँ
गैरों से बच भी जाये अपनों से कौन बचाये

शुभ प्रभात मित्रों

ध्यानी प्रणाम

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
September 7 at 1:09am · Edited ·

एक राह गुजरती है

एक राह गुजरती है
वो तेरे दिल से जाती है
चलो वंही घर बस ले हम
जंहा ये राह ले जाती है
एक राह गुजरती है

झुरमुट पेड़ों के समूह में
अपना वो आशियाना हो
खिलखिलाती धुप हो
वो रंगीन सा शामियाना हो
एक राह गुजरती है

कुछ कह जाती है
जो ये मखमली घास दमकती है
सुख दुःख का घरोंदा अपना
वो सच्चाई का आईना हो
एक राह गुजरती है

एक राह गुजरती है
वो तेरे दिल से जाती है
चलो वंही घर बस ले हम
जंहा ये राह ले जाती है
एक राह गुजरती है

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित